वॉशिंगटन:भारत अपने फैसले खुद लेता है, हम निर्देश नहीं दे सकते-जैमीसन ग्रीर

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वॉशिंगटन:न्यूयॉर्क के इकोनॉमिक क्लब द्वारा आयोजित एक बातचीत के दौरान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि और राष्ट्रपति ट्रंप के व्यापार सलाहकार जैमीसन ग्रीर ने कहा कि भारत देश से हम 40 अरब अमेरिकी डॉलर का सामान अधिक खरीदते हैं।जिसके कारण उनका अमेरिका के साथ पहले से ही बेहतर समझौता है। जितना हम उन्हें बेचते हैं, वे उससे कहीं अधिक बिक्री करते हैं।इसी कारण से भारत व्यवहारिक रुख अपना रहा है।उन्होंने कहा कि भारत अपने फैसलेखुद लेता है ।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि और राष्ट्रपति ट्रंप के व्यापार सलाहकार जैमीसन ग्रीर ने कहा कि अमेरिका दूसरे देशों को यह निर्देश नहीं दे रहा है कि वे किसके साथ संबंध रखें। भारत ने हमेशा इतना रूसी तेल नहीं खरीदा है। रूस के साथउनके हमेशा मजबूत संबंध रहे हैं, लेकिन पिछले दो या तीन वर्षों में उन्होंने न केवल उपभोग के लिए, बल्कि रिफाइनिंग और बेचने के लिए भी रूस से कम कीमत पर तेल खरीदना शुरू किया है।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि और राष्ट्रपति ट्रंप के व्यापार सलाहकार जैमीसन ग्रीर ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा खरीद में विविधता लाने लगा है। ऐसा नहीं है कि रूसी तेल भारतीय अर्थव्यवस्था का कोई आधार है। हमारा मानना है कि वे अपनी तेल खरीद में विविधता ला सकते हैं और उन्हें ऐसा करना चाहिए। सच कहूं तो, मैं पहले से ही देख सकता हूं कि उन्होंने अपनी तेल खरीद में विविधता लानी शुरू कर दी है। मुझे लगता है कि वे इसे समझते हैं।

अमेरिका के साथ पहले से ही एक बेहतरीन समझौता

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि और राष्ट्रपति ट्रंप के व्यापार सलाहकार जैमीसन ग्रीर ने कहा कि भारत एक संप्रभु देश हैं। वे अपने फैसलों को नियंत्रित करेंगे।भारत को हम जितना बेचते हैं, उससे ज्यादा खरीदते हैं,भारत एक ऐसा देश है, जिससे हम 40 अरब अमेरिकी डॉलर का सामान ज्यादा खरीदते हैं। इसलिए उनका अमेरिका के साथ पहले से ही एक बेहतरीन समझौता है। जितना हम उन्हें बेचते हैं, वे उससे कहीं ज्यादा बेचते हैं। ऐसे में भारत व्यवहारिक रुख अपना रहा है।

रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं ट्रंप

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि और राष्ट्रपति ट्रंप के व्यापार सलाहकार जैमीसन ग्रीर ने कहा कि ट्रंप रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। ‘हम कोशिश कर रहे हैं कि व्लादिमीर पुतिन पर जितना हो सके उतनादबाव पड़े। हमने अपने यूरोपीय सहयोगियों से भी बात की है, जिनमें से कुछ आज भी रूसी तेल खरीद रहे हैं, जो कि एक अजीब बात है। इसलिए हम इस बारे में सिर्फ भारतीयों से ही बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि हमने चीनियों से भी बातकी है। हम बस इस युद्ध को समाप्त करने की कोशिश कर रहे हैं, और अगर युद्ध समाप्त हो जाता है, तो स्थिरता आएगी, तो आप रूसी तेल के बारे में फिर से बातचीत कर सकते हैं।

Aaj National

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