-मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने दिलाई शपथ
-योगी मंत्रिमंडल में एक महिला समेत छह नए मंत्री शामिल,भूपेंद्र सिंह चौधरी, मनोज कुमार पांडेय ने कैबिनेट मंत्री, कृष्णा पासवान, सुरेंद्र दिलेर, कैलाश सिंह राजपूत, हंसराज विश्वकर्मा ने राज्यमंत्री के रूप में ली शपथ,अजीत सिंह पाल व सोमेंद्र तोमर का प्रमोशन, बने राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार
- REPORT BY:K.K.VARMA || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ ।योगी मंत्रिमंडल का रविवार को विस्तार हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने जनभवन के गांधी सभागार में नए मंत्रियों को शपथ दिलाई। मंत्रिमंडल के नए सदस्य के रूप में भूपेंद्र सिंह चौधरी, मनोज कुमार पांडेय ने कैबिनेट मंत्री तथा कृष्णा पासवान, सुरेंद्र दिलेर, हंसराज विश्वकर्मा, कैलाश सिंह राजपूत ने राज्यमंत्री के रूप में शपथ ली। योगी सरकार में राज्यमंत्री अजीत सिंह पाल व सोमेंद्र तोमर का प्रमोशन हुआ। दोनों राज्यमंत्रियों ने अब राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में शपथ ली। नवनियुक्त मंत्रियों ने राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पुष्पगुच्छ देकर उनका अभिनंदन किया। शपथ ग्रहण के उपरांत जनभवन का गांधी सभागार भारत माता की जय व जयश्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। भूपेंद्र सिंह चौधरी विधान परिषद सदस्य हैं। वे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं, जबकि मनोज कुमार पांडेय ऊंचाहार सीट से विधायक हैं। राज्यमंत्री की शपथ लेने वालीं कृष्णा पासवान खागा से, सुरेंद्र दिलेर खैर से और कैलाश सिंह राजपूत तिर्वा से विधायक हैं। हंसराज विश्वकर्मा विधान परिषद सदस्य हैं।
शपथ ग्रहण समारोह में केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, महामंत्री संगठन धर्मपाल, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक आदि मौजूद रहे।
आईजीआरएस :अप्रैल में रामपुर ने फिर मारी बाजी
-पीलीभीत ने दूसरा, श्रावस्ती और अमेठी ने बराबर अंक पाकर पाया तीसरा स्थान
-हाथरस, बरेली, हमीरपुर, बदायूं, बाराबंकी और बलिया टॉप टेन में
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पिछले नौ वर्षों से समग्र विकास की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में न केवल बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है बल्कि समाज के हर वर्ग का उत्थान भी किया जा रहा है। सीएम के सपनों काे साकार करने में एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली आईजीआरएस अहमभूमिका निभा रहा है। आईजीआरएस से जनसुनवाई, जन कल्याणकारी योजनाओं और राजस्व कार्यों की निगरानी की जा रही है, जिससे जिलों को बेहतर प्रशासनिक मानक स्थापित करने में मदद मिल रही है।
आईजीआरएस की अप्रैल माह की रिपोर्ट में प्रदेशभर में रामपुर ने 138 अंक प्राप्त कर पहला स्थान प्राप्त किया है जबकि पीलीभीत ने दूसरा और श्रावस्ती के साथ अमेठी ने बराबर-बराबर अंक प्राप्त कर तीसरा स्थान प्राप्त किया है। हाथरस, बरेली, हमीरपुर, बदायूं, बाराबंकी और बलिया ने टॉप टेन जिलों में जगह बनायी है।आईजीआरएस द्वारा हर माह जिलों के राजस्व कार्यों, विकास कार्यों और जन शिकायत की सुनवाई की रिपोर्ट जारी की जाती है। आईजीआरएस द्वारा प्रदेशभर के जिलों में 49 विभागों के 109 कार्यक्रमों की विभिन्न मानकों के आधार पर समीक्षा की जाती है। जिलों की रैंकिंग जारी की जाती है। आईजीआरएस की अप्रैल की रिपोर्ट के अनुसार रामपुर ने मानक पूर्णांक 140 नंबर के सापेक्ष 138 अंक प्राप्त कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इसका रेश्यो 98.57 प्रतिशत है।डीएम रामपुर अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि आईजीआरएस की रिपोर्ट जिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है, जिन्होंने प्रशासनिक दक्षता, विकास कार्यों और राजस्व प्रबंधन में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा अनुरूप रामपुर में विकास कार्यों को गुणवत्तापूर्ण समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। आईजीआरएस के जरिये मिली शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण तरीके से त्वरित निस्तारण किया जा रहा है। रामपुर पिछले चार माह से पहले स्थान पर है।पीलीभीत जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जिले में प्राथमिकता के आधार पर जनसुनवाई में शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है। जनशिकायतों के निस्तारण दर में सुधार हो रहा है। पीलीभीत लगातार चार माह से प्रदेश में दूसरा स्थान बनाए हुए है। आईजीआरएस की अप्रैल माह की रिपोर्ट में भी पीलीभीत पूरे प्रदेश में दूसरे स्थान पर है।
पीलीभीत ने पूर्णांक 140 नंबर के सापेक्ष 137 अंक प्राप्त किये। रेश्यो 97.86 प्रतिशत है। श्रावस्ती ने पूर्णांक 140 नंबर के सापेक्ष 136 अंक प्राप्त कर तीसरा स्थान प्राप्त है। रेश्यो 97.14 प्रतिशत है।डीएम अन्नपूर्णां गर्ग ने बताया कि विकास परियोजनाओं के गुणवत्तापूर्ण और तय समय सीमा में पूरा करने के लिए हर हफ्ते अधिकारियों के साथ बैठक कर समीक्षा की जाती है। जनमानस की शिकायतों का प्राथमिकता पर निस्तारण किया जा रहा है। समस्या के निस्तारण के संतुष्टीपूर्ण फीडबैक पर आईजीआरएस की रिपोर्ट जारी की जाती है। अमेठी ने भी 136 अंक प्राप्त कर तीसरा स्थान प्राप्त किया है। हाथरस, बरेली, हमीरपुर, बदायूं, बाराबंकी और बलिया ने टॉप टेन जिलों में जगह बनायी है।
जल जीवन मिशन को भरपूर बजट, जल्द पूरा होगा लक्ष्य,केंद्र और प्रदेश सरकार के 28 हजार करोड़ रुपये से पूरे होंगे अधूरे काम
उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन ‘हर घर नल योजना’ न केवल एक सरकारी योजना है बल्कि ग्रामीण जीवनशैली में एक बड़े बदलाव का प्रतीक है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इस मिशन को युद्धस्तर पर लागू किया जा रहा है। केंद्र से उत्तर प्रदेश के लिए 13,425 करोड़ रुपये से अधिक का बजट आवंटित हो चुका है। उत्तर प्रदेश सरकार भी ग्रामीण जलापूर्ति विभाग को करीब 15 हजार करोड़ रुपये वर्ष 2026-27 में योजनाओं को पूरा करने के लिए देगी। इस 28 हजार करोड़ रुपये से अधिक के बजट से स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति को सुनिश्चित करने में कोई बाधा नहीं आएगी। योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश में 2.62 करोड़ ग्रामीण परिवारों तक नल से स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जाए। इस लक्ष्य को अब जल जीवन मिशन 2.0 के जरिए हासिल किया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के बीच जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत समझौता ज्ञापन एमओयू पर हस्ताक्षर हो चुका है। इसमें जल जीवन मिशन की डेड लाइन जल जीवन मिशन 2.0 के रूप में दिसंबर 2028 तक बढ़ा दी गई है। वित्तीय वर्ष के लिए उत्तर प्रदेश को 13,425 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।एसडब्ल्यूएसएम, नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के विशेष सचिव, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रभास कुमार ने बताया कि मिशन के नए स्वरूप और बजट के साथ नई जिम्मेदारियों को भी जोड़ा गया है। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत प्रदेश में जल गुणवत्ता परीक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विंध्य और बुंदेलखंड समेत प्रदेश के कई इलाकों में पानी में रासायनिक तत्वों की जांच कर उन्हें पीने योग्य बनाना सबसे जरूरी है। इसके लिए पानी की गुणवत्ता की जांच कराई जा रही है।जनभागीदारी दूसरा सबसे अहम बिंदु है। प्रदेश में जलापूर्ति के लिए जितने भी पंप हाउस, पानी की टंकी समेत अन्य निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद ग्राम एवं पेयजल स्वच्छता समिति वीडब्ल्यूएससी को सौंपा जाएगा। 10 वर्षों तक जल निगम, वीडब्ल्यूएससी, निर्माण एजेंसियां व ठेकेदार मिलकर इनके सुचारु संचालन को सुनिश्चित करेंगे। पानी के स्रोत के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि एक बार निर्माण हो जाने के बाद कोई भी बोरवेल, पंप या पानी का स्रोत सूखे नहीं। इससे ग्रामीण इलाकों में पानी की आपूर्ति हो पाएगी। 2027 में कार्यों की प्रगति की समीक्षा केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी, ताकि लक्ष्य पूरा किया जा सके। जल जीवन मिशन 2.0 के तहतनई प्राथमिकताओं को प्रदेश में लागू कराया जाएगा।विभाग के मुताबिक जल जीवन मिशन के तहत अभी तक 2.43 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन पहुंचाया जा चुका है। वहीं वर्ष 2026-27 में 2.62 करोड़ कनेक्शन का लक्ष्य पूरा करने की योजना पर काम किया जा रहा है।
जनसमस्या का त्वरित समाधान सरकार की प्राथमिकता-शर्मा
नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के नेतृत्व एवं “जनता सर्वोपरि” की कार्यशैली के अंतर्गत प्रदेश में जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान प्राथमिकता के आधार पर कराया जा रहा है। चाहे शिकायत व्हाट्सएप, सोशल मीडिया, मीडिया, ट्वीट अथवा जनता दरबार के माध्यम से प्राप्त हो, संबंधित टीम तत्काल सक्रिय होकर समाधान सुनिश्चित करने में जुट जाती है। अमेठी के जगदीशपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम एवं पोस्ट मंगौली में एक मामला सामने आया, जहां 29 अप्रैल को आंधी-तूफान के कारण कई विद्युत खंभे क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिससे पूरे गांव की विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई थी। भीषण गर्मी के बीच ग्रामीणों को पेयजल, बच्चों की पढ़ाई, मोबाइल संचार एवं दैनिक जीवन की अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।एक मीडिया कर्मी ने समस्या की जानकारी व्हाट्सएप के माध्यम से मंत्री के मीडिया प्रकोष्ठ तक पहुंचाई गई। मामला संज्ञान में आते ही तत्काल ग्रामीणों से संपर्क कर पूरी जानकारी प्राप्त की गई तथा अधिशासी अभियंता एवं विभागीय अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। टीम तुरंत सक्रिय हुई और ग्रामीणों के सहयोग से टूटे हुए खंभों को बदलने, गड्ढों की तैयारी एवं विद्युत तारों को पुनः व्यवस्थित करने का कार्य युद्धस्तर पर प्रारंभ कराया गया। 24 घंटे के भीतर विभागीय टीम एवं ग्रामीणों के सहयोग से तीन से चार क्षतिग्रस्त खंभों को बदलकर विद्युत आपूर्ति पुनः बहाल कर दी गई।ग्रामीणों ने कहा कि यदि समस्या समय पर मंत्री तक न पहुंचती तो संभवतः इतनी शीघ्र विद्युत आपूर्ति बहाल नहीं हो पाती। श्री शर्मा ने कहा कि जनता की सुविधा और जनहित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रदेश के प्रत्येक नागरिक की समस्या का त्वरित एवं संवेदनशील समाधान सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है।
प्रवक्ता संवर्ग की लिखित परीक्षा प्रदेशभर में सकुशल सम्पन्न,एआई एकीकृत नियंत्रण कमांड कक्ष से हुई निगरानी
-लखनऊ में परीक्षा कक्ष में ही ओएमआर स्कैनिंग,दो दिनों में 1,92,934 अभ्यर्थियों की रही उपस्थिति- प्रशांत
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि आयोग ने प्रवक्ता संवर्ग की लिखित परीक्षा 10 मई को प्रदेश के विभिन्न परीक्षा केन्द्रों पर सकुशल सम्पन्न करायी । परीक्षा दो पालियों में आयोजित हुई। प्रथम पाली में नागरिक शास्त्र, गणित, अर्थशास्त्र, संस्कृत एवं मनोविज्ञान विषयों की परीक्षा तथा द्वितीय पाली में रसायन विज्ञान, भूगोल, हिन्दी एवं कला विषयों की परीक्षा सम्पन्न हुई। प्रथम पाली की परीक्षा प्रातः 9:30 बजे से 11:30 बजे तक तथा द्वितीय पाली की परीक्षा अपराह्न 2:30 बजे से 4:30 बजे तक आयोजित की गयी।
परीक्षा का संचालन आयोग द्वारा निर्धारित परीक्षा केन्द्रों पर पूर्ण पारदर्शिता, नकलविहीन एवं सुव्यवस्थित वातावरण में सम्पन्न कराया गया। परीक्षा के दौरान आयोग में स्थापित एआई एकीकृत नियंत्रण कमांड कक्ष से सभी परीक्षा केन्द्रों की सतत निगरानी की गयी। आयोग के अध्यक्ष, सदस्य, सचिव, परीक्षा नियंत्रक एवं उपसचिव की उपस्थिति में परीक्षा केन्द्रों पर लगे एआई कैमरों के माध्यम से परीक्षार्थियों की गतिविधियों पर निरंतर दृष्टि रखी गयी। आयोग द्वारा तकनीकी नवाचार एवं पारदर्शिता को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत लखनऊ जनपद के चयनित परीक्षा केन्द्रों पर परीक्षा समाप्ति के तत्काल बाद परीक्षार्थियों द्वारा प्रयुक्त ओएमआर उत्तर पत्रकों की स्कैनिंग परीक्षा कक्ष में ही करायी गयी।
स्कैनिंग प्रक्रिया अभ्यर्थियों की उपस्थिति में सम्पन्न हुई तथा स्कैन डाटा को तत्काल सुरक्षित करने की कार्यवाही भी की गयी। सम्पूर्ण प्रक्रिया की निगरानी भी आयोग के एआई एकीकृत नियंत्रण कमांड कक्ष से की गयी।आयोग अध्यक्ष ने जानकारी दी कि 9 मई की लिखित परीक्षा में 89,766 परीक्षार्थी उपस्थित रहे, जिनमें महिला परीक्षार्थियों की उपस्थिति 34.89 प्रतिशत एवं पुरुष परीक्षार्थियों की उपस्थिति 42.26 प्रतिशत रही। वहीं 10 मई की लिखित परीक्षा मे 1,03,168 परीक्षार्थी उपस्थित रहे, जिनमें महिला परीक्षार्थियों की उपस्थिति 41.92 प्रतिशत तथा पुरुष परीक्षार्थियों की उपस्थिति 48.08 प्रतिशत रही। 9 एवं 10 मई को आयोजित लिखित परीक्षा में 1,92,934 परीक्षार्थी उपस्थित रहे।
