-लोगो को नसीब नही हो पा रहा सरकारी हैण्डपम्प का पानी
-बहुत कुछ हकीकत बयां कर रही है सरोजनीनगर के नरायनपुर चौराहा की यह तस्वीर
- REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ। विकास खंड सरोजनीनगर के नरायनपुर चौराहे की यह तस्वीर किसी को भी शर्मसार कर देने वाली है। जहां

एक इंडिया मार्क-2 हैंडपंप लंबे समय से खराब पड़ा है और लोग पेयजल के लिए विधायक-सांसद के चक्कर काट रहे हैं, वहीं ठीक उसी के बगल में दूसरा हैंडपंप तो जनप्रतिनिधि से कहकर लगवा लिया गया, लेकिन अब उसका पक्का चबूतरा भैंसों का चाराघर बन चुका है। चबूतरे पर भूसा बिखरा पड़ा है और दर्जन भर भैंसें बंधी हुई चारा चबा रही हैं।मौके पर मौजूद स्थानीय निवासी रामदास ने बताया, “ये जो पुराना वाला हैंडपंप है,वो वर्षों पहले खराब हो गया था। इसमें पानी ही नहीं आता। हम लोग विधायक और सांसद के पास कई बार गए, फरियाद लगाई कि नया हैंडपंप लगवा दो। फिर किसी तरह एक नया लग भी गया, लेकिन अब देखिए हालत… लोग भैंसें बांधकर चारा डाल देते हैं। चबूतरे पर गोबर-पेशाब सब पड़ा रहता है। कभी पानी निकालना पड़े तो कैसे निकालेंगे?”
आश्चर्य की बात यह है कि दोनों हैंडपंप महज 20-30 फीट की दूरी पर लगे हैं। एक पूरी तरह बेकार पड़ा है, दूसरा भैंसों के नीचे दबा हुआ है। एक ग्रामीण महिला ने गुस्से में कहा, “गर्मी में तो बच्चे प्यास से बिलखते हैं।जनप्रतिनिधि चुनाव के समय वादे करते हैं, वोट ले लेते हैं, फिर कोई पूछने वाला नहीं। ये जो चबूतरा देख रहे हो, इसमें भैंसें सोती भी हैं। पानी निकालने जाएं तो पहले भैंस हटाओ, गोबर साफ करो, फिर पानी आएगा भी या नहीं पता नहीं।”स्थानीय एक युवा ने बताया कि कई बार पंचायत और ब्लॉक में शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। “जल निगम वाले कहते हैं – बजट नहीं है। पंचायत वाले कहते हैं – ये जनप्रतिनिधि फंड से लगता है, हम क्या करें। जनप्रतिनिधि का फोन नहीं उठता। बस यही सिलसिला चल रहा है।
नरायनपुर चौराहा सरोजनीनगर ब्लॉक का प्रमुख केंद्र है। यहां से रोजाना सैकड़ों लोग गुजरते हैं, लेकिन कोई भी इस बदहाली पर ध्यान नहीं दे रहा। जल जीवन मिशन के बड़े-बड़े होर्डिंग तो लगे हैं, पर जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।स्थानीय लोगों ने अब एक ही मांग की है कि या तो खराब हैंडपंप को ठीक किया जाए, या भैंसों वाले चबूतरे को खाली करवाकर उस हैंडपंप को आम जनता के लिए सुरक्षित किया जाए। नहीं तो आने वाली गर्मियों में पानी के लिए लोग फिर सड़कों पर उतरने को मजबूर हो जाएंगे।यह तस्वीर और यह हाल सिर्फ नरायनपुर चौराहे का नहीं, पूरे सरोजनीनगर विकास खंड के कई गांवों का है, जहां सरकारी हैंडपंप या तो खराब पड़े हैं या पशुओं के आश्रय स्थल बन चुके हैं।
नाई की दुकान पर दाढ़ी बनाने की बारी को लेकर हुई मारपीट
थाना बन्थरा क्षेत्र के ग्राम नरायनपुर में मामूली-सी बात ने मारपीट और गाली-गलौज का रूप ले लिया। नाई की दुकान पर दाढ़ी बनवाने की बारी को लेकर दो पक्षों में जमकर विवाद हुआ। मामला इतना बढ़ गया कि एक पक्ष ने न सिर्फ मारपीट की, बल्कि महिला (पीड़ित की पत्नी) को भी भद्दी-भद्दी गालियाँ दीं और जान से मारने की धमकी दी।
सजीवन पुत्र उदन (निवासी नरायनपुर, थाना बन्थरा) ने थाना बन्थरा में दी गई तहरीर में बताया कि वह मंगलवार को नाई की दुकान पर दाढ़ी बनवा रहा था। इसी दौरान गाँव के ही हरिओम सिंह पुत्र पप्पू सिंह वहाँ आया और जोर-जबरदस्ती करते हुए बोला कि “पहले हमारी दाढ़ी बनेगी”। जब पीड़ित ने विरोध जताया तो हरिओम ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी और गाली-गलौज करने लगा। इतना ही नहीं, हरिओम ने पीड़ित की पत्नी रेनू को भी अपशब्द कहे और जान से मारने की धमकी दी।पीड़ित ने बताया कि जब वह और उनका परिवार चौकी हरौनी पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज कराने जा रहे थे, तभी आरोपी हरिओम का साथी गौरव सिंह पुत्र सुबोध सिंह (निवासी नरायनपुर) वहाँ पहुँच गया और उसने भी गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी।डर के माहौल के बीच सजीवन ने थाना बन्थरा में लिखित तहरीर देकर आरोपियों हरिओम सिंह और गौरव सिंह के खिलाफ मारपीट, गाली-गलौज, महिलाओं को अपशब्द कहने एवं जान से मारने की धमकी देने का मुकदमा दर्ज करने की माँग की है। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच पड़ताल शुरू कर दी है।
दहेज के लिए पत्नी, एक साल की मासूम बेटी को मारने की कोशिश
-पति-सास-ससुर सहित 10 लोग नशे में घर में घुसे, गले पर चाकू रखा रखा; महिला ने सीएम को लिखी चिट्ठी
बिजनौर क्षेत्र की रहने वाली शिल्पी (उम्र करीब 24-25 वर्ष) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर अपनी तथा अपनी एक साल की बेटी खुशी की जान का खतरा बताया है।शिल्पी की शादी 2 मई 2023 को संतराम उर्फ संत कुमार पुत्र श्रीराम रावत (निवासी बिजनौर गढ़ी, लखनऊ) के साथ हुई थी। शादी में लड़की पक्ष ने अपनी हैसियत से 10 लाख नकद + 5 लाख का सामान-दहेज दिया, फिर भी ससुराल वाले लगातार एक कार और 5 लाख रुपये अतिरिक्त दहेज की मांग करते रहे।महिला का आरोप है कि सास-ससुर, पति, देवर-ननद और अन्य रिश्तेदार मिलकर उसे रोज मारते-पीटते, गाली देते और जान से मारने की धमकी देते हैं। आरोपियों के पास दबंगई और पैसा होने का दावा करते हुए वे खुलेआम कहते हैं, “हमारे पास करोड़ों हैं, नेता-सरकार हमारे हैं, जो चाहें करेंगे।”सबसे गंभीर घटनाएँ:1 जून 2025 को ससुराल वालों ने मिलकर शिल्पी और उसकी मासूम बेटी को मारने की कोशिश की, बच्ची को भी फेंकने का प्रयास किया गया।
16 जून 2025 की शाम करीब 6 बजे पति संतराम सहित सास-ससुर, ननद-देवर और 5-6 अन्य लोग नशे में शिल्पी के मायके (भक्तिखेड़ा, थाना बिजनौर) पहुँचे। पति ने बाल पकड़कर उसे जमीन पर पटका और गले पर चाकू रखकर बोला, “आज मार डालेंगे, दूसरी शादी कर लेंगे।” शोर मचाने पर मोहल्ले के लोग आए तो सभी धमकी देकर भाग गए।शिल्पी के अनुसार उसने 1090 व 112 पर चार बार कॉल की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। डर के मारे वह मायके में रह रही है, फिर भी ससुराल वाले दबंगों को लेकर मायके में भी हंगामा करते हैं।महिला ने मुख्यमंत्री से खुद, अपनी बेटी खुशी, पिता मेवालाल, भाइयों राहुल व रोहित की जान-माल की सुरक्षा और सख्त कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई है।बिजनौर पुलिस रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दक्षिणी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सघन वाहन चेकिंग अभियान
-अपराधियों में दहशत, जनता में सुरक्षा का भरोसा
राजधानी लखनऊ के पुलिस कमिश्नरेट दक्षिणी क्षेत्र में अपराध और अपराधियों पर अंकुश लगाने तथा सुरक्षा व्यवस्था को


और मजबूत करने के लिए बुधवार को बड़े स्तर पर सघन चेकिंग अभियान चलाया गया।पुलिस उपायुक्त (दक्षिणी) निपुण अग्रवाल और अपर पुलिस उपायुक्त रल्लापल्ली वसंथ कुमार के निर्देशन में बिजनौर, सरोजनीनगर, बंथरा सहित कई थाना क्षेत्रों में एक साथ यह अभियान चलाया गया।
पुलिस टीमों ने चौराहों, बाजारों, मुख्य मार्गों, गांवों के प्रवेश द्वार और रात में कम भीड़ वाले इलाकों में चेकिंग प्वाइंट बनाए।संदिग्ध बाइक, ऑटो, चारपहिया वाहनों और व्यक्तियों को रोका गया। ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन दस्तावेज, संदिग्ध सामान, पहचान पत्र और यात्रियों की गतिविधियों की बारीकी से जांच की गई। हेलमेट नहीं पहनने, नंबर प्लेट छुपाने, तेज रफ्तार और बिना कागजात वाहन चलाने वालों पर विशेष निगरानी रखी गई। कई संदिग्धों से पूछताछ कर चेतावनी भी दी गई।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि अपराध नियंत्रण की नियमित रणनीति का हिस्सा है। क्षेत्र में बढ़ती आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करना जरूरी था।अभियान से जहां अपराधियों में भय का माहौल बना, वहीं आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि ऐसे सघन चेकिंग अभियान भविष्य में भी समय-समय पर जारी रहेंगे, ताकि क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था और बेहतर बनी रहे।
सरोजनीनगर में सरकारी धान क्रय केंद्र बंद,किसान भटकने को मजबूर; गेहूं की बुवाई पर संकट
सरोजनीनगर तहसील क्षेत्र में सरकारी धान खरीद व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। माती और सोहावा ग्राम सभा के

सरकारी क्रय केंद्र इस साल पूरी तरह बंद पड़े हैं, जबकि दादूपुर क्रय केंद्र का गोदाम भरने से वहां भी खरीद ठप कर दी गई है। नतीजतन, स्थानीय किसान अपना धान बेचने के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।किसानों का कहना है कि पिछले वर्षों में ये केंद्र सुचारु रूप से चलते थे और उन्हें घर के पास ही धान बेचने की सुविधा मिल जाती थी, लेकिन इस बार पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। धान न बिकने से उनके हाथ में पूंजी नहीं आ रही, जिससे आगामी रबी फसल में गेहूं की बुवाई भी प्रभावित होने की कगार पर है।दादूपुर क्रय केंद्र के सचिव ने बताया कि पीसीएफ द्वारा जैसे ही पुराना धान उठान होगा और गोदाम खाली होगा, खरीद फिर शुरू कर दी जाएगी। लेकिन किसानों में इस आश्वासन पर भरोसा नहीं है और अनिश्चितता बनी हुई है।किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार एक तरफ “किसान की आय दोगुना” करने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन धान जैसी मुख्य फसल की खरीद में ही भयंकर अव्यवस्था है। ग्रामीण क्षेत्रों में क्रय केंद्र ठप पड़े होने से किसानों में भारी रोष व्याप्त है। उनकी मांग है कि बंद पड़े सभी सरकारी क्रय केंद्रों को तुरंत खोलकर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीद शुरू की जाए, ताकि उनकी फसल समय पर बिक सके और रबी सीजन की तैयारी बिना रुकावट के हो सके।
मातृशक्ति का जागरण ही भारत का सबसे बड़ा इंजन: डॉ. राजेश्वर सिंह
सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने महिला सशक्तिकरण को राष्ट्र निर्माण का सबसे मजबूत आधार बताते हुए

बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक प्रेरक संदेश जारी किया। उन्होंने कहा, “मातृशक्ति का उत्थान = भारत का उत्थान। जब माँ कमाती है, तो बच्चों के सपने पंख पाते हैं और जब मातृशक्ति आगे बढ़ती है, तो भारत उठ खड़ा होता है।विश्व बैंक के अनुसार यदि भारत में पुरुषों जितनी महिलाएँ कार्यबल में शामिल हों तो GDP में 27% तक की वृद्धि संभव है।अभी केवल 41% महिलाएँ ही कार्यबल में सक्रिय (PLFS 2023)। कामकाजी महिला अपने कमाई का 90% तक बच्चों की शिक्षा पर खर्च करती है।2017 से 2023 तक महिला श्रम भागीदारी दर 23.3% से बढ़कर 41.7% हुई, ग्रामीण क्षेत्रों में तो 24.6% से 47.6% तक पहुँच गई।
सरोजनीनगर बना नारी सशक्तिकरण का राष्ट्रीय मॉडल
डॉ. राजेश्वर सिंह के नेतृत्व में सरोजनीनगर ने महिलाओं की आत्मनिर्भरता को जन-आंदोलन बना दिया है,160 ताराशक्ति केंद्रों पर हजारों महिलाएँ सिलाई, कढ़ाई, डिज़ाइनिंग और उद्यमिता सीखकर आत्मनिर्भर बन रही हैं।14 RBS डिजिटल एम्पावरमेंट सेंटर्स में बेटियाँ AI, कोडिंग, पायथन, डेटा एनालिटिक्स और इंग्लिश कम्युनिकेशन सीख रही हैं,सरोजनीनगर स्पोर्ट्स लीग से महिलाओं में नया आत्मविश्वास जागा है।700 से अधिक मेधावी बालिकाओं को लैपटॉप- साइकिल वितरित।14 से अधिक डिजिटल लाइब्रेरी में रोज़ 500+ बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं।डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा, “यह केवल विकास नहीं, सामाजिक पुनर्जागरण है। AI के युग में यदि हमारी बेटियाँ डिजिटल लीडर बन गईं, तो भारत दुनिया को नेतृत्व देगा।विधायक ने अंत में कहा, “अब समय है ‘अनुमति’ से ‘भागीदारी’ की ओर बढ़ने का। जब आधी आबादी आधी ज़िम्मेदारी उठाती है, तो भारत पूरी उड़ान भरता है। आत्मनिर्भर मातृशक्ति ही आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 की असली कुंजी है।