नयी दिल्ली:जी राम जी बिल को लेकर सदर में जोरदार हंगामा

-राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

  • -REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK

नयी दिल्ली: लोकसभा की कार्यवाही शुक्रवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। इस सत्र में सदन की कार्य उत्पादकता 111 प्रतिशत रही और आठ सरकारी विधेयकों को पारित किया गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि इस सत्र में 15 बैठकें हुईं।

उन्होंने अपने संक्षिप्त उल्लेख में कहा कि आप सभी के सहयोग से इस सत्र में सभा की कार्य उत्पादकता लगभग 111 प्रतिशत रही।इस दौरान सदन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उपस्थित थे। अठारहवीं लोकसभा के छठे सत्र में सदन ने आठ सरकारी विधेयकों को मंजूरी दी। इनमें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लेने के लिए लाया गया ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक, 2025’ शामिल है जिसे लेकर विपक्ष ने भारी विरोध दर्ज कराया।

सदन ने भारत के रुपांतरण के लिए नाभिकीय ऊर्जा का संधारणीय दोहन और अभिवर्द्धन (शांति) विधेयक, 2025’, ‘सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) विधेयक, 2025’ और वर्ष 2025-26 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगें-प्रथम बैच और संबंधित विनियोग (संख्याक 4) विधेयक, 2025 को भी पारित किया। देश में अप्रचलित एवं पुराने हो चुके 71 कानूनों को निरस्त और संशोधित करने के प्रस्ताव वाले ‘निरसन और संशोधन विधेयक, 2025’ को भी निम्न सदन की स्वीकृति प्राप्त हुई। इनके अतिरिक्त लोकसभा ने ‘मणिपुर माल और सेवा कर (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2025’, ‘केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2025’ और पान मसाला पर उपकर लगाने के प्रावधान वाले ‘स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025’ को भी ध्वनिमत से पारित कर दिया।

सदन में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने और चुनाव सुधारों के मुद्दे पर चर्चा भी हुई। इससे पहले विपक्ष ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विषय पर संसद में चर्चा कराने की मांग की थी और शीतकालीन सत्र के शुरुआती दो दिन सदन की कार्यवाही इस मुद्दे पर विपक्ष के प्रदर्शन के कारण बाधित भी रही।
अंततः चुनाव सुधारों के मुद्दे पर चर्चा की सहमति बनी और सदन में कामकाज शुरू हुआ।

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के विषय पर चर्चा की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषण से हुई। संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत एक दिसंबर को हुई थी। इस सत्र में नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने इंडिगो एयरलाइन्स के परिचालन में व्यवधान के मुद्दे पर सदन में वक्तव्य दिया। लोकसभा ने विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों को स्वतंत्र स्व-शासन वाले संस्थान बनाने के उद्देश्य से लाए गए ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ को संसद की संयुक्त समिति के पास भेजने को मंजूरी दी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में प्रतिभूति बाजार संहिता विधेयक, 2025 पेश किया और इसे विचार-विमर्श के लिए विभाग संबंधी संसदीय स्थायी समिति को भेजने का प्रस्ताव रखा।

राहुल गांधी बोले, बिल वापस कराने के लिए बनाया जाएगा राष्ट्रव्यापी मोर्चा

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के स्थान पर ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक’ संसद द्वारा पारित किए जाने के बाद शुक्रवार को कहा कि यह प्रस्तावित कानून प्रदेश एवं गांवों के खिलाफ है तथा इसे वापस लेने के लिए सरकार को विवश करने के मकसद से एक राष्ट्रव्यापी मोर्चा बनाया जाएगा। संसद ने बृहस्पतिवार को ‘विकसित भारत- जी राम जी विधेयक, 2025’ को मंजूरी दी। पहले दिन में यह विधेयक लोकसभा और देर रात राज्यसभा से पारित किया गया। राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘कल रात मोदी सरकार ने एक ही दिन में मनरेगा के बीस वर्षों को ध्वस्त कर दिया। जी राम जी विधेयक, मनरेगा का कोई ‘‘पुनर्गठन’’ नहीं है। यह अधिकार-आधारित, मांग-आधारित गारंटी को खत्म कर इसे एक सीमित योजना में बदल देता है, जिसे दिल्ली से नियंत्रित किया जाएगा।’’उन्होंने आरोप लगाया कि इस विधेयक की संरचना ही राज्यविरोधी और गांवविरोधी है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘‘मनरेगा ने ग्रामीण मजदूर को मोलभाव की ताकत दी। वास्तविक विकल्प मिलने से शोषण और मजबूरी में पलायन घटा, मजदूरी बढ़ी, काम की परिस्थितियां बेहतर हुईं और साथ ही ग्रामीण ढांचे का निर्माण व पुनर्जीवन हुआ। यही वह ताकत है जिसे यह सरकार तोड़ना चाहती है।’’उनके मुताबिक, काम की सीमा तय करके और काम से वंचित करने के और रास्ते बनाकर, जी राम जी विधेयक उस एकमात्र माध्यम को कमजोर करता है जो ग्रामीण गरीबों के पास था। राहुल गांधी ने कहा, ‘‘हमने कोविड-19 महामारी के दौरान देखा कि मनरेगा का क्या मतलब था। जब अर्थव्यवस्था बंद हो गई और आजीविकाएं खत्म हो गईं, तब इसने करोड़ों लोगों को भूख और कर्ज में डूबने से बचाया। इससे सबसे ज्यादा लाभ महिलाओं को हुआ, जिन्होंने साल दर साल कुल व्यक्ति-दिवसों का आधे से अधिक योगदान दिया है।

उन्होंने कहा कि जब किसी रोजगार कार्यक्रम को सीमित किया जाता है, तो सबसे पहले महिलाएं, दलित, आदिवासी, भूमिहीन मजदूर और सबसे गरीब अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय के लोग बाहर धकेले जाते हैं। राहुल गांधी ने कहा, ‘‘ऊपर से, इस कानून को संसद में बिना उचित जांच-पड़ताल के जबरन पारित कराया गया। विधेयक को स्थायी समिति के पास भेजने की विपक्ष की मांग खारिज कर दी गई। ग्रामीण सामाजिक करार को बदल देने वाला, करोड़ों मजदूरों को प्रभावित करने वाला कानून कभी भी गंभीर समिति समीक्षा, विशेषज्ञ परामर्श और सार्वजनिक सुनवाई के बिना नहीं थोपा जाना चाहिए। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा, ‘‘हम इस सरकार को ग्रामीण गरीबों की आखिरी रक्षा-पंक्ति को नष्ट नहीं करने देंगे। हम मजदूरों, पंचायतों और राज्यों के साथ खड़े रहेंगे, इस कदम को हराने और इस कानून को वापस लेने के लिए एक राष्ट्रव्यापी मोर्चा बनाएंगे।

Aaj National

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *