इस मौके पर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आप सभी ने अपने प्रशिक्षण काल में कठोर परिश्रम, लगन और अनुशासन के साथ प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इस परेड में उसकी उत्कृष्ट और भव्य प्रस्तुति हम लोगों ने देखी है। दीक्षान्त समारोह के उपरान्त आप सभी विभिन्न जनपदों में फील्ड ड्यूटी के लिये जायेंगे। पुलिस कार्मिक अपराधी के लिए जितना कठोर हो, नागरिकों के प्रति उतना ही संवेदनशील होना चाहिए। आपसे आशा है कि आप प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान, कौशल और मूल्यों का उपयोग करते हुए पूरी निष्ठा, ईमानदारी और कर्तव्य परायणता के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस की गौरवशाली परम्परा को आगे बढ़ाएंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज का दीक्षान्त समारोह इस बात का गवाह है कि कैसे इन बेटियों ने यहां बेहतरीन प्रशिक्षण प्राप्त कर पुलिस की व्यावसायिक प्रशिक्षण क्षमता का उत्कृष्टतम उदाहरण प्रस्तुत किया है। उत्तर प्रदेश पुलिस बल को देश व दुनिया की बेहतरीन पुलिस के रूप में स्थापित करने के लिए किए जाने वाले प्रयासों में इनका अहम योगदान होने वाला है। पुलिस प्रशिक्षण के बारे में कहा जाता है कि प्रशिक्षण में जितना पसीना बहेगा, बाद में उतना ही कम खून बहाने की नौबत आयेगी। इन बेटियों ने जिस मजबूती, तत्परता, समर्पण और अनुशासन के साथ प्रशिक्षण पूरा किया है, वह अत्यन्त सराहनीय है।
मुख्यमंत्री नें कहा कि आज प्रदेश में 10 पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों, 73 जनपदों की पुलिस लाइन्स, 29 पी0एस0सी0 बटालियन के कुल 112 रिक्रूट ट्रेनिंग केन्द्रों में आरक्षी दीक्षान्त परेड एक साथ आयोजित की जा रही है। 15 जून, 2025 को लखनऊ में डिफेन्स एक्सपो ग्राउण्ड में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 60,244 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया था। 21 जुलाई, 2025 से प्रारम्भ इन अभ्यर्थियों के प्रशिक्षण के दौरान मुझे विभिन्न प्रशिक्षण केन्द्रों में जाने औऱ व्यवस्थाओं के निरीक्षण का अवसर प्राप्त हुआ था। प्रदेश में पुलिस बल की प्रशिक्षण सुविधाओं को पहले की तुलना में बेहतरीन किया गया है। यह आज यहां हम लोगों ने अपनी आंखों से देखा है। पुलिस की सबसे बड़ी ताकत उसका अनुशासन व टीम वर्क के साथ कार्य करने का उत्कृष्ट भाव होता है। देश के लिए सर्वोत्कृष्ट योगदान देने की भावना किसी भी वर्दीधारी फोर्स के लिए महत्वपूर्ण होती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस को आज देश के बेहतरीन पुलिस बल के रूप में स्थापित किया गया है। वर्ष 2017 से अब तक 2.18 लाख से अधिक पुलिस कार्मिकों की भर्ती की जा चुकी है। 01 लाख से अधिक पुलिस कार्मिकों को अलग-अलग फेजेज में प्रमोशन दिया गया है। वर्ष 2017 से पूर्व पुलिस की ट्रेनिंग क्षमता मात्र 3,000 थी। प्रसन्नता का विषय है कि प्रदेश सरकार के प्रयासों से 60,244 पुलिस आरक्षियों का प्रशिक्षण एक साथ उत्तर प्रदेश के ही प्रशिक्षण केन्द्रों में सम्पन्न किया है। यह उत्तर प्रदेश की विगत 09 वर्षों में अर्जित प्रगति को दर्शाता है।अब प्रदेश के 55 जनपद ऐसे हैं, जहां सबसे हाई राइज बिल्डिंग पुलिस कार्मिकों के बैरक या उनकी आवासीय सुविधा है। प्रशिक्षण केन्द्रों में प्रत्येक प्रशिक्षु को आधारभूत तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण देने के साथ ही, ‘य0ूपी0 पुलिस ट्रेनिंग पोर्टल’ नाम का डिजिटल प्लेटफार्म भी लांच किया गया है। शारीरिक प्रशिक्षण को वैज्ञानिक और आधुनिक बनाने के लिए स्मार्ट पी0टी0 प्रोग्राम लागू किया गया। आउटडोर प्रशिक्षण में 03 नॉट 03 राइफल के स्थान पर इन्सास और एस0एल0आर0 राइफल द्वारा प्रशिक्षण दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में इन्टीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग ‘मिशन कर्मयोगी’ के अन्तर्गत ‘आई0 गॉट’ कर्मयोगी पोर्टल पर विशेष मॉड्यूल तैयार किए गए हैं। 32 विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। हाल ही में संचालित ‘साधना सप्ताह’ में उत्तर प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों ने 01 करोड़ 25 लाख कोर्स पूर्ण कर एक कीर्तिमान बनाया है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हुए 28 लाख कोर्स पूरे किए और सभी राज्यों व विभागों में देश भर में चौथा स्थान प्राप्त किया है। यू0पी0 ए0टी0एस0 के अधिकारियों और जवानों को एन0आई0ए0 और अन्तरराष्ट्रीय एजेंसियों के मानक के अनुरूप प्रशिक्षण देने का कार्य चल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस बल को व्यावहारिक दक्षता और सॉफ्ट स्किल पर आधारित विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है। प्रदेश के सभी 75 जनपदों में साइबर थानों की स्थापना के साथ ही पुलिस कर्मियों को आधुनिक साइबर अपराधों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। लखनऊ में ‘उत्तर प्रदेश स्टेट इन्स्टीट्यूट ऑफ फॉरेन्सिक साइंस की स्थापना की गई है। जहां पुलिस बल को वैज्ञानिक जांच की बारीकियां का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन सब प्रयासों के परिणाम आज हम सबके सामने हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस देश की मॉडल व स्मार्ट पुलिस के रूप में प्रदेश के लोगों को बेहतरीन सुरक्षा सुविधा उपलब्ध करा रही है। अब प्रदेश में दंगे नहीं होते।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्ता के समानान्तर माफिया राज नहीं चलता। गुण्डा टैक्स और अन्य अवैध वसूली नहीं होती है। अब प्रदेश में पुलिस के अपार मनोबल से अपराधियों के मन में भय व्याप्त है। पहले बेटी और व्यापारी सुरक्षित नहीं थे। प्रदेश अराजकता और अस्थिरता का पर्याय बन चुका था। लेकिन अब प्रदेश में स्पष्ट नीति और साफ नीयत के परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। ‘लॉ एंड ऑर्डर’ के मॉडल के रूप में अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनायी जा रही है। पुलिस बल की कार्यक्षमता को बेहतर करने के लिए रिकॉर्ड स्तर पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया को सम्पन्न किया गया है। इन भर्तियों में 20 प्रतिशत बेटियों को अनिवार्य रूप से सम्म्लित किया गया है। जब दीक्षान्त परेड के बारे में मुझे बताया गया तो मैंने कहा कि मैं उसी प्रशिक्षण केन्द्र पर परेड का निरीक्षण करने जाउंगा, जहां बड़ी संख्या में बेटियां होंगी। उत्तर प्रदेश पुलिस के बजट को वर्ष 2017 की तुलना में तीन गुना से अधिक बढ़ाया गया है। प्रदेश में 07 पुलिस कमिश्नरेट स्थापित की गयी हैं। आधी आबादी की सुरक्षा के लिए मिशन शक्ति के अन्तर्गत महिला सुरक्षा, सम्मान और उनके स्वावलम्बन के लिए बेहतरीन कार्यक्रम आगे बढ़ाये जा रहे हैं। प्रत्येक थाने में मिशन शक्ति केन्द्र स्थापित किये गये हैं। पी0ए0सी0 की तीन महिला बटालियन के गठन को स्वीकृति दी गई है। इनमें लखनऊ में वीरांगना ऊदा देवी पासी, गोरखपुर में वीरांगना झलकारी बाई कोरी और बदायूं में वीरांगना अवन्तीबाई लोधी महिला पी0ए0सी0 बटालियन सम्मिलित हैं। तीन नई बटालियन के गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 17 म्युनिसिपल कॉरपोरेशन और गौतम बुद्ध नगर में सिटी परियोजना को लागू किया गया है। प्रदेश में उत्तर प्रदेश एस0एस0एफ0 का गठन भी किया गया है। पिंक पुलिस बूथों की स्थापना हुई है। ए0टी0एस0 को अत्याधुनिक तकनीक, साइबर एक्सपर्ट तथा आधुनिक प्रशिक्षण से सुसज्जित किया गया है। प्रदेश में 12 सक्रिय तथा 06 निर्माणणाधीन फॉरेंसिक लैब स्थित हैं। तीन नए कानून लागू होने के उपरान्त प्रदेश में फॉरेंसिक एविडेंस के लिये प्रत्येक जनपद में 02-02 मोबाइल फॉरेंसिक लैब स्थापित की गई हैं। यू0पी0-112 के रिस्पांस टाइम को 65 मिनट से घटाकर 06 से 07 मिनट तक लाने में सफलता प्राप्त हुई है। अब उत्तर प्रदेश में महिला कार्यबल 13 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत से अधिक हो गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने स्वयं को प्रदेश की आर्थिक प्रगति की रीढ़ के रूप में तैयार किया है।