– 14 साल की शर्त को 12 साल में ही ‘एडजस्ट’ कर दिया”
-CBI जांच की मांग: MCI ने पहले ही लगाया था ठप्पा, फिर भी प्रोफेसर बना दिए गए डॉ. मधुकर मित्तल
- REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ। लखनऊ, 15 जून 2026। AIIMS रायबरेली में फैकल्टी भर्ती के नाम पर “नियमों की हत्या” का आरोप लगा है। जनरल मेडिसिन की प्रोफेसर की कुर्सी
पर 14 साल अनुभव की अनिवार्य शर्त को 12 साल 5 महीने में ही “एडजस्ट” कर दिया गया। शिकायतकर्ता संजय मिश्रा ने CBI ऑफिस हजरतगंज में 113 पन्नों की शिकायत देकर तहलका मचा दिया है।
पूरा खेल क्या हुआ ?
1. MCI ने KGMC में ही लगा दी थी रोकआरोप है कि डॉ. मधुकर मित्तल को 2016 में KGMC लखनऊ में एसोसिएट प्रोफेसर की पदोन्नति MCI ने खारिज कर दी थी। वजह: 5 साल अनुभव चाहिए था, इनके पास 4 साल 3 महीने थे। वही “अधूरे” रिकॉर्ड के दम पर 2024 में सीधे AIIMS रायबरेली में प्रोफेसर बना दिए गए।
2. विज्ञापन बोला 14 साल, चयन हुआ 12 साल 5 महीने पर AIIMS ने 22.08.2024 के विज्ञापन AIIMS/RBR/REC/FACULTY/2024/311 में साफ लिखा था: “MD/MS के बाद जनरल मेडिसिन प्रोफेसर के लिए 14 साल टीचिंग अनुभव जरूरी”। डेडलाइन 05.10.2024 थी।
शिकायत के मुताबिक डॉ. मित्तल का कुल अनुभव 12 साल 5 महीने ही बनता है। यानी 1 साल 7 महीने की कमी। फिर भी UR कैटेगरी की सीट पर सिलेक्ट कर लिए गए। ज्यादा योग्य Dr. Jalees Fatima को “Waiting” में डाल दिया गया।
3. बिना NOC के साक्षात्कार, भोपाल से सीधे कुर्सीसबसे बड़ा झोल NOC का है। 26.03.2025 तक डॉ. मित्तल AIIMS भोपाल में प्रोफेसर थे। साक्षात्कार के समय उनके पास NOC नहीं, सिर्फ “Undertaking” था। नियम: बिना NOC इंटरव्यू ही अवैध। फिर भी AIIMS रायबरेली ने आंख बंद कर ली।
4. 2 आवेदन, 1 कुर्सी… नतीजा “फिक्स” ? जनरल मेडिसिन में सिर्फ 2 आवेदन आए थे। Dr. Jalees Fatima: Final List में “Eligible” डॉ. मधुकर मित्तल: “Provisional Eligible – NOC” यानी कागज अधूरे 24.12.2024 की Final List में अधूरे कागज वाले मित्तल का नाम आ गया और पूरी योग्य Fatima को वेटिंग। शिकायत में इसे “पद की बंदरबांट” कहा गया।
“कुर्सी मिली कैसे?” 5 बड़े सवाल ?
1. MCI ने 2016 में KGMC में प्रमोशन रोका था ।”अनुभव कम” बताकर, फिर AIIMS ने 2024 में प्रोफेसर कैसे बना दिया ?
2. विज्ञापन की शर्त 14 साल थी। 12 साल 5 महीने वाले कैसे पास हुए ?
3. बिना NOC साक्षात्कार नियम के खिलाफ। AIIMS ने छूट क्यों दी ?
4. Dr. Jalees Fatima “Eligible” थीं। उन्हें छोड़कर “Provisional” वाले को क्यों चुना गया ?
5. सिर्फ 2 आवेदन थे। तो मेरिट की बात कहां हुई ? क्या चयन पहले से तय था ?
“MCI ने पहले ही फेल कर दिया था, फिर भी जॉइनिंग लेटर थमा दिया”
शिकायतकर्ता संजय मिश्रा का आरोप सीधा है: डॉ. मधुकर मित्तल को KGMC लखनऊ में 2016 में ही एसोसिएट प्रोफेसर की पदोन्नति MCI ने “अनुभव अधूरा” कहकर खारिज कर दी थी। तब 5 साल का अनुभव चाहिए था, इनके पास 4 साल 3 महीने थे। वही अधूरे कागजों के दम पर 2024 में AIIMS रायबरेली में प्रोफेसर बन गए!
विज्ञापन की शर्त vs हकीकत का फर्क
AIIMS ने 22 अगस्त 2024 के विज्ञापन में साफ लिखा – “जनरल मेडिसिन प्रोफेसर के लिए MD/MS के बाद 14 साल टीचिंग अनुभव अनिवार्य”। डेडलाइन 05 अक्टूबर 2024 थी।हकीकत: डॉ. मित्तल का कुल अनुभव 12 साल 5 महीने निकलता है। 1 साल 7 महीने कम! फिर भी UR कैटेगरी की सीट पर चयनित कर दिए गए। ज्यादा योग्य Dr. Jalees Fatima को “प्रतीक्षारत” की पट्टी बांधकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
NOC का झोल, भोपाल से सीधे कुर्सी पर !
सबसे बड़ा सवाल: 26 मार्च 2025 तक डॉ. मित्तल AIIMS भोपाल में प्रोफेसर थे। साक्षात्कार के समय उनके पास NOC नहीं था, सिर्फ “Undertaking” का सहारा था। नियम कहता है – बिना NOC के साक्षात्कार में बैठना ही गैरकानूनी। फिर AIIMS रायबरेली ने आंखें क्यों बंद कर लीं?
2 आवेदन, 1 कुर्सी… और चयन “स्पेशल” !
जनरल मेडिसिन में सिर्फ 2 लोगों ने फॉर्म भरा था। एक Dr. Jalees Fatima – “Eligible”। दूसरे डॉ. मधुकर मित्तल – “Provisional Eligible-NOC”। यानी कागज अधूरे। फिर भी 24 दिसंबर 2024 की Final List में मित्तल का नाम चमक गया और Fatima को वेटिंग में धकेल दिया गया। शिकायत में इसे “पद की बंदरबांट” कहा गया है।
CBI से गुहार: “113 पन्ने चीख रहे हैं, अब जांच कौन रोकेगा ?”
शिकायत में MCI रिपोर्ट, KGMC रिकॉर्ड, AIIMS भोपाल का रिलीविंग लेटर सब संलग्न है। मांग साफ है – पूरी भर्ती रद्द करो, दोषियों पर कार्रवाई करो। CBI ऑफिस हजरतगंज और AIIMS निदेशक को भेजी गई चिट्ठी में लिखा है: “AIIMS का उद्देश्य UG-PG की शिक्षा का उच्च मानक रखना है, पर यहां नियमों की धज्जियां उड़ाकर अयोग्य को ताज पहना दिया गया।”
सवाल AIIMS प्रशासन से :
1. MCI की आपत्ति के बाद भी पदोन्नति कैसे हुई ?
2. बिना NOC के साक्षात्कार क्यों कराया गया ?
3. 14 साल की शर्त को 12 साल में कैसे “मैनेज” कर लिया गया ?
4- AIIMS रायबरेली प्रशासन अभी चुप है। पर 113 पन्नों के सबूत चीख-चीख कर पूछ रहे हैं – क्या AIIMS में भी अब जुगाड़ से कुर्सी मिलती है ?
-CBI से मांग,भर्ती रद्द करो, दोषियों पर FIR
शिकायत में MCI रिपोर्ट, KGMC का रिकॉर्ड, AIIMS भोपाल का रिलीविंग लेटर सब लगा है। मांग है: पूरी भर्ती रद्द हो, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो। चिट्ठी में लिखा है: “AIIMS का काम UG-PG को उच्च शिक्षा देना है, पर यहां नियम तोड़कर अयोग्य को ताज पहना दिया गया”।
AIIMS प्रशासन का पक्ष: खबर लिखे जाने तक AIIMS रायबरेली प्रशासन की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है।
