- REPORT BY:PREM SHARMA || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ। नगर निगम कर्मचारी संघ लखनऊ ने एक बार फिर विभिन्न संवर्ग के पदोन्नति वाले 52 पदों पर ससमय पदोन्नति की मांग नगर
आयुक्त से की है। संघ ने शासनादेश का हवाला देते हुए पदोन्नति के रिक्त पदों पर 31 जुलाई तक कार्रवाई करने की मांग की है।
संघ के अध्यक्ष आनन्द वर्मा ने बताया कि विभिन्न संवर्गो के पदोन्नति सम्बंधित कई पद रिक्त पड़े है। इनमें पदोन्नति के लिए संघ लगातार नगर निगम प्रशासन से अनुरोध करता आ रहा है। वर्तमान में प्रथम श्रेणी लिपिक स्वीकृत पद 66 और रिक्त पद 14 हैं द्वितीय श्रेणी लिपिक 59 के सापेक्ष 18, मुख्य अध्यापिका तीन के सापेक्ष 2 और प्रधान माली 20 के सापेक्ष 18 पद रिक्त है। उनका कहना है कि समय से पदोन्नति न होने पर कर्मचारियों में निराशा बढ़ रही है। अतः ससमय पदोन्नति की कार्रवाई की जाए।
जनसुनवाई में निजीकरण रद्द करने की मांग करेगी संघर्ष समिति,जनपदों और परियोजनाओं में सभाएं,जेल भरो अभियान की तैयारी’
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश ने निर्णय लिया है कि पावर कॉरपोरेशन द्वारा विद्युत नियामक आयोग को भेजे गए
निजीकरण के मसौदे के विरोध में संघर्ष समिति जन सुनवाई की सभी तारीखों पर नियामक आयोग के समक्ष आपत्ति दर्ज कराते हुए निजीकरण का निर्णय रद्द करने की मांग करेगी। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों ने आज यहां जारी बयान में कहा कि अवैधानिक ढंग से नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन द्वारा तैयार किए गए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का पूरा मसौदा असंवैधानिक है।
संघर्ष समिति ने निजीकरण के मसौदे पर बिंदुवार आपत्तियां तैयार करने के लिए एक उच्च स्तरीय तकनीकी समिति का गठन किया है। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी जनसुनवाई के दौरान सभी शहरों में उपस्थित रहेंगे और निजीकरण के विरोध में हर जगह आपत्ति दर्ज की जाएगी और निजीकरण निर्णय रद्द करने की मांग की जाएगी।संघर्ष समिति ने बताया कि विद्युत नियामक आयोग 07 जुलाई को लखनऊ में, 09 जुलाई को केस्को में, 11 जुलाई को वाराणसी में, 15 जुलाई को आगरा में ,16 जुलाई को ग्रेटर नोएडा में और 17 जुलाई को मेरठ में सुनवाई करने वाला है। इन सभी बैठकों में सुनवाई के दौरान संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी मौजूद रहेंगे।संघर्ष समिति ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि किस बिडिंग डॉक्यूमेंट के आधार पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सितंबर 2020 में भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय ने एक ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट जारी किया था जिस पर आपत्तियां मांगी गई थी। बिजली इंजीनियरों ने भी उस पर आपत्ति की थी। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने इस ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट को आज तक फाइनल नहीं किया है। अब बताया जा रहा है कि अप्रैल 2025 में कोई नया स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 का ड्राफ्ट जारी कर दिया गया है जो न तो पब्लिक डोमेन में है और न ही राज्यों के पॉवर कारपोरेशन को अभी तक सर्कुलेट किया गया है। सवाल है लाखों करोड़ों रुपए की परिसंपत्तियों को निजी घरानों को बेचा जा रहा है और जिस बिडिंग डॉक्यूमेंट के आधार पर बेचा जा रहा है उसी को गोपनीय रखा जा रहा है। इससे साफ है कि बिजली के निजीकरण के पीछे बड़ी लूट होने वाली है। संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 218 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश में समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर विरोध प्रदर्शन जारी रखा। आज विरोध प्रदर्शन के दौरान निजीकरण का विरोध कर स्वेच्छा से जेल भरो आंदोलन में सम्मिलित होने वाले कर्मचारियों की सूची बनाया जाना प्रारंभ हो गया है। संघर्ष समिति ने निर्देश दिया है कि तीन दिन के अंदर सभी जनपदों से जेल भरो आंदोलन में स्वेच्छा से सम्मिलित होने वाले कर्मचारियों की कम से कम सात दिन तक जेल भरो अभियान की योजना बनाकर सूची तैयार कर ली जाए।
निजीकरण मसौदा सुनवाई के पहले करें सार्वजनिक,वितरण हानियां व मसौदे में हानियां में क्या अंतर ?
सात जुलाई को मध्यांचल विद्युत वितरण निगम में आम जनता की सुनवाई के पहले उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आज
विद्युत नियामक आयोग में नियामक आयोग के सदस्य संजय कुमार सिंह से मुलाकात कर निजीकरण से संबंधित अपनी आपत्तियां सौंपा। परिषद ने आयोग से बिजली दर सुनवाई का पार्ट बनाने की मांग उठाई। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा मल्टी ईयर डिस्ट्रीब्यूशन टैरिफ रेगुलेशन 2025 की धारा 45 रिस्ट्रक्चरिंग ऑफ लाइसेंसी के तहत बिजली दर की सुनवाई में निजीकरण के मामले पर भी उपभोक्ता अपनी बात रखेंगे। सबसे बड़ा महत्वपूर्ण सवाल है कि प्रदेश की बिजली कंपनियों के तरफ से बिजली दर में लगभग 45 प्रतिशत तक बढ़ोतरी प्रस्ताव के साथ जो वितरण हानियां का आकलन सौपा गया है।निजीकरण के मसौदे के साथ भी वितरण हानियों का आकलन सौपा गया है,दोनों में भिन्नता है या समानता है ? इसी प्रकार पावर परचेज एग्रीमेंट के मामले में भी निजीकरण के मसौदे में व्यवस्था दी गई है। बिजली दर के अनेकों पहलुओं पर विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 108 के तहत निर्देश जारी करने का भी मामला है। ऐसे में उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग से सुनवाई के पहले उपभोक्ता परिषद में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जो भी निजीकरण का मसौदा आयोग को सौपा गया है। उसको तत्काल सार्वजनिक करने की मांग उठाई। उपभोक्ता परिषद की तरफ से स्पष्ट किया गया कि ताकि जिससे कोई भी उपभोक्ता देख सके और यह समझ सके कि दोनों में क्या अंतर है क्या समानता है और वह जनहित में है अथवा नहीं ?
वद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने यह भी गंभीर सवाल उठाया कि निजीकरण के मसौदे में बिजली कंपनियों को कम लागत में बेचने के लिए विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 131(2) का भी खुला उल्लंघन किया गया। रेवेन्यू पोटेंशियल का कोई भी आकलन नहीं कराया गया इसी प्रकार से जो मनमाने तरीके से रिजर्व बिड प्राइस में आकलन किया गया। उसमे लगभग सीधे तौर पर 3500 करोड़ रूपया उद्योगपतियों को लाभ देने की साजिश की गई देश में चंडीगढ़ का मॉडल सबके सामने था उसे नजरअदाज करके एक मनमाना आधार बनाया गया। उपभोक्ता परिषद के संज्ञान में है पावर कॉरपोरेशन विद्युत नियामक आयोग से जल्दबाजी में मसौदे पर अंतिम मोहर लगवाने के लिए आयोग पर दबाव बनाने की रणनीति में लगा ह।ै ऐसे में अभी तक जो पूरा मसौदा सामने आ रहा है वह पूरी तरह खारिज करने योग्य है। इसलिए विद्युत नियामक आयोग उसे खारिज करें और पावर कारपोरेशन के किसी भी मांग को पूरा ना करें। श्री वर्मा ने अपनी आपत्तियां में यह भी मुद्दा उठाया कि निजीकरण के मसौदे में यह भी व्यवस्था बनाई गई है कि दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण हो जाने के बाद टोरेंट पावर की फ्रेंचाइजी मध्यांचल के अधीन हो जाएगी ऐसे में इस पर भी सुनवाई के पहले पावर कॉरपोरेशन से स्थिति आयोग को स्पष्ट कराना चाहिए। इसके साथ ही उपभोक्ता परिषद ने यह भी गंभीर सवाल उठाया कि आने वाले समय में पूरे प्रदेश में सभी बिजली कंपनियों के बिजली खरीद के पावर परचेज एग्रीमेंट ,(पीपीए),की व्यवस्था के तहत अभी जो बिजली कंपनी ज्यादा घाटे में है उसे सस्ता पावर परचेज एग्रीमेंट एलॉट किया गया है और जो बिजली कंपनी अच्छी हालत में है उन्हें महंगा पावर परचेज एग्रीमेंट अलर्ट किया गया है। ऐसे में दक्षिणांचल पूर्वांचल में सबसे सस्ता पावर परचेज एग्रीमेंट है तो आने वाले समय में निजीकरण के बाद इन दोनों बिजली कंपनियों के निजी घरानों का बड़ा लाभ हो जाएगा। दो साल बाद जब पावर परचेज एग्रीमेंट सभी का अलग-अलग होगा तो पूरे प्रदेश में समान बिजली दर के बजाय अलग-अलग बिजली दर हो जाएगी।
आभार सचिवालय का विमोचन
एन.पी. त्रिपाठी, सचिव,उत्तर प्रदेश सचिवालय पेंशनर्स एसोसिएशन एवं संयोजक,संयुक्त पेंशनर्स कल्याण समिति, उत्तर प्रदेश द्वारा प्रकाशित
आभार सचिवालय का विमोचन समारोह उत्तर प्रदेश सचिवालय के मुख्य भवन स्थित कक्ष संख्या 80 में सम्पन्न हुआ। समारोह की अध्यक्षता पी.के. शर्मा, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश सचिवालय पेंशनर्स एसोसिएशन ने किया।
एन पी त्रिपाठी द्वारा प्रकाशित एवं शव शंकर द्विवेदी, संयुक्त सचिव (सेवानिवृत्त) उत्तर प्रदेश शासन द्वारा सम्पादित संस्मरण पत्रिका आभार सचिवालय का विमोचन, समारोह के मुख्य अतिथि डॉ दिनेश चंद्र अवस्थी पूर्व महामंत्री, उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान के कर कमरों द्वारा किया गया। समारोह में उत्तर प्रदेश सचिवालय के 1974 बैच के पूर्व अधिकारीगण के साथ अन्य अनेक विशेष आमंत्रित सदस्य भी उपस्थित थे। संस्मरण पत्रिका आभार सचिवालय में एन.पी. त्रिपाठी ने अपने सचिवालय सेवा के 50 वर्षों का महत्वपूर्ण घटनाक्रम लिपिबद्ध किया है। इस पत्रिका में श्री त्रिपाठी के साथ एफ.एन. प्रधान,विशेष सचिव (सेवानिवृत्त) उत्तर प्रदेश शासन,शिव शंकर द्विवेदी, संयुक्त सचिव (सेवानिवृत्त) उत्तर प्रदेश शासन, डाक्टर एम.डी. मिश्रा पूर्व संपादक सचिवालय साहित्यिकी एवं पेंशनर्स परिकल्प, राम नरेश त्रिपाठी अनुभाग अधिकारी (सेवानिवृत्त) एवं टी एन द्विवेदी, महासचिव,पी.सी.एस.(रिटा) अधिकारी वेलफेयर एसोसिएशन उ.प्र.के संस्मरण भी लिपिबद्ध हैं। पत्रिका विमोचन कार्यक्रम में सचिवालय संघ के पूर्व सचिव एवं उत्तर प्रदेश पेंशनर्स कल्याण संस्था के महामंत्री ओंकार नाथ तिवारी व सचिवालय दर्पण के संपादक अखिलेश कुमार श्रीवास्तव भी शामिल हुए।
स्थानीय कर्मचारी महासंघ विकास मंत्री को फिर सौपा ज्ञापन,नौ को प्रदेश व्यापी आन्दोलन का कराया ध्यानाकर्षण
एक बार फिर स्थानीय कर्मचारी महासंघ विकास मंत्री को फिर ज्ञापन सौपा। उनके आवास पर पहुंचकर दस सूत्रीय मांगों के निस्तारण तथा 9
जुलाई के प्रदेशव्यापी आन्दोलन के लिए ध्यानाकर्षण कराया गया। महासंघ वर्ष 2019 से वर्ष 2025 तक प्रमुख रूप से 06 बैठके प्रमुख सचिव, नगर विकास की अध्यक्षता में कर चुका है जिस पर जारी कार्यवृत्त का समयबद्ध निस्तारण,कार्यवाही का लिखित आश्वासन जारी होने के बाद भी कोई निर्णय,आदेश जारी नही किया गया। मंत्री ,नगर विकास द्वारा 02 पत्र 08 अक्टूबर, 2024 व 21 फरवरी, 2025 के बाद भी मांगों के समाधान हेतु कोई कार्यवाही नहीं हुई। जिसके विरोधस्वरूप एवं प्रदेश के निकाय कर्मचारियों में बढ़ रहे व्याप्त आक्रोश को दृष्टिगत रखते हुए महासंघ पूर्व प्रेषित आन्दोलन की नोटिस 30 जून, 2025 के क्रम में 8 जुलाई, 2025 तक यदि जारी कार्यवृत्त एवं मांग-पत्र के बिन्दुओं पर कोई सकारात्मक कार्यवाही नहीं की गयी तो 9 जुलाई, 2025 को प्रदेश की समस्त ईकाईयों द्वारा अपने-अपने मुख्यालय पर गेट मीटिंगसांकेतिक कार्यबन्दी कर अपने-अपने विभागाध्यक्ष के माध्यम से मंत्री नगर विकास एवं प्रमुख सचिव, नगर विकास को ’’ज्ञापन’’ प्रेषित किया जायेगा।
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष शशि कुमार मिश्र, महामंत्री रमाकान्त मिश्र, प्रदेश प्रवक्ता मुन्ना हजारिया, प्रचार मंत्री सुधाकर मिश्र, आनन्द मिश्र अध्यक्ष नगर निगम एवं जलकल कर्मचारी संघ, संजय चन्द्रा, अमित सिंह, अमरेन्द्र दीक्षित, अनिल शुक्ला आदि कर्मचारी प्रतिनिधियों की उपस्थिति में मंत्री नगर विकास के आवास पर गत दिनांे हुये महासंघ के प्रान्तीय अधिवेशन का स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ, महासंघ की बुकलेट आदि भेंट करते हुए लम्बित मांगों पर 09 जुलाई, 2025 को होने वाले प्रदेश व्यापी आन्दोलन के सम्बन्ध में ध्यानाकर्षण कराते हुए पत्र देकर समयबद्ध कार्यवाही किये जाने का अनुरोध किया गया। नगर विकास मंत्री ने एक बार फिर उन्हें आश्वासन दिया है।
नगर निगम आज संपूर्ण समाधान दिवस
नगर निगम लखनऊ द्वारा शहरवासियों की समस्याओं के समाधान को लेकर हर महीने के पहले शुक्रवार को आयोजित किए जाने वाले संपूर्ण
समाधान दिवस का आयोजन 04 जुलाई, शुक्रवार को किया जाएगा। इस बार भी त्रिलोकनाथ सभागार, नगर निगम मुख्यालय, लालबाग में सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक यह समाधान दिवस आयोजित होगा।
सर्वेक्षण के बाद कई भवन स्वामियों द्वारा कर निर्धारण को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। ऐसे मामलों के समाधान के लिए नागरिक इस संपूर्ण समाधान दिवस में भाग ले सकते हैं। साथ ही जलकल, सफाई, सड़कों की मरम्मत, स्ट्रीट लाइट और अन्य नागरिक सेवाओं से जुड़ी शिकायतों के समाधान हेतु संबंधित विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।नगर निगम लखनऊ ने शहरवासियों से अपील की है कि वे 04 जुलाई को समय से पहुंचें और अपनी समस्या से संबंधित आवश्यक दस्तावेज साथ लाएं, ताकि मौके पर ही उनकी शिकायत का त्वरित समाधान किया जा सके। नगर आयुक्त ने कहा कि यह समाधान दिवस केवल समस्याओं के निस्तारण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनता और प्रशासन के बीच संवाद एवं विश्वास का एक सशक्त माध्यम भी है।
