LUCKNOW:मोहनलालगंज तहसील में ‘पेशकारों की तिगड़ी’ का दबदबा

-सीधे सौदेबाजी से अधिवक्ताओं में भारी उबाल,मृतक आश्रित फाइल के नाम पर लाखों के वारे-न्यारे की चर्चा, अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल

-तहसील में दलालों औऱ  बिल्डरों का जमावड़ा, बिना ‘ठेका’ लिए नहीं हिलती तहसील में कोई फाइल

  • REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS|| EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK 
लखनऊ।राजधानी की मोहनलालगंज तहसील इन दिनों भ्रष्टाचार और रसूखदारों की नई चारागाह बन गई है। यहाँ तैनात पेशकारों की एक कथित ‘तिगड़ी’ ने पूरी तहसील की व्यवस्था को अपने शिकंजे में कस लिया है।आलम यह है कि बिना इस तिगड़ी की मर्जी के कोई भी पटल पर पत्रावली आगे नहीं बढ़ती।यहाँ काम करने वाले अधिवक्ताओं का आरोप है कि इस तिगड़ी ने सीधे फरियादियों से ‘सेटिंग-गेटिंग’ का खेल शुरू कर दिया है।जिससे न केवल न्याय व्यवस्था तार-तार हो रही है। बल्कि वकीलों के काम पर भी डाका डाला जा रहा है।
तहसील परिसर में चर्चा है कि यह तिगड़ी सीधे फरियादियों को जाल में फंसाती है और काम कराने का मोटा ‘ठेका’ लेती है।जो भी  व्यक्ति इनके इस सिंडिकेट का हिस्सा नहीं बनता, उसकी फाइल धूल फांकती रहती है। इनकी कार्यशैली पर वकीलों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि पेशकारों के पास अब फरियादियों और वकीलों से ज्यादा बिल्डरों और बाहरी दलालों का मजमा लगा रहता है। तहसील की मर्यादा को ताक पर रखकर यहाँ खुलेआम सौदेबाजी किये जाने की चर्चा है।
अभी ताजा मामला धारा-98 से जुड़ी फाइल का बताया जा रहा है।एक बाबू मृतक आश्रित में नियुक्ति के बाद इस फाइल को ठिकाने लगाने और पक्ष में रिपोर्ट लगवाने की एवज में लाखों रुपये के लेनदेन की चर्चा इन दिनों  जोरों पर है। इस कथित डील की खबर जैसे ही अधिवक्ताओं तक पहुँची तो तहसील का पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया।सबसे हैरानी की बात तो यह है कि इस तिगड़ी के कारनामों की गूँज तहसील से लेकर जिला मुख्यालय तक है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने अपनी आँखों पर पट्टी बांध रखी है।

अधिवक्ता व संगठनों  ने बनाया आर-पार की लड़ाई का मन

अधिवक्ताओं ने तीखा सवाल किया है कि आखिर इन पेशकारों को किसका वरदहस्त प्राप्त है ? क्या इस बंदरबाँट में ऊपर तक हिस्सा जा रहा है, जो भ्रष्टों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें मौन सहमति दी जा रही है ? पेशकारो की तिगड़ी के बढ़ते वर्चस्व और भ्रष्टाचार के खिलाफ अब अधिवक्ता संगठनों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। वकीलों का कहना है कि यदि जल्द ही इन बेलगाम पेशकारों पर लगाम नहीं कसी गई और इनका पटल नहीं बदला गया, तो तहसील में बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।​अधिवक्ताओं ने साफ कहा है कि क्या तहसील अब बिल्डरों और दलालों के इशारे पर चलेगी अधिकारी क्यों तमाशबीन बने है , आखिर किस बात का  डर है।आम आदमी के न्याय और वकीलों के मान-सम्मान की रक्षा कौन करेगा ?

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