-धरती रो रही है, अब हमारी बारी है: डॉ. राजेश्वर सिंह का भावनात्मक पर्यावरण संदेश वायरल
- REPORT BY:A.S.CHAUHAN || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS
लखनऊ। सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक गहन और
जागरूकता भरा संदेश साझा किया, जो तेजी से वायरल हो रहा है। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा, “धरती रो रही है, अब हमारी बारी है।” डॉ. सिंह ने लोगों से अपील की कि हम अपने घर तो साफ रखते हैं, लेकिन धरती माता को गंदा कर रहे हैं। यदि प्रकृति थम गई, तो इंसान का अस्तित्व भी थम जाएगा।डॉ. सिंह ने वैज्ञानिक आंकड़ों और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के आधार पर छोटे कदमों से बड़े बदलाव की बात की:
ऊर्जा बचत: एक LED बल्ब बदलने से भारत 40 अरब यूनिट बिजली बचा सकता है, जो 3.8 करोड़ टन CO₂ उत्सर्जन कम करने और 80 लाख कारों को सड़क से हटाने के बराबर है।परिवहन: 10% छोटी यात्राएं पैदल या साइकिल से करने पर सालाना 20 करोड़ टन CO₂ कम होगा।जल संरक्षण: एक टपकता नल 10,000 लीटर पानी बर्बाद करता है; 10 लाख परिवार सावधान हों तो 10 अरब लीटर पानी बच सकता है, जो 1 लाख लोगों की सालभर की प्यास बुझा सकता है।भोजन बर्बादी: इससे 9.3 अरब टन CO₂ निकलता है, जिसे रोककर चीन-अमेरिका के संयुक्त उत्सर्जन के बराबर राहत मिल सकती है।वृक्षारोपण: एक पेड़ 20 किग्रा CO₂ सोखता है; हर भारतीय एक पेड़ लगाए तो 2.8 करोड़ टन CO₂ अवशोषित हो सकता है, यानी 60 लाख कारों का उत्सर्जन।IPCC, UN, NITI Aayog और WHO रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए डॉ. सिंह ने चेतावनी दी कि 2030 तक तापमान 1.5°C से आगे बढ़ा तो अमेज़न का 47% नष्ट हो जाएगा। 2050 तक समुद्र स्तर 3 मीटर बढ़ सकता है, जिससे एशिया के 60 करोड़ लोग बाढ़ के खतरे में होंगे—मुंबई, कोलकाता, चेन्नई सबसे प्रभावित। भारत के 75% जिले क्लाइमेट हॉटस्पॉट हैं; 14 लाख भारतीय वायु प्रदूषण से अकाल मृत्यु का शिकार हो रहे हैं। उत्तर भारत का तापमान 1.3°C बढ़ चुका है और 2080 तक 4°C तक पहुंच सकता है।भावनात्मक आह्वान में डॉ. सिंह ने कहा, “हमारे बच्चे जिस दुनिया में जन्म लेंगे, उसका रूप आज हम तय कर रहे हैं। अगर आज पेड़ नहीं लगाए, तो कल छांव कहाँ? जल नहीं बचाया, तो प्यास कहाँ बुझाएंगे? प्रदूषण नहीं रोका, तो सांस कैसे लेंगे?”उन्होंने संकल्प दिलाया: पानी बचाना धर्म, बिजली बचाना कर्तव्य, प्लास्टिक छोड़ना संस्कार, कचरा पृथक्करण आदत और वृक्षारोपण परंपरा है। अंत में बोले, “प्रकृति के बिना मानवता का भविष्य नहीं। जब धरती बचेगी, तभी विकसित भारत 2047 सांस ले पाएगा।”
गांव में बिना वजह गाली-गलौज, मारपीट, मुकदमा दर्ज
थाना बिजनौर क्षेत्र के ग्राम रसूलपुर इठुरिया (माती) में मंगलवार शाम करीब 6:45 बजे एक व्यक्ति पर तीन ग्रामीणों ने मिलकर हमला कर दिया। पीड़ित चन्दन पाल (पुत्र रामकिशोर पाल) ने थाने में दी तहरीर में आरोप लगाया कि आदित्य शर्मा (पुत्र जगन्नाथ शर्मा), मजीत शर्मा और रंजीत शर्मा (दोनों पुत्र नन्हके शर्मा) ने बिना किसी वजह गालियां दीं और विरोध करने पर डंडों व ईंटों से हमला किया।चन्दन पाल के मुताबिक, हमले में उनके सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आईं। आरोपी जान से मारने की धमकी देकर मौके से फरार हो गए। थाना बिजनौर में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
अनुसूचित जाति की जमीन पर भू-माफिया का कब्जा
कृष्णानगर थाना क्षेत्र के निलमथा बाजार निवासी चन्द्रिका पुत्र स्व. हरिश्चन्द्र (अनुसूचित जाति) ने सहायक पुलिस आयुक्त को दी तहरीर में
गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि भू-माफिया नागेश्वर चौधरी, विनोद कुमार सिंह और संतोष वर्मा ने मिलीभगत से उनकी दो खसरा नंबरों (800 व 801) की जमीन पर फर्जी बैनामा करा अवैध कब्जा कर लिया।
फर्जी दस्तावेजों का खेल
खसरा 801: 13.09.2002 को मंशाराम से खरीदी (रजिस्ट्रेशन नं. 6385, उपनिबंधक लखनऊ),खसरा 800: 14.06.2006 को केशन से खरीदी (रजिस्ट्रेशन नं. 5085, उपनिबंधक लखनऊ)
फर्जी बैनामा: 16.11.2022 को दो अलग-अलग फर्जी बैनामे कराए गए – एक नागेश्वर चौधरी के नाम, दूसरा विनोद कुमार सिंह के नाम।
दोनों में गवाह एक ही – विनोद और नागेश्वर एक-दूसरे के बैनामे में गवाह, दूसरा गवाह संतोष वर्मा।
फर्जी हस्ताक्षर + फोटो दुरुपयोग: बैनामे में चन्द्रिका का फोटो चस्पा है, लेकिन हस्ताक्षर फर्जी व्यक्ति के। रजिस्ट्रार ऑफिस की स्कैन फोटो में कोई और व्यक्ति (संभवतः अभियुक्तों का रिश्तेदार)।
27 जून 2025 को हिंसा और धमकी
जब चन्द्रिका अपनी जमीन पर गए तो:अभियुक्तों ने अवैध कब्जा कर रखा था।मना करने पर जातिसूचक गालियाँ दीं। जान से मारने की धमकी देकर भगा दिया।डायल-112 बुलाई गई – वाहन नं. UP-32 DG 4925 व UP-32 DG 4917 मौके पर पहुँचे। पुलिस मामला दर्ज कर जांच पड़ताल शुरू कर दिया है।
नादरगंज चौराहे के पास टैक्सी में चोरी,पर्स से 35 हजार नकद सोने की चेन, मोबाइल और ATM कार्ड गायब; दो अज्ञात बाइक सवार फरार
उन्नाव निवासी शुयैब आफाक ने सरोजनीनगर थाने में दी गई प्राथमिकी में बताया कि 27 अक्टूबर 2025 को शाम करीब 7:30 बजे वह अपनी
पत्नी और पुत्र के साथ बुक टैक्सी (नंबर UP14QT1439) से हजरतगंज नरही से उन्नाव जा रहे थे। नादरगंज चौराहे से थोड़ा आगे एयरपोर्ट बाउंड्री के पास दो अज्ञात युवक बाइक पर आए और गाड़ी खराब होने का इशारा किया।टैक्सी साइड में रोककर जैसे ही शुयैब गाड़ी से उतरे, एक युवक ने सीट पर रखा पर्स उठा लिया और दोनों फरार हो गए। पर्स में 30-35 हजार रुपये नकद, एक सोने की चेन, MI मोबाइल फोन व तीन ATM कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस था। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
हीरो स्प्लेंडर प्लस मोटरसाइकिल चोरी, रिपोर्ट दर्ज
सरोजनीनगर थाना क्षेत्र के हीरालाल यादव डिग्री कॉलेज के सामने से 24 अक्टूबर 2025 को एक हीरो स्प्लेंडर प्लस मोटरसाइकिल (रजिस्ट्रेशन नंबर UP32KM6388) चोरी हो गई। पीड़ित अनिल मिश्रा ने 28 अक्टूबर को थाना सरोजनीनगर में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।शिकायत में अनिल मिश्रा (पुत्र स्व. कृष्णानंद मिश्रा, निवासी आजादनगर सरोजनीनगर ने बताया कि उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल कॉलेज के सामने खड़ी की थी। कुछ देर बाद लौटने पर वह गायब मिली। आसपास तलाशने के बावजूद कोई सुराग नहीं मिला।
नई खाद वितरण नीति से सरोजनीनगर के किसान परेशान,सदस्यता के नाम पर खेती पर गहराया संकट, गरीब बटाईदार ग्रामीण किसान चिंता में डूबे
सरोजनीनगर तहसील क्षेत्र में सहकारी समितियों के माध्यम से खाद वितरण की नई नीति लागू होने के बाद ग्रामीण किसानों में भारी असंतोष
व्याप्त है। गरीब और सीमांत किसान, जो पहले आसानी से डीएपी और यूरिया जैसी खाद प्राप्त कर लेते थे, अब इस नीति के कारण बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। नई व्यवस्था के तहत किसानों को समिति का सदस्य बनना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसके लिए आधार कार्ड, तीन फोटो, जमीन के दस्तावेज और 230 रुपये की फीस जमा करनी पड़ रही है। इसके बाद ही प्रति बीघा जमीन पर एक बोरी खाद उपलब्ध कराई जा रही है।
इस नीति को लेकर क्षेत्र के सैकड़ों किसान खुलकर विरोध जता रहे हैं, उनका कहना है कि यह व्यवस्था गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले किसानों के लिए घातक सिद्ध हो रही है।सरोजनीनगर तहसील के ग्रामीण इलाकों में खेती मुख्य रूप से बटाईदारी पर आधारित है। अधिकांश गरीब किसान अपनी जमीन न होने के कारण दूसरों की जमीन लेकर फसल उगाते हैं, जिससे उनका परिवार का गुजारा चलता है। पहले सहकारी समितियों पर बिना किसी झंझट के खाद उपलब्ध हो जाती थी, लेकिन अब सदस्यता की यह शर्त ने उनके लिए नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। बिना सदस्यता के खाद न मिलने से किसानों को बाजार से नकली और महंगी खाद खरीदनी पड़ रही है, जो फसलों के उत्पादन को प्रभावित कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल खेती का खर्च बढ़ेगा, बल्कि फसल की गुणवत्ता भी प्रभावित होगी, जिसका असर अंततः खाद्यान्नों की कीमतों पर पड़ेगा।
क्षेत्र के प्रमुख किसानों ने इस नीति की कड़ी आलोचना की है। शिवकुमार वर्मा, एक बटाईदार किसान ने बताया, “हम गरीब लोग हैं, जो दिन-रात मेहनत करके परिवार का पेट पालते हैं। सरकार की यह नीति हमें और गहरी दलदल में धकेल रही है। आधार कार्ड और फोटो तो ठीक, लेकिन जमीन के कागजात कहां से लाएं? हम तो बटाई पर खेती करते हैं। 230 रुपये की फीस जमा करने के बाद भी एक बोरी प्रति बीघा मिलेगी, जो पर्याप्त नहीं। अब बाजार से 500-600 रुपये की बोरी खरीदनी पड़ रही है, जो नकली भी हो सकती है। इससे हमारी फसल बर्बाद हो जाएगी।
इसी तरह, बाबूलाल वर्मा ने कहा, “यह नीति अमीर किसानों के लिए ठीक हो सकती है, जो अपनी जमीन के मालिक हैं, लेकिन हम जैसे गरीबों के लिए यह अभिशाप है। पहले समिति पर लाइन लगाकर खाद ले आते थे, अब यह ताम-झाम हमें खेती छोड़ने पर मजबूर कर देगा। सरकार को सोचना चाहिए कि छोटे किसान बिना खाद के क्या करेंगे?” गौरी शंकर चौरसिया, एक अन्य प्रभावित किसान ने जोड़ा, “हमारे जैसे सैकड़ों परिवार इसी खेती पर निर्भर हैं। अगर खाद महंगी और नकली मिली, तो फसल सूख जाएगी। फिर भूखे रहने का सवाल कौन सोचेगा? यह नीति गरीब-विरोधी है।”
सुनील कुमार चौरसिया सहित अन्य किसानों ने भी एक स्वर में कहा कि इस नीति से ग्रामीण अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी। उन्होंने मांग की है कि सरकार तत्काल इस नियम को संशोधित करे और बटाईदार किसानों के लिए विशेष छूट प्रदान करे। क्षेत्रीय किसान संगठनों ने भी इस मुद्दे पर जिला प्रशासन से वार्ता की योजना बनाई है। एक संगठन के पदाधिकारी ने बताया, “हम जल्द ही धरना और विरोध प्रदर्शन करेंगे, ताकि सरकार की नींद खुल सके।
जिला कृषि विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “यह नीति पारदर्शिता लाने के लिए लागू की गई है, ताकि कालाबाजारी रुके। लेकिन हम किसानों की शिकायतों पर विचार कर रहे हैं।” फिलहाल, सरोजनीनगर के किसान चिंता में डूबे हुए हैं। यह मुद्दा न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक चेतावनी का संकेत है कि कृषि नीतियां छोटे किसानों की वास्तविकता को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए।
