LUCKNOW:निकाय कर्मचारी महासंघ को मिला समर्थन, क्रामिक धरना जारी,क्लिक करें और भी खबरें

  • REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK 

लखनऊ। महासंघ ने प्रदेश सरकार व नगर विकास विभाग को पुनः सचेत करते हुए कहा कि हम निकाय कर्मचारियो की धैर्य की परीक्षा न ले,अभी तो शान्तिपूर्ण ढंग से क्रमिक अनशन के माध्यम से प्रदेश का निकाय कर्मचारी ध्यानाकर्षक करा रहा। महासंध की तरफ से कहा गया कि यदि 7 नवम्बर तक नगर विकास विभाग ने दैनिक वेतन, संविदा व तदर्थ कर्मचारियो का विनियमतीकरण व अकेन्द्रियत कर्मचारियो की सेवा नियमावली सहित जिन मांगो पर समय समय पर प्रमुख सचिव नगर विकास ने बैठक कर सहमति व्यक्त की उनका क्रियान्वयनध्आदेश नही जारी होते तो यह आन्दोलन और भी उग्र होगा। जिसमें प्रदेश की सफाई व्यवस्था,कूड़ा निस्तारण सहित अन्य सेवाएं वाधित होगी। स्थानीय निकाय कर्मचारियो के समर्थन में प्रदेश का हर विभाग व आम कर्मचारी खडा है,यह आन्दोलन अब निकाय तक न सीमित होकर प्रदेश के अन्य विभागो तक फैल जायेगा। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष कहा कि यदि समय रहते मांगो का समाधान किया जाय वरना 10 नवम्बर से होगी कार्यबन्दी
महासंघ के इस जायज आन्दोलन को नगर निगम लखनऊ सहित प्रदेश के सभी अन्य संगठनो के साथ साथ सफाई सहित सभी कर्मचारी संगठनो का समर्थन बराबर मिल रहा जिसके क्रम में आज उत्तर प्रदेश नगर निगम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष व महामंत्री राजेश सिंह व रमेश चैरसिया क्रमिक अनशन स्थल पर आकर आन्दोलन के समर्थन में पत्र दिया गया। इन परिस्थितियो में जब तक मांगो का समाधान नही निकलता तब तक आन्दोलन वापस किसी भी दशा में नही किया जायेगा। आज क्रमिक अनशन मे नगर निगम व जलकल के 13 आउटसोर्सिंग कर्मचारी साथी मनोज मोर्या,जयकुमार वर्मा,तजाउद्दीन,कपिल शर्मा,मारूख,ज्ञान तोष झां,सन्तोष सविता,महेन्द्र शर्मा,सन्तोष गौतम, योगेन्द्र तिवारी,सुनील श्रीवास्तव, रामगोपाल मिश्र, संतोष झां महासंघ के नेतृत्व में बैठे। .3 नवम्बर को बरेली व वाराणसी नगर निगमध्जलकल के कर्मचारी साथी बैठेगे। आज नगर निगम जलकल कर्मचारी संघ अपनी पूर्व से लम्बित समस्याओ जिन पर नगर आयुक्त जी के निर्देशानुसार अपर नगर आयुक्त श्रीमती नम्रता सिंह ने गत दिनो बैठक की तथा कुछ मांगो पर सदन व कार्यकारिणी ने निर्णय लेकर अनुमोदन किया उनके नगर निगम प्रशासन द्वारा विभागीय आदेश नही जारी किए जाने के विरोध स्वरूप प्रर्दशन कर नगर आयुक्त कार्यालय पर उपस्थित अपर नगर आयुक्त  पंकज व अपर नगर आयुक्त नम्रता को समय रहते आदेश जारी करने से अवगत कराते हुए सचेत किया कि यदि नगर निगम प्रशासन समय रहते स्थानीय समस्याऔ का समाधान नही करता तो बहुत जल्द पुनः आन्दोलन किया जायेगा।

इस अवसर पर लखनऊ ईकाई के सभी सहयोगी संगठन के साथी उपस्थित थे। जिसमें प्रमुख रूप से शशिकुमारमिश्र प्रदेश अध्यक्ष, आन्नद मिश्र, रामकुमार रावत,सै.कैसर रजा, राजेश सिंह,रमेश चैरसिया,संतोष श्रीवास्तव, नितिन त्रिवेदी,अमरेंद्र दीक्षित, कबीर दास,विजय यादव, शैलेन्द्र तिवारी,जितेन्द्र सिघ्द्धार्थ, अनिल दुबे,अनिल शुक्ल, राजेन्द्र कुमार,हरिशंकर पाण्डेय, राकेश तिवारी, श्रीधर,सुधाकर मिश्र,संजय श्रीवास्तव ,आकाश गुप्ता,कुवंर जय सिंह, अक्क्षत बंसल, विजय श्रीवास्तव, सतीश कुमार सिंह, अजय सिंह, संजय चन्द्रा,सुमित शुक्ल,दिग्विजय सिंह, शास्वत दीक्षित, रोहित कनौजिया,अब्दुल रशीद,  मनोज नायक,सुखदेव, आशुतोष गुप्ता,रेखाकुमारी,कुसुम सरोज, सुनीता भट्ट, बिन्दू सिंह ,दीपिका तिवारी,रितेश,आदि उपस्थित होकर समर्थन व प्रर्दशन मे शामिल रहे।

सेवानिवृत्त रामजियावन को सहयोगियों ने दी बिदाई

जोन -5 के कर्मचारी साथी राम जियावन बेलदार अपनी अधिवर्षता आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त हुए।जोन में आयोजित विदाई एवं सम्मान समारोह में समस्त अधिकारीगण कर्मचारीगण उपस्थित रहे सबने फूल माला पहनाकर स्वागत किया और उपहार प्रदान किया।उक्त अवसर पर जोनल अधिकारी नंदकिशोर, कर अधीक्षक अलोक श्रीवास्तव, जेड.एस.ओ  राजेश नगर निगम कर्मचारी संघ लखनऊ के पदाधिकारी  शमशाद समस्त कर्मचारीगण उपस्थित रहे। यह जानकारी अर्जुन यादव संगठन मंत्री,नगर निगम कर्मचारी संघ लखनऊ ने दी।इस अवसर पर आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि जोनल अधिकारी नंद किशोर ने राम जियावन की काय्रशैली की सराहना करते हुए कहा कि कर्मचारी समाज के लिए सेवानिवृत्ति एक अवसर होता है जो उसके सेवा काल का स्र्वाणिम अवसर माना जाता है। उन्होंने कहा सेवानिवृत्ति के उपरान्त कार्मिक परिवार और समाज सेवा के लिए स्वतंत्र हो जाता है।

वर्टिकल व्यवस्था के खिलाफ विरोध प्रदर्शन एवं असहयोग आंदोलन

पावर कॉरपोरेशन निविदा,संविदा कर्मचारी संघ लखनऊ ने पावर कारपोरेशन में वर्टिकल व्यवस्था के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और असहयोग आन्दोलन शुरू कर दिया है। यह जानकारी प्रदेश महामंत्री।देवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने दी।उन्होने कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन द्वारा वर्तमान व्यवस्था के स्थान पर वर्टिकल व्यवस्था लागू किया जा रहा है। जिससे जहां एक तरफ वर्षों से कार्य कर रहे बिजली आउटसोर्स कर्मचारी बेरोजगार होंगे तथा उनकी दुर्घटनाओं में वृद्धि होगी वहीं दूसरी तरफ उपभोक्ताओं को बिजली संकट का सामना करना पड़ेगा एवं विभाग पर आर्थिक भार बढ़ेगा। जिसको ध्यान में रखकर उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन निविदा,संविदा कर्मचारी संघ लखनऊ द्वारा वर्टिकल व्यवस्था लागू करने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन एवं असहयोग आन्दोलन करने का निर्णय लिया गया था। जिसके तहत 1 नवम्बर 2025 को सुबह 10 बजे, अधिक्षण अभियन्ता विद्युत नगरीय वितरण मण्डल- तृतीय तालकटोरा, लेसा लखनऊ कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन कर अध्यक्ष,उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड शक्ति भवन लखनऊ के नाम सम्बोधित ज्ञापन दिया गया। असहयोग आन्दोलन के दौरान कोई भी बिजली आउटसोर्स कर्मचारी अपने मोबाइल फोन या बाइक का प्रयोग विभाग के लिए नहीं करेगा तथा 8 घंटे 26 दिन ही कार्य करेगा, इस बीच किसी भी कर्मचारी या पदाधिकारी का उत्पीड़न किया गया तो संगठन द्वारा कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया जाएगा।

बदल रहे घटनाक्रमों के बीच निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की मांग

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से अपील की है कि पावर सेक्टर में राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से बदल रहे घटनाक्रमों और बिजली के क्षेत्र में देश भर में हुए निजीकरण के प्रयोगों की विफलता को देखते हुए उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त किया जाए।
संघर्ष समिति ने कहा कि विद्युत वितरण निगमों के बेल आउट के लिए केंद्र सरकार का विद्युत मंत्रालय और वित्त मंत्रालय राज्यों से विचार विमर्श कर बेल आउट पैकेज तैयार कर रहा है। इसके पहले केन्द्र सरकार विद्युत वितरण निगमों के बेल आउट के लिए एफ आर पी, ए पी आर डी आर पी, आर ए पी आर डी आर पी, उदय और आर डी एस एस स्कीम ला चुकी है। आर डी एस एस स्कीम के तहत पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में अरबों खरबों रुपए खर्च कर बिजली के ढांचे को सुदृढ़ करने का कार्य चल रहा है जिससे ए टी एंड सी हानियों में लगातार कमी आ रही है। उप्र में 2017 में 41ः की तुलना में 2025 में घटकर 15ः ए टी एंड सी हानियां रह गई हैं। ऐसे में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का जल्दबाजी में लिया गया निर्णय निरस्त किया जाना चाहिए। संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश में इतने बड़े पैमाने पर 42 जनपदों में निजीकरण की प्रक्रिया शुरू करने के पहले देश के अन्य प्रांतों में और विशेषतया उत्तर प्रदेश में हुए निजीकरण के प्रयोग की सफलता विफलता का मूल्यांकन किया जाना जरूरी है। संघर्ष समिति ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद निजी कंपनियों को टेकओवर कर सरकारी क्षेत्र में लिया गया और राज्य विद्युत परिषद बनाया गया था। जब से निजीकरण का दौर शुरू हुआ है उड़ीसा के अतिरिक्त निजीकरण के सारे प्रयोग केवल शहरी क्षेत्र में हुए हैं। विडंबना यह है कि यह सारे प्रयोग बुरी तरह असफल रहे हैं। उड़ीसा में 1999 में निजीकरण किया गया था। चार निजी कंपनी आई थी। अमेरिका की ए ई एस कंपनी ने सुपर साइक्लोन के बाद इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में पैसा खर्च करने से मना कर दिया और एक साल बाद ही पलायन कर गई। रिलायंस पावर की तीन कंपनियां 16 साल काम करती रही। 16 साल के बाद 2015 में उड़ीसा के विद्युत नियामक आयोग ने पूरी तरह विफल रहने के कारण उनके लाइसेंस निरस्त कर दिए। जून 2020 से टाटा की चार कंपनियां काम कर रही है। पांच साल के बाद जुलाई 2025 में उड़ीसा के विद्युत नियामक आयोग ने पूर्णतरू विफल रहने के चलते इन चारों कंपनियों को नोटिस जारी किया है और यह संभावना है कि अगले वर्ष के पहले पहले उनके लाइसेंस भी निरस्त कर दिए जाएंगे।शहरी क्षेत्र में किया गया निजीकरण भी पूरी तरह विफल रहा है। औरंगाबाद, जलगांव, नागपुर, गया, भागलपुर, समस्तीपुर, रांची, जमशेदपुर, सागर, ग्वालियर,उज्जैन आदि कई स्थान पर अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के करार रद्द किए जा चुके हैं। उत्तर प्रदेश में आगरा में काम कर रही टोरेंट पावर कंपनी की काली करतूतें आए दिन जनता के सामने आ रही है। टोरेंट कंपनी ने पिछले 25 साल से पावर कारपोरेशन का बिजली राजस्व का 2200 करोड रुपए दबा रखा है। पावर कारपोरेशन महंगी दरों पर बिजली खरीद कर टोरेंट पावर को सस्ती दरों पर दे रही है जिससे प्रतिवर्ष 1000 करोड रुपए का नुकसान हो रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के इन विफल प्रयोगों की कहानी उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों में थोपे जाने से किसानों और आम जनता को कोई लाभ नहीं होने जा रहा है। यह एक मेगा घोटाला है।अतः इन सारे घटनाक्रमों को देखते हुए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का एक साल पहले लिया गया निर्णय तत्काल निरस्त किया जाए जिससे उत्तर प्रदेश के ऊर्जा निगमों में कार्य का वातावरण बन सके और बिजली कर्मी पूर्ववत अपने काम में जुट जाएं।

पुरानी कहानी, नया नाम” उपभोक्ता परिषद करेगी वैधानिक विरोध
-उद्योगपतियों के लिए केंद्र सरकार ला रही योजनाः अवधेश

केंद्र सरकार या ना भूले कि इसके पहले विदेशी कोयला खरीदने की अनिवार्य शर्त में यह भी कहा गया था कि जो विदेशी कोयला नहीं करेगा उसके कोयले के रैक को रोक रखा जाएगा। लेकिन उपभोक्ता परिषद के विरोध के चलते उत्तर प्रदेश में विदेशी कोयला नहीं खरीदा गया था। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित नई विद्युत वितरण सुधार योजना, जिसमें राज्यों को राजकोषीय उत्तरदायित्व बजट प्रबंधन सीमा से अधिक उधारी की अनुमति देकर पुराने पीएफसी व आरईसी ऋणों को चुकाने की छूट दी जा रही है। उपभोक्ता परिषद के अनुसार वास्तव में सुधार नहीं बल्कि एक और वित्तीय पुनरावृत्ति बेल आउट है। जिसमें पहली शर्त होगी कि हर हाल में निजीकरण और बिजली दरों में बढ़ोतरी जिसे उपभोक्ता परिषद स्वीकार नहीं करेगा।

उत्तर प्रदेश में केंद्र सरकार के इशारे पर किए जा रहे निजीकरण में उपभोक्ता परिषद के विरोध के आगे पूरी तरह फेल साबित होने के बाद अब केंद्र सरकार वित्तीय सहायता के नाम पर उत्तर प्रदेश में निजीकरण को बढ़ावा देने की चाल चली है जिसे उपभोक्ता परिषद कभी कामयाब नहीं होने देगा। इसके पहले उपभोक्ता परिषद के विरोध के चलते ही उत्तर प्रदेश में विदेशी कोयला नहीं खरीदा गया था और केंद्र सरकार की या शर्त थी कि जो विदेशी कोयला नहीं खरीदेगा उसकी कोयले की रैक कम कर दी जाएगी। उत्तर प्रदेश विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा उपभोक्ता परिषद का दृढ़ मत है कि यह योजना भी पूर्ववर्ती योजनाओं, एपीडीआरपी, आर-एपीडीआरपी, एफआरपी, उदय, और आरडीएसएस की तरह केवल “कागजी सुधार” साबित होगी। हर पाँच वर्ष में नई योजना आती है, ऋण पुनर्गठन होता है, परन्तु वास्तविक सुधारकृजैसे वितरण दक्षता, घाटा नियंत्रण, समय पर सब्सिडी भुगतान और जवाबदेहीकृअब भी दूर की कौड़ी बने हुए हैं।

वित्तीय राहत, संरचनात्मक सुधार नहीं

अब तक की सभी योजनाएँ केवल ऋण मुक्ति या बैलेंस शीट सुधार तक सीमित रहीं। जमीनी स्तर पर न तो वितरण हानियों में कमी आई, न ही उपभोक्ता सेवा सुधरी।

नई योजना, पुरानी भूल

केंद्र अब राज्यों को राजकोषीय उत्तरदायित्व बजट प्रावधान सीमा से बाहर जाकर पुराने ऋण चुकाने की छूट दे रहा है, जिससे ऋण का वास्तविक भुगतान नहीं, केवल रंग रोगन यानी पुराने ऋण को नए ऋण से ढकना हो रहा है।

निजीकरण का मिथक

केंद्र का दावा है कि निजी कंपनियाँ दक्षता लाएँगी, परन्तु हकीकत यह है कि पूरे देश में केवल कुछ ही निजी कंपनियाँ (रिलायंस, टाटा, अदाणी, टॉरेंट, सीईएससी) वितरण क्षेत्र में सक्रिय हैं और बड़ा लाभ कमा रही है जनता को परेशान होना पड़ रहा है और उन्हें उनके सापेक्ष कोई भी सुविधा नहीं मिल पा रही और ये ज्यादातर शहरी क्षेत्र में लाभ कमाने के लिए आ रहे हैं

राजनीतिक हकीकत

बिजली क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या तकनीकी नहीं, राजनीतिक है। मुफ्त बिजली, अनुदान में देरी और घाटे को छिपानाकृये सब चुनावी राजनीति का हिस्सा बन चुके हैं। जब तक इन पर लगाम नहीं लगेगी, कोई भी योजना टिकाऊ नहीं हो सकती।

सुझाव

प्रत्येक फीडर व ट्रांसफॉर्मर की पारदर्शी ऊर्जा लेखा प्रणाली एनर्जी अकाउंटिंग और उसका सार्वजनिक खुलासा। केंद्र से मिलने वाले धन को प्रदर्शन से जोड़ना कृ केवल कागजी अनुपालन पर नहीं।स्वतंत्र और सशक्त नियामक आयोग (ैम्त्ब्े) जो समय पर टैरिफ संशोधन व सब्सिडी भुगतान सुनिश्चित कर सकें।बिजली कंपनियों मे उच्च प्रबंधन में केवल तकनीकि दक्ष अभियंता की ही तैनाती की जाए नौकर शाह की बिल्कुल नहीं।

 

Aaj National

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