LUCKNOW:राजू गुप्ता बना खूनी, पत्नी की हत्या कर लाल किया अपना हाथ

-पैसे मांगने पर पूजा का कर डाला खून,पुलिस से बचने के लिए खेला खेल , लेकिन पहुंच गया सलाखों के पीछे

  • REPORT BY:A.AHMED SAUDAGAR || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK 

लखनऊ। कहते हैं कि अपराधी अपराध करता है, लेकिन मौक -ए -वारदात पर कुछ न कुछ सबूत जरूर छोड़ जाता है। दुबग्गा क्षेत्र स्थित सीता विहार कॉलोनी निवासी 56 वर्षीय आढ़ती राजू गुप्ता दूसरी पत्नी पूजा देवी से ब्याह रचाया और जिंदगी भर साथ निभाने का वायदा किया, लेकिन मामूली कहासुनी ने उसे खूंखार अपराधी बना दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद पुलिस से बचने के लिए कई पैंतरा अपनाया और खुद को साफ-सुथरा होने का दावा करता रहा, लेकिन अत्याधुनिक तकनीक और जमीनी मुखबिर तंत्र से उसका चेहरा बेनकाब हो गया कि पूजा देवी का कातिल कोई नहीं, बल्कि उसी का पति आढ़ती राजू था।बीते कुछ दिनों से वह पूजा देवी से पीछा छोड़ने का बहाना तो बहुत किया, लेकिन बहादुर पूजा भी अड़ी रही कि उसका खर्च पड़ोसी नहीं आप देंगे।प्लाट बिकने के बाद पूजा ने जैसे ही कुछ रूपयों की मांग शुरू की तो खूनी राजू गुप्ता को नागवार गुजरा और वह योजना के तहत पत्नी पूजा देवी को 31 अक्टूबर 2025 को बहला-फुसलाकर दूर यानी माल थाना क्षेत्र स्थित बसहरी गांव के पास ले गया और अपने चार साथियों के साथ मिलकर सात फेरे लेकर जिंदगी भर साथ निभाने वाली पत्नी को मौत के घाट उतार दिया।

यह सनसनीखेज वारदात मानो पुलिस के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं थी। इसी दौरान मां की तलाश में घूम रही सीतापुर जिले के असवा मऊ गांव निवासी सुमन को लगी कि एक महिला की हत्या कर फेंकी गई लाश बसहरी गांव के पास मिली है। सुमन भागकर इंस्पेक्टर माल नवाब अहमद से मिली। पुलिस ने जैसे ही फोटो, कपड़े व सैंडिल सुमन के सामने रखा तो वह चीख पड़ी और पहचान अपनी मां पूजा के रूप में की।शव की पहचान होते ही पुलिस टीम सक्रिय हुई और कातिल की तलाश में जुट गई। बताया जा रहा है पुलिस के सामने सुमन द्वारा दिए गए कुछ अहम बयान पुलिस के लिए संजीवनी साबित हुई और वह खूनी की गर्दन तक पहुंचने में कामयाब हो गई। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद एक बार फिर साफ हो गया कि पेशेवर अपराधियों से अधिक अपनों से खतरा है। पूजा देवी की हत्या के आरोप में पुलिस ने उसके पति आढ़ती राजू गुप्ता को गिरफ्तार, जिस पर भरोसा करती थी और उसके बहकावे में आकर 31 अक्टूबर को साथ चली गई थी। चंद रुपयों से बचने के लिए आढ़ती ने ऐसा कदम उठाया कि हमेशा के लिए उसके शरीर पर अपराध की मुहर लग गई।

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