- REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ।सेवानिवृत्त डिप्लोमा इंजीनियस कल्याण संघ-उत्तरप्रदेश द्वारा 18 नवम्बर, 2025 को प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर
अनुरोध के साथ सूचित किया गया था कि भारत सरकार द्वारा आठवें वेतन आयोग के लिए निर्धारित विचारार्थ विषयों में पेंशनरों को बाहर रखा गया है जिससे पेंशनरों में घोर निराशा एवं रोष व्याप्त है।
पेंशन एवं पेंशनरी लाभों को आठवें वेतन आयोग में, सम्मिलित करने हेतु सरकार शीघ्र स्थिति स्पष्ट कर संशय दूर करे जिससे पेंशनरों में उत्पन्न निराशा समाप्त हो सके। इसीके साथ-साथ 65,70 एवं 75 वर्षपर 5-5 प्रतिशत पेंशन वृद्धि, रेल, बस किराये में 50 प्रतिशत छूट, राशिकरण की कटौती 15 वर्ष के स्थानपर 10 वर्ष 11 माह करने,चिकित्सा प्रतिपूर्ति बीजों में आयकर कटौती समाप्तह 8700ग्रेडवेतन देने तथा पुरानी पेंशन बहाली आदि समस्याओं के निराकरण का अनुरोध किया गया है।
इस सम्बंध में निर्णय लिया गया है कि समस्या का निराकरण न होने पर 11 दिसम्बर को जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन दिया जाएगा।
संघ के प्रान्तीय अध्यक्ष इं. आर.के. भाटिया ने अवगत कराया कि उक्त पत्रों पर सकारात्मक कार्यवाही न होने तथा राज्य सभा में भी पेंशनरों के सम्बन्ध में स्पष्ट उत्तर ने देने के कारण 11 दिसम्बर,2025 को पूर प्रदेश के मण्डल, मुख्यालय तथा जनपदों में संघ के सदस्य प्रधानमंत्री,मुख्यमंत्री को मण्डलायुक्त, जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित करेंगे।संघ के कार्यकारी प्रान्तीय अध्यक्ष इं. दिवाकरराय ने अवगत कराया कि अगर केन्द्र तथा प्रदेश सरकार द्वारा पेंशनरों को न्याय नहीं प्रदान किया जाता तो संघ के सदस्य अगले चरण के संघर्ष कार्यक्रम आरम्भ करने हेतु बाध्य होंगे।
संघ के मण्डल अध्यक्ष इं. वी.के. सिंह तथा जनपद सचिव इं.ए.के. गुप्ता द्वारा अवगत कराया गयाकि लखनऊ के कार्यक्रम हेतु मण्डलायुक्त, जिलाधिकारी को अवगत करा दिया गया है। लखनऊ में सदस्य स्व.बी.एन. सिंह की प्रतिमा स्थल हजरतगंज लखनऊ में 11 दिसम्बरको 11ः00 बजेपूर्वान्ह एकत्र होकर ज्ञापन देन हेतु मण्डलायुक्त, जिलाधिकारी, कार्यालय को जायेंगे।
आयोग ने उपभोक्ता शिकायत निवारण के लिए जारी किए निर्देश
-उपभोक्ताओं की संतुष्टि के लिए उठाना होगा पारदर्शी कदम
उत्तर प्रदेश में विद्युत उपभोक्ताओं की शिकायतों के त्वरित एवं संतोषजनक निस्तारण को सुनिश्चित करने के लिए राज्य विद्युत उपभोक्ता
परिषद द्वारा 1912 की फर्जी शिकायतों के प्रभावी समाधान हेतु ओटीपी-आधारित शिकायत बंद करने की व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई गई थी। विद्युत नियामक आयोग द्वारा अपने तारिफ आदेश वर्ष 2024- 25 में 3 महीने में यह व्यवस्था लागू करने के लिए पावर कॉरपोरेशन से प्रस्ताव मांगा था। लेकिन पावर कॉरपोरेशन साल भर हीला हवाली करता रहा। अब पावर कॉरपोरेशन की इस हीला हवाली पर उपभोक्ताओं की शिकायतों की उदासीनता पर विद्युत नियामक आयोग ने अपने आदेश में संशोधन करते हुए टैरिफ आदेश में एक नई पारदर्शी व्यवस्था 3 माह के अंदर लागू करने करने का निर्देश पावर कॉरपोरेशन व बिजली कंपनियों को दिया है। आयोग ने कहां यदि पावर कारपोरेशन को ओटीपी लागू करने में कठिनाई है तो उसे एक पारदर्शी व्यवस्था 3 महीने के अंदर बनाना होगा और इसका प्रस्ताव आयोग के सामने प्रस्तुत करना होगा उपभोक्ता शिकायत निस्तारण को अत्यंत महत्वपूर्ण माना है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा है उपभोक्ता की संतुष्टि स्तर को मापने के लिए एक प्रभावी फीडबैक एवं रेटिंग प्रणाली विकसित की जाए, ताकि उपभोक्ता यह बता सकें कि उनकी शिकायत कितनी जल्दी और कितनी जिम्मेदारी से निस्तारित की गई। इस व्यवस्था में उपभोक्ता अनुभव साझा करने, स्थानीय वितरण तंत्र की सक्रियता बताने और शिकायत निपटान प्रक्रिया को रेटिंग देने की सुविधा शामिल होगी। चूँकि पावर कारपोरेशन ओटीपी-आधारित शिकायत बंद करने की प्रक्रिया को लागू नहीं कर सका, इसलिए आयोग ने इस बार अपने आदेश में अधिक सख्ती दिखाते हुए संबंधित याचिकाकर्ताओं,पेटिशनर्स को निर्देशित किया है कि उपभोक्ता संतोष मापन हेतु एक व्यापक शिकायत-निस्तारण मूल्यांकन ढांचा तैयार किया जाए। उपभोक्ता से समयबद्ध प्रतिक्रिया (फीडबैक) प्राप्त करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। यह पूरा ढांचा 3 माह के भीतर आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। आयोग ने कहा है कि उपभोक्ताओं की संतुष्टि ही किसी भी लाइसेंसी की सेवा गुणवत्ता का वास्तविक पैमाना है, इसलिए शिकायत निस्तारण प्रक्रिया को पारदर्शी, उत्तरदायी और उपभोक्ता-केंद्रित बनाना अनिवार्य है।
आदेश के विपरीत 48 प्रतिशत तक संविदा कर्मियों की छटनी
-बिजली कर्मियों का गुस्सा बढ़ा,निजीकरण के विरोध में आंदोलन जारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आरोप लगाया है कि निजीकरण की दृष्टि से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के अंतर्गत
बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों की छटनी की जा रही है।संघर्ष समिति ने चार्ट जारी करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में पॉवर कॉरपोरेशन द्वारा निर्धारित मानक की तुलना में 48: तक संविदा कर्मी कम किए जा रहे हैं जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त हो रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के लिए उतावलेपन में पॉवर कार्पाेरेशन प्रबंधन हजारों की तादाद में संविदा कर्मियों को हटाकर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पटरी से उतार देने पर आमादा है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के निर्णय के विरोध में लगातार 372 दिन से आंदोलनरत बिजली कर्मियों ने आज भी प्रदेश के समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन ने नगरीय एवं ग्रामीण विद्युत उपकेंद्रों के लिए नियमित कर्मचारियों और संविदा कर्मियों की तैनाती का मानक वर्ष 2017 में तय किया था। इस संबंध में पॉवर कॉरपोरेशन ने 15 मई 2017 को आदेश जारी किया था। संघर्ष समिति ने बताया कि पॉवर कारपोरेशन ने इस आदेश में आज तक कोई संशोधन नहीं किया है और आज भी यही आदेश प्रभावी है। संघर्ष समिति ने कहा कि मई 2017 के आदेश के अनुसार शहरी क्षेत्र में एक उपकेंद्र पर 36 कर्मचारी और ग्रामीण क्षेत्र में एक उप केंद्र पर 20 कर्मचारी निर्धारित किए गए हैं। अब मनमाने ढंग से बड़े पैमाने पर संविदा कर्मी हटाए जा रहे हैं और शहरी क्षेत्र में 36 कर्मचारियों के स्थान पर 18.5 कर्मचारी और ग्रामीण क्षेत्रों में 20 कर्मचारियों के स्थान पर 12 कर्मचारी प्रति उप केंद्र पर रखे जा रहे हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंधन ने मई 2017 के आदेशों की अवहेलना करते हुए बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों की छटनी के आदेश जारी कर दिए हैं।नए तैनाती आदेशों के अनुसार संविदा कर्मचारियों को 22 प्रतिशत से 48 प्रतिशत तक कम किया जा रहा है जिससे अत्यन्त अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मी भुखमरी के कगार पर आ गए हैं। संघर्ष समिति ने बताया कि इसके पहले मध्यांचल विद्युत वितरण निगम में भी इसी प्रकार से हजारों संविदा कर्मियों को हटाया गया। राजधानी लखनऊ में लेसा में रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर हजारों संविदा कर्मी हटाए जा चुके हैं। अब पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में भी हजारों की संख्या में संविदा कर्मियों को हटाया जा रहा है। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि निजीकरण के नाम पर हजारों की तादाद में अत्यंत अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मियों को हटाया जाना तत्काल बंद न किया गया तो बिजली कर्मी इस अन्याय के विरोध में आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या के खिलाफ महापौर मैदान में आई
-बोलीं 15 दिन में लखनऊ करो खाली, मौके से 50 ठेलिया व दो टाटा मैजिक किये गए जब्त
-एसडीओ को बुलाकर अवैध बिजली कनेक्शन काटने के भी दिए निर्देश
राजधानी में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और रोहिंग्या के खिलाफ गुरुवार को लखनऊ की महापौर श्रीमती सुषमा खर्कवाल पूरी तरह
एक्शन मोड में नज़र आईं। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद माननीय महापौर स्वयं नगर निगम और ईटीएफ की टीम के साथ गुडंबा थाना क्षेत्र के निकट शंकरपुरवा प्रथम वार्ड के बहादुरपुर पहुंचीं, जहां बड़ी संख्या में अवैध रूप से बांग्लादेशी और रोहिंग्या झुग्गीदृझोपड़ियां डालकर रह रहे थे। आज अचानक पूरे लावलश्कर के साथ महापौर ने अवैध अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या की झोपड़ियों मार कर उन्हें खदेडने का ऐलाना कर दिया।
आज जैसे ही महापौर का काफिला क्षेत्र में पहुंचा, वहां रहने वाले कई बांग्लादेशी एवं रोहिंग्या युवक मौके से भागते नज़र आए, जबकि कई महिलाएं अपनी झोपड़ियों में छिपने लगीं। माननीय महापौर द्वारा टीम के माध्यम से सभी से आधार कार्ड, एनआरसी प्रमाण पत्र और अन्य वैध दस्तावेज़ मांगे गए, लेकिन अधिकांश बांग्लादेशी और रोहिंग्या कोई भी पहचान पत्र प्रस्तुत नहीं कर सके। इस पर माननीय महापौर ने कड़ा रुख अपनाते हुए तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए।कार्रवाई के दौरान अपर नगर आयुक्त ललित कुमार, जोनल सेनेटरी अधिकारी अजीत राय, नगर निगम की टीम तथा ईटीएफ के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।
जांच के दौरान वहां खड़ी अवैध 50 ठेलिया को मौके पर ही जप्त कर लिया गया। महापौर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इन सभी वाहनों को तत्काल कब्जे में लेकर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।इसके साथ ही दो टाटा मैजिक वाहन, जिनका उपयोग अवैध रूप से कूड़ा ढोने में किया जा रहा था, उन्हें भी तुरंत जप्त किया गया।
महापौर सुषमा खर्कवाल ने अधिकारियों को आदेश दिया कि इन वाहनों पर भारी जुर्माना लगाया जाए और इस प्रकार की गतिविधियों को रोकने के लिए नियमित निगरानी रखी जाए। महापौर ने मौके पर ही बिजली विभाग के एसडीओ को भी बुलाया और क्षेत्र में लगे सभी अवैध बिजली कनेक्शनों को तत्काल काटने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बिना किसी वैध अनुमति के बिजली का उपयोग गंभीर अपराध है और यह सुरक्षा के लिए भी खतरा है। महापौर ने वहां मौजूद अवैध बांग्लादेशियों एवं रोहिंग्या से सख्त लहजे में कहा कि उन्हें केवल 15 दिन का समय दिया जा रहा है।
इस अवधि में यदि वे वैध दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं करते हैं, तो उन्हें क्षेत्र पूरी तरह खाली करना होगा। महापौर ने कहा कि लखनऊ शहर में बिना पहचान और बिना अनुमति किसी भी विदेशी को रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी।महापौर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आने वाले 15 दिनों तक क्षेत्र में विशेष निगरानी रखी जाए और समय-समय पर जांच अभियान चलाया जाए, ताकि अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या दोबारा यहां बसने न पाएँ। स्थानीय लोगों ने माननीय महापौर की इस पहल का स्वागत किया और कहा कि इससे क्षेत्र में सुरक्षा तथा स्वच्छता को मजबूती मिलेगी। महापौर जी ने कहा कि अवैध बांग्लादेशी एवं रोहिंग्या के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
संपूर्ण समाधान दिवस आए और समाधान पाए
नागरिकों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण हेतु नगर निगम लखनऊ द्वारा प्रत्येक माह के प्रथम शुक्रवार को आयोजित किया जाने वाला संपूर्ण
समाधान दिवस इस माह 05 दिसंबर, शुक्रवार को आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम माननीय महापौर श्रीमती सुषमा खर्कवाल जी की अध्यक्षता में त्रिलोकनाथ सभागार, नगर निगम मुख्यालय, लालबाग में प्रातः 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक संपन्न होगा।
समाधान दिवस पर कर निर्धारण, सफाई, जलापूर्ति समेत अन्य समस्याओं का होगा समाधान किया जाएगा। गृहकर एवं जलकर से संबंधित विवाद, सफाई व्यवस्था, सड़कों,गलियों की मरम्मत, सीवर लाइन व ड्रेनेज, मार्ग प्रकाश (स्ट्रीट लाइट), कूड़ा उठान सहित शहरी सुविधाओं से जुड़े अन्य मुद्दों के निस्तारण हेतु समाधान दिवस में उपस्थित होकर आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।नागरिकों से अनुरोध है कि वे 05 दिसंबर को आयोजित समाधान दिवस में समय से पहुँचे और अपनी शिकायत से संबंधित आवश्यक दस्तावेज अवश्य साथ लाएँ, जिससे कार्यवाही सुचारु रूप से हो सके। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने कहा कि संपूर्ण समाधान दिवस न केवल शिकायतों के निस्तारण का माध्यम है, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच संवाद एवं विश्वास को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण मंच है।नगर निगम का उद्देश्य है कि नागरिकों को एक ही स्थान पर विभिन्न विभागों की संयुक्त उपस्थिति में उनकी समस्याओं का सुगम, त्वरित व पारदर्शी समाधान प्राप्त हो।
हटाईं अवैध डेरियां, 20 गाय, 1 बछिया जब्त
नगर निगम लखनऊ द्वारा शहरी स्वच्छता और जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए गुरूवार को जोन-6 के चौक थाना क्षेत्र में अवैध डेघ्रियों के
खिलाफ सख्त अभियान चलाया गया। नगर आयुक्त गौरव कुमार के निर्देश पर पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अभिनव वर्मा के नेतृत्व में यह अभियान संचालित किया गया। विशेष अभियान के अंतर्गत चौक थाना में अशरफाबाद, टुड़ियागंज, याहिया गंज, खाला बाजार में कार्यवाही की गई जिससे डेरी संचालको में हड़कंप मच गया।
अभियान के दौरान कुल 20 गाय, 01 बछिया जब्त की गई, जिन्हें ठाकुरगंज स्थित कांजी हाउस में निरुद्ध किया गया है। इन पशुओं को केवल निर्धारित जुर्माना जमा करने के पश्चात ही छोड़ा जाएगा। यह कार्यवाही प्ळत्ै पोर्टल व स्थानीय नागरिकों की शिकायतों के आधार पर की गई थी, जिनमें डेरी संचालकों द्वारा गोबर को खुले प्लॉटों में फेंकने एवं नालियों में बहाने से गंदगी, जलभराव और मच्छरजनित रोगों की आशंका व्यक्त की गई थी।
नगर निगम ने यह स्पष्ट किया है कि नगर निगम अधिनियम 1959 के अंतर्गत शहरी सीमा में भैंस पालन पूर्णतः प्रतिबंधित है, क्योंकि इसे अपदूषण कारक पशु की श्रेणी में रखा गया है। केवल अधिकतम दो गायों को ही वैध लाइसेंस के तहत पालने की अनुमति है। अभियान में पुलिस बल, प्रवर्तन दल एवं पशु कल्याण विभाग की संयुक्त भागीदारी रही। डॉ. अभिनव वर्मा के साथ शिवेक, अभिनव, रामकुमार, फुरकान, अवधेश, मनोज ने अभियान को सफलतापूर्वक संपन्न किया।नगर निगम ने चेतावनी दी है कि भविष्य में भी शहर के बीचो बीच अवैध डेरियों का संचालन नहीं होने दिया जाएगा व गोबर निस्तारण की लापरवाही के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि शहर को स्वच्छ, सुरक्षित और रोगमुक्त बनाया जा सके।
