– कई बार पत्र लिखने के बावजूद नही हुईं कार्रवाई, सत्यनिष्ठा संदिग्ध वाले अफसर कर रहे मौज
– भ्रष्ट अधिकारियों का बढ़ रहा मनोबल, विभाग की छवि भी हो रही धूमिल
- REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ। डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ लोक निर्माण विभाग, उ.प्र. की उच्चाधिकार समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ लोक निर्माण विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपी एवं सत्यनिष्ठा संदिग्ध अधिकारियों के विरूद्ध कार्रवाई के लिए आन्दोलन करेगा। बैठक में चर्चा की गयी कि भ्रष्टाचार के आरोपी एवं सत्यनिष्ठा संदिग्ध कतिपय अधिकारियों के विरूद्ध कार्रवाई के लिए संघ द्वारा कई पत्र उच्चाधिकारियों को लिखे गये। परन्तु इन अधिकारियों के विरूद्ध उच्च स्तर से कोई कार्रवाई नही की गयी। इससे प्रदेश के डिप्लोमा इंजीनियर्स में आक्रोश व्याप्त है।इन अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही न किये जाने से इनका मनोबल बढ़ रहा है जिससे अधिकारियों में भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिल रहा है। इससे विभाग एवं सरकार की छवि धूमिल हो रही है तथा प्रभावित अवर अभियंता एवं सहायक अभियन्ता अत्यधिक मानसिक दबाव महसूस कर रहे हैं। विभिन्न भ्रष्टाचार के आरोपी एवं सत्यनिष्ठा संदिग्ध अधिकारियों के विरूद्ध उच्च स्तर पर कार्यवाही न किये जाने के कारण डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ लोनिवि की उच्चाधिकार समिति द्वारा इं.एन.डी.द्विवेदी प्रदेश अध्यक्ष की अध्यक्षता में इन अधिकारियों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई किये जाने की मांग को लेकर प्रदेश व्यापी आन्दोलन किये जाने का निर्णय लिया गया है।
बैठक में बताया गया कि यूपी के मुरादाबाद जिले के एक अधिशासी अभियन्ता कुलदीप संत की सत्यनिष्ठा प्रमुख अभियन्ता विकास एवं विभागाध्यक्ष द्वारा संदिग्ध कर दी गयी है। आयुक्त सहारनपुर मण्डल द्वारा कुलदीप संत को अयोग्य एवं गैर अनुभवी अभियन्ता मानते हुए इन्हें निर्माण खण्ड (भवन) सहारनपुर से हटाने तथा किसी योग्य एवं अनुभवी अधिशासी अभियन्ता की तैनाती किये जाने की मांग पर इन्हें सहारनपुर से हटाया गया था। सरकार की कैबिनेट द्वारा पारित स्थानांतरण नीति के प्रस्तर.4 में स्पष्ट उल्लेख है कि संदिग्ध सत्यनिष्ठा वाले कार्मिकों की तैनाती संवेदनशील पदों पर कदापि न की जाय।स्थानांतरण नीति में स्पष्ट प्राविधान के बावजूद भी अधिशासी अभियन्ता को न केवल प्रान्तीय खण्ड मुरादाबाद जैसे संवेदनशील खण्ड में तैनाती की गयी। अपितु मुरादाबाद के दो अन्य खण्डों का चार्ज भी इन्हीं अधिशासी अभियन्ता के पास कई महीनों तक रखा गया। इसी प्रकार देवरिया के एक अधिशासी अभियन्ता अनिल जाटव पर अनाधिकृत रूप से 6.00 करोड़ का फर्जी बजट मांगने के गम्भीर आरोप हैं।
बैठक में बताया गया कि इसके अतिरिक्त इन्हीं अधिशासी अभियन्ता पर 2.5 करोड़ रूपये के 34 फर्जी सप्लाई आर्डर निर्गत करने का भी आरोप है। इन आरोपों के बावजूद न तो अधिशासी अभियन्ता को हटाया गया। अपितु उन्हें जनपद देवरिया के एक अन्य महत्वपूर्ण खण्ड का चार्ज भी काफी दिनों तक रखा गया। इसी प्रकार जनपद श्रावस्ती के एक अधिशासी अभियन्ता सुनिल कुमार पर बिना सहायक अभियन्ता के हस्ताक्षर किये करोड़ो रूपये के बिल पास करने एवं भुगतान करने के गम्भीर आरोप हैं। इस प्रकरण पर महालेखाकार आडिट पैरा भी बनाया गया है। मुख्य कार्यपालक अधिकारी उ.प्र. ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण द्वारा भी इस अनियमितता के सम्बन्ध में पत्र लिखा गया। इसके अलावा अधिशासी अभियन्ता द्वारा चिकित्सा अवकाश के दौरान सरकारी वाहन को निजी आवास पर प्रयोग किया गया।
बैठक में बताया गया कि सहायक अभियन्ता नें वाहन के मासिक किराये से नियमानुसार कटौती की अनुमति मांगी गयी। परन्तु अधिशासी अभियन्ता द्वारा कटौती न करते हुए शासकीय धन का दुरूपयोग एवं अनियमितता की गयी। इसी प्रकार इन अधिशासी अभियन्ता द्वारा अपने पद का दुरूपयोग करते हुए अपने अधीनस्थ दो सहायक अभियन्ता का 16 माह से वेतन न देने तथा अन्य अधीनस्थ कर्मचारियों का उत्पीड़न करने का भी गम्भीर आरोप है। जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी श्रावस्ती नें भी इनके विरूद्ध लिखा। यहाॅ तक कि जिलाधिकारी श्रावस्ती द्वारा इन अधिशासी अभियन्ता अभियन्ता का वेतन भी रोक लिया गया है। परन्तु इनके विरूद्ध लोनिवि के जिम्मेदारों नें कई कार्रवाई नही की गयी।
