LUCKNOW:संजय की योगी सरकार के अफसरों से नाराजगी,पकड़ी लखनऊ की ड़गर 

-गोरखपुर से शुरू पद यात्रा फ़ैजाबाद में प्रवेश करोड़ो के घोटाले, फिर भी कार्रवाई शून्य

-भृष्टाचार के विरुद्ध जीरो टालरेंस की पंचायती राज औऱ युवा कल्याण विभाग के अफसर उड़ा रहे खुलेआम धज्जियाँ

  • REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ।भृष्टाचार के विरुद्ध मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टालरेंस की नीति की युवा कल्याण औऱ पंचायती राज विभाग के अफसर खुलेआम धज्जियाँ उड़ा रहे है। इससे मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र गोरखपुर के रहने वाले समाजसेवी औऱ आरटीआई कार्यकर्ता संजय मिश्रा खाशा नाराज है। उनकी नाराजगी इतना बढ़ी की उन्होंने अब आर-पार की लड़ाई शुरू कर दी है।पंचायती राज औऱ युवा कल्याण विभाग में हुए करोड़ो के घोटालो की जाँच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र गोरखपुर के रहने वाले समाजसेवी औऱ आरटीआई कार्यकर्ता संजय मिश्रा की पद यात्रा फ़ैजाबाद में पहुंच चुकी है।उन्होंने गाँधी प्रतिमा टाउन हॉल गोरखपुर से पद यात्रा छह दिसम्बर को शुरू की थी। उनकी यह पद यात्रा गांधी प्रतिमा हजरतगंज लखनऊ में समाप्त होंगी। 25 दिन की इस यात्रा में उन्हें समाजसेवियों, जन प्रतिनिधियों,माताओं एवं बहनों का अपार समर्थन मिल रहा है।गोरखपुर के रहने वाले समाजसेवी औऱ आरटीआई कार्यकर्ता संजय मिश्रा कहते है कि उत्तर प्रदेश पंचायत सामान्य निर्वाचन 2021 के दौरान नियुक्त प्रशासकों नें प्रदेश के सभी जिलों में माह मई 2021 (प्रधानों के निर्वाचित्त घोषित होने एवं शपथ ग्रहण के मध्य) 20 दिनों में लगभग 650 करोड़ रुपए निकाल लिए आज लगभग 2 वर्ष बीतने को है। भृष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति की बात करने वाली सरकार ना ही जांच करा पाई ना दोषियों को सजा ही दे सकी।
संजय मिश्रा नें जनपदवार निकाली गई धनराशि का विवरण देते हुए बताया कि आगरा 12 करोड़, अलीगढ़ 8 करोड़, अंबेडकर नगर 10 करोड़, अमेठी 9 करोड, अमरोहा 2 करोड़,औरैया 6 करोड़, अयोध्या 11 करोड़, आजमगढ़ 13 करोड़, बागपत 6 करोड़, बहराइच 21 करोड़, बलिया 13 करोड़, बलरामपुर 8 करोड़, बांदा 20 करोड़, बाराबंकी 14 करोड, बरेली-करोड़, बस्ती-6 करोड़, बिजनौर 27 करोड़, बदायू 9 करोड़, बुलंदशहर 18 करोड़, बंदौली 7 करोड़, चित्रकूट 8 करोड़, एटा 6 करोड़, इटावा 5 करोड़, फर्रुखाबाद 6 करोड़, फतेहपुर-17 करोड़, फिरोजाबाद 12 करोड़, गौतमबुद्ध नगर 01 करोड़, गाजियाबाद 01 करोड़, गाजीपुर-5 करोड़, गोडा- 7 करोड़, गोरखपुर 6 करोड़, हमीरपुर 5 करोड़, हापुड़ 2 करोड़, हरदोई-11 करोड़, हाथरस 7 करोड़, जालौन 12 करोड़, जौनपुर 20 करोड़, झांसी 12 करोड़, कन्नौज -2 करोड़, कानपुर देहात 5 करोड़, कानपुर नगर 6 करोड़, कासगंज 10 करोड़ (43) कौशांबी 5 करोड़, खीरी 11 करोड़, कुशीनगर 18 करोड़, ललितपुर 6 करोड़, लखनऊ 5 करोड़, महाराजगंज-5 करोड़, महोबा 7 करोड, मैनपुरी 4 करोड़, मथुरा 12 करोड़, मऊ 2 करोड़, मेरठ 3 करोड़, मिर्जापुर 8 करोड़, मुरादाबाद 9 करोड़, मुजफ्फरनगर 15 करोड, पीलीभीत 9 करोड, प्रतापगढ़- 13 करोड, प्रयागराज 12 करोड़, रायबरेली 5 करोड़, रामपुर 7 करोड़, सहारनपुर- 14 करोड़, संभल 8 करोड़, संत कबीर नगर 4 करोड़, संत रविदास नगर 3 करोड़, शाहजहांपुर 4 करोड, शामली 5 करोड़, श्रावस्ती 4 करोड, सिद्धार्थ नगर 9 करोड, सीतापुर 18 करोड़, सोनभद्र- 8 करोड़, सुल्तानपुर 12 करोड़, उन्नाय 8 करोड़, वाराणसी-4 करोड़, देवरिया 11 करोड़ जनपद देवरिया में लगभग 11 करोड़ रूपये निकाले गये। संजय मिश्रा कहते है कि इन 20 दिनों में नियम विरुद्ध तरीके से रूपये निकाले गए जिसकी जांच को लेकर जिलाधिकारी देवरिया को  17 जून 2022 एवं 27 मार्च 2023 को समस्त तथ्यों से अवगत कराते हुए पत्र लिखा लेकिन आज लगभग 03 वर्ष होने को है। इस दौरान पत्र में उठाए गए बिंदुओं पर कोई जांच नही हुई है।
मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र गोरखपुर के रहने वाले समाजसेवी औऱ आरटीआई कार्यकर्ता संजय मिश्रा ने कहा कि पूरे प्रदेश में  20 दिनों में नियम विरूद्ध तरीके से लगभग 650 करोड़ रुपए नियुक्त प्रशासकों व सचिवों द्वारा निकाल लिए गए। इसकी जांच को लेकर  अपर मुख्य सचिव पंचायती राज को दिनांक 30 जनवरी 2024 एवं दिनांक 07 फरवरी 2024 को भी पत्र भेजा गया। परंतु उनके द्वारा आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई 07 फरवरी 2024 को निदेशक पंचायती राज से मिलकर भी शिकायती पत्र दिया। निदेशालय से लगभग 232 माह बाद जांचोपरान्त निदेशक पंचायती राज उत्तर प्रदेश ने पत्र संख्या 6/674/2024-6/358/2023 दिनांक 18 अप्रैल, 2024 समस्त जिलाधिकारी उत्तर प्रदेश को प्रेषित करते हुए यह कहा कि प्रकरण की जांच करते हुए दोषी कर्मचारी औऱ अधिकारी के विरुद्ध कार्यवाही करें परंतु आज 12 वर्ष बीतने के बाद भी प्रदेश के किसी भी जिलाधिकारी ने आदेश का अनुपालन नहीं किया।संजय मिश्रा नें कहा कि निदेशक के आदेश पर जब प्रदेश के किसी भी जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी व  जिला पंचायत राज अधिकारी ने कोई संज्ञान नहीं लिया तब निदेशक पंचायती राज नें 13 नवम्बर 2024 व 04 अप्रैल 2025 को भेजे गये पत्र में प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों व जिला पंचायत राज अधिकारियों को प्रकरण की जांच 01 पक्ष के भीतर कराते हुए दोषी कर्मचारी व अधिकारी के विरुद्ध सख्त कार्यवाही के निर्देश दिये।वही उन्होंने इस प्रकरण में अब तक की गई कार्यवाही से भी अवगत करानें को कहा, परंतु आज तक कोई भी कार्यवाही नहीं हुई ? संजय मिश्रा कहते है कि इन आंकड़ों के आधार पर प्रदेश के लगभग सभी गांवों के ग्रामीणों व प्रधानों औऱ सदस्यों के हक पर नियम विरुद्ध तरीके से अधिकारियों नें डाका डाला है।लेकिन शासन प्रशासन में बैठे अफसरों नें कोई कार्रवाई नही की है।उन्होंने कहा कि हमने अपने पत्र में इस प्रकरण की सीबीआई  से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

जाने युवा कल्याण के अफसरों नें क्या किया खेल

मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र गोरखपुर के रहने वाले समाजसेवी औऱ आरटीआई कार्यकर्ता संजय मिश्रा  की माने तो युवा कल्याण विभाग नें प्रदेश के सभी जिलों के 25000 युवक / महिला मंगल दलों के लिए 25 करोड़ रूपये की घटिया खेल सामाग्री वित्तीय वर्ष 2019-20 में खरीदी गई। लगभग 5 वर्ष बाद भी शासन स्तर पर जांच लंबित है। लेकिन दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई नही हुईं।उनका कहना है कि जनसूचना से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर दिनांक 21 नवंबर 2020 को समस्त तथ्यों के साथ प्रमुख सचिव युवा कल्याण विभाग को इस बाबत शिकायती पत्र प्रेषित किया।उन्होंने कहा कि महानिदेशक द्वारा दिनांक 08 फरवरी 2021 को 07 सदस्यी कमेटी का गठन कर जांच हेतु निर्देशित किया गया।जिला युवा कल्याण अधिकारी गोरखपुर नें  महानिदेशक युवा कल्याण को अवगत कराया कि में० सॉफर इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा उपलब्ध कराई गई खेल सामग्री घटिया है।शासन के आदेश के लगभग 2 वर्ष बाद जनसूचना लगाने पर आनन- फानन में कूटरचित ढंग से जांच रिपोर्ट तैयार कर प्रेषित कर दी गई जिस पर अपनी आपत्ति समस्त तथ्यों के साथ दिनांक 12 जनवरी 2023 को मुख्यमंत्री को पत्र प्रेषित किया जो आईजीआरएस संदर्भ संख्या 12188230019528 पर दर्ज हुआ। दिनांक 17 फरवरी 2023 को निस्तारित कर दिया गया।इसको लेकर मैंने दोबारा मुख्य सचिव को 14 मार्च 2023 को पत्र प्रेषित कर सीबीआई व ईओडब्ल्यू से इस मामले की जांच की मांग की गई।लेकिन युवा कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश शासन के कार्यालय ज्ञाप 18 जुलाई 2023 द्वारा विशेष सचिव युवा कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश शासन की अध्यक्षता में जांच समिति का गठन किया गया परंतु आज 21 वर्ष बाद भी भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सरकार मेरे पत्र में उठाए गए बिंदुओं पर जांच नही करा पाई न ही दोषियों पर कार्यवाही हुईं।

संजय मिश्रा के मैदान में डांटने से पहले भी हुईं भृष्टाचार के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई

मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र गोरखपुर के रहने वाले समाजसेवी औऱ आरटीआई कार्यकर्ता संजय मिश्रा  कहते है कि पिछले 11 वर्षों से अनेक विभागों में भ्रष्टाचार को उजागर किया अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम निगम में हजारों लोगों के करोड़ो रूपये के गबन के मामले में एफआईआर दर्ज हुई जिसकी जांच ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अनुसंधान संस्थान) लखनऊ द्वारा की जा रही है। गाँव में सोलर लाइट लगाने में हुये वित्तीय अनियमितता के मामले में लगभग 200 अधिकारियों औऱ कर्मचारियों तथा ग्राम प्रधानों व ब्लाक प्रमुख औऱ खण्ड विकास अधिकारियों पर आंशिक जांच में करोड़ों रूपये का गबन साबित हुआ । वसूली आदेश हुआ पूर्ण जांच एवं कार्यवाही पिछले 7 वर्षों से लम्बित।इसके अलावा उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कार्पोरेशन लिमिटेड रायबरेली में 262 करोड़ 70 लाख रूपये के ऋण से बन रहे ट्रांसमिशन केन्द्र में हुए वित्तीय अनियमितता की जाँच साल भर से लम्बित आज कई विभागो में या तो जांच चल रही है या सालों से लम्बित है।

संजय मिश्रा को समाप्त करना चाहते है भृष्टाचारी

मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र गोरखपुर के रहने वाले समाजसेवी औऱ आरटीआई कार्यकर्ता संजय मिश्रा  कहते है कि भ्रष्टाचार में लिप्त लोग मुझे समाप्त करना चाहते है मैं भ्रष्टाचार को समाप्त करना वाहता हूँ। हमारा प्रयास आपके सहयोग से भ्रष्टावार करने वालों का स्थान जेल की सलाखों में होगा इस लड़ाई में उन्होंने सभी से समर्थन औऱ सहयोग की आपेक्षा भी की है।

Aaj National

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