LUCKNOW:यूपी में अंतिम मील कनेक्टिविटी,योगी सरकार बना रही है रोडमैप,क्लिक करें और भी खबरें

-रीजनल ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बढ़ाने पर फोकस,शहरी क्षेत्रों के बीच आवागमन तेज व सुगम बनाने का खाका हो रहा तैयार

  • REPORT BY:K.K.VARMA
  • EDITED BY:AAJNATIONAL NEWS

लखनऊ।यूपी  को ‘उत्तम प्रदेश’ बनाने के लिए प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार विजन-2047 के लक्ष्यों को

Yogi Adityanath, chief minister of Uttar Pradesh

साकार करने की दिशा में प्रदेश की परिवहन संरचना को सशक्त और आधुनिक बनाने पर निरंतर कार्य कर रही है। ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ की परिकल्पना के तहत सरकार का प्रमुख फोकस क्षेत्रीय आवागमन संपर्क की अवसंरचनाओं को सुदृढ़ करने के साथ अंतिम मील कनेक्टिविटी पर है ताकि प्रदेश के शहरों, कस्बों तथा औद्योगिक क्षेत्रों को तेज, सुरक्षित तथा विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

प्रदेश सरकार हाई-स्पीड परिवहन नेटवर्क के माध्यम से शहरी क्षेत्रों के बीच आवागमन को तेज और सुगम बनाने का व्यापक खाका तैयार कर रही है। इसके अंतर्गत प्रमुख शहरों तथा आर्थिक केंद्रों को जोड़ने के लिए हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विकास पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। भविष्य की जरूरतों के अनुरूप इसे प्रदेश में एक हजार किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में किस प्रकार व्यवस्थित रूप से स्थापित किया जाए, इसे लेकर कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इस नेटवर्क के साकार होने से न केवल यात्रा का समय घटेगा, बल्कि लोगों की आवाजाही आसान होने के साथ ही आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों के विस्तार तथा व्यापक कायाकल्प को लेकर जो खाका तैयार किया जा रहा है, उसमें रीजनल ट्रांसपोर्ट सिस्टम को सुदृढ़ करना भी शामिल है।
योजना के अनुसार, प्रदेश में रीजनल ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मजबूत करने के लिए लगभग 1500 किलोमीटर क्षेत्र में विस्तारित परिवहन नेटवर्क के विकास को ध्यान में रखते हुए कार्ययोजना निर्माण पर काम किया जा रहा है। विभिन्न ऑर्बिटल कॉरिडोर्स के निर्माण को लेकर भी कार्ययोजना तैयार की जा रही है, जिससे शहरों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाने और नगरीय क्षेत्रों में यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलेगी। ये कॉरिडोर औद्योगिक क्षेत्रों, लॉजिस्टिक्स हब तथा नगरीय केंद्रों को बेहतर तरीके से जोड़कर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेंगे।
इंटरसिटी हाइपरलूप, प्रदेश के प्रमुख शहरों में मेट्रो रेल परियोजनाओं का संचालन और विस्तार तथा वॉटर मेट्रो नेटवर्क को बढ़ाने पर भी फोकस किया जा रहा है।बेहतर रीजनल कनेक्टिविटी से प्रदेश में व्यापार व उद्योग को नई दिशा मिलेगी। विभिन्न कॉरिडोर तथा परिवहन नेटवर्क के विकास से उद्योगों को कच्चे माल, बाजार तथा श्रम शक्ति तक सुगमता से पहुंच प्राप्त होगी। इससे न केवल प्रदेश में निवेश को बल मिलेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। योगी आदित्यनाथ सरकार का मानना है कि सशक्त परिवहन अवसंरचना आर्थिक विकास की रीढ़ होती है।
प्रदेश सरकार की रणनीति केवल बड़े परिवहन नेटवर्क तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों की दैनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अंतिम मील कनेक्टिविटी को प्रमुख प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि मजबूत, सुरक्षित और आधुनिक परिवहन व्यवस्था के बिना प्रदेश का समग्र विकास संभव नहीं है। विजन-2047 को केंद्र में रखते हुए रीजनल कनेक्टिविटी के साथ ही अंतिम मील कनेक्टिविटी को एकीकृत रूप से विकसित करने को लेकर कार्य जारी है।

आज कानपुर में होगी मक्का की  कार्यशाला,सभी जिलों में होगा त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम 

त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम के तहत  राज्य स्तरीय मक्का कार्यशाला, प्रदर्शनी का आयोजन कल 17  दिसंबर को प्रातः 10:30 बजे से शताब्दी भवन सभागार, हरकोर्ट बटलर तकनीकी विश्वविद्यालय, कानपुर में किया जाएगा। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही होंगे। उत्तर प्रदेश का देश में मक्का के अन्तर्गत क्षेत्रफल की दृष्टि से चौथा स्थान है, और यह कार्यशाला प्रदेश में मक्का की खेती के प्रोत्साहन के लिए एक राज्यपोषित योजना है, जो चार वर्षों 2024-25 से 2027-28 तक के लिए संचालित है। योजना का परिव्यय 14656.45 करोड़ रूपये  है तथा यह सम्पूर्ण 75 जनपदों में संचालित होगी।
वर्तमान में मक्का की खेती के प्रोत्साहन हेतु भारत सरकार के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के कोर्स रियल घटक अन्तर्गत मक्का फसल हेतु मात्र 13 जनपद चयनित हैं।मक्का का उपयोग मुख्य रूप से पोल्ट्री फीड, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, एनीमल फीड, स्टार्च और एथेनॉल उत्पादन आदि के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त, प्रदेश में बढ़ते धार्मिक पर्यटन और औद्योगिकीकरण के कारण होटल उद्योग में स्वीट कॉर्न और बेबी कॉर्न जैसे उत्पादों की मांग बढ़ रही है।
प्रदेश में मक्का का उत्पादन खरीफ, रबी एवं जायद तीनों सीजन में होता है, हालाँकि मक्का के लिए खरीफ मुख्य सीजन है। वर्तमान में प्रदेश में मक्का का क्षेत्रफल 10.85 लाख हेक्टेयर, उत्पादन 30.55 लाख मी० टन तथा औसत उत्पादकता 28.15 कुन्टल प्रति हेक्टेयर है। चूंकि प्रदेश का मुख्य फसल चक्र धान-गेहूं होने के कारण प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन, मृदा स्वास्थ्य खराब होने, खेती की लागत बढ़ने, किसानों को कम लाभ प्राप्त होने जैसी समस्याएँ आ रही हैं, इसलिए मक्का ऐसी फसल है जिसको बढ़ावा देकर समस्याओं का काफी हद तक समाधान पाया जा सकता है। प्रदेश में रबी एवं जायद सीजन में मक्का अन्तर्गत आच्छादन, उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि किए जाने की पर्याप्त संभावनायें हैं।2025-26 में योजना में 27.37 करोड़ का व्यय किया जाएगा। योजना के अंतर्गत उन्नत तकनीकी प्रदर्शन मद में विभिन्न अनुदान दिए जाते हैं: देसी मक्का पर 3,000 प्रति एकड़ अनुदान, संकर मक्का प्रदर्शन हेतु 4,600 रूपये  प्रति एकड़ अनुदान, पॉपकॉर्न मक्का प्रदर्शन हेतु 4,600 प्रति एकड़ अनुदान, बेबी कॉर्न मक्का प्रदर्शन हेतु 16,000 प्रति एकड़ अनुदान, और स्वीट कॉर्न मक्का प्रदर्शन हेतु 20,000 प्रति एकड़ अनुदान देय है। सामान्य संकर बीज वितरण पर 15,000 प्रति क्विंटल पर अनुदान देय है। मेज शेलर यंत्र पर मूल्य का 50 प्रतिशत या 40,000 जो भी कम हो अनुदान देय है। बैच ड्रायर पर मूल्य का 80 प्रतिशत या 15,00,000 जो भी कम हो सक्रिय एफपीओ को अनुदान देय है। पॉपिंग मशीन पर मूल्य का 50 प्रतिशत या 10,000 अनुदान देय होगा। योजना में कृषकों को मक्का की खेती के लिए प्रोत्साहित किए जाने हेतु गोष्ठियों, मेलों, कार्यशालाओं तथा प्रदेश के अन्दर एवं बाहर भ्रमण कराया जाता है।
कार्यशाला में बलदेव सिंह औलख कृषि राज्य मंत्री रविन्द्र प्रमुख सचिव कृषि कुलपति हरकोर्ट बटलर तकनीकी विश्वविद्यालय कानपुर  कुलपति चन्द्रशेखर आज़ाद कृषि एवं प्रौ‌द्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर निदेशक भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर डॉ पंकज त्रिपाठी कृषि निदेशक जगदीश कुमार अपर कृषि निदेशक, महानिदेशक कृषि अनुसंधान परिषद प्रबन्ध निदेशक बीजविकास निगम निदेशक बीज प्रमाणीकरण, निदेशक राज्य कृषि प्रबन्ध संस्थान) आईआईएमआर लुधियाना एवं बेगूसराय के प्रधान वैज्ञानिक, अन्य कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डिस्टलरीज एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं पदाधिकारी, वाइस प्रेसीडेन्ट एक्सेस डेवलपमेंट सर्विसेज तथा  मण्डलीय संयुक्त कृषि निदेशक, जनपदीय उप कृषि निदेशक जिला कृषि अधिकारी व कृषक प्रतिभाग करेंगे।

रामकाज को समर्पित रहा रामविलास वेदांती का संपूर्ण जीवन- योगी

-मुख्यमंत्री ने ब्रह्मलीन डॉ. रामविलास वेदांती  को अर्पित किये श्रद्धासुमन 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को अयोध्या स्थित हिंदू धाम आश्रम पहुंचकर वशिष्ठ भवन के ब्रह्मलीन महंत डॉ. रामविलास वेदांती महाराज के प्रति श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके योगदान का स्मरण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति अभियान के वरिष्ठ सदस्य तथा वशिष्ठ भवन, अयोध्या के महंत डॉ. रामविलास वेदांती महाराज भौतिक रूप से आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका संपूर्ण जीवन अयोध्या धाम के विकास और रामलला के भव्य मंदिर निर्माण को समर्पित रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वेदांती का पूरा जीवन ही रामकाज को समर्पित था। यह भी एक संयोग है कि प्रभु श्रीराम की पावन कथा का वाचन करते हुए उन्होंने नश्वर देह का त्यागकर साकेतवास किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वेदांती महाराज के योगदान को याद करते हुए कहा कि श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के प्रारंभिक दौर से लेकर उसके मूर्त रूप लेने और आंदोलन के सफल परिणाम को देखने का सौभाग्य उन्हें प्राप्त हुआ।  25 नवंबर को श्रीरामजन्मभूमि पर निर्मित मंदिर पर धर्मध्वजा आरोहण के समारोह में वेदांती की गरिमामयी उपस्थिति रही। यह उनके समर्पण और निरंतर सहभागिता का स्पष्ट प्रमाण है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 1983 में श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति अभियान के आरंभ से लेकर अब तक आयोजित प्रत्येक आंदोलन और कार्यक्रम में वेदांती महाराज की सक्रिय भूमिका रही। वेदांती जी  को याद करते हुए कहा कि आज भले ही वे भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके साकेतवासी होने पर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करने, उनके शिष्यों व आश्रमवासियों के प्रति संवेदना व्यक्त करने के लिए मैं अयोध्या आया हूं  गोरक्षपीठ से वेदांती महाराज का अत्यंत निकट और आत्मीय संबंध रहा।  1949 में अयोध्या धाम में श्रीरामजन्मभूमि पर प्रभु श्रीराम के विग्रह के प्रकटीकरण के समय गोरक्षपीठ के तत्कालीन पीठाधीश्वर पूज्य महंत दिग्विजयनाथ तथा वेदांती के पूज्य गुरु बाबा अभिराम दास उस ऐतिहासिक अभियान का हिस्सा थे। मुख्यमंत्री योगी ने आगे कहा कि वर्ष 1983 में जब श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति का गठन हुआ और उनके पूज्य गुरुदेव, गोरक्षपीठाधीश्वर पूज्य महंत अवेद्यनाथ महाराज उस समिति के अध्यक्ष बने, तब से डॉ. रामविलास वेदांती  महाराज वरिष्ठ सदस्य के रूप में निरंतर इस आंदोलन से जुड़े रहे।मुख्यमंत्री  ने कहा कि प्रभु श्रीराम के पवित्र मंदिर से जुड़े ऐतिहासिक कार्यक्रमों, 5 अगस्त 2020 को मंदिर के शिलान्यास, 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा तथा 25 नवंबर 2025 को धर्मध्वजा आरोहण के वेदांती साक्षी रहे जो उनके जीवन की साधना और संकल्प का ही परिणाम था कि वे रामलला को विराजमान होते, भव्य मंदिर का निर्माण होते और दिव्य-भव्य अयोध्या को साकार रूप में देखते हुए तथा रामकथा का गायन करते हुए इस लोक से विदा हुए। मुख्यमंत्री ने प्रभु श्रीराम से प्रार्थना की कि वे वेदांती जी महाराज को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें। वे विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी स्मृतियों को नमन करते हैं और उन्हें पूर्ण विश्वास है कि वेदांती के आदर्शों का अनुसरण करते हुए उनके आश्रम के शिष्य और अनुयायी निरंतर रामकाज के अभियान से जुड़े रहेंगे। डॉ. रामविलास वेदांती मध्य प्रदेश के लालगांव के समीप स्थित भठवा गांव में रामकथा का वाचन कर रहे थे। कथा 17 दिसंबर तक निर्धारित था, लेकिन शनिवार की रात सीने में दर्द और घबराहट की शिकायत के बाद उन्हें उपचार के लिए रीवा लाया गया। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में इलाज के दौरान सोमवार को उनका साकेतवास हो गया।

हर पात्र तक पहुंचे योगी सरकार की योजनाओं का लाभ – कश्यप

-शादी अनुदान, छात्रवृत्ति,दिव्यांग योजनाओं में तेजी के निर्देश

योगी सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करने के उद्देश्य से पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्त्तीकरण राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार नरेन्द्र कश्यप ने मंगलवार को सचिवालय स्थित कक्ष संख्या–80 में विभागीय समीक्षा बैठक की। मंत्री ने  निर्देश दिये कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित सभी योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक समयबद्ध, पारदर्शी और बिना किसी बाधा के पहुंचना चाहिए तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी।पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की समीक्षा के दौरान मंत्री ने शादी अनुदान योजना, छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना, कम्प्यूटर प्रशिक्षण योजना, बजट व्यय, रिक्त पदों की स्थिति, तकनीकी समस्याओं तथा योजनाओं के प्रचार-प्रसार की  समीक्षा की। वित्तीय वर्ष 2025-26 में शादी अनुदान योजनान्तर्गत पात्र लाभार्थियों को लाभान्वित करने की प्रक्रिया में और तेजी लाई जाये। बैठक में बताया गया कि 15 दिसम्बर तक 69,644 लाभार्थियों को 139.288 करोड़ रुपये पीएफएमएस के माध्यम से उनके खातों में अंतरित किये जा चुके हैं। शेष पात्र आवेदकों को शीघ्र लाभान्वित करने के लिए मण्डलीय एवं जनपदीय अधिकारियों को  निर्देश दिये गये हैं।छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजनाओं की समीक्षा में अवगत कराया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में पूर्वदशम छात्रवृत्ति कक्षा 9-10 के अंतर्गत 6,90,349 छात्रों को 147.75 करोड़ रुपये तथा दशमोत्तर छात्रवृत्ति,शुल्क प्रतिपूर्ति कक्षा 11-12 के अंतर्गत 5,85,954 छात्रों को 175.54 करोड़ रुपये उनके खातों में अंतरित किये गये हैं। इस प्रकार अब तक कुल 12,76,303 छात्रों को 323.29 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की जा चुकी है। मंत्री ने निर्देश दिये कि ट्रांजेक्शन फेल मामलों में री-पेमेंट की स्वचालित व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करते हुए छात्रों को प्रत्येक चरण की सूचना एसएमएस एवं ई-मेल के माध्यम से अनिवार्य रूप से दी जाये।कम्प्यूटर प्रशिक्षण योजनाओं की समीक्षा में बताया गया कि 435 संस्थाओं के ऑनलाइन आवेदनों के सापेक्ष 299 पात्र संस्थाओं का चयन किया गया है, जिनमें 21,336 ओ-लेवल तथा 7,355 सीसीसी प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है और इस मद में अब तक 19.18 करोड़ रुपये व्यय किये जा चुके हैं। मंत्री ने कहा कि योगी सरकार दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण, सम्मान और आत्मनिर्भरता के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान योजना के अंतर्गत वर्तमान में 11 लाख 57 हजार से अधिक दिव्यांगजनों को प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता दी जा रही है । कुष्ठावस्था पेंशन योजना, दुकान निर्माण संचालन योजना, निःशुल्क बस यात्रा सुविधा, शादी-विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना, यूडीआईडी कार्ड, कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण, कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी, विशेष विद्यालयों का संचालन तथा राज्य निधि के अंतर्गत किये जा रहे कार्यों की भी समीक्षा की गयी। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप दिव्यांगजनों के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक एवं चिकित्सकीय पुनर्वासन से जुड़ी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाये तथा डिजिटल नवाचार, ई-ऑफिस, ऑनलाइन भुगतान और बजट मॉनीटरिंग  व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ किया जाये, ताकि प्रदेश का प्रत्येक दिव्यांगजन सम्मानपूर्वक और आत्मनिर्भर जीवन जी सके।

पर्यटन मंत्री ने किया राष्ट्र प्रेरणा स्थल का निरीक्षण 

-राष्ट्र प्रेरणा स्थल देशभक्ति और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों का बनेगा प्रतीक- जयवीर 

लखनऊ के वसंत कुंज आवासीय योजना में 65 एकड़ में फैला राष्ट्र प्रेरणा स्थल बनकर तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर इसका लोकार्पण प्रस्तावित है। लोकार्पण से पूर्व आज पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने राष्ट्र प्रेरणा स्थल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को लोकार्पण से पहले सभी कार्य व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के निर्देश दिए।पर्यटन मंत्री ने राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर मूर्ति निर्माण एवं स्थापना से जुड़े शिल्पकारों से संवाद किया। कौशल, समर्पण व सृजनात्मक योगदान की सराहना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की डबल इंजन सरकार राष्ट्र प्रेरणा स्थल को देशभक्ति, सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय नायकों के प्रेरक मूल्यों का सशक्त प्रतीक बनाने के लिए प्रयासरत है। लखनऊ अब नए भारत के नए उत्तर प्रदेश को साक्षात प्रस्तुत कर रहा है। यह स्थल भावी पीढ़ियों को राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा देगा।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, प्रमुख सचिव अमृत अभिजात एवं संस्कृति विभाग के अधिकारियों, कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधियों आदि के साथ राष्ट्र प्रेरणा का निरीक्षण किया। उन्होंने म्यूजियम में जनसंघ के वरिष्ठ नेता डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी ने नाम पर बने गैलरी का जायजा लिया। मंत्री ने म्यूजियम में स्व अटल बिहारी वाजपेयी से संबंधित जानकारियों को देखा, जिसमें उनके जनसंघ में प्रवेश, सांसद के रूप में चुने जाने, जनता पार्टी के गठन, पांचजन्य से संबंधों को देखा और सराहना की। राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल पर देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व अटल बिहारी वाजपेयी, पंडित दीन दयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 65 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमाएं लगी हैं। संस्कृति विभाग द्वारा तीनों प्रतिमाओं के निर्माण पर करीब 21 करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि खर्च की गई है। स्थल पर तीनों विभूतियों के जीवन यात्रा से जुड़े संस्मरणों को संजोते हुए एक म्यूजियम भी बनाया गया है। प्रतिमाओं का निर्माण मेसर्स राम सुतार आर्ट क्रिएशन प्रा.लि. और मेसर्स माटूराम आर्ट्स सेंटर प्रा. लि.ने किया है। राष्ट्र प्रेरणा स्थल कमल के आकार पर आधारित डिजाइन में तैयार किया गया है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल केवल एक स्मारक भर नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण से जुड़े महान विचारों और मूल्यों को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने वाला एक सशक्त माध्यम है। प्रधानमंत्री के कर कमलों से इसका लोकार्पण लखनऊ वासियों के लिए गर्व और गौरव का विषय है। प्रकृति से जुड़ाव को केंद्र में रखते हुए पार्क एवं हरित क्षेत्रों का विकास किया जा रहा है। 25 दिसंबर के भव्य आयोजन को लेकर प्राधिकरण द्वारा युद्धस्तर पर अंतिम तैयारियां की जा रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हाल के वर्षों में औद्योगिक विकास, सुदृढ़ कानून व्यवस्था और बेहतर कनेक्टिविटी के माध्यम से उत्तर प्रदेश को देश के ग्रोथ इंजन के रूप में स्थापित किया गया है और राष्ट्र प्रेरणा स्थल इस परिवर्तनशील और सशक्त होते प्रदेश का जीता-जागता प्रतीक है।इस अवसर पर प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति अमृत अभिजात, राज्य ललित कला अकादमी के निदेशक अमित कुमार अग्निहोत्री, अपर निदेशक संस्कृति डॉ.सृष्टि धवन, संस्कृति विभाग की सहायक निदेशक रेनू रंगभारती सहित  अधिकारी मौजूद रहे।

बिजली आउटसोर्स कर्मचारी 20 को करेंगे  जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा अपने स्वयं के आदेश 15 मई 2017 का उल्लंघन कर 33/11 के वी विद्युत उपकेन्द्रो के परिचालन व अनुरक्षण कार्य में तैनात हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों की छटनी करने, छटनी के उपरान्त मानक निर्धारित करने हेतु समिति का गठन,अपने स्वयं के आदेश 18 सितंबर 2025 का पालन करते हुए आउटसोर्स कर्मचारियों का कार्य के अनुरूप अनुबंध न करने, वेतन रुपया 18000 निर्धारित न करने, मार्च 2023 में हटाए गए कर्मचारियों को कार्य पर वापस न लेने, घायल कर्मचारी का कैशलेस इलाज न कराने, घायल कर्मचारियों द्वारा उपचार में व्यय की गई धनराशि को संविदाकारों के बिल से काटकर भुगतान न करने एवं 55 वर्ष का हवाला देकर अनुभवी कर्मचारियों को कार्य से हटाने, वर्टिकल व्यवस्था लागू करने, जांचअधिकारियों द्वारा दी गई जांच रिपोर्ट के आधार पर भ्रष्ट ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई न करने, मीटर रीडरों को न्यूनतम वेतन के हिसाब से वेतन का भुगतान न करने तथा स्मार्ट मीटर लगने की स्थिति में कार्य से हटाने के खिलाफ संगठन द्वारा 26 नवंबर को शक्ति भवन लखनऊ पर शान्ति पूर्वक विरोध प्रदर्शन किया गया।संघ के प्रदेश महामंत्री देवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने आगे बताया कि परिणाम स्वरूप प्रशासन कि उपस्थित में पावर कार्पोरेशन प्रबंधन व संगठन पदाधिकारी के बीच बैठक वार्ता में बनी सहमति के अनुरूप कार्यवृत्त जारी न करने, मानक समिति द्वारा रिपोर्ट देने से पहले ही पूर्वांचल डिस्काम में पुनः छटनी शुरू करने आदि के कारण संगठन द्वारा 20 दिसंबर से जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन करने एवं 12 जनवरी 2026 को ऊर्जा मंत्री से उनके लखनऊ स्थित आवास पर मिलकर आउटसोर्स कर्मचारियों की ज्वलंत समस्याओं से अवगत कराने का निर्णय लिया गया है।

Aaj National

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