-निजीकरण का मोह भंग होने पर सुधरेगी व्यवस्था: अवधेश
- REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ। प्रदेश की बिजली कंपनियों में वर्टिकल व्यवस्था लागू कर इसे अत्यंत सफल बताकर वाहवाही लूटी जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जहां-जहां यह व्यवस्था लागू है वहां उपभोक्ता गंभीर रूप से परेशान हैं और कोई सुनने वाला नहीं है।पूर्वांचल और दक्षिणांचल के निजीकरण में पावर कॉरपोरेशन पूरी तरह फेल और बेनकाब हो चुका है। इसके बावजूद अब पश्चिमांचल और मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के लिए नया प्लान तैयार किया जा रहा है, जिसके तहत अधिकारियों को एनडीपीएल व टोरेंट पावर (आगरा/मुंबई) की स्ट्रक्चरिंग व्यवस्था का भ्रमण कर अध्ययन कराने की योजना है।सवाल यह है कि सार्वजनिक क्षेत्र में उपभोक्ताओं के हित में किए गए सुधारों पर दर्जनों अध्ययन पहले से उपलब्ध हैं। उन्हें लागू कर विद्युत व्यवस्था में व्यापक सुधार किया जा सकता है, लेकिन पावर कॉरपोरेशन और बिजली कंपनियों का प्रबंधन बार-बार निजी क्षेत्र की वकालत इस तरह कर रहा है मानो निजी क्षेत्र सस्ती और बेहतर बिजली दे रहा हो।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा कहना है कि यदि वास्तव में निजी क्षेत्र इतना ही बेहतर है तो पावर कॉरपोरेशन और बिजली कंपनियों के शीर्ष प्रबंधन को चाहिए कि वे 5 वर्षों के लिए किसी निजी बिजली कंपनी में नौकरी कर लें और फिर अपना अनुभव आकर प्रदेश की जनता से साझा करें। भारत सरकार की आरडीएसएस योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में लगभग घ्44,000 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। अब जब सुधार दिखने का समय आया है, तब पावर कॉरपोरेशन यह कह रहा है कि निजी घरानों की व्यवस्था का अध्ययन किया जाए। अध्ययन पहले होता है, व्यवस्था बाद में लागू की जाती है। 44,000 करोड़ खर्च करने के बाद अध्ययन कराने की सोच पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि निजी क्षेत्र की फ्लाइट व्यवस्था (इंडिगो सहित) के कारण जनता को हुई भारी परेशानियां क्या सभी भूल गए हैं? टोरेंट पावर स्वयं स्वीकार करता है कि बकाया राशि पर छूट तभी देगा जब सरकार सहायता देगी, फिर भी निजी क्षेत्र का अध्ययन कराया जा रहा है।उपभोक्ता परिषद स्पष्ट करती है कि पावर कॉरपोरेशन और बिजली कंपनियां जब चाहें कार्यशाला आयोजित करें। उपभोक्ता परिषद हर समस्या के समाधान हेतु निशुल्क, गारंटी सहित व्यावहारिक प्लान देने को तैयार है, बशर्ते अध्यक्ष से लेकर श्रमिक तक सभी की जवाबदेही तय की जाए।
व्यापारियों का धरना, महापौर ने दिया भरोसा
नगर निगम द्वारा प्रस्तावित 20 नए लाइसेंस शुल्क को लेकर शनिवार को नगर निगम मुख्यालय पर लखनऊ व्यापार मंडल एवं विभिन्न बाजारों से आए व्यापारी भाइयों ने शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया। व्यापारियों का कहना था कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में लाइसेंस शुल्क में प्रस्तावित 20 नए लाइसेंस शुल्क से उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, जिसे वे वहन करने की स्थिति में नहीं हैं।
धरने की सूचना मिलने पर महापौर सुषमा खर्कवाल स्वयं नगर निगम मुख्यालय पहुंचीं और धरने पर बैठे व्यापारियों से संवाद कर उनकी समस्याओं एवं मांगों को गंभीरतापूर्वक सुना। व्यापारियों ने महापौर जी को ज्ञापन सौंपते हुए 20 नए लाइसेंस शुल्क के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की। उन्होंने यह भी बताया कि इससे छोटे और मध्यम व्यापारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।माननीय महापौर ने व्यापारियों को आश्वस्त किया कि नगर निगम किसी भी स्थिति में व्यापारी भाइयों पर अनावश्यक या अतिरिक्त आर्थिक भार नहीं पड़ने देगा। उन्होंने कहा कि व्यापारियों के हित नगर निगम की प्राथमिकता में हैं और इस विषय पर संबंधित अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा कर सदन में शीघ्र निर्णय लिया जाएगा। महापौर ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना सभी पक्षों को सुने कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जाएगा। महापौर के आश्वासन के बाद व्यापारियों ने अपना धरना शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त कर दिया। व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने माननीय महापौर जी द्वारा मौके पर पहुंचकर समस्या सुनने और सकारात्मक आश्वासन देने के लिए आभार व्यक्त किया।
आगरा का घाटे वाला फ्रेंचाइजी करार रद्द करने की मांग
-घाटे के गलत आंकड़ों के आधार पर निजीकरण का निर्णय निरस्त करे: संघर्ष समिति
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन द्वारा घाटे के दिए गए गलत आंकड़ों के आधार पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का लिया गया निर्णय निरस्त कर ऊर्जा निगमों में कार्य का स्वस्थ वातावरण बनाया जाय। संघर्ष समिति ने कहा कि पॉवर कारपोरेशन द्वारा आज भी घाटे के भ्रामक आंकड़े दिए जा रहे हैं। पॉवर कॉरपोरेशन एक लाख 15 हजार करोड़ रुपए का घाटा बता रहा है जो भ्रामक है। पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन सब्सिडी की 22 हजार करोड़ रुपए की धनराशि और सरकारी विभागों की राजस्व की धनराशि भी घाटे में जोड़ रहा है जो पूरी तरह गलत है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पॉवर कारपोरेशन को उपभोक्ताओं से एक लाख 15 हजार करोड़ रूपए वसूलने है। इसे वसूल लिया जाय तो पॉवर कॉरपोरेशन मुनाफे में है। इस राजस्व वसूली के लिए नए पद सृजित करना समय की महती आवश्यकता है जबकि पॉवर कॉरपोरेशन रिस्ट्रक्चरिंग कर बड़े पैमाने पर पदों को समाप्त करने में लगा है।संघर्ष समिति ने कहा कि हाल ही में विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी टैरिफ आदेश में भी यह पाया गया है कि पावर कारपोरेशन के पास 01 अप्रैल, 2025 को सरप्लस धनराशि है। इसी आधार पर घरेलू उपभोक्ताओं के लिए टैरिफ नहीं बढ़ाया गया है। इसी से स्पष्ट हो जाता है कि पॉवर कारपोरेशन घाटे के गलत और भ्रामक आंकड़े दे रहा है।संघर्ष समिति घाटे के भ्रामक आंकड़ों पर कल विस्तृत प्रेस नोट जारी करेगी।संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि कल हुई समीक्षा में पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल ने स्वयं स्वीकार किया है कि केस्को में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और बिजली कर्मी बिजली चोरी रोकने तथा लाइन हानियां कम करने के तरीके केस्को से सीखें।
संघर्ष समिति ने कहा कि वर्ष 2009 में केस्को और आगरा दोनों शहरों के फ्रेंचाइजीकरण का निर्णय एक साथ हुआ था। आज सरकारी क्षेत्र की कम्पनी केस्को में निजी क्षेत्र की फ्रेंचाइजी आगरा की तुलना में लाइन हानियां भी कम हैं और प्रति यूनिट बिजली बेचने पर केस्को से 07 रुपए प्रति यूनिट से अधिक राजस्व मिल रहा है जबकि फ्रेंचाइजी करार के अनुसार पॉवर कॉरपोरेशन को आगरा से प्रति यूनिट 04.36 रुपए राजस्व मिलता है। ऐसे में जब घाटे के नाम पर निजीकरण की बात हो रही है तब घाटा दे रहे आगरा के फ्रेंचाइजी करार को तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए।पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के आज 388 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
