LUCKNOW:केंद्रीय बजट केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन का रोडमैप,क्लिक करें और भी खबरें

-75 जनपद, 375 प्रतिभागी: केन्द्रीय बजट पर विचार प्रस्तुत कर रही प्रदेश की युवा शक्ति

-विधायक धनौरा ने अमरोहा के युवाओं के साथ किया संवाद 

  • REPORT BY:K.K.VARMA || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ। केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के मार्गदर्शन में ‘मेरा युवा भारत’  उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय विकसित भारत युवा संसद 2026 के दूसरे दिन 180 युवा युवा वक्ताओं ने अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रत्येक वक्ता को निर्धारित 3 मिनट में अपनी बात रखनी थी, लेकिन 3 मिनटों में जो गहराई, दृष्टि और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई दी, उसने पूरे विधानमंडप को बार-बार तालियों से गूंजा दिया।
प्रदेश भर के जनपदों में माय भारत द्वारा आयोजित जिला स्तरीय युवा संसद में उत्कृष्ट प्रदर्शन केउपरांत राज्य स्तरीयविकसित भारत युवा संसद में चयनित युवाओं ने माय भारत संग जुड़कर “विकसित भारत” के संकल्प को स्वर दिया।दूसरे दिन की विशेषता रही कि युवाओं के विचारों में और अधिक गहराई, तथ्यात्मक मजबूती और समाधान आधारित दृष्टिकोण देखने को मिला। दूसरे दिन उन विचारों को नीति, क्रियान्वयन और प्रभाव के स्तर पर जोड़ने का प्रयास स्पष्ट दिखाई दिया। माय भारत द्वारा राज्य स्तरीय विकसित भारत युवा संसद 2026 हेतु निर्धारित विषय “केंद्रीय बजट 2026: विकसित भारत 2047 की ओर युवाओं के मार्ग को सुदृढ़ बनाना”पर युवाओं ने रोजगार, स्टार्टअप इकोसिस्टम, डिजिटल इंडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, हरित अर्थव्यवस्था और स्किल डेवलपमेंट जैसे विभिन्न आयामों को जोड़ते हुए अपने विचार प्रस्तुत किए।प्रतिभागियों ने अपने विचारों में इस बात को प्रमुखता से रखा कि इस बजट की आधारशिला माय भारत द्वारा आयोजित विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 के दौरान रखी गई, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं से सीधे संवाद कर उनके सुझावों को सुना।
युवा वक्ताओं ने बताया कि स्वास्थ्य, उद्यमिता, स्वच्छता, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में युवाओं के दृष्टिकोण को बजट में स्थान दिया गया है। इस संदर्भ में प्रतिभागियों ने केंद्रीय बजट को केवल आर्थिक दस्तावेज न मानते हुए इसे विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में युवाओं की भागीदारी को सशक्त बनाने वाला माध्यम बताया।कई वक्ताओं ने बताया कि केंद्रीय बजट केवल एक आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि एक सामाजिक परिवर्तन का रोडमैप है जो युवाओं को अवसर देने के साथ-साथ उन्हें विकसित राष्ट्र गढ़ने की जिम्मेदारी भी सौंपता है। युवाओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि विकसित भारत की परिकल्पना तभी साकार होगी जब विकास समावेशी, संतुलित और सतत होगा। “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य और अमृत काल की परिकल्पना के अनुरूप राज्य स्तरीय विकसित भारत युवा संसद 2026काआयोजन युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा सेजोड़ने का प्रयास है। इसमें युवाओं को केवल श्रोता नहीं बल्कि सक्रिय सहभागी के रूप में मंच प्रदान किया जा रहा है, जिससे वे देश की नीतियों और विकास की दिशा में  भूमिका को समझ सकें। प्रदेश के 75 जनपदों से चयनित होकर आए होनहार युवाओं ने भी  विचारों और तर्कों से सभी का ध्यान आकर्षित किया। उनकी प्रस्तुति में गांव की जमीनी समझ, राष्ट्रीय दृष्टिकोण और वैश्विक सोच का अनूठा संगम देखने को मिला।
पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवाओं ने जब मंच संभाला, तो उनके शब्दों में अनुभव, संवेदना और प्रतिबद्धता का संगम दिखाई दिया। यह आयोजन “विकसित भारत” के उस रोडमैप की झलक बनकर सामने आया, जिसमें गांव, जिला, प्रदेश और राष्ट्र चारों स्तर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। हर भाषण के बाद गूंजती थपथपाहट यह बताने के लिए पर्याप्त थीं कि यह केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि विचारों का उत्सव है। यहां कोई हार-जीत नहीं, बल्कि सीखने, समझने और आगे बढ़ने की भावना प्रमुख थी। प्रतिभागियों ने एक-दूसरे के विचारों को गंभीरता से सुना और नए दृष्टिकोणों को आत्मसात किया।इस आयोजन का एक भावनात्मक पहलू यह भी रहा कि अधिकांश प्रतिभागी पहली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा पहुंचे है। विधानसभा में प्रवेश करते ही उनके चेहरे पर उत्साह, जिज्ञासा और गर्व का मिश्रण साफ नजर आया। कई युवाओं ने इसे अपने जीवन का “टर्निंग पॉइंट अनुभव” बताया, जहां उन्होंने केवल सुना नहीं, बल्कि लोकतंत्र को जीया।
कार्यक्रम का प्रतिदिन उत्तर प्रदेश विधानसभा के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर लाइव प्रसारण किया जा रहा है, जिसे प्रदेशभर से हजारों लोग देख रहे हैं।निर्णायक मंडल के रूप में  विधायक शशांक वर्मा,  विधायिका डॉ सुरभि एवं डॉ नीरज बोरा द्वारा प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया जा रहा है। उन्होंने युवाओं को आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करते हुए संसदीय प्रक्रिया, तर्क प्रस्तुति और नेतृत्व कौशल के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। इस पहल के माध्यम से युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की गहराई को समझने, नीति निर्माण में अपनी भागीदारी दर्ज कराने और अपने नेतृत्व कौशल को निखारने का अवसर मिल रहा है।  वहीं कार्यक्रम का संचालन अनन्या तिवारी एवं मृणाली दीक्षित ने किया।कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों ने  युवाओं की इस ऊर्जा और प्रतिबद्धता की सराहना की।
इस अवसर पर माय भारत उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय निदेशक अनिल कुमार सिंह, राज्य निदेशक गोपेश पांडेय, उप निदेशक विकास कुमार सिंह, उपनिदेशक सोनिका चंद्रा, जिला युवा अधिकारी राम गोपाल सिंह चौहान,  युवा अधिकारी संजीव सिंह, जिला युवा अधिकारी राम गोपाल सिंह चौहान, जिला युवा अधिकारी रश्मि शबनम गुप्ता, जिला युवा अधिकारी सीमा पांडेय सहायक निदेशक रवि दत्त, सहायक निदेशक कुमारी दिव्या, लेखा एवं कार्यक्रम सहायक विशाल सिंह एवं योगेश कुमार उपस्थित रहे।

जल जीवन मिशन: खोदी गईं सड़कों और गड्ढों को तत्काल भरने का फरमान,किसी भी स्तर पर चूक बर्दाश्त नहीं 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि जल जीवन मिशन के तहत खुदाई का काम करते समय सुरक्षा के सभी मानकों का सख्ती से पालन किया जाए और कार्य संपन्न होते ही खोदी गई सड़कों व गड्ढों को तत्काल भरा जाए। जिलाधिकारी व अन्य वरिष्ठ अधिकारी खुद स्थलीय निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करेंगे। इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। योगी सरकार शहरी इलाकों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में साफ पानी पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। जल जीवन मिशन के जरिए करोड़ों लोगों को इसका लाभ पहुंचाया जा रहा है।मुख्यमंत्री के निर्देश के मुताबिक प्रदेश के सभी जिलों में जिलाधिकारी, जल जीवन मिशन से जुड़े वरिष्ठ अधिकरी तथा अन्य संबंधित विभागीय अधिकारी स्थलीय निरीक्षण कर खुदी हुई सड़कों व गड्ढों की स्थिति का पता करें। साथ ही इन्हें तत्काल भरना भी सुनिश्चित करें। इस काम में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। काम को समय से पूरा नहीं करने, अधूरा छोड़ने या इसमें लापरवाही बरतने वाली कार्यदायी संस्थाओं व ठेकेदारों पर जुर्माना लगाने के साथ ही उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की जाए। सीएम ने निर्देश दिया कि जल समाधान पोर्टल पर आपूर्ति, लीकेज व खुदाई से जुड़ी शिकायतों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए।जल जीवन मिशन के तहत जलापूर्ति या मरम्मत संबंधित शिकायतों के लिए लोग 18001212164 टोल फ्री नंबर पर शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में करीब 2.50 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण परिवारों को नल से जल कनेक्शन पहुंचाया जा चुका है। विंध्य और बुंदेलखंड में लगभग शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। योगी सरकार घर-घर साफ पानी पहुंचाने का काम युद्धस्तर पर कर रही है।

5 लाख के पार हुई रूफटॉप सोलर संयंत्र की स्थापना,ऊर्जा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने रचा इतिहास, रूफटॉप सोलर स्थापना में देश में नंबर-1

-5,000 कंपनियों के माध्यम से 65,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में रूफटॉप सोलर स्थापना के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल करते हुए देश में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रदेश में अब तक 5,00,115 से अधिक रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।राज्य में 8,94,217 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से बड़े पैमाने पर स्वीकृति एवं स्थापना की गई है।  प्रदेश में 1,696.68 मेगावाट की कुल स्थापित क्षमता सृजित हुई है तथा 3,038.08 करोड़ की सब्सिडी केंद्र सरकार द्वारा एवं ₹1,000 करोड़ से अधिक की सब्सिडी राज्य सरकार द्वारा जारी की जा चुकी है।
नेडा डायरेक्टर रविन्दर सिंह ने बताया कि कुल उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 5 करोड़ मूल्य की मुफ्त बिजली उत्पन्न हो रही है तथा लाखों टन कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई गई है। इसके अतिरिक्त, प्रदेश में लगभग 5,000 कंपनियों के माध्यम से 65,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार एवं लाखों लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ है। साथ ही, सौर परियोजनाओं को लोगों के छतों पर स्थापित किए जाने से प्रदेश की लगभग 6,500 एकड़ भूमि को संरक्षित करते हुए उसे कृषि एवं अन्य व्यावसायिक उपयोग हेतु सुरक्षित रखा गया है।अप्रैल में मात्र 30 दिनों में 51,882 रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित कर प्रदेश ने स्थापना की गति में नया मानक स्थापित किया तथा योजना प्रारंभ से अब तक किसी भी राज्य द्वारा 50,000 संयंत्रों की सर्वाधिक तीव्र स्थापना का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया।
अप्रैल में प्रदेश की औसत दैनिक स्थापना 1,729 संयंत्र प्रति दिन रही, जो अब तक का सर्वाधिक है। इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उत्तर प्रदेश ने अखिल भारतीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया है। मार्च में औसत दैनिक स्थापना 1,700 संयंत्र प्रतिदिन थी, जिसे पीछे छोड़ते हुए अप्रैल में नया कीर्तिमान स्थापित किया गया। यह उपलब्धि प्रदेश के प्रभावी क्रियान्वयन, सुदृढ़ समन्वय और निरंतर निगरानी का प्रत्यक्ष परिणाम है।

एआई और स्विस तकनीक से लैस हो रहे यूपी के एक्सप्रेसवे,योगी सरकार बना रही ‘स्मार्ट रोड नेटवर्क’

-लोकार्पित गंगा एक्सप्रेसवे में तकनीक का किया गया उपयोग

उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे निर्माण का मॉडल अब पारंपरिक ढांचे से आगे निकलकर तकनीक-आधारित निगरानी और प्रबंधन की दिशा में प्रवेश कर चुका है। योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में जहां एक ओर तेज गति से एक्सप्रेसवे नेटवर्क का विस्तार हुआ, वहीं अब इन परियोजनाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और दीर्घकालिक स्थायित्व सुनिश्चित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई और स्विस सेंसर तकनीक को केंद्र में रखा गया है।
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण यूपीडा द्वारा स्विट्जरलैंड की ईटीएच ज्यूरिख और आरटीडीटी लैबोरेट्रीज एजी के साथ की गई साझेदारी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत सड़क निर्माण को ‘डेटा-ड्रिवन’ और ‘रियल-टाइम मॉनिटरिंग’ आधारित बनाया जा रहा है। पीएम मोदी द्वारा लोकार्पित गंगा एक्सप्रेसवे में भी इस तकनीक का उपयोग किया गया है। अब तक सड़क निर्माण में गुणवत्ता का आकलन प्रायः निर्माण पूरा होने के बाद होता था, जिससे खामियों के सुधार में समय और लागत दोनों बढ़ते थे। नई प्रणाली में यह पूरी प्रक्रिया बदल गई है। सेंसर आधारित मॉड्यूल के जरिए निर्माण के दौरान ही सड़क की गुणवत्ता की लगातार निगरानी की जा रही है, जिससे किसी भी कमी को उसी समय दुरुस्त किया जा सके।
इस तकनीक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह विशेष वाहन है, जिसमें सात एक्सेलेरोमीटर सेंसर लगाए गए हैं। यह वाहन एक्सप्रेसवे की हर लेन पर चलकर सतह की एकरूपता, ऊंचाई में उतार-चढ़ाव और कंपन का डेटा जुटाता है। यह डेटा सड़क की वास्तविक स्थिति का वैज्ञानिक आकलन प्रस्तुत करता है, जो पारंपरिक विजुअल इंस्पेक्शन से कहीं अधिक सटीक माना जा रहा है।सेंसर से प्राप्त आंकड़ों को एआई सॉफ्टवेयर के जरिए प्रोसेस कर सड़क की गुणवत्ता को ‘एक्सीलेंट’, ‘गुड’ और ‘पुअर’ जैसी श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। इससे न केवल गुणवत्ता का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन संभव होता है,बल्कि निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही भी तय होती है। खास बात यह है कि एआई आधारित यह सिस्टम सड़क की छोटी-से-छोटी खामी को भी पहचान लेता है, जिससे समय रहते सुधार किया जा सकता है।

योगी सरकार का फोकस केवल निर्माण तक सीमित नहीं है। एक्सप्रेसवे के संचालन चरण में भी एआई का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। एआई-सक्षम कैमरे ओवरस्पीडिंग या गलत लेन में चलने जैसे ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को स्वतः चिन्हित करेंगे। इससे न केवल प्रवर्तन मजबूत होगा, बल्कि मार्ग दुर्घटनाओं में कमी लाने में भी मदद मिलेगी।यह पहल उत्तर प्रदेश को पारंपरिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल से आगे ले जाकर ‘स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर’ की श्रेणी में स्थापित करती है। एक्सप्रेसवे अब केवल कनेक्टिविटी का माध्यम नहीं, बल्कि डेटा, तकनीक और प्रबंधन के समन्वय से संचालित एक इंटेलिजेंट नेटवर्क के रूप में विकसित हो रहे हैं। स्पष्ट है कि योगी सरकार अब इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुकी है, जहां फोकस केवल निर्माण पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता, सुरक्षा और टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन पर है।

Aaj National

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