LUCKNOW:सीएम की मौजूदगी में आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर समझौता,क्लिक करें और भी खबरें

-आपदा प्रबंधन आज समय की अनिवार्य प्रशासनिक प्राथमिकता-योगी

-राहत आयुक्त कार्यालय और यूएनडीपी के बीच हुआ 19.99 करोड़ के सहयोग पर एमओयू,75 जिलों और 15 विभागों में विकसित होंगी आपदा प्रबंधन योजनाएं, शहरी क्षेत्रों के लिए भी बनेगी विशेष रणनीति

-एंजेला लुसिगी ने की मुख्यमंत्री से भेंट,एमओए से यूपी को मिलेगा वैश्विक मानकों पर आधारित आपदा न्यूनीकरण रणनीति का लाभ

  • REPORT BY: K.K.VARMA || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK 
लखनऊ। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आपदा जोखिम न्यूनीकरण को लेकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। राज्य में आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी, समन्वित, वैज्ञानिक और सशक्त बनाने के उद्देश्य से राहत आयुक्त कार्यालय तथा संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के मध्य एक महत्त्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर सम्पन्न हुआ। यह समझौता प्रदेश में डिजास्टर रिस्क रिडक्शन कार्यक्रमों को लागू करने, राज्य की संस्थागत क्षमता को सशक्त बनाने और बहुस्तरीय आपदा प्रबंधन व्यवस्था को तकनीकी दृष्टिकोण पर आधारित बनाने की दिशा में नई शुरुआत है। समझौता आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर यूएनडीपी की भारत प्रमुख एवं रेजिडेंट रिप्रेजेंटेटिव एंजेला लुसीगी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने मुख्यमंत्री से शिष्टाचार भेंट कर उत्तर प्रदेश सरकार की आपदा प्रबंधन के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की और यूएनडीपी की ओर से राज्य को हरसंभव तकनीकी सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया।इस समझौते का उद्देश्य राज्य के विभिन्न स्तरों पर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन कार्यक्रमों की व्यापक श्रृंखला को लागू करना है, जिससे राज्य की आपदा प्रबंधन प्रणाली अधिक समावेशी, जवाबदेह और प्रभावी बन सके। इसके अंतर्गत जिला और विभागीय स्तर पर आपदा प्रबंधन योजनाओं के विकास से लेकर जोखिम मूल्यांकन, सूचना प्रणाली के सुदृढ़ीकरण, प्रशिक्षण, संसाधन क्षमता निर्माण, अर्ली वार्निंग सिस्टम की स्थापना, परियोजना प्रबंधन तक विभिन्न पहलों को क्रियान्वित किया जाएगा। यह साझेदारी राज्य को आपदा न्यूनीकरण के वैश्विक मानकों से जोड़ते हुए जरूरतों के अनुरूप कार्यान्वयन में मदद करेगी।समझौते के प्रमुख बिंदुओं में 75 जिलों में जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं, 15 विभागों की विभागीय आपदा प्रबंधन योजनाओं का विकास शामिल है। राज्य के 10 विभागों के लिए  परियोजना प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा। 20 प्रमुख शहरों में संभावित आपदाओं को ध्यान में रखते हुए जोखिम व संवेदनशीलता का मूल्यांकन कराया जाएगा। इन्हीं शहरों में शहरी आपदा प्रबंधन योजनाएं भी विकसित की जाएंगी।तकनीकी मोर्चे परराज्य स्तर की आपदा सूचना प्रणाली को सुदृढ़ करने हेतु इसे एकीकृत किया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यशालाएं, मूल्यांकन अध्ययन, आईसीटी उपकरणों की उपलब्धता तथा राहत आयुक्त कार्यालय में परियोजना प्रबंधन यूनिट की स्थापना की जाएगी ताकि सभी गतिविधियाँ सुगठित एवं प्रभावशाली ढंग से संचालित हो सकें।कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आगामी तीन वर्षों में 19.99 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। धनराशि चरणबद्ध तरीके से व्यय की जाएगी और यूएनडीपी द्वारा प्रस्तुत तकनीकी प्रस्तावों के अनुरूप क्रियान्वयन  किया जाएगा। राज्य सरकार इस कार्यक्रम को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की संस्तुति के अनुरूप आगे बढ़ा रही है, जिसने यूएनडीपी को इस क्षेत्र में तकनीकी सहयोग हेतु अधिकृत किया है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर कहा कि आपदा प्रबंधन आज के समय की अनिवार्य प्रशासनिक प्राथमिकता है। तकनीकी दक्षता, प्रशिक्षण और पूर्व तैयारी के समन्वय से ही हम आपदा के प्रभाव को कम कर सकते हैं।  यह साझेदारी राज्य की आपदा प्रबंधन क्षमता को विश्वस्तरीय बनाएगी और शासन-प्रशासन को वैज्ञानिक ढंग से निर्णय लेने में समर्थ बनाएगी।यह प्रयास उत्तर प्रदेश के आपदा न्यूनीकरण प्रयासों को नई दिशा देगा। इससे प्रदेश में जीवन, संपत्ति और अवसंरचना की रक्षा के लिए समेकित रणनीति पर कार्य करना अधिक सुगम होगा। आपदा प्रबंधन की दिशा में उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकेगा।यूएनडीपी की भारत प्रमुख एंजेला लुसीगी ने भी मुख्यमंत्री से भेंट के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना की।  राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और तत्परता समझौते को धरातल पर सफल बनाने में सहायक सिद्ध होगी। यूएनडीपी तकनीकी सहायता के साथ नीति निर्माण, योजना विकास और जमीनी कार्यान्वयन तक हर स्तर पर उत्तर प्रदेश सरकार के साथ सहयोग करेगा।

27 चालू कार्यों हेतु 05 करोड़ 31 लाख 62 हजार रूपये अवमुक्त

राज्य सरकार द्वारा चीनी मिल परिक्षेत्र में कृषि विपणन सुविधाओं हेतु मार्गों का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण नवनिर्माण पुनर्निर्माण कार्यों हेतु एकमुश्त व्यवस्था योजनान्तर्गत 27 चालू कार्यों हेतु  05 करोड़ 31 लाख 62 हजार रूपये की धनराशि का आवंटन उत्तर प्रदेश शासन द्वारा किया गया है। इन 27 चालू कार्यों में जनपद बागपत के 21, जौनपुर के 4 तथा बुलन्दशहर के 2 कार्य सम्मिलित है।  जारी शासनादेश में निर्देश दिये गये हैं कि सम्बन्धित अधिकारियों द्वारा आवंटित धनराशि का व्यय अंकित परियोजना पर ही मानक व विशिष्टियों के अनुरूप किया जाय तथा अन्य किसी मद में न किया जाय।

द्वितीय चरण काउन्सिलिंग की तिथियों में आंशिक वृद्धि,17 जुलाई तक पूर्ण करें प्रवेश प्रक्रिया

सचिव संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद संजीव कुमार सिंह ने बताया  कि वर्ष-2025 की संयुक्त प्रवेश परीक्षा की प्रवेश काउन्सिलिंग के द्वितीय चरण में संस्था पाठ्यक्रम का आवंटन प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों हेतु विकल्पों के चयन एवं सीट एक्सेप्टेंस शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि पूर्व में 15 जुलाई निर्धारित थी तथा अभिलेख सत्यापन की अंतिम तिथि 16 जुलाई सायं 6 बजे तक निर्धारित की गई थी।सचिव ने बताया कि अब तक काउन्सिलिंग के द्वितीय चरण में 32,399 अभ्यर्थियों द्वारा थ्तमम्रम विकल्प तथा 9,589 अभ्यर्थियों द्वारा थ्सवंज विकल्प का चयन किया गया है। 11,715 अभ्यर्थियों द्वारा अभिलेख सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है।छात्रहित को दृष्टिगत रखते हुए अभ्यर्थियों को अंतिम अवसर प्रदान करते हुए थ्तमम्रमध्थ्सवंज विकल्प चयन एवं सीट एक्सेप्टेंस शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि  17 जुलाई को दोपहर 12 बजे तक तथा अभिलेख सत्यापन की अंतिम तिथि 17 जुलाई को अपराह्न 2 बजे तक बढ़ा दी गई है।

सचिव ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे निर्धारित तिथि एवं समयसीमा के भीतर प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण करें। काउन्सिलिंग से संबंधित समस्त जानकारी परिषद की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

उपभोक्ताओं के हितों का संरक्षण सर्वोपरि-अध्यक्ष रेरा

भू-सम्पदा सेक्टर में उपभोक्ताओं के हितों एवं भू-सम्पदा सेक्टर के संवर्धन एवं सुनियोजित पारदर्शी पक्रिया के दृष्टिगत उत्तर प्रदेश भू-सम्पदा रेरा द्वारा रेरा एजेन्टस प्रशिक्षण कार्यक्रम को संचालित किया जा रहा है। सफल प्रशिक्षणर्थियों को रेरा द्वारा प्रमाण पत्र प्रदान करते हुए रेरा में पंजीकृत कराये जाने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है, भू-समपदा क्षेत्र में होमवायर्स के हितों के दृष्टिगत महत्वपूर्ण पहल है। अध्यक्ष यूपी रेरा द्वारा चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में ग्यारहवा, बारहवा व तेरहवें बैचेस के प्रशिक्षित सफल भू-सम्पदा एजेन्टस को अध्यक्ष भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण संजय आर भूसरेडडी ने  प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। इसके पूर्व भी अध्यक्ष  रेरा द्वारा दस बैचस के सफल एवं प्रशिक्षित भू-सम्पदा एजेन्टस को प्रमाण पत्र प्रदान करते हुए रेरा में पंजीकरण हेतु मार्ग-प्रशस्त किया गया है।
इस अवसर पर अध्यक्ष रेरा संजय भूसरेड्डी  ने कहा कि पहले यूपी रेरा एजेंट एजेंसी के लिए कोई भी व्यक्ति अप्लाई करता था तो उसको एजेंट बना दिया जाता था, बिना गुणवत्ता की परख किये, जिसके कारण होम वायर्स एवं रेरा एजेन्टस  को कठिनाईयों को सामना करना होता था, पर अब रेरा द्वारा नई व्यवस्था के तहत एजेंटस को चार दिन का अनिवार्य प्रशिक्षण प्राप्त करना होता है। इसके लिए रेरा द्वारा दो प्रशिक्षण केन्द्रों को भी संचालित किया जा रहा है। एक लखनऊ एवं दूसरा गौतमबुद्ध नगर में है। अभी तक रेरा द्वारा पन्द्रह बैचेस का प्रशिक्षण पूर्ण हो चुका है।  अध्यक्ष रेरा ने बताया कि प्रशिक्षण के उपरान्त परीक्षा में उत्तीर्ण पशिक्षणार्थी को प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है, तब वह प्रमाणिक एजेन्ट हो जाता है। क्योकि प्रशिक्षण में रेरा के लॉ, अधिकार एजेन्ट की जिम्मेदारियां व उनके दायित्वों आदि का बोध कराया जाता है। उन्होने बताया कि सफल अभ्यर्थी रेरा पोर्टल पर जाकर अपना आवेदन एजेन्सी के लिए कर सकतें है।सफल अभ्यर्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि होम बायर को सदैव सही सुझाव दे, ताकि उसे परेशानी गुजरना न पडे। उन्होने यह भी कहा कि यदि रेरा एजेन्ट को कोई समस्या आ रही हो तो रेरा सदैव सहयोग के लिए तत्पर है।

भाषा विश्वविद्यालय में प्रवेश पंजीकरण अब 20 जुलाई तक

ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ ने छात्रहित में प्रवेश प्रक्रिया के अंतर्गत ऑनलाइन पंजीकरण की अंतिम तिथि को बढ़ाकर अब 20 जुलाई  कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह निर्णय छात्रों की बढ़ती रुचि और कई छात्रों के अनुरोध को ध्यान में रखते हुए लिया है। विश्वविद्यालय भाषा, संस्कृति और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध है और यहाँ बी.टेक सिविल, मैकेनिकल, बायोटेक्नोलॉजी, कंप्यूटर साइंस बीए ऑनर्स, बीबीए बीसीए, एमबीए, एमसीए सहित विविध स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं। साथ ही हिंदी, अंग्रेज़ी, उर्दू, अरबी, फारसी, जर्मन, चीनी, जापानी और पाली जैसी भाषाओं के साथ पत्रकारिता एवं जनसंचार, गृह विज्ञान, इतिहास, राजनीतिक विज्ञान और वाणिज्य जैसे विषयों में अध्ययन के अवसर उपलब्ध हैं।प्रवेश समन्वयक प्रोफेसर सौबान सईद ने कहा कि “हम चाहते हैं कि अधिक से अधिक विद्यार्थी इस शैक्षणिक अवसर का लाभ उठाएं। प्रवेश पंजीकरण की तिथि बढ़ने से उन छात्रों को भी आवेदन का अवसर मिलेगा जो किसी कारणवश पूर्व में आवेदन नहीं कर सके थे। हम छात्रों से अनुरोध करते हैं कि वे 20 जुलाई से पूर्व अपना पंजीकरण अवश्य पूर्ण करें।

जिलास्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में सर्वाेदय विद्यालय की छात्राओं ने लहराया परचम,स्पोर्ट्स स्टेडियम भिनगा श्रावस्ती में हुई प्रतियोगिता

समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित जय प्रकाश नारायण सर्वाेदय विद्यालय, भयापुरवा भिनगा श्रावस्ती की छात्राओं ने जिला स्तर पर हुई खेलकूद प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया है। खेल निदेशालय के निर्देश पर जिला खेल कार्यालय श्रावस्ती द्वारा 14 और 15 जुलाई को स्पोर्ट्स स्टेडियम भिनगा श्रावस्ती में दो दिवसीय जूनियर वर्ग की खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।प्रतियोगिता में जूनियर बालिका वर्ग में बास्केटबॉल और एथलेटिक्स की विभिन्न प्रतिस्पर्धाएं हुईं। बास्केटबॉल के बालिका वर्ग के सेमिफाइनल में एटीएस भयापुरवा भिनगा की छात्राओं ने कस्तूरबा गांधी विद्यालय को हराया, जबकि फाइनल मुकाबले में स्पोर्ट्स स्टेडियम श्रावस्ती को हराकर पहला स्थान प्राप्त किया। वहीं, एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भी छात्राओं का प्रदर्शन सराहनीय रहा। शॉटपुट में अनामिका चौधरी ने दूसरा और निशा राना ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। 100 और 200 मीटर दौड़ में बिंदिया राना और 400 मीटर दौड़ में वन्दना ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। जिला क्रीडाधिकारी शिव कुमार यादव श्रावस्ती और श्रावस्ती विधायक के प्रतिनिधि अवधेश पांडेय ने विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया। समाज कल्याण विभाग की ओर से अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग व अन्य वर्गों के छात्र-छात्राओं को निःशुल्क आवासीय सुविधा के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से 109 सर्वाेदय विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इन विद्यालयों में 85 प्रतिशत छात्र ग्रामीण व 15 प्रतिशत शहरी क्षेत्र से चयनित किये जाते हैं। इन विद्यालयों में 60 प्रतिशत अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति, 25 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग व 15 प्रतिशत सामान्य वर्ग के बच्चों को प्रवेश दिया जाता है।

प्रदेश के विकास ब्लू प्रिंट विकसित यूपी 2047 के संबंध में कार्यशाला आयोजित

भारत सरकार के नीति आयोग द्वारा विकसित राज्य फॉर विकसित भारत  2047’ कार्यक्रम के अंतर्गत आज योजना भवन में “विकसित यूपी 2047” विषय पर एक उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को वर्ष 2047 तक एक विकसित, समावेशी और आत्मनिर्भर राज्य के रूप में स्थापित करने हेतु रणनीतिक विकास ब्लू प्रिंट तैयार करना है।कार्यशाला की अध्यक्षता नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी वीवीआर सुब्रह्मण्यम् ने की। कार्यशाला में नीति आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने “विकसित भारत 2047” के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के तहत उत्तर प्रदेश के विकास मार्गों और प्राथमिकताओं पर व्यापक चर्चा की।कार्यशाला में प्रदेश के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह एवं विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। अधिकारियों के साथ मिलकर नीति आयोग के विशेषज्ञों ने विभिन्न क्षेत्रों-जैसे बुनियादी ढांचा, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, ऊर्जा, डिजिटल गवर्नेंस और पर्यावरण के संबंध में उत्तर प्रदेश के लिए विकास की संभावनाओं और चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया। साथ ही अन्य अग्रणी राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश और गुजरात द्वारा तैयार किए गए विजन डॉक्यूमेंट्स को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया, ताकि उत्तर प्रदेश भी एक ठोस और प्रभावशाली दीर्घकालिक योजना तैयार कर सके।प्रमुख सचिव नियोजन आलोक कुमार ने कहा कि विकसित भारत का संकल्प उत्तर प्रदेश को विकसित किए बिना संभव नहीं। उत्तर प्रदेश की भौगोलिक स्थिति लगभग सभी प्रकार के औद्योगिक विकास के लिए अनुकूल है। हमें अपनी क्षमता वर्धन करना होगा ताकि निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने में कोई कठिनाई ना आए। हमारा स्पष्ट विज़न ही विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश के सपने को साकार करेगा।कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य राज्य के विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर एक साझा विजन के तहत उत्तर प्रदेश को वर्ष 2047 तक विकसित राज्यों की श्रेणी में लाना है। यह पहल उत्तर प्रदेश सरकार की दूरदर्शिता और नीति आयोग के सहयोग का एक सशक्त उदाहरण है, जो राज्य के समग्र विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

जलशक्ति मंत्री ने किया भूजल सप्ताह का  शुभारम्भ

प्रदेश के जल शक्ति मंत्री  स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि जल एक अनमोल प्राकृतिक संसाधन है, जिसके बिना जीवन की कल्पना असंभव है। जैसे-जैसे आवश्यकताएं बढ़ीं, वैसे-वैसे जल संसाधनों का अत्यधिक दोहन हुआ, जिससे प्रदेश के कई क्षेत्रों में भूजल स्तर में चिंताजनक गिरावट दर्ज की गई है। जलशक्ति मंत्री ने यह विचार आज यहां गोमती नगर स्थित मरीन ड्राइव पर ‘भूगर्भ जल विभाग, उत्तर प्रदेश’ एवं ‘क्लाइमेट पर चर्चा संस्थान’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘भूजल सप्ताह’ के शुभारंभ के अवसर पर व्यक्त किए। कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं, पर्यावरण प्रेमियों, समाजसेवियों के साथ सहभागिता की। उन्होंने इस अवसर पर जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा पर केंद्रित प्रेरणादायी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। जन जागरूकता हेतु प्रारंभ किए गए विशेष अभियानों  ‘मिशन नीर रक्षक एवं परिवर्तन की मशाल मार्च’ को फ्लैग ऑफ किया। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेशभर में 16 जुलाई से 22 जुलाई तक भूजल सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य आमजन को जल संरक्षण एवं भूजल प्रबंधन के प्रति जागरूक करना है। जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह की उपस्थिति में भूजल सप्ताह के उद्घाटन समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में स्कूली छात्र-छात्राओं एवं स्वयंसेवकों ने जल सुरक्षित तो कल सुरक्षित की भावना को आत्मसात करते हुए जल संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया। ‘मानव जल बूँद संरचना’ एवं ‘परिवर्तन की मशाल’ जैसी प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से उन्होंने समाज में सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया।जलशक्ति मंत्री ने बताया कि प्रदेश में लगभग 70 प्रतिशत  सिंचाई, 80 प्रतिशत पेयजल आपूर्ति और 85 प्रतिशत उद्योगों की आवश्यकताएं भूजल से ही पूरी की जाती हैं। वर्ष 2000 में 20 विकासखण्ड अतिदोहित श्रेणी में थे, जो अब बढ़कर 95 हो चुके हैं, जबकि सुरक्षित विकास खण्डों की संख्या घटकर 566 रह गई है।स्वतंत्र देव सिंह ने भूजल संरक्षण की दिशा में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए मिशन नीर रक्षक 1000 नल, 100 घंटे, रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग की अनिवार्यता, उत्तर प्रदेश भू-गर्भ जल प्रबंधन एवं विनियमन अधिनियम-2019 के क्रियान्वयन, भूजल प्रबंधन पोर्टल की स्थापना और जिला भूजल प्रबंधन परिषदों की सक्रियता जैसे नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए कैच द रेन अभियान की सराहना करते हुए कहा कि यह अभियान वर्षा जल संचयन को जन-आंदोलन में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।श्री सिंह ने अटल भूजल योजना के अंतर्गत बुंदेलखंड समेत 10 जनपदों के 26 विकासखण्डों में चल रही भूजल प्रबंधन परियोजना का भी उल्लेख किया, जिसमें 550 ग्राम पंचायतों में व्यापक जनसहभागिता के साथ ‘वॉटर सिक्योरिटी प्लान’ तैयार कर जल की खपत कम करने और संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। अपने प्रेरणादायी समापन वक्तव्य में मंत्री जी ने सभी से अपील की कि वे भूजल संरक्षण को अपनी सामूहिक जिम्मेदारी मानते हुए इसके संरक्षण व संवर्धन में भागीदार बनें। उन्होंने कार्यक्रम के अंत में सभी सहभागियों, छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, स्वयंसेवकों एवं अधिकारियों का आभार व्यक्त किया और सभी से अपील की कि वे जल संरक्षण के इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाएं।

Aaj National

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