LUCKNOW: 10 प्रतिशत की दरों में रिबेट को आगे बढ़ाया जाए,क्लिक करें और भी खबरें

-नोएडा पावर कंपनी केवल लाभ कमा रही, अनुबंध तत्काल किया निरस्त जाए

  • REPORT BY:PREM SHARMA || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के तत्वाधान में आज नोएडा पावर कंपनी में बिजली दर की सुनवाई संपन्न हुई। नियामक आयोग अध्यक्ष अरविंद कुमार व सदस्य संजय कुमार सिंह की उपस्थिति में सुनवाई शुरू हुई। नोएडा पावर कंपनी के प्रबंध निदेशक द्वारा अपना प्रस्तुतीकरण किया गया। नोएडा पावर कंपनी के अंतर्गत किसानों का गुस्सा काफी देखने को मिला उनका मानना है कि यहां पर फ्री बिजली का लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। उपभोक्ता परिषद में कहां नोएडा पावर कंपनी का एग्रीमेंट समाप्त हो गया। लेकिन उसके द्वारा विधिक विवाद पैदा करके उसे आगे बढ़ाया गया वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा लड़ रही है। इसलिए तत्काल इसके एग्रीमेंट को समाप्त किया जाए। नोएडा पावर कंपनी को पक्षिमंचल को वापस किया जाए।

प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की तरफ से अपनी बात रखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा नोएडा पावर कंपनी का एग्रीमेंट 1993 में राज्य सरकार द्वारा किया गया। उसके बाद से ही नोएडा पावर कंपनी ने सभी अनुबंधों का उल्लंघन करते हुए केवल लाभ कमाया है। निजीकरण का यह प्रयोग किसी भी प्रकार से ग्रेटर नोएडा के उपभोक्ताओं के हित में नहीं है।नोएडा पावर कंपनी ने केवल लाभ कमाया है। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा नोएडा के उपभोक्ताओं को जो 10 प्रतिशत की रिबेट मिल रही है वह अगले वर्षों में भी लागू रहनी चाहिए। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद में एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि नोएडा पावर कंपनी में बड़ा भ्रष्टाचार का धंधा चल रहा है। ट्रांसफार्मर खरीद में इनके एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर जो कोलकाता में बैठते हैं। उनके द्वारा जो भी ट्रांसफार्मर के निर्माता कंपनी व वेंडर है उनसे करोड़ों रुपए की सीधे कैश में मांग की जाती है। कहां जाता है कि टेंडर में ऊंची दर आप भरकर उसका हिसाब बराबर कर ले। इसका खुलासा उपभोक्ता परिषद ने करते हुए कहा इसकी जानकारी उपभोक्ता परिषद को नोएडा पावर कंपनी के ही वेंडर द्वारा गोपनीय तरीके से की गई है। उपभोक्ता परिषद ने कहा क्योंकि मामला बड़े भ्रष्टाचार का और लेनदेन का है इसकी सच्चाई का खुलासा तभी हो सकता है कि जब नोएडा पावर कंपनी के इस प्रकार के भ्रष्टाचार की सीबीआई या ईडी से जांच कराई है। नोएडा पावर कंपनी की वेबसाइट से यह बात सिद्ध भी होती लग रही है लगातार पावर ट्रांसफार्मर और वितरण ट्रांसफार्मर का टेंडर जारी किया जाता है। इसके बाद लगातार उसकी निरस्त करते है फिर आगे टेंडर की डेट बढ़ाई जाती है। इससे या प्रतीत होता है कि जो शिकायतें आ रही है वह सही है। मल्टी स्टोरी परिसर में रहने वाले उपभोक्ताओं ने बड़े पैमाने पर रखी अपनी बात कहां बिल्डर लगातार करते हैं उत्पीड़न कोई सुनने वाला नहीं। उनका बिल अनाज-आप बनाया जाता है। नियामक आयोग के आदेश के बाद भी आज तक वेबसाइट नहीं बनी जो गंभीर मामला है। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा उनकी समस्या बहुत जायज है। इस पर विद्युत नियामक आयोग संगत कदम उठाए साथी डूब क्षेत्र में बड़े पैमाने पर उपभोक्ता बिजली कनेक्शन को लेकर परेशान है इस पर भी विचार करना होगा।

सघन अतिक्रमण विरोधी अभियान,हटाए अवैध कब्जे

लखनऊ। शहर में लगातार मिल रही अतिक्रमण संबंधी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए महापौर  सुषमा खर्कवाल के निर्देश एवं नगर आयुक्त  गौरव कुमार के आदेशानुसार बुधवार को लखनऊ नगर निगम द्वारा एक साथ कई जोनों में सघन अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया गया। इन अभियानों का नेतृत्व संबंधित जोनों के जोनल अधिकारियों ने किया, जिसमें सड़क, फुटपाथ और सार्वजनिक स्थलों से अस्थायी अवैध कब्जों को हटाया गया तथा अतिक्रमणकारियों को सख्त चेतावनी दी गई।

जोन-05 क्षेत्र के अंतर्गत चारबाग मेट्रो स्टेशन के नीचे और आस-पास के क्षेत्रों में अतिक्रमणकारियों द्वारा किए गए अवैध कब्जों को हटाने के लिए नगर निगम की टीम ने अभियान चलाया। इस दौरान 06 काउंटर, 02 गुमटी, 12 ठेले हटाए गए तथा 01 ठेला जब्त किया गया। निगम द्वारा इन अतिक्रमणकारियों को पुनः ऐसा न करने की चेतावनी दी गई।जोन-06 में आईजीआरएस शिकायत के आधार पर वार्ड कल्याण सिंह के मोहल्ला बर्फ खाना एवं मोहान रोड नहर से आगरा एक्सप्रेस वे तक के क्षेत्र में अवैध अस्थाई अतिक्रमण हटाया गया। इस दौरान 20 ठेले, 10 फ्लैक्स बोर्ड, 15 अस्थाई दुकानें हटवाई गईं। साथ ही 10 टायर, 5 फ्लैक्स बोर्ड, 5 प्लास्टिक स्टूल, 3 लोहे के स्टूल जब्त किए गए।

उड़ीसा में निजीकरण का प्रयोग दोबारा फेल,उत्तर प्रदेश में निजीकरण न थोपने की अपील

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से अपील की है कि उड़ीसा में निजीकरण के प्रयोग के दोबारा विफल हो जाने के बाद उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण के इस असफल प्रयोग को गरीब जनता पर न थोपा जाय । निजीकरण के विरोध में आज लगातार 231 वें दिन प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर विरोध सभाओं का क्रम जारी रहा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के केंद्रीय पदाधिकारियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से अपील की है कि वह बिजली सेक्टर में निजीकरण के असफल प्रयोग को उत्तर प्रदेश की गरीब जनता पर थोपने की इजाजत न दे और निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल रद्द करने का निर्देश दें।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि उड़ीसा विद्युत नियामक आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए टाटा पावर की चारों कंपनियों को उनकी उपभोक्ता सेवाओं के प्रति विफलता को देखते हुए विगत 21 जून को नोटिस जारी किया था। टाटा पावर की चारों कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को नोटिस जारी कर उड़ीसा विद्युत नियामक आयोग ने उपभोक्ता सेवाओं में कोताही के मामले में 15 जुलाई को सफाई देने के लिए बुलाया था। 15 जुलाई को टाटा पावर की चारों कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विद्युत नियामक आयोग को कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए। अंततः उड़ीसा विद्युत निगम आयोग ने 15 जुलाई को यह निर्णय दिया कि अगले एक महीने के अंदर टाटा पावर की चारों कंपनियों की उपभोक्ता सेवाओं के प्रति कोताही और अक्षमता के मामले पर अब जनसुनवाई की जाएगी। उड़ीसा की चारों विद्युत वितरण कंपनियों के क्षेत्र में जाकर विद्युत नियामक आयोग टाटा की चारों कंपनियों के परफॉर्मेंस के बारे में आम जनता से राय लेगा। इसके पूर्व स्वतरू संज्ञान लेते हुए उड़ीसा विद्युत नियामक आयोग ने टाटा पावर की चारों कंपनियों को नोटिस दिया था। नोटिस में कहा गया था कि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 के सेक्शन 43 में यह लिखा है कि पूरी तरह से सही आवेदन देने के बाद उपभोक्ता को एक माह के अंदर बिजली का कनेक्शन मिल जाना चाहिए। ऐसी शिकायतें आम है कि एक किलो वाट के गरीब उपभोक्ताओं को टाटा पावर कनेक्शन देने में कोताही कर रहा है।उड़ीसा विद्युत नियामक आयोग ने अपनी नोटिस में लिखा था उड़ीसा विद्युत नियामक आयोग (आपूर्ति की शर्तें) कोड 2019, उड़ीसा विद्युत नियामक आयोग (स्टैंडर्ड और परफॉर्मेंस) रेगुलेशन 2004 के अंतर्गत इस बात का प्राविधान है कि विद्युत वितरण कंपनी बिजली की बढ़ती हुई माँग की दृष्टि से बिजली के इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करेगी और इसका विस्तार करेगी किंतु टाटा पॉवर द्वारा ऐसा कुछ भी नहीं किया जा रहा है। नए कनेक्शन और टेंपरेरी कनेक्शन टाटा पावर की दया पर निर्भर हो गए हैं। यहां तक की एचटी फीडर पर वोल्टेज का बहुत ज्यादा उतार चढ़ाव हो रहा है।संघर्ष समिति ने बताया कि उड़ीसा देश का ऐसा पहला प्रांत है जहां पूरे प्रांत का निजीकरण 1999 में किया गया था। निजीकरण का प्रयोग उड़ीसा में पूरी तरह विफल रहा। अमेरिका की एईएस कंपनी एक साल में ही भाग गई। इस कंपनी ने चक्रवात के बाद बिजली का ध्वस्त हो गया ढांचा बनाने से इनकार कर दिया। तीन अन्य कंपनियों का वितरण लाइसेंस रिलायंस के पास था। उड़ीसा के विद्युत नियामक आयोग ने फरवरी 2015 में पूरी तरह अक्षम और असफल रहने के चलते इन तीनों कंपनियों का वितरण का लाइसेंस रद्द कर दिया था। कोरोना के दौरान 2020 में उड़ीसा की चारों विद्युत वितरण कंपनियों का लाइसेंस टाटा पावर को दे दिया गया। अब उड़ीसा विद्युत नियामक आयोग ने स्वतरू संज्ञान लेते हुए इन चारों कंपनी को पूरी तरह अक्षम रहने के कारण नोटिस जारी किया है और इनके परफॉर्मेंस पर अगले एक माह में जनसुनवाई का आदेश जारी कर दिया है।संघर्ष समिति ने उम्मीद जताई कि उड़ीसा के मामले में उड़ीसा विद्युत नियामक आयोग के फैसले को देखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ निजीकरण का फैसला निरस्त करने का निर्देश देंगे और प्रदेश की जनता को लालटेन युग में नहीं जान देंगे।

निधि नारंग का चौथी बार सेवा विस्तार न देने की अपील

पावर कारपोेरेशन में निजीकरण की पैरोकारी करने वाले निधि नारंग को चौथी बार सेवा विस्तार की सम्भावना को देखते हुए संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से सेवा विस्तार न दिये जाने की अपील की है।
संघर्ष समिति की तरफ से संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि यह जानकारी मिली है कि निदेशक वित्त  निधि नारंग का कार्यकाल 06 माह बढ़ाने के लिए पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष ने शासन को प्रस्ताव भेजा है। निधि नारंग का कार्यकाल पहले ही तीन बार बढ़ाया जा चुका है।यदि अब  निधि नारंग का कार्यकाल बढ़ता है तो यह उन्हें चौथा सेवा विस्तार होगा। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने इस पर गहरी आपत्ति जताते हुए कहा है कि निधि नारंग की अवैध ढंग से नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन के साथ मिली भगत है और केवल निजीकरण करने के लिए निधि नारंग का कार्यकाल अब चौथी बार बढ़ाया जा रहा है। संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि वह निजीकरण के नाम पर निदेशक वित्त निधि नारंग के कार्यकाल को चौथी बार बढ़ाई जाने को अनुमोदन न दें।

महासंघ का आरोप, निदेशालय में नही हो रहा पत्रावलियों का निस्तारण

स्थानीय महासंघ ने आरोप लगाया है कि स्थानीय निकाय निदेशालय में निगमों एवं निकायों से मेडिकल की जो पत्रावलियॉ भेजी जा रहा है उनका समय से निस्तारण नही किया जा रहा है। इसके कारण कार्मिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
महासंघ के अध्यक्ष शशि कुमार मिश्रा ने बताया कि प्रदेश के सेवानिवृत्त व सेवारत निकाय कर्मचारियो व उनके आश्रित जनो की मेडिकल प्रतिपूर्ति की पत्रावलियां जो विभिन्न नगर निगमो व निकायो से निदेशक स्थानीय निकाय निदेशालय स्वीकृत हेतु भेजी जाती है,परन्तु उनका समयबद्ध निस्तारण नही हो रहा.जिससे कर्मचारी व उसका परिवार समय से ईलाज नही करा पा रहा है,जो बहुत ही खेद का विषय है। यह शिकायत बहुत सी निकायो के कर्मचारियो द्वारा महासंघ को भेजी जा रही,जिसके निस्तारण हेतु अपर निदेशक स्थानीय निकाय  रितु सुहास और निदेशालय के सम्बंधित पटल सहायको को अनेको बार अवगत कराने के बाद भी यथावत मेडिकल प्रतिपूर्ति के प्रकरण आज भी लगभग 6-6 माह से लम्बित हैै। इनमें नगर निगम आगरा,लखनऊ ,मथुरा-वृंदावन, मेरठ आदि के कई मामले लम्बित है। महासंघ प्रमुख सचिव नगर विकास व निदेशक,सचिव नगर विकास, अपर निदेशक स्थानीय निकाय उ.प्र.शासन से अनुरोध करता है कि उपरोक्त प्रकरण का निस्तारण समयबद्ध कराने के सम्बंधित को आदेशित करने का कष्ट करे,अन्यथा महासंघ इस प्रकरण पर बहुत जल्द निदेशालय स्तर पर धरना-प्रदर्शन, आन्दोलन करने हेतु वाध्य होगा।

 

Aaj National

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