-बोले,कोई और होता तो अच्छे से जवाब देते,समाजवादी पार्टी और लोकतंत्र, यह नदी के दो अलग- अलग छोर -योगी
-नेता प्रतिपक्ष कें कंधे पर रखकर चला रहे बंदूक,नाखुश सपा सदस्यों का हंगामा,बेल में आकर की नारेबाज़ी, धरने पर बैठे
- REPORT BY:K.K.VARMA || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ।यूपी विधानमंडल मानसून सत्र की शुरुआत हो गई है। सोमवार को विधानसभा में सदन की कार्रवाई शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने गोरखपुर के विरासत गलियारे का मुद्दा उठाते हुए वहां कुछ लोगों द्वारा खुद को रोके जाने और अभद्र व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया।सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसका जवाब दिया। इसके बाद सपा सदस्य नारेबाजी करते हुए विरोध जताने लगे। सत्र की शुरुआत होने से पहले भी सपा विधायकों ने परिसर में नारेबाजी की थी। कानून व्यवस्था, महंगाई, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवा सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर समाजवादी पार्टी के सदस्य हाथों में तख्तियां लेकर विधानमंडल परिसर में पहुंचे।गोरखपुर में विरासत गलियारा प्रोजेक्ट को लेकर सीएम योगी ने सदन में बैठे सपा के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय को निशाने पर लिया।
सीएम ने उनसे मुखातिब होते हुए बिना अखिलेश का नाम लिए कहा कि आपके कंधे पर बंदूक रखकर निशाना साधा जा रहा है। सरकार व्यापारियों को मुआवजा देगी।वे 3 दिन पहले विरासत गलियारे का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने हर व्यापारी से बातचीत की थी। गोरखपुर की वह सबसे प्राचीन मंडी है, सबसे पुराना बाजार है।अवैध कब्जा होने के कारण गलियारा बहुत संकरा हो गया है। समाजवादी पार्टी और लोकतंत्र, यह नदी के दो अलग- अलग छोर हैं। लोकतंत्र की बात इनके मुंह से शोभा नहीं देता है।संभल में जो नग्न तांडव जो सपा सरकार ने किया था। इस समय जब वहां शुद्धिकरण का अभियान चल रहा है, उसमें हवन डालना है तो ठीक है लेकिन नकारात्मक तरीके से उसके विकास को रोका जा रहा है।बहराइच हो, संभल हो या गोरखपुर, समाजवादी पार्टी यही करती है।
सीएम ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के आरोप पर जवाब देते हुए कहा कि सपा और लोकतंत्र नदी के दो छोर हैं।ये शब्द समाजवादी पार्टी के नेताओं के मुंह से शोभा नहीं देते हैं।समाजवादी पार्टी नेताओं ने नकारात्मकता से कई ज़िलों के विकास को रोकने का काम किया है।नेता प्रतिपक्ष के कंधे पर बंदूक रखकर कुछ लोग चलाने की कोशिश कर रहे हैं।जिस इलाक़े में दुकानें तोड़ने का आरोप लगाए जा रहे हैं, वो गोरखपुर का सबसे पुराना बाज़ार है और वहां भीषण अवैध क़ब्ज़ा है।हमने दुकानदारों से बात करके सबको मुआवज़ा देने का आश्वासन दिया है।सपा शासन ने विकास कराया नहीं गया और अब आरोप लगाये जा रहे हैं।सपा शासन में भय और दहशत का माहौल था. नेपा प्रतिपक्ष विघ्न बढ़ा पैदा करने उस बाज़ार में गए थे, जिस वजह से वहां के दुकानदारों ने अपना विरोध दर्ज कराया था।सीएम योगी ने माता प्रसाद पांडेय से कहा कि आपकी जगह कोई और होता तो व्यापारी अच्छे से जवाब देते। योगी के बयान से नाराज़ समाजवादी पार्टी के विधायकों ने सदन में हंगामा शुरू कर दिया।विधानसभा अध्यक्ष ने प्रश्नकाल शुरू करते हुए सपा विधायकों से प्रश्न पूछने को कहा लेकिन सपा नेताओं ने सवाल पूछने से मना किया। 18 सदस्यों ने सवाल नही किया।विधानसभा के मानसून सत्र को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाजवादी पार्टी और लोकतंत्र एक ही नदी के दो अलग-अलग छोर हैं, उन्हें लोकतंत्र पर भरोसा कब से होने लगा? लोकतंत्र की बात करना उन्हें शोभा नहीं देता।
सीएम ने कहा,संभल में उन्होंने क्या किया, यह सबको पता है। संभल हो, बहराइच हो या गोरखपुर, सपा की करतूतों से सभी वाकिफ हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में कुछ नहीं किया. अगर एनडीए सरकार विकास करना चाहती है, तो समाजवादी पार्टी को बुरा लग रहा है। हम पूरे प्रदेश के व्यापारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।सपा शासन में गुंडा टैक्स लगाया जाता था, इसी वजह से व्यापारी आपसे नाराज़ हैं। समाजवादी पार्टी को इसका खामियाजा बार-बार भुगतना पड़ रहा है।व्यापारियों के विकास के लिए कदम उठाने के बजाय, सपा ने उनके रास्ते में रोड़े ही अटकाए हैं।समाजवादी पार्टी से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह सुरक्षा की बात करेगी और अच्छे विकास का समर्थन करेगी।
विधान परिषद सत्र शुरू, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सपा पर किया हमला
-समाजवादी पार्टी सिर्फ ‘हो-हल्ला’ पार्टी है-ब्रजेश
-विजन तो 2027 के बाद सत्ता में आने वाले तय करेंगे-पल्लवी
उत्तर प्रदेश विधान परिषद का सत्र शुरू हो गया है। पहले ही दिन उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला करते हुए कहा, समाजवादी पार्टी सिर्फ ‘हो-हल्ला’ पार्टी है, जिनके पास कुछ ठोस कहने को नहीं है।अगर विधानसभा में आते हैं तो उन्हें बोलना होगा, लेकिन उनके पास कोई सार्थक बात नहीं क्योंकि भाजपा सरकार ने सबके साथ मिलकर प्रदेश को विकास के मामले में नंबर 1 बनाया है। दूसरे डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, “जब अखिलेश यादव सत्ता में थे, उन्हें याद रखना चाहिए कि उनके कार्यकाल के दौरान विधानसभा कितने दिनों तक चली। आगामी 24 घंटे का ऐतिहासिक चर्चा सत्र ‘विकसित यूपी’ के विजन डॉक्यूमेंट पर बेहद महत्वपूर्ण है। अखिलेश यादव को प्रदेश के विकास में कोई रुचि नहीं है, वे केवल बयानबाजी में माहिर हैं।समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीयमहासचिव शिवपाल सिंह यादव ने जवाब में कहा कि हम वर्तमान में सत्ता में नहीं हैं, इसलिए हम अपने सहयोगी और समर्थकों के माध्यम से काम कर रहे हैं, जो शिक्षा और गरीब बच्चों के कल्याण में लगे हुए हैं। उधर कांग्रेस की विधायक अराधना मिश्रा मोना ने मानसून सत्र को तीन दिन और आधे दिन का संक्षिप्त सत्र बताते हुए कहा, विपक्ष बार-बार मांग कर रहा है कि उत्तर प्रदेश के 25 करोड़ लोगों की आवाज़ सदन में सुनी जानी चाहिए क्योंकि हम इसके लिए चुने गए हैं। अगर बाढ़, कानून व्यवस्था, स्कूल बंद, बच्चों का भविष्य, निजीकरण और युवाओं की बेरोजगारी जैसे मुद्दे इस सत्र में नहीं उठेंगे तो फिर किस बारे में चर्चा होगी? दूसरी ओर समाजवादी पार्टी की विधायक पल्लवी पटेल ने कहा,उत्तर प्रदेश सरकार विजन तय करने वाली कौन हैं? विजन तो 2027 के बाद सत्ता में आने वाले तय करेंगे। किस तरह से वे मान लेते हैं कि 2027 में यही लोग विजन तय करेंगे, यह उचित नहीं है।
विधान परिषद में गूंजा स्कूल में प्रवेश की आयु का मामला,लाल बिहारी यादव ने की सरकारी स्कूलों में प्रवेश की आयु तीन वर्ष करने की मांग
उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में नेता विरोधी दल लाल बिहारी यादव ने निजी व सरकारी स्कूलों में प्रवेश की आयु का मसला उठाया। उन्हाेंने कहा कि निजी स्कूल तीन साल में प्रवेश ले रहे हैं, जबकि सरकारी विद्यालय पांच साल में बच्चों को प्रवेश दे रहे हैं।ऐसे में अभिभावकों को दो साल का समय अधिक लगता है और वो निजी स्कूल की तरफ बढ़ जाते हैं। सरकार से इसे दूर करने और निजी व सरकारी स्कूलों में प्रवेश की आयु सीमा एक किए जाने की मांग करता हूं।विधान परिषद में स्कूलों के मर्जर को लेकर सवाल उठाते हुए लाल बिहारी यादव ने कहा कि शिक्षा समाज को आगे ले जाती है। जबकि भारतीय जनता पार्टी की सरकार संविधान के खिलाफ काम कर रही है। शिक्षा को संविधान की समवर्ती सूची में इसलिए रखा गया, क्योंकि इस पर सभी का समान अधिकार है। बच्चे 25 हो 50, विद्यालय बंद नहीं होने चाहिए। सरकार शिक्षा को व्यवसाय समझ कर बंद कर रही है। जबकि विद्यालय में यदि पांच बच्चे भी हैं तो उस पर सरकार को खर्च करना चाहिए।उन्होंने परिषदीय विद्यालयों में लागू एनसीईआरटी की पुस्तकों को लेकर कहा कि अनुदानित और सहायता प्राप्त विद्यालयों को तो किताबें मिल जाती हैं लेकिन काफी संख्या में बच्चे किताबों से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि निजी दुकानों पर भी किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित कराए।लाल बिहारी ने कहा, मदरसों को मिलने वाले अनुदान को सरकार ने बंद कर दिया है। फिर भी मदरसे चल रहे हैं। एक मुस्लिम अपनी आय का 10 फीसद जकात के लिए रखता है। उन जकात के पैसे से मदरसों का संचालन किया जाता है। इसके बावजूद सरकार उनकी जांच करा रही है। कहीं कहीं पर मानक से अधिक प्रवेश लिया जा रहा है। एक सेक्शन की आड़ में विद्यालय मानक से अधिक प्रवेश ले रहे हैं। बलिया का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वे बालिका विद्यालय गए तो वहां पर 4000 छात्राओं का प्रवेश हुआ था। इसलिए मानक से अधिक प्रवेश पर रोक लगाई जाए। उन्होंने कम्प्यूटर शिक्षा को भी अनिवार्य बनाये जाने की मांग रखी। वहीं विधान परिषद में सदस्य आशुतोष सिन्हा ने स्कूलों को बंद किये जाने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हमारे लोग बच्चों को शिक्षित करने के लिए पीडीए पाठशाला चला रहे हैं, तो हमारे कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।
