-भाजपा के बाहुबली ठाकुर नेता की अखिलेश से नजदीकी सपा के लिए फायदेमंद,सपा के बागी बीजेपी के पाले में ठोंक रहे ताल
- REPORT BY:K.K.VARMA || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
राजनीतिक गर्माहट बढ़ गई है।सत्ता में हैट्रिक को बेताब बीजेपी हर मोर्चे पर रणनीति रच रही है तो समाजवादी पार्टी को सत्ता में वापसी की ख्वाहिश है। दोनों दलों के बीच बढ़ते सियासी तनाव के बीच एक नाम अचानक बृजभूषण शरण सिंह का सुर्खियों में आ गया।पूर्व सांसद बीजेपी के नेता बृजभूषण शरण सिंह अखिलेश के खिलाफ बीजेपी के हमलों पर ब्रेकर बनने का काम कर रहे हैं। जब अखिलेश को घेरने की कोशिश होती है तो बृजभूषण पक्ष में खड़े नजर आते हैं।सपा विधायक पूजा पाल के निष्कासन के बाद बीजेपी ने अखिलेश यादव को महिला और ओबीसी विरोधी करार देने की रणनीति बनाई। बीजेपी “पीडीए पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक गठजोड़ के खिलाफ उठाया गया कदम” बता रही थी। बृजभूषण ने कहा, “पूजा पाल पार्टी लाइन से बाहर गई, उनके खिलाफ कार्रवाई जायज है।”यह बयान बीजेपी की कोशिशों पर पानी फेरने से कम नहीं था। बृजभूषण ने कहा, अखिलेश के नेतृत्व में हर जाति को समान प्रतिनिधित्व मिलेगा, पीडीए किसी जाति विशेष की राजनीति नहीं, समावेशी सोच है। मैनपुरी में कथावाचकों की पिटाई के बाद बीजेपी ने अखिलेश यादव को “सनातन विरोधी” बताना शुरू किया। अखिलेश पर हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगा तो बृजभूषण शरण सिंह ने उन्हें “सच्चा हिंदू” बताया और कहा कि “अखिलेश भगवान कृष्ण के वंशज हैं।” उन्होंने याद दिलाया कि अखिलेश ने अपने कार्यकाल में मंदिरों के विकास के लिए कई योजनाएं दी थीं। पहली बार नहीं है, बृजभूषण ने अखिलेश का समर्थन किया है। 2009 में जब बृजभूषण के बीजेपी से संबंध बिगड़े, तब सपा ने ही उन्हें टिकट दिया और वे सांसद बने। उन्होंने स्वीकार किया है कि जब वे सपा में नहीं थे तब भी अखिलेश यादव ने देवीपाटन मंडल को 500 करोड़ की योजनाएं दीं। बृजभूषण शरण सिंह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मिले लेकिन कुछ खास नही रहा। पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोंडा, बलरामपुर, बहराइच जैसे जिलों में क्षत्रिय और ओबीसी समुदाय में बृजभूषण का गहरा प्रभाव है। अगर वे अखिलेश के पक्ष में रहे तो बीजेपी के परंपरागत वोट बैंक में सेंधमारी हो सकती है। 2027 में सपा का फोकस पीडीए के साथ ब्राह्मण-ठाकुर समीकरण साधने पर होगा।2027 का असेम्बली इलेक्शन बीजेपी बनाम सपा होगा,यह तो तय है।डबल इंजन की सरकार में किसानो का पुरसाहाल नही,खतौनी हाथ में लेकर भटक रहे किसान, मांगते खाद मिलते पुलिस के डंडे
-न खाद मिल रही ,न सिंचाई के लिए पानी,सरकारी दावे थोथे,घटेगी धान की पैदावार
खाद नही मिलेगी,खेतों तक पानी पहुंचेगा। दोगुनी तो दूर किसानों की धान की फसल की लागत भी नही निकलने के आसार बन रहे हैं।डबल इंजन की सरकार न किसानों को यूरिया और डीएपी खाद दे पा रही है और न नहरों में पानी।धान की फसल बिन पानी सब सून।खाद के लिए किसानों को डंडे खाने पड़ रहे हैं। कृषि महकमे के आला अधिकारी दफ्तर से बाहर निकल नही रहे हैं। सरकार का दावा है कि प्रदेश में खाद प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। यदि खाद की कमी नहीं है तो किसानों को मिल क्यों नहीं रही है।बाँदा जनपद के तिंदवारी रोड में किसानों ने खाद के लिए चक्का जाम किया।समाजवादी पार्टी की महिला सभा की राष्ट्रीय सचिव नीलम गुप्ता ने कहा भाजपा सरकार में किसान खाद की समस्या से जूझ रहा है और त्रस्त है। खाद का वितरण नहीं हो रहा है। खाद की कालाबाजारी हो रही है। खाद आती है तो जाती कहां। अगर बड़ा आंदोलन करना पड़ा तो समाजवादी पीछे नहीं हटेगी।बाराबंकी जिले में बहुत ही हालत खराब है। साधन सहकारी समितियों पर खाद की व्यवस्था की गई है मगर पात्र किसान पाते नही। कब आई कब खत्म, पता नहीं चल पाता है।रामसनेही घाट तहसील में भिटरिया, उमरापुर राय साहब, दिलोना ,महराजगंज समेत अधिकांश जगह खाद के लिए मारामारी मची है। पूरा पूरा दिन धूप में लाइन लगे रहते हैं किसान और आखिर में कह दिया जाता है कि खाद है नही या फिर खत्म हो गई है खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री सतीश शर्मा ने साफ कहा कि किसान खाद के लिए परेशान न होने पाये। अफसर स्वयं मॉनिटरिंग करें, लापरवाही बर्दाश्त नही की जायेगी। सहकारी समितियो पर खाद समुचित रूप से उपलब्ध हो और किसान निर्धारित रेट पर मिले।सरकार बराबर दावा कर रही है कि प्रदेश में न उर्वरक की कमी है न ही उन्नत किस्म के बीजों की।दावे हैं दावों का क्या,किये जाते हैं लेकिन धरातल पर हालात विषम और विपरीत हैं।न सहकारी समितियों पर पर्याप्त उर्वरक है और न ही खाद बीज के विक्रेताओं के पास पर्याप्त उर्वरक है। जिस भी दुकान पर खाद है, वो मनमानी कीमतों पर बेंच रहे हैं।निर्धारित दर पर बिक्री के केवल दावे किए जा रहे हैं।दुकानदार यूरिया के साथ कोई कीटनाशक या फिर जिंक अथवा कोई और रसायन जबरन महंगी दर पर बिना जरूरत खरीदने को मजबूर करते हैं। कृषि महकमे के आला ओहदेदार दफ्तरों से बाहर आने को राजी नहीं है। उर्वरक विक्रेताओं के यहां चेकिंग के नाम पर खानापूर्ति होती है। शिकायतें आती हैं जरूर लेकिन उन्हें तरजीह ही नही मिलती।सच यह है कि विभाग के जिम्मेदार हकीकत से वाकिफ हैं लेकिन मौन साधे रहते हैं। कालाबाजारी पर नियंत्रण नहीं है। प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही बराबर दौरे कर रहे हैं। कहते हैं कि प्रचुर मात्रा में खाद उपलब्ध है।केंद्र से भी सहयोग मांगने के लिए दिल्ली दौरा कर चुके हैं। आये दिन प्रतिष्ठानों और खाद की दुकानों की औचक चेकिंग भी करने जा पहुंचते हैं।लेकिन अफसर तो कालाबाजारी करने वालों पर मेहरबान है।कृषि मंत्री बहराइच दौरे पर बाढ़ प्रभावित लोगों से मिलने पहुंचे तो भी खाद की स्थिति की पड़ताल करने से नही चूके।उत्तर का शायद ही कोई जिला ऐसा हो जहां के किसानों को खाद की लाइन में घण्टो न लगना पड़ रहा हो।किसानों को पुलिस की लाठियां खाद के लिए खानी पड़े, यह तो चिंताजनक जरूर है।प्रदेश के दूरस्थ जिलों में हालत ज्यादा खराब है। शासन ने कहा है कि खतौनी देखकर खाद वितरण किया जाये।बावजूद इसके किसान परेशान हैं।सहकारी समितियों पर न जाने कब खाद आती है और कब खत्म हो जाती है।नेता प्रतिपक्ष विधानसभा माता प्रसाद पांडे तो साफ आरोप लगा रहे हैं कि सरकारी दावे झूठे हैं।किसान बदहाल हैं।लखनऊ ही नही बाराबंकी, सीतापुर, हरदोई, रायबरेली, लखीमपुर खीरी, उन्नाव, फतेहपुर, गोंडा, बहराइच,मिर्जापुर, सिद्धार्थनगर, बलिया, महराजगंज आदि में खाद की किल्लत किसानो को झेलनी पड़ रही है।यूपी सरकार और एफसीडीओ यूके के बीच “चिवनिंग-भारत रत्न श्री अटल बिहारी बाजपेयी उत्तर प्रदेश राज्य सरकार छात्रवृत्ति योजना” के लिए हुआ एमओयू
सरकार और द फॉरेन कामनवेल्थ एंड डेवलपमेंट ऑफिस एफसीडीओ यूके के मध्य “चिवनिंग-भारत रत्न श्री अटल बिहारी बाजपेयी उत्तर प्रदेश राज्य सरकार छात्रवृत्ति योजना” के संचालन हेतु समझौता ज्ञापन एमओयू हुआ है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि योजना का उद्देश्य प्रदेश के मेधावी छात्र छात्राओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर उपलब्ध कराना है। इसमें प्रत्येक वर्ष प्रदेश के पाँच प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का चयन कर उन्हें यूनाइटेड किंगडम के किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय में एक वर्षीय मास्टर डिग्री हेतु छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। छात्रवृत्ति शैक्षणिक वर्ष 2025-26 से प्रारम्भ होकर तीन वर्ष तक 2025-26, 2026-27 और 2027-28 संचालित होगी। 2028-29 से योजना को जारी रखने के लिए नवीनीकरण किया जाएगा। छात्रवृत्ति में पूर्ण शिक्षण शुल्क, परीक्षा एवं शोध शुल्क, रहने-खाने के लिए पर्याप्त मासिक भत्ता तथा निवास स्थान से यूके तक इकोनॉमी क्लास का एक बार आने-जाने का हवाई किराया सम्मिलित रहेगा। योजना अंतर्गत प्रति छात्र लगभग £38,048 से £42,076 पैंतालीस से अड़तालीस लाख रुपये के समतुल्य का व्यय होगा, जिसमें से लगभग £19,800 अर्थात 23 लाख रुपये उत्तर प्रदेश सरकार वहन करेगी, जबकि शेष राशि का निर्वहन द फॉरेन कामनवेल्थ एंड डेवलपमेंट ऑफिस एफसीडीओ यूके करेगा। भारत रत्न श्री अटल बिहारी बाजपेयी की प्रेरणा से आरम्भ की गई यह योजना प्रदेश के छात्रों को वैश्विक स्तर पर शिक्षा, शोध और नेतृत्व में उत्कृष्टता प्राप्त करने का अवसर देगी। उच्च शिक्षा मंत्री ने मेधावी विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे इस योजना का लाभ उठाकर उत्तर प्रदेश और देश का नाम रोशन करें।पुरातत्व अभिरूचि कार्यक्रम आज से
निदेशालय छतर मंजिल परिसर कैसरबाग में किया जा रहा है,जिसमें न केवल उत्तर प्रदेश से अपितु देश की विभिन्न प्रदेश यथा-मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, नई दिल्ली से लोगों ने सहभागिता के लिए पंजीकरण कराया है। अब तक 550 से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया है, किंतु अवसर प्रथम आगत प्रथम स्वागत के आधार पर 300 प्रतिभागियों को प्रतिभागिता के लिए आमंत्रित किया गया है। राज्य पुरातत्व निदेशक सुश्री रेनू द्विवेदी ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारम्भ 20 अगस्त को उपराह्न 03 बजे किया जायेगा। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं वक्ता डॉ राकेश तिवारी पूर्व महानिदेशक भारतीय पूरातत्व संरक्षण नई दिल्ली द्वारा किया जायेगा।ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कॉन्क्लेव 21 को,ग्रामीण पर्यटन से यूपी की प्रगति, समृद्ध गांव, सशक्त प्रदेश – जयवीर
है। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान आईजीपी में कॉन्क्लेव में पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विषेशज्ञों, फार्म स्टे और होम स्टे मालिकों, ग्रामीण एवं जिला समन्वयकों और गैर सरकारी संगठनों एनजीओ के प्रतिनिधियों की भागीदारी रहेगी। कॉन्क्लेव के विभिन्न सत्रों में प्रदेश में ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं, चुनौतियों और विभिन्न रणनीतियों पर विचार मंथन किया जायेगा। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने बताया कि ‘उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में एग्री टूरिज्म को नई पहचान दिलाने की दिशा में काम कर रही है। कृषि और पर्यटन क्षेत्र को जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने तथा किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से यह पहल की जा रही है। पर्यटन विभाग द्वारा फार्म स्टे, होम स्टे और ग्रामीण अनुभव यात्राओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है। ताकि, देश-विदेश से आने वाले पर्यटक ग्रामीण जीवनशैली, खेती-बाड़ी, जैविक कृषि और पारंपरिक खानपान से सीधे जुड़ सकें।उत्तर प्रदेश के ग्रामीण पर्यटन पर कॉन्क्लेव में विभिन्न सत्र होंगे। उद्घाटन सत्र के बाद तकनीकी सत्र को पांडुरंग तवरे श्एग्री टूरिज्मश् पर परिचर्चा को आगे बढ़ाएंगे। निवेश सत्र,निवेश सारथी के महाप्रबंधक पंकज अरोड़ा तकनीकी सत्र को संबोधित करेंगे। सामुदायिक आधारित पर्यटन सत्र में आनंद मल्लिगावाद लेक मैन अपने विचार रखेंगे। ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने एवं ग्रामीण पर्यटन को प्रोत्साहित करने को लेकर राउंड टेबल सेशन में स्टेकहोल्डर्स शामिल होंगे। ग्रामीण पर्यटन कॉन्क्लेव के समापन सत्र में विलेज वेज से जुड़ीं मनीषा पांडे सभी सत्रों का निष्कर्ष प्रस्तुत करेंगी। पर्यटन मंत्री ने बताया कि ‘आगामी कॉन्क्लेव में ग्रामीण पर्यटन को सशक्त बनाने पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना और पर्यटकों को प्रामाणिक ग्रामीण अनुभव उपलब्ध कराना है। ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से पर्यटकों को भारत की आत्मा को करीब से महसूस कराना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है।’ प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा, ‘उत्तर प्रदेश में ग्रामीण पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। विभाग समय-समय पर फैम ट्रिप्स और अन्य माध्यमों से प्रदेश के अनछुए पर्यटन स्थलों को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास करता रहा है। ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के 234 गांवों का चयन किया गया। पर्यटन नीति-2022 के तहत पर्यटन इकाइयों को सब्सिडी देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है। विश्वास है कि यह कॉन्क्लेव ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं को नया आयाम प्रदान करेगा।’लम्पी के संक्रमण से गोवंश के बचाव हेतु गोशालाओं की जाये व्यवस्थायें,एफएमडी एवं एलएसडी से पशुधन की सुरक्षा हेतु कराये पर्याप्त टीकाकरण-धर्मपाल
पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा है कि लम्पी रोग के संक्रमण से गोवंश के बचाव हेतु अधिकारी पूरे प्रदेश के गोशालाओं का
नियमित निरीक्षण कर आवश्यक व्यवस्थायें करें। एफएमडी एवं एलएसडी से पशुधन की सुरक्षा हेतु पर्याप्त टीकाकरण कराए। महराजगंज, सोनभद्र, कुशीनगर, भदोही, बलिया, गाजीपुर, चन्दौली एवं वाराणसी जनपदों मेें 10 किमी चौड़ी बेल्ट बनाकर लम्पी रोग से गोवंश के बचाव हेतु वैक्सीनेशन कार्य अभियान के रूप में संचालित किया जाए। जिन क्षेत्रों से लम्पी रोग के संक्रमण की सूचना प्राप्त हो वहां बार्डर सील करके गोवंश का आवागमन प्रतिबंधित किया जाए। लम्पी रोग के संबंध में पशुपालन निदेशालय में स्थापित कन्ट्रोल रूम में टोलफ्री नम्बर-1800 1805 141 पर प्राप्त शिकायतों पर तत्काल कार्यवाही की जाए। पशुधन मंत्री ने आज विधान भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में लम्पी रोग से बचाव एवं नियंत्रण के संबंध में उच्च स्तरीय बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को सख्त रूप से निर्देशित किया कि एलएसडी और एफएमडी के टीकाकरण एवं उपचार के कार्यों में कोई कमी न हो और गोवंश की हानि न होने पाए। जनपदों में वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और टीकाकरण का कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए। गोशालाओं में कोई गाय भूखी न रहे और चारा, भूसा, पानी, औषधि की पर्याप्त व्यवस्था की जाए। लम्पी रोग के संक्रमण की रोकथाम के लिए उपचार, टीकाकरण एवं जनजागरूकता कार्य तीव्र गति से कराया जाए। उन्होंने वैक्सीनेशन कार्य, गोआश्रय स्थलों, गोसंरक्षण केन्द्रों के सैनेटाइजेशन एवं स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
प्रमुख सचिव व्यावसायिक शिक्षा ने नवनियुक्त अनुदेशकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का किया निरीक्षण
कैपेसिटी बिल्डिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम का मंगलवार को प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने निरीक्षण किया। उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे नवनियुक्त अनुदेशकों को संबोधित करते हुए प्रशिक्षण की गुणवत्ता, कौशल तकनीक एवं उद्यमशीलता को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया। प्रशिक्षकों को इस प्रकार प्रशिक्षित किया जाए कि वे आने वाले समय में प्रशिक्षार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक बनें।संस्थान के निदेशक प्राविधिक ने अपने वक्तव्य में संस्थान में संचालित विभिन्न व्यवसायों एवं प्रशिक्षण गतिविधियों की जानकारी दी और बताया कि प्रशिक्षक अपने-अपने संस्थानों में प्राप्त ज्ञान का प्रयोग कर व्यापक रूप से प्रशिक्षार्थियों को लाभान्वित कर सकते हैं।इस अवसर पर आरडीएटी कानपुर के उपनिदेशक राहुल प्रियदर्शी एवं राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान अलीगंज लखनऊ के प्रधानाचार्य राजकुमार यादव ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की सराहना की और कहा कि प्रशिक्षण से प्राप्त जानकारी को संस्थानों में क्रियान्वित कर अधिकाधिक लाभार्थियों तक पहुँचाया जाएगा।कार्यक्रम में संस्थान की उपनिदेशक एवं सहायक निदेशक उपस्थित रहीं। अतिथियों को मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया।प्राकृतिक खेती के क्लस्टरों की नियमित करें निगरानी, लापरवाही पर होगी कार्यवाही –शाही
जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से किया जाए, नियमित निरीक्षण किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि लापरवाही पाए जाने पर अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जाए। कृषि मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरता और जल संरक्षण होगा तथा किसानों को जैविक उत्पादों की बाजार में अच्छी कीमत प्राप्त होगी। उन्होंने कृषकों से आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण और संसाधन केंद्रों का लाभ उठाकर प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपने खेतों में लागू करें।कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख ने कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण का सशक्त माध्यम है, इसे मिशन मोड में आगे बढ़ाया जाए।बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 75 जनपदों एवं 318 विकासखण्डों में 1886 क्लस्टरों का गठन किया जा चुका है। अब तक 3772 कृषि सखी सीआरपी का चयन और प्रशिक्षण हुआ है। क्लस्टर स्तर पर 1886 जागरूकता कार्यक्रम और 318 ओरिएन्टेशन कार्यक्रम सम्पन्न कराए गए हैं। मिशन के अंतर्गत 2.20 लाख कृषक प्रशिक्षित हो चुके हैं। किसानों से 82 हजार से अधिक मृदा नमूने लिए गए हैं। 38 स्थानीय प्राकृतिक खेती संस्थान (एलएफएनआई) से 38 मॉडल फार्म विकसित किए गए हैं तथा 199 वैज्ञानिक, फार्मर मास्टर ट्रेनर एवं 120 विभागीय अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया है। केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी में वैज्ञानिकों एवं फार्मर मास्टर ट्रेनरों का विशेष प्रशिक्षण आयोजित हुआ।इस बैठक के तुरंत बाद कृषि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की निर्माण परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में टीश्यू कल्चर लैब, ऑडिटोरियम, इनक्यूबेशन सेंटर, ऑर्गेनिक लैब तथा अन्य निर्माण प्रस्तावों की प्रगति पर चर्चा की गई।कृषि मंत्री ने निर्देश दिया कि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को केवल बुनियादी ढाँचे के निर्माण तक सीमित न रहकर रिसर्च आधारित प्रोजेक्ट प्रस्तुत करने होंगे। प्रत्येक कृषि विश्वविद्यालय को अपना आगामी वर्षों का विज़न डॉक्यूमेंट तैयार करना चाहिए, जिसमें यह स्पष्ट हो कि वे आने वाले समय में किस दिशा में अनुसंधान करेंगे और उसका प्रत्यक्ष लाभ किसानों को कैसे मिलेगा।माटी से युवा निखार रहे है हुनर,माटी कला में महिलाओं के लिए रोजगार कम नहीं-गोला
माटी कला बोर्ड अध्यक्ष ओम प्रकाश गोला ने बताया कि माटी आज सोना हो रही है। शिक्षित युवा माटी से अपने हुनर को निखार रहे हैं। युवा
यदि माटी कला कारोबार शुरू करना चाहते है तो उन्हें खादी ग्रामोद्योग द्वारा 25 प्रतिशत का अनुदान के साथ 10 लाख रुपये तक का लोन मुहैया कराया जाता है। पढ़े लिखे युवा इस क्षेत्र से अपना कैरियर सवार रहे हैं। माटी कला में महिलाओं के लिए रोजगार कम है? ऐसा नहीं है दो साल पहले विभाग से 1,84,000 रुपये की सहायता दी गयी थी। आज वे 10- 10 अन्य महिलाओं को रोजगार दे रही हैं। मिट्टी के बर्तन बनाने की मशीनें, पॉपकॉर्न बनाने की मशीनें और दोना-पत्तल निर्माण एवं दिये बनाने की मशीनें महिलाओं को दी जा रही है। गत वर्ष 3,000 विद्युत चालित चाक, 375 पगमिल मशीनों का वितरण किया गया । 300 नई इकाइयों की स्थापना, 4,800 लाभार्थियों को प्रशिक्षण और एक कॉमन फैसिलिटी सेंटर की स्थापना की गई है। 81 दीया मेकिंग , 31 पेंटिंग मशीनें और 15,832 विद्युत चालित चाक का वितरण किया गया था। माटीकला बोर्ड द्वारा 48,048 कारीगर परिवारों की पहचान की गई है जिन्हेें प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोडऩे का अभियान जारी है।कुम्हारों के लिए मिट्टी की किल्लत खत्म करने के लिए 32,593 कारीगरों को मिट्टी खोदने के लिए पट्टे वितरित किए गए हैं। सरकारी कार्यालयों ने कांच एवं प्लास्टिक की जगह माटी के बर्तनों का उपयोग के लिए निर्देश दिये गये हैं। इसके अलावा माटी कला मेला त्यौहारों के समय मण्डल स्तर पर लगाया जा रहा है, जिसे इस बार जिला स्तर पर करने की योजना है। पूर्व की सरकारों में माटी कला मृत प्राय हो रही थी। मुख्यमंत्री द्वारा जुलाई 2018 में माटी कला बोर्ड के गठन के बाद मशनीकरण को बढ़ावा दिया गया जिससे जो कारीगर दिन भर में 100 दिये भी नहीं बना पाते थे, वह आज 2000 तक दिये बना रहे है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार एवं कुटीर उद्योगों को बढ़ावा मिला।मशीन के जरिये लोग समूह में माटी के उत्पाद तैयार कर रहे हैं।
