-भ्रष्टाचार के आरोपों से मचा हड़कंप,व्यवस्था पर उठे सवाल
- REPORT BY:A.S.CHAUHAN || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS
लखनऊ। सरोजनीनगर तहसील क्षेत्र में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। राजस्व ग्राम सभा नूर नगर भदरसा की मूल्यवान सरकारी भूमि पर एल्डिको शौर्य नामक इकाई का कब्जा बना हुआ है, जिसकी पुष्टि खुद राजस्व विभाग ने करीब डेढ़ वर्ष पूर्व कर दी थी। सूत्रों के अनुसार, कई बार भूमि खाली कराने के आदेश जारी किए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। इस मामले ने न केवल स्थानीय स्तर पर विवाद पैदा किया है, बल्कि भू-माफियाओं और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।शिकायतकर्ता दिनेश सिंह ने सरोजनीनगर तहसील प्रशासन पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का सीधा आरोप लगाया है। उनका दावा है कि तहसील प्रशासन भू-माफियाओं के साथ सांठगांठ में है, जिसके कारण सरकारी आदेशों की अनदेखी की जा रही है। दिनेश सिंह ने कहा है कि मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के बावजूद भू-माफिया बेखौफ होकर सरकारी जमीनों पर कब्जा जमाए हुए हैं। तहसील दिवस पर आने वाली शिकायतों को भी नजरअंदाज किया जा रहा है, जो प्रशासन की मिलीभगत को उजागर करता है।स्थानीय नागरिकों का भी यही कहना है कि सरोजनीनगर तहसील प्रशासन के संरक्षण में भू-माफिया फल-फूल रहे हैं। एक स्थानीय निवासी ने नाम न लिखने की शर्त पर बताया कि यह क्षेत्र शहर के करीब होने से जमीनों की कीमतें आसमान छू रही हैं, लेकिन प्रशासन की निष्क्रियता से सरकारी भूमि बचाने की सारी कवायदें बेअसर साबित हो रही हैं। मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी के आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।इस मामले में सवाल उठ रहे हैं कि क्या भू-माफियाओं में अब सरकारी आदेशों का कोई डर बाकी नहीं रह गया।सरोजनीनगर तहसील क्षेत्र में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की घटनाएं कोई नई नहीं हैं। हाल ही में फरवरी 2025 में नटकुर गांव में बुलडोजर कार्रवाई कर 8.17 करोड़ की सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराया गया था। इसी तरह जुलाई 2025 में नीवां गांव में 2 करोड़ से अधिक मूल्य की भूमि से प्रॉपर्टी डीलर का कब्जा हटाया गया। दिसंबर 2024 में कल्ली पश्चिम और हैवत मऊ मवैया में 18 करोड़ की जमीन मुक्त कराई गई। इसके बावजूद नूर नगर भदरसा का मामला लंबित है, जो प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।2023 में भी सरोजनीनगर तहसील में 110 बीघा जमीन घोटाले में पांच पीसीएस अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी, जिसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई। इन घटनाओं से साफ है कि तहसील क्षेत्र में भू-माफिया सक्रिय हैं और प्रशासन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं।
फर्जी मुख्तारनामा से मृतक की संपत्ति हड़पने का आरोप
-सरोजनीनगर में भूमि घोटाला, मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने शुरू की जांच
रायबरेली निवासी त्रिभुवन कुमार ने लखनऊ पुलिस उपायुक्त को शिकायत देकर आरोप लगाया है कि उनके पिता स्वर्गीय नंदेश्वर तिवारी की अमौसी गांव स्थित पैतृक भूमि को फर्जी दस्तावेजों के जरिए हड़प लिया गया। शिकायत में सुशील त्रिवेदी पर धोखाधड़ी का आरोप है, जिन्होंने कथित तौर पर 1992 में जाली मुख्तारनामा बनवाकर भूमि के हिस्सों को बेच दिया।त्रिभुवन कुमार के अनुसार, उनके पिता की मृत्यु 2008 में हो गई, लेकिन सुशील त्रिवेदी ने मौत के बाद भी फर्जी विक्रय पत्र बनवाए और भूमि पर ‘शांति नगर’ नाम से अनधिकृत कॉलोनी विकसित कर दी। भूमि के खसरा नंबर 3989, 3992 और 3993 कुल 0.8470 हेक्टेयर के हैं, जो सरोजनीनगर तहसील में हैं। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि सुशील त्रिवेदी ने विभिन्न व्यक्तियों के नाम पर फर्जी बिक्री की और पूरा पैसा खुद रखा।शिकायत में राजस्व विभाग के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया कि हाल ही में त्रिभुवन कुमार और उनके भाइयों को उत्तराधिकारी घोषित किया गया है। पुलिस से मांग की गई है कि सुशील त्रिवेदी और उनके सहयोगियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के तहत एफआईआर दर्ज की जाए। थाने की पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर शुरू की जांच।
पति ने पत्नी पर चाकू से किया हमला, मौके से फरार
सरोजनीनगर थाना क्षेत्र में एक महिला ने अपने पति पर मारपीट और चाकू से हमला करने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता राधिका, पत्नी बाल किशुन ने अपनी शिकायत में बताया कि वह न्यू रहीमाबाद में किराए के मकान में रहती है।8 सितंबर 2025 को शाम करीब 7 बजे उनके पति बाल किशुन ने उनके साथ गाली-गलौज शुरू की और फिर मारपीट की। इसके बाद सब्जी काटने वाले चाकू से उनकी गर्दन पर हमला कर दिया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। हमले के बाद आरोपी पति मौके से फरार हो गया।राधिका ने उपचार कराने के बाद 10 सितंबर 2025 को सरोजनीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई और कानूनी कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
अज्ञात वाहन की टक्कर से सुरक्षा अधिकारी गंभीर रूप से घायल
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे पर गौरी चौराहे के पास पीलर नंबर 34 पर 5 सितंबर 2025 को रात्री पाली में ड्यूटी कर रहे केलिवर सिक्योरिटी सर्विस के मार्शल संतोष राय, पिता श्री हरि चरण राय को एक अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। इस हादसे में संतोष राय गंभीर रूप से घायल हो गए, और उनके बाएं पैर में गहरी चोट आई।प्राथमिक उपचार के लिए उन्हें सरोजनीनगर अस्पताल ले जाया गया, जहां से बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। इस घटना की लिखित शिकायत सुरक्षा अधिकारी विक्रम कुमार, पिता ब्रजनंदन सिंह ने सरोजनीनगर थाने में दर्ज कराई है।
साइबर ठगी का शिकार बना छात्र
सरोजनीनगर थाना क्षेत्र में एक साइबर फ्रॉड का मामला सामने आया है, जिसमें मऊ जिले के रहने वाले छात्र मुहम्मद आरिफ को ठगों ने निशाना बनाया। आरिफ जो अमौसी में रहकर पढ़ाई करते हैं ने थाना प्रभारी को दी गई तहरीर में बताया कि टेलीग्राम के जरिए बार-बार मैसेज कर ट्रेडिंग और घर बैठे पैसे कमाने का लालच देकर अज्ञात व्यक्तियों ने उनसे तीन बार में कुल 96,641 रुपये ठग लिए। पीड़ित ने थाना सरोजनीनगर में अज्ञात ठगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।
बंथरा में रिकवरी एजेंट हत्याकांड: पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
बंथरा थाना क्षेत्र के दादूपुर गांव में रिकवरी एजेंट कुनाल शुक्ला की निर्मम हत्या ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। मंगलवार सुबह स्वास्तिक एसोसिएट्स के ऑफिस में कुनाल का खून से लथपथ शव मिला, जिसके सिर और चेहरे पर गंभीर चोटों के निशान थे। पुलिस ने महज 24 घंटे में इस हत्याकांड का खुलासा कर दो आरोपियों, विवेक सिंह और वसीम अली खान, को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि हत्या का कारण विवेक सिंह की पत्नी से कुनाल के कथित प्रेम संबंध और पैसों का विवाद था। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त लोहे का सब्बल और अन्य साक्ष्य भी बरामद कर लिए हैं।हालांकि, इस मामले में स्थानीय लोगों ने पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि डायल 112 की पुलिस और बंथरा थाने के कुछ पुलिसकर्मी नियमित रूप से स्वास्तिक एसोसिएट्स के ऑफिस में आकर बैठते थे और वहां शराब पार्टी में शामिल होते थे, वही ऑफिस के बगल में तख्त पड़ा है उसपर आराम भी करते थे।स्थानीय नागरिकों के अनुसार, घटना की रात, यानी सोमवार रात, पुलिस का कोई भी कर्मचारी ऑफिस के आसपास नहीं दिखा, जो कि असामान्य है। लोगों का मानना है कि यदि पुलिस नियमित रूप से वहां गश्त करती थी, तो उस रात उनकी अनुपस्थिति संदेहास्पद है।क्षेत्र के निवासियों का कहना है कि हत्यारों को सलाखों के पीछे भेजा जाना स्वागत योग्य कदम है, लेकिन अगर इस मामले में पुलिसकर्मियों की संलिप्तता की जांच नहीं की गई, तो ऐसी घटनाएं भविष्य में भी होती रहेंगी। एक स्थानीय नागरिक ने कहा, “पुलिस कर्मी हर शाम ऑफिस के आसपास दिखते थे, शराब की महफिल सजती थी, लेकिन जिस रात हत्या हुई, उस रात कोई पुलिसवाला वहां क्यों नहीं पहुंचा, यह सवाल हर किसी के मन में है।” लोगों ने मांग की है कि पुलिस अधिकारियों को इस मामले में शामिल पुलिसकर्मियों की जांच करनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
पुलिस की भूमिका पर सवाल
घटना की रात पुलिस की अनुपस्थिति और उनकी नियमित मौजूदगी की चर्चा ने खाकी की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस समय पर गश्त करती या सतर्क होती, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। कुछ नागरिकों ने आरोप लगाया कि पुलिस की लापरवाही या संभावित मिलीभगत ने अपराधियों को वारदात को अंजाम देने का मौका दिया।स्थानीय लोगों ने पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि इस मामले में पुलिसकर्मियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की जाए। उनका कहना है कि अगर दोषी पुलिसकर्मियों को सजा नहीं दी गई, तो उनकी “घटिया हरकतों” पर अंकुश नहीं लगेगा। एक नागरिक ने कहा, “पुलिस का काम लोगों की सुरक्षा करना है, न कि अपराधियों के साथ मिलकर माहौल बिगाड़ना। अगर इसमें शामिल पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता का भरोसा टूट जाएगा।पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है, लेकिन लोगों की मांग है कि इस जांच में पुलिसकर्मियों की भूमिका को भी शामिल किया जाए। क्षेत्र में भय और आक्रोश का माहौल है, और लोग चाहते हैं कि इस हत्याकांड की पूरी सच्चाई सामने आए। पुलिस के उच्च अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे इस मामले में पारदर्शी जांच सुनिश्चित करें ताकि दोषियों को सजा मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।
थाना प्रभारी बंथरा राणा राजेश कुमार सिंह नें कहा कि कौन पुलिसकर्मी गस्त के दौरान रात में वहां पर बैठते थे, इसकी जांच की जाएगी,अगर पुलिस कर्मियों की संलिप्तता पायी जाती है तो उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएंगी।
