LUCKNOW:मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया प्रबुद्धजनों से संवाद

  • REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK 
लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  ने आज जनपद गाजीपुर में प्रबुद्धजन से संवाद किया और सिद्धपीठ हथियाराम मठ की अधिष्ठात्री देवी वृद्धम्बिका माता का दर्शन-पूजन कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री ने संवाद कार्यक्रम के अवसर पर परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद और महावीर चक्र विजेता रामउग्रह पाण्डेय के परिजनों को सम्मानित भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनपद गाजीपुर एक समृद्ध परम्परा का वाहक रहा है। जिस प्रकार व्यक्ति की एक प्रकृति होती है, उसी प्रकार धरती माता की भी एक प्रकृति होती है। दुनिया में अलग-अलग देश की अपनी-अपनी पहचान है। फ्रांस कला प्रेम, जर्मनी नवाचार प्रेम व ब्रिटेन व्यवसाय प्रेम के लिए जाना जाता है तथा भारत दुनिया में अपनी उच्च आध्यात्मिक चेतना के लिए जाना जाता है। त्रेतायुग से ही जनपद गाजीपुर आध्यात्मिक चेतना के माध्यम से राष्ट्रीय जागरण का कार्य कर रहा है। त्रेतायुग में बक्सर में महर्षि विश्वामित्र का यज्ञ केवल एक कर्मकांड नहीं था, बल्कि भारत के अनुसंधान का केंद्र बिन्दु था। महर्षि विश्वामित्र जब विशिष्ट अनुसंधान के लिए कार्य कर रहे थे, तो रावण द्वारा भेजे गए राक्षस मारीच, सुबाहु, खर व ताड़का आदि यज्ञ में व्यवधान डाल रहे थे। इस सम्बन्ध में तुलसी दास जी ने लिखा है ’गाधि तनय मनु चिन्ता व्यापी, हरि बिनु मरहि न निसिचर पापी’। अर्थात महर्षि विश्वामित्र स्वयं उन राक्षसों को मार सकते हैं, लेकिन वह अपनी ऊर्जा को वहां न खर्च करके स्वयं भगवान को सामने लाकर अपना परीक्षण सिद्ध करना चाहते हैं, क्योंकि आगे लम्बी लड़ाई थी। गाजीपुर की पवित्र धरा इस घटना की साक्षी बनी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उन्हें यहां माता गुड़िया देवी के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। यहां पर लोकमंगल की भावना लेकर लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं और भक्ति भावना के अनुरूप इच्छित फल प्राप्त करते हैं। जनपद गाजीपुर अनेक पूज्य संतों की आध्यात्मिक साधना का केंद्र रहा है। जनपद में 900 वर्ष पूर्व सन्यासियों की समृद्ध परम्परा प्रारम्भ हुई, जो पूज्य स्वामी भवानीनंदन यति जी महाराज के रूप में अनवरत जारी है। इन संतों ने संपूर्ण क्षेत्र को अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा का लाभ दिया है। संत लोक कल्याण के लिए समर्पित होता है, भले ही मार्ग अलग-अलग हों। कोई विशुद्ध आध्यात्मिक क्षेत्र में अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा से लोकमंगल की कामना करता है व उसके अनुरूप समाज में जन जागरण का अभियान चलाता है तथा कोई भौतिक व आध्यात्मिक दृष्टि से उन सभी कार्यों को आगे बढ़ाकर राष्ट्र मंगल की कामना में अपना योगदान देता है। यही भारत की असली पहचान है। यदि भारत का नागरिक अपनी आध्यात्मिक चेतना को ध्यान में रखकर कार्य करेगा और इसके उपरांत भौतिक विकास के कार्यक्रमों को आगे बढ़ाएगा तो वह भारत को पुनः विश्व गुरु बनाने में मददगार साबित होगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि संकल्प पूरे होने में समय लग सकता है। हम लोगों को धैर्य रखना चाहिए। आज से 8-10 वर्ष पहले श्रीराम मंदिर का निर्माण लोगों के लिए एक सपना था, लेकिन अब यह हकीकत बन चुका है। संतो के मार्गदर्शन में देश के लोगों के संकल्प के परिणामस्वरूप प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने वर्ष 2020 में श्रीराम मंदिर की आधारशिला रखी तथा गत वर्ष भगवान श्रीरामलला को उनकी जन्मभूमि में विराजमान किया। मा0 उच्चतम न्यायालय ने वर्षों से चले आ रहे विवाद का समाधान निकाला और आज एक नई अयोध्या भारत को एक नई पहचान दे रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत दिनों दक्षिण भारत के तीन संतों की प्रतिमाओं की स्थापना अयोध्या में की गई है। दक्षिण भारत के इन तीनों संतों ने 13वीं शताब्दी से 18 वीं शताब्दी के मध्य जन्म लेकर अपना पूरा जीवन भगवान श्रीराम की भक्ति में समर्पित कर दिया। इससे पहले अयोध्या में भगवान श्रीराम के लिए सबसे अधिक भजन गाने वालीं गायिका स्व0 लता मंगेशकर के नाम पर चौक की स्थापना की गई। श्रीराम मंदिर के चारों द्वार देश के चार पूज्य संतों को समर्पित किए गए हैं।इसके साथ ही भगवान श्रीराम से जुड़ी ऋषि परम्परा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए अयोध्या के इण्टरनेशनल एयरपोर्ट का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा गया है। श्रीराम मंदिर परिसर में जिन सप्त ऋषियों की प्रतिमाओं व उनके मंदिर का निर्माण किया जा रहा है उसमें महर्षि वाल्मीकि व गोस्वामी तुलसीदास जी शामिल हैं। भगवान श्रीराम के पहले सहयोगी श्री निषादराज जी के नाम पर अयोध्या के रैन बसेरों व यात्री विश्रामालयों का नाम रखा गया है। माता शबरी के नाम पर अयोध्या में भोजनालयों की स्थापना की गई है।उन्होंने  कहा कि प्रधानमंत्री जी की अनुकम्पा से स्थापित गाजीपुर मेडिकल कॉलेज को महर्षि विश्वामित्र को समर्पित किया गया है। महर्षि विश्वामित्र पहले ऋषि हैं, जिन्होंने उस समय के आतंकवाद को पहचाना था। इस आतंकवाद से निपटने के अभियान में भगवान श्रीराम का संकल्प एक नई प्रेरणा देता है। हमारे शास्त्र केवल कर्मकाण्ड व उपासना विधि के माध्यम नहीं हैं, बल्कि यह हमारी अध्यात्मिक ऊर्जा के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता को भी आधार देते हैं। हमारे मठ व मंदिरों का पुनः दायित्व बन गया है कि वह राष्ट्रीय चेतना के अभियान को आगे बढ़ाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश को सर्वाधिक सैनिक देने वाला गांव गहमर गाजीपुर जनपद में ही है। हर भारतीय को इस पर गौरव की अनुभूति होनी चाहिए। राष्ट्रीय चेतना हम सभी का दायित्व है। भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश की पंक्तियां ‘परित्राणाय च साधूनाम्, विनाशाय च दुष्कृताम्’ हमारे लिए प्रेरणा हैं। सज्जनों का प्रत्येक दशा में संरक्षण होना चाहिए। समाज के लिए विकास कार्य होने चाहिए तथा मठ व मंदिरों का पुनरुद्धार भी होना चाहिए। सरकार संस्कृत की शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए कार्य कर रही है, लेकिन अपराध के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति का भी पालन कर रही है। कोई भी अच्छा कार्य करे, उसका समर्थन करना चाहिए लेकिन अगर कोई व्यक्ति राष्ट्रीयता को नुकसान पहुंचा रहा है, तो उसे जवाब देने के लिए भी समाज को तैयार करना चाहिए।
इस अवसर पर स्टाम्प तथा न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  रवीन्द्र जायसवाल, परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  दयाशंकर सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण तथा हथियाराम मठ के पीठाधीश्वर महामण्डलेश्वर स्वामी भवानीनन्दन यति जी महाराज व साधु-संत उपस्थित थे।

गाजीपुर:प्रबुद्धजन से संवाद तथा महंत रामाश्रय दास जी महाराज की मूर्ति का किया अनावरण 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज जनपद गाजीपुर के भुड़कुड़ा स्थित महंत रामाश्रय दास पी0जी0 कॉलेज परिसर में प्रबुद्धजन से संवाद किया तथा महंत रामाश्रय दास जी महाराज की मूर्ति का अनावरण किया।इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने महंत रामाश्रय दास जी महाराज के जीवन और उनके द्वारा शिक्षा तथा समाज सेवा के क्षेत्र में किए गए अद्वितीय योगदान का स्मरण किया।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि  महंत जी के आदर्श और उनकी शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। महंत रामाश्रय दास जी महाराज ने शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया। उनकी स्मृति में इस मूर्ति का अनावरण उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि और उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प है। हमारा सौभाग्य है कि डबल इंजन सरकार उत्तर प्रदेश में विरासत की सुरक्षा करते हुए प्रत्येक क्षेत्र में विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है। उत्तर प्रदेश को विकसित राज्य बनाने के कार्य किए जा रहे हैं। देश को विकसित भारत बनाने में उत्तर प्रदेश अपनी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इसके लिए हम सभी को मिलकर कार्य करना होगा। विगत 08 वर्षां से डबल इंजन सरकार ने उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य से उठाकर देश के विकास के ग्रोथ इंजन के रूप में स्थापित किया है। वर्ष 2047 मे जब देश आजादी का शताब्दी वर्ष मना रहा होगा, उस समय हमें कैसा भारत चाहिए, उस भारत के निर्माण के लिए डबल इंजन सरकार द्वारा कार्य किया जा रहा है। विकसित भारत प्रधानमंत्री जी का संकल्प है, तो विकसित भारत के लिए विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित उत्तर प्रदेश के लिए विकसित गाजीपुर होना आवश्यक है।विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश की शुरूआत स्कूलों और कॉलेजां से होनी चाहिए। महाविद्यालयों, संस्कृत महाविद्यालयों, इण्टर कॉलेजों एवं अन्य संस्थानों को भी विकसित उत्तर प्रदेश की संकल्पना से जोड़ने की जरूरत है। आप सभी अलग-अलग क्षेत्रां जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन, इन्फ्रास्ट्रक्चर, निवेश आदि क्षेत्रों में अपना सुझाव समर्थ पोर्टल या क्यू0आर0 कोड के माध्यम से भेजें । विकसित उत्तर प्रदेश के लिए हम सभी को मिलकर कार्य करना होगा।इससे पूर्व, मुख्यमंत्री ने महंत रामाश्रय दास पी0जी0 कॉलेज परिसर में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ के अन्तर्गत रूद्राक्ष का पौधा रोपित किया।

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