सरोजनीनगर:दहेज के लिए नवविवाहिता को ससुराल में पीटा, उंगली टूटी,क्लिक करें और भी खबरें

-पति ने गर्लफ्रेंड का राज खोला, जबरन संबंध बनाए

  • REPORT BY:A.S.CHAUHAN || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS

लखनऊ। सरोजनीनगर थाने में एक नवविवाहिता वेटरनरी डॉक्टर ने अपने पति विश्वास शुक्ला उर्फ मोहित, सास सुमन शुक्ला और ससुर अरुण शुक्ला के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, मारपीट, जबरन संबंध और जान से मारने की धमकी का मुकदमा दर्ज कराने के लिए प्रार्थना-पत्र दिया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि शादी में 25 लाख रुपए खर्च करने के बावजूद ससुराल वाले दहेज में कार की मांग कर रहे थे, पति ने गर्लफ्रेंड के साथ अवैध संबंध स्वीकार किए और दिवाली पर उरई बुलाकर परिवार ने मिलकर मारपीट की, जिसमें उसकी उंगली टूट गई।प्रार्थना-पत्र के अनुसार, पीड़ित  का विवाह 5 मई 2025 को हिंदू रीति-रिवाज से लखनऊ के साईं लॉन में हुआ था। पिता ने 5 लाख नकद, सोने के गहने, फ्रिज, एसी, फर्नीचर आदि कुल 25 लाख रुपए खर्च किए। शादी के बाद पीड़ित  पति के साथ उरई गई, लेकिन पति  (हरियाणा) में नौकरी करता था और हर सप्ताहांत अंबाला जहां पीड़ित वेटरनरी ऑफिसर है आता था।पीड़ित  बवाल आने की जिद करती तो पति मारपीट करता, 10 हजार रुपए छीनता और आधी सैलरी की मांग करता।एक बार पति के फोन पर गर्लफ्रेंड की आपत्तिजनक फोटो और चैट देखने पर पति ने गालियां दीं, धक्का देकर जबरन संबंध बनाए और कहा, “शादी मजबूरी में पैसे के लिए की, गर्लफ्रेंड हमेशा रहेगी।” सास ने फोन पर कहा, “दहेज में कार नहीं लाई तो मार सहो, अभी कार दिलाओ तो समझा लेंगे।”दिवाली पर 18 अक्टूबर को उरई बुलाया गया। वहां अपनी आपबीती सास को बताने पर सास-ससुर-पति ने मिलकर गालियां दीं, मारपीट की और कहा, “समाज में बदनाम करेगी, यहीं मारकर खत्म करो।” रिया की उंगली टूट गई, शरीर पर चोट के निशान हैं। जान बचाकर भागी और पिता को फोन किया, जो उरई से ले आए।

सरोजनीनगर में टीबी मरीजों को पौष्टिक पोटली वितरण,मारवाड़ी महिला समिति का सराहनीय आयोजन

अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला समिति के तत्वावधान में गुरुवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सरोजनीनगर में 25 टीबी मरीजों को पौष्टिक पोटली का वितरण किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. मोनिका अग्रवाल, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष एसपीएम विभाग, केजीएमयू ने अपने कर-कमलों से यह वितरण संपन्न किया।इस अवसर पर समिति की प्रांतीय अध्यक्ष रेखा लाठ, राष्ट्रीय अध्यक्ष अंजू सरावगी, राष्ट्रीय सचिव निशा मोदी, प्रांतीय कोषाध्यक्ष मधु लाठ, प्रांतीय उपाध्यक्ष शालिनी सिंघल, प्रांतीय सचिव अनुराधा बंसल, शाखा अध्यक्ष मोनिका अग्रवाल, शाखा उपाध्यक्ष अनुराधा अग्रवाल, शाखा सचिव सुशीला अग्रवाल एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मीना तोंदी ने निश्चय मित्र के रूप में उपस्थित टीबी रोगियों को पोटली सौंपी। अपने उद्बोधन में उन्होंने आगे भी इसी प्रकार सहयोग जारी रखने का आश्वासन दिया।कार्यक्रम के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. नीरज कुमार गुप्ता एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सरोजनीनगर के अधीक्षक डॉ. चंदन कुमार यादव ने सभी आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया।आयोजन में चिकित्सा अधिकारी डॉ. वसीम शाह, नीरज यादव, श्रीमती राम जानकी पाल, मनीष यादव, जय प्रकाश यादव, ज्ञान प्रकाश पाण्डेय, संध्या, स्मिता, राजेश, दिलीप, अमित, दीपू, शिवम, पूनम के अलावा डाट्स केंद्र के श्री रत्नेश कुमार यादव (एसटीएस), विनय कुमार सिंह, टीबीएचवी एवं महावीर प्रसाद (एलटी) उपस्थित रहे।

 बनी में सई नदी पर जर्जर पुल मिट्टी भरकर दौड़ रहे डंपर,अवैध खनन माफियाओं की लूट से खतरा मंडराया,
-प्रशासन की लापरवाही ने बढ़ाई चिंता

राजधानी लखनऊ की सीमा पर स्थित सरोजनीनगर तहसील के बनी गांव में सई नदी पर बना पुराना पुल अब पूरी तरह जर्जर हो चुका है। दशकों पुराने इस पुल पर अवैध मिट्टी खनन माफिया दिन-रात डंपरों से भारी मात्रा में मिट्टी का ढुलाई कर रहे हैं, जिससे पुल की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि किसी भी पल यह ढह सकता है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की मिलीभगत से चल रहे इस अवैध धंधे ने न केवल पुल को खतरे में डाल दिया है, बल्कि आसपास के सैकड़ों किसानों की आजीविका पर भी संकट मंडरा रहा है।
अवैध खनन का केंद्र बनी और आसपास के गांव सई नदी के किनारे स्थित बनी गांव और उन्नाव जिले के थाना सोहरामऊ के अंतर्गत आने वाले ग्राम सभा निबहरी व बजेहरा इलाकों में पिछले कई महीनों से अवैध मिट्टी खनन का सिलसिला जोरों पर है। माफिया दिन-रात डंपरों से मिट्टी लोड कर बंथरा क्षेत्र के विभिन्न निजी स्थानों पर डंप कर रहे हैं। इस खनन की पूरी सप्लाई चेन इसी जर्जर पुल से होकर गुजर रही है, जो लखनऊ और उन्नाव जनपदों की सीमा पर स्थित है। पुल पर भारी डंपरों का लगातार आवागमन न केवल सड़क को तोड़ रहा है, बल्कि इसके नीचे बहने वाली सई नदी के कटाव को भी तेज कर रहा है।स्थानीय निवासी वीरपाल सिंह और संतोष सिंह ने बताया यह पुल डेढ़ सौ वर्ष पुराना है। इसका आधा हिस्सा लगभग दो सौ वर्ष पहले बनाया गया था, लेकिन अब पूरे पुल में जगह-जगह दरारें पड़ गई हैं। अनियंत्रित डंपरों के कारण मिट्टी भरकर पुल पर दौड़ रहे वाहन इसकी जड़ें ही खोखली कर रहे हैं। दोनों ग्रामीणों सहित अन्य तमाम लोगों ने चिंता जताई कि पुल के दोनों ओर रेलिंग पूरी तरह गायब हो चुकी है, जिससे कई लोग पहले ही नीचे गिर चुके हैं। फिर भी, न तो कोई मरम्मत हो रही है और न ही कोई निगरानी।इस जर्जर पुल का सबसे बड़ा असर बनी गांव के किसानों पर पड़ रहा है। नदी के उस पार कई एकड़ कृषि भूमि फैली हुई है, जो लखनऊ जनपद की सरोजनीनगर तहसील और उन्नाव जनपद की हसनगंज तहसील में विभाजित है। किसान बताते हैं कि यह पुल ही उनका एकमात्र संपर्क मार्ग है। यदि पुल गिर गया, तो न केवल फसलें बाजार तक पहुंचाने में समस्या होगी, बल्कि आपात स्थिति में चिकित्सा सहायता भी प्रभावित हो जाएगी। “हमारी जमीन नदी के उस पार है, लेकिन अब पुल पर चलना मौत को दावत देना है। प्रशासन सो रहा है, जबकि माफिया खुलेआम लूट मचा रहे हैं,” एक किसान ने गुस्से में कहा।ग्रामीणों के अनुसार, अवैध खनन से नदी का जलग्रहण क्षेत्र सिकुड़ रहा है, जिससे बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है। बनी सहित आसपास के गांवों—जैसे बनी, निबहरी और बजेहरा—के लोग रातों की नींद हराम कर रहे हैं। वे डरते हैं कि यदि पुल गिरा, तो न केवल संपत्ति का नुकसान होगा, बल्कि जान-माल को भी खतरा हो सकता है।

प्रशासन की लापरवाही और मिलीभगत के आरोप

सबसे बड़ा सवाल यह है कि दो जनपदों—लखनऊ और उन्नाव—के प्रशासनिक अमले की क्या मजाल है? ग्रामीणों का आरोप है कि उन्नाव जिले के अधिकारी और कर्मचारी खनन माफियाओं से अवैध वसूली कर इस धंधे को संरक्षण दे रहे हैं। वहीं, लखनऊ के सरोजनीनगर प्रशासन को पुल की दयनीय स्थिति की भनक तक नहीं लगी । “दोनों तरफ के अधिकारी मिले हुए हैं। खनन माफिया बिना किसी डर के काम कर रहे हैं, जबकि पुल पर कोई चेकिंग या मरम्मत का नामोनिशान नहीं,” धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले लगभग डेढ़ दशकों से पुल की कोई मरम्मत नहीं हुई है। दशकों से उपेक्षित यह संरचना अब ‘नंगा पुल’ कहलाने लगा है। ग्रामीणों ने कई बार तहसील और जिला प्रशासन को शिकायतें भेजीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तत्काल मरम्मत न की गई, तो यह पुल न केवल गिर सकता है, बल्कि आसपास के इलाकों में जलस्तर बढ़ने से बड़ा हादसा हो सकता है।बनी गांव के लोग अब जिलाधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि अवैध खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगे, डंपरों की आवाजाही रोकी जाए और पुल की मजबूती के लिए इंजीनियरों की टीम भेजी जाए। यदि शासन ने ध्यान नहीं दिया, तो ग्रामीण आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।यह घटना राजधानी की सीमा पर प्रशासनिक विफलता  उजागर करती है। क्या सत्ता के गलियारों तक यह पुकार पहुंचेगी, या फिर एक और हादसा होने का इंतजार किया जाएगा? समय रहते कार्रवाई जरूरी है, वरना बनी के ग्रामीणों का दर्द और गहरा हो जाएगा।

राजस्व निरीक्षक बंथरा तहसील सरोजनीनगर अनिल कुमार ओझा बताते है कि पुल को मैंने भी देखा है वो पूरी तरीके से जर्जर हो चुकी है,मिट्टी भरकर जो डंपर पुल से निकल रहे हैं मैं इसकी जांच करवाता हूं, मिट्टी का खनन कहां हो रहा है इसको भी दिखाऊंगा, अभी मैं इंस्पेक्टर बंथरा से बात करके मिट्टी भरकर दौड़ रहे डंपरों के विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए कह रहा हूं।थाना प्रभारी बंथरा राणा राजेश कुमार सिंह कहते है कि मैं इसे दिखवा रहा हूं और यह बता दिया जाएगा कि इस पुल से मिट्टी भरकर डंपरों का आवागमन ना हो।

बंथरा के चांदे बाबा तालाब मामले की सुनवाई,डॉ. राजेश्वर सिंह ने गरीब दलित परिवारों का रखा पक्ष

-अदालत ने विकास कार्यों पर जताया संतोष,विकास और पर्यावरण का संतुलन: ₹25 लाख विधायक निधि से तालाब का सौंदर्यीकरण, विस्थापन पर रोक

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी, दिल्ली) में गुरुवार को बंथरा क्षेत्र के चांदे बाबा तालाब (गढ़ी चुनौटी) मामले की सुनवाई हुई। विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने स्वयं उपस्थित होकर गरीब दलित परिवारों की ओर से पक्ष रखा और विस्थापन के बजाय संवेदनशील पुनर्विकास की मांग की।एनजीटी ने डॉ. सिंह द्वारा विधायक निधि से स्वीकृत ₹25 लाख की राशि के प्रस्ताव को सराहा। यह धनराशि तालाब के सौंदर्यीकरण, पुनर्विकास और वृक्षारोपण के लिए उपयोग होगी। जिला मजिस्ट्रेट लखनऊ के शपथपत्र में मैक्स हेल्थकेयर ग्रुप के CSR फंड से विकास कार्यों की जानकारी दी गई। अदालत ने ड्रोन वीडियो देखकर कार्यों पर संतोष जताया।डीएफओ लखनऊ की रिपोर्ट में वृक्षारोपण और हरियाली की प्रगति उजागर हुई। एनजीटी ने स्पष्ट किया कि दलित परिवारों को अभी विस्थापित नहीं किया जाएगा। फोकस अब 36.9 हेक्टेयर तालाब के पर्यावरणीय पुनर्जीवन पर है।डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि विकास का मतलब किसी की छत छीनना नहीं। गरीबों और प्रकृति दोनों की रक्षा हमारा लक्ष्य है। चांदे बाबा तालाब आस्था, हरियाली और एकता का प्रतीक बनेगा।

Aaj National

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