LUCKNOW:आयोग ने अदानी के पॉवर प्लांट से बिजली खरीद प्रस्ताव पर लगाई रोक,क्लिक करें और भी खबरें

-ग्रांट थॉर्टन द्वारा बनाए गए निजीकरण के प्रस्ताव को रद्द किया जाय: संघर्ष समिति

  • REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK 

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यह जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग ने फिक्स और वेरिएबल चार्जेज में भारी गड़बड़ी को लेकर नाराजगी जताते हुए अदानी पॉवर से 1500 मेगावाट बिजली खरीद के प्रस्ताव पर रोक लगा दी है। संघर्ष समिति ने कहा कि अदानी पावर का कंसलटेंट भी ग्रांट थॉर्टन ही था। उल्लेखनीय है कि ग्रांट थॉर्टन वह दागी कंपनी है जिसने उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट तैयार किए है। संघर्ष समिति ने कहा कि अदानी थर्मल से बिजली खरीद के मामले में फर्जीवाडा सामने आने के बाद अब यह जरूरी हो गया है की ग्रांट थॉर्टन द्वारा तैयार किए गए निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट को भी तत्काल रद्द किया जाए और निजीकरण का निर्णय निरस्त किया जाए। विद्युत नियामक आयोग ने पावर कार्पाेरेशन प्रबंधन से कहा है कि अदानी पावर को भी इस केस की पार्टी बनाते हुए 18 दिसंबर तक एफजीडीएस संयंत्र न लगने पर बिजली खरीद की घटी कीमत का प्रस्ताव दाखिल करें।संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 358 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।

संघर्ष समिति ने बताया कि भारत सरकार के एक आदेश के अनुसार अब भारत के ताप बिजली घरों में फ्लू गैस डीसल्फराइजेशन संयंत्र (एफ जी डी एस) नहीं स्थापित किया जाना है। अदानी पावर के साथ हुए बिजली खरीद समझौते में एफ जी डी एस की लागत भी सम्मिलित है जिसके चलते कम से कम 55 पैसे प्रति यूनिट से 75 पैसे प्रति यूनिट तक अधिक दाम पर यह करार किया गया है। मोटे तौर पर इस संयंत्र की लागत 1.2 करोड़ प्रति मेगावाट होती है और इसके लगाने का खर्च उपभोक्ताओं से वसूल किया जाता है।संघर्ष समिति ने बताया की विद्युत नियामक आयोग ने पॉवर कार्पाेरेशन प्रबंधन से यह सवाल किया है कि एफजीडीएस संयंत्र को न लगाने पर लागत कम होने का विश्लेषण पॉवर कॉर्पाेरेशन ने क्यों नहीं किया। एफजीडीएस संयंत्र को लगाने से फिक्स कास्ट भी बढ़ती है और वेरिएबल कॉस्ट भी बढ़ती है तथा ऑग्ज़ीलियरी कंजप्शन 1.2 प्रतिशत बढ़ जाने से बिजली की उत्पादन लागत भी बढ़ जाती है। संघर्ष समिति ने कहा कि इस प्लांट के न लगने से उत्पादन लागत 55 पैसे से 75 पैसे प्रति यूनिट तक कम हो जाती है। इन सब की गणना किए बिना पावर कार्पाेरेशन प्रबंधन ने अदानी पावर से रु 5 . 38 प्रति यूनिट पर बिजली खरीद का समझौता कर लिया जिसे विद्युत नियामक आयोग ने रोक दिया है । संघर्ष समिति ने बताया कि विद्युत नियामक आयोग ने कोयले पर जीएसटी की संशोधित दरों को लेते हुए भी बिजली की कीमत कम होने का सवाल उठाया है और इस पर भी पावर कॉरपोरेशन से रिपोर्ट मांगी है। संघर्ष समिति ने कहा कि इस फर्जीवाडा में पॉवर कार्पाेरेशन प्रबंधन, अदानी पॉवर और अदानी पॉवर के कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन की पूरी जिम्मेदारी है । इससे 55 पैसे से 75 पैसे प्रति यूनिट तक अधिक दरों पर अदानी पॉवर से बिजली खरीद का करार किया गया है।

तय सीमा से ज्यादा समय से लंबित 11,494 शिकायतें
उपभोक्ता हितों की अनदेखी कर रहा पावर कारपोरेशन

उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा वर्षों पूर्व घोषित स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस रेगुलेशन-2019 (मुआवजा कानून) का लाभ आज तक किसी भी उपभोक्ता को नहीं मिल पाया है। इस कानून के अनुसार, 1912 हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों का निर्धारित समयसीमा में निस्तारण न होने पर उपभोक्ता को मुआवजा मिलना चाहिए, लेकिन पावर कॉरपोरेशन की गैर-उत्तरदायी व्यवस्था के कारण उपभोक्ताओं को अभी तक एक भी मुआवजा नहीं दिया गया।

आज उपभोक्ता परिषद द्वारा 20 नवंबर दोपहर 2 बजे तक 1912 की लंबित शिकायतों का विश्लेषण किया गया। इसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए कि पूरे उत्तर प्रदेश में 11,494 शिकायतें समयसीमा के बाहर बिना निस्तारण के पड़ी हुई हैं। इनमें सबसे अधिक शिकायतें स्मार्ट मीटर से संबंधित हैं। श्रेणीवार लंबित शिकायतों का विवरण में बताया गया कि स्मार्ट मीटर संबंधी 3504, सप्लाई संबंधी 666, बिल संबंधी 3332, मीटर संबंधी 2135, सूचना/इनफॉर्मेशन संबंधी 629, अन्य 837 और सर्विस रिलेटेड 391 शिकायतें समय सीमा से अधिक समय से लम्बित है। लखनऊ में भी गंभीर स्थिति 1,075 शिकायतें समयसीमा से बाहर लम्बित है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि राजधानी लखनऊ में ‘वर्टिकल व्यवस्था’ लागू होने के बावजूद स्थिति बेहद चिंताजनक है। जोनवार स्थिति यह है कि
जानकीपुरम जोन कुल लंबित 155, जिनमें स्मार्ट मीटर संबंधित 97, अमौसी जोन कुल लंबित 403, जिनमें स्मार्ट मीटर संबंधित 295,लखनऊ सेंट्रल कुल लंबित 241, जिनमें स्मार्ट मीटर संबंधित 224,गोमती नगर जोन कुल लंबित 279, जिनमें स्मार्ट मीटर संबंधित 222 लम्बित होना यह साफ दर्शाता है कि स्मार्ट मीटरिंग सिस्टम उपभोक्ताओं के लिए समस्या का बड़ा कारण बन गया है।श्री वर्मा ने स्पष्ट कहा कि जिन शिकायतों का निर्धारित समय सीमा में निस्तारण नहीं हुआ है, उन सभी मामलों में उपभोक्ताओं को मुआवजा कानून के तहत तुरंत मुआवजा दिया जाना चाहिए। यह उपभोक्ताओं का कानूनी अधिकार है। 1912 की निस्तारण व्यवस्था अविश्वसनीय; व्ज्च् सत्यापन आज तक लागू नहीं।उपभोक्ता परिषद ने पुनः दोहराया कि 1912 पर शिकायतों का वास्तविक निस्तारण संदिग्ध है। कई मामलों में फर्जी क्लोजर की शिकायतें मिल रही हैं। इसी कारण विद्युत नियामक आयोग ने 1912 पर ओटीपी आधारित शिकायत सत्यापन व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए थे, परन्तु आज तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई।उपभोक्ता परिषद मांग की है कि 1912 पर लंबित सभी शिकायतों का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए। मुआवजा कानून को तत्काल लागू कर उपभोक्ताओं को उनका अधिकार दिया जाए।ओटीपीआधारित शिकायत सत्यापन व्यवस्था बिना देरी लागू की जाए। स्मार्ट मीटर संबंधी शिकायतों के समाधान हेतु विशेष प्रकोष्ठ बनाया जाए।

तीन बड़े कर बकायेदारों के कार्यालय और भवन सील

नगर आयुक्त गौरव कुमार के निर्देश पर गृह कर बकाया वसूली को लेकर नगर निगम जोन 4 द्वारा गुरुवार को व्यापक अभियान चलाया गया। लंबे समय से गृह कर जमा न करने वाले बड़े बकायेदारों के खिलाफ की गई इस कड़ी कार्रवाई में तीन प्रमुख संस्थानों के कार्यालय और भवन सील किए गए। इस विशेष अभियान का नेतृत्व जोनल अधिकारी सुश्री शिल्पा कुमारी द्वारा किया गया, जिनके निर्देशन में विभागीय टीम सुबह से ही क्षेत्र में सक्रिय रही।जोनल अधिकारी ने बताया कि नगर निगम लगातार गृह कर वसूली के लिए नोटिस जारी कर रहा था, लेकिन कुछ संस्थान कर जमा करने में लगातार लापरवाही बरत रहे थे। ऐसे में नगर निगम प्रशासन ने कठोर रुख अपनाते हुए गुरुवार को विशेष कार्रवाई करने का निर्णय लिया।

अभियान की शुरुआत जोन 4 क्षेत्र स्थित सरोज इंस्टीट्यूट से हुई। निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर संस्था के एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक को सील कर दिया। जानकारी के अनुसार, सरोज इंस्टीट्यूट पर 51,01,635.87 का गृह कर बकाया था। कई बार नोटिस जारी किए जाने के बावजूद संस्था द्वारा कर जमा नहीं किया गया, जिसके बाद निगम को यह कार्रवाई करनी पड़ी।इसके बाद निगम टीम खरगापुर सरसवां वार्ड पहुंची और वहाँ स्थित विनायक मार्बल के कार्यालय को सील कर दिया। विनायक मार्बल पर 5,37,336 का गृह कर बकाया था। निगम अधिकारियों ने बताया कि कई बार चेतावनी और नोटिस देने के बावजूद संबंधित प्रतिष्ठान ने गृह कर जमा नहीं किया, जिसके चलते यह कदम उठाया गया।अभियान की तीसरी प्रमुख कार्रवाई भी खरगापुर सरसवां वार्ड में की गई, जहाँ स्थित शानोक डॉट कॉम कमर्शियल कॉम्प्लेक्स को सील किया गया। इस कॉम्प्लेक्स पर 4,29,868 का गृह कर बकाया था। निगम अधिकारियों ने बताया कि इस प्रतिष्ठान को भी पहले कई बार नोटिस भेजे गए थे, मगर बकाया राशि जमा नहीं की गई, जिसके बाद नियमों के तहत सीलिंग की कार्रवाई की गई।पूरे अभियान के दौरान टैक्स सुपरिंटेंडेंट श्री बनारसी दास, टैक्स इंस्पेक्टर तथा जोन 4 के अन्य अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे। निगम टीम ने कहा कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और शहर के बड़े कर बकायेदारों के खिलाफ इसी प्रकार की कार्रवाई की जाएगी।

Aaj National

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