-उच्च न्यायालय की डबल बेन्च ने दिया निर्णय
- REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ। लम्बें अरसे से अपने हक के लिए लड़ रहे डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ लोक निर्माण विभाग को उच्च न्यायालय की
डबल बेंच ने निर्णयाक फैसला दिया है। इस फैसले से डिप्लामाधारियों के लिए लोनिवि में जूनियर इंजीनियर्स के पद पर भर्ती का रास्ता खुल गया है। इस फैसले से 4612 जूनियर इंजीनियर्स की भर्ती में डिप्लोमा धारी ही पात्र होगें।
इस सम्बंध में विस्तार से जानकारी देते हुए डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ लोनिवि के अध्यक्ष इं. एन.डी. द्विवेदी बताया कि उच्च न्यायालय खण्डपीठ लखनऊ की डिवीजन बेन्च द्वारा उ.प्र. के विभिन्न अभियंत्रण विभागों के अन्तर्गत आयोग द्वारा विज्ञापित जूनियर इंजीनियर के 4612 पदों पर आवेदन हेतु अनुमति प्रदान करने के लिए डिग्री होल्डर अभ्यर्थियों द्वारा योजित दो रिट याचिकाओं को डिसमिस कर दिया। इसी के साथ पूर्व में दिये गये समस्त अन्तरिम आदेश को भी समाप्त कर दिया। इस प्रकार जूनियर इंजीनियर के 4612 पदों पर अब केवल डिप्लोमा होल्डर अभ्यर्थी ही चयनित हो सकेंगे। न्यायमूर्ति संगीता चन्दा एवं यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की डिवीजन बेन्च द्वारा समस्त पक्षों के अधिवक्ताओं को विस्तार से सुनने के उपरान्त इन याचिकाओं में निर्णय पारित किया। डिग्रीधारक अभ्यर्थियों के तरफ से अधिवक्ता अमन ठाकुर तथा डिप्लोमाधारक की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता उपेन्द्र नाथ मिश्रा, अभय प्रताप सिंह, श्रीश कुमार एवं उत्कर्ष कुमार अधिवक्तागण द्वारा अपना पक्ष रखा गया। इसी प्रकार आयोग की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा एवं उत्सव मिश्रा अधिवक्ता द्वारा अपना पक्ष रखा गया। सरकार की तरफ से मुख्य स्थायी अधिवक्ता द्वारा पक्ष रखा गया। उ.प्र. डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ एवं बेरोजगार डिप्लोमा होल्डर अभ्यर्थियों की तरफ से प्रभावी पैरवी हेतु इं. एन. डी. द्विवेदी अध्यक्ष, डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ, लोनिवि उ.प्र. को अधिकृत किया गया था। उल्लेखनीय है कि उ.प्र. अधीनस्थ चयन आयोग द्वारा 07 मार्च 2024 को विभिन्न अभियंत्रण विभागों के जूनियर इंजीनियर पद पर सीधी भर्ती हेतु विज्ञापन प्रकाशित किया गया जिसे शुद्धि पत्र के माध्यम से 24 जून 2024 को संशोधित किया गया।
विज्ञापन के अनुसार विभिन्न अभियंत्रण विभागों यथा लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, उ.प्र.आवास विकास परिषद, उ.प्र. सेतु निगम एवं उ.प्र. प्रोजेक्ट कार्पाेरेशन लि. इत्यादि के कुल 4612 पदों पर भर्ती हेतु आवेदन मांगा गया। जिसमें नियमावली के अनुसार केवल डिप्लोमा होल्डर अभ्यर्थियों को आवेदन हेतु अधिकृत किया गया था। डिग्रीहोल्डर अभ्यर्थियों द्वारा इस विज्ञापन के अन्तर्गत आवेदन करने हेतु दो रिट याचिकायें उच्च न्यायालय खण्डपीठ लखनऊ में योजित की गयी। उच्च न्यायालय द्वारा राहत न मिलने पर डिग्रीधारक अभ्यर्थियों द्वारा सर्वाेच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की गयी। सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा अन्तरिम राहत प्रदान करते हुए डिग्रीधारक अभ्यर्थियों को आवेदन करने हेतु अनुमति प्रदान कर दी गयी।
सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा दिये गये अन्तरिम आदेश के क्रम में हजारों की तादात में डिग्रीधारक अभ्यर्थियों द्वारा आयोग में आवेदन कर दिया गया। तत्पश्चात् उ.प्र. डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ एवं बेरोजगार डिप्लोमा अभ्यर्थियों द्वारा इम्प्लीडमेन्ट सर्वाेच्च न्यायालय में दाखिल किया गया। जिसपर मा0 सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में जारी अन्तरिम आदेश को संशोधित करते हुए उच्च न्यायालय को लम्बित दोनों रिट याचिकाओं को गुण-दोष के आधार पर निस्तारित करने के आदेश निर्गत किये। याचिकाओं के उच्च न्यायालय द्वारा निस्तारित किये जाने तक अन्तरिम आदेश को प्रभावी रहने का भी निर्देश निर्गत किया। अन्ततः उच्च न्यायालय के डिवीजन बेन्च द्वारा सभी पक्षों को सुनने के उपरान्त डिप्लोमाधारक अभ्यर्थियों के पक्ष में निर्णय देते हुए डिग्रीधारक अभ्यर्थियों की दावेदारी को नकारते हुए दोनों याचिकाओं को डिसमिस कर दिया। साथ ही साथ पूर्व में जारी किये गये समस्त अन्तरिम आदेश को भी निष्प्रभावी कर दिया।
एस्मा लगाए जाने का संघर्ष समिति ने किया विरोध
-मनमाने ढंग से हजारों संविदा कर्मियों की छटनी से बिजली कर्मियों में आक्रोश
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां जारी बयान में बताया कि
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में संविदा कर्मियों का नया टेंडर कर मनमाने ढंग से हजारों संविदा कर्मियों को रोज निकाला जा रहा है जिससे पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में कार्य का वातावरण पूरी तरह बिगड़ गया है और बिजली कर्मियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। संघर्ष समिति ने अति आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम 1966 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए सरकार द्वारा हड़ताल पर प्रतिबंध लगाने हेतु एस्मा लगाए जाने का प्रबल विरोध किया है । संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली सेक्टर में पिछले 25 साल से लगातार एस्मा लगा हुआ है। अब बिजली कर्मचारियों का समर्थन करने वाले राज्य कर्मचारियों, स्थानीय निकाय और निगमों के कर्मचारियों पर भी एस्मा लगा दिया गया है जो लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन है।
संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निवेदन किया है कि वह इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर संविदा कर्मियों की छटनी रोकने का निर्देश देने की कृपा करें। संघर्ष समिति ने बताया कि मई 2017 के आदेश के अनुसार शहरी क्षेत्र में प्रत्येक विद्युत उपकेंद्र पर 36 कर्मचारी और ग्रामीण क्षेत्र में 20 कर्मचारी होनी चाहिए। अब नए टेंडर के अनुसार इस आदेश के सर्वथा उल्लंघन में 48ः तक संविदा कर्मचारी हटाए जा रहे हैं।संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग का प्रयोग विफल हो जाने के बावजूद विद्युत वितरण निगमों में अन्य शहरों में इसे लागू करने का मुख्य मकसद इन शहरों की बिजली व्यवस्था डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी को सौंपने की तैयारी है।संघर्ष समिति ने बताया कि भदोही, मिर्जापुर, आजमगढ़, मऊ, और फतेहपुर के अलावा अब सीतापुर, रायबरेली, उन्नाव और हरदोई में भी वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर बड़े पैमाने पर पदों को समाप्त करने की तैयारी हो रही है। संघर्ष समिति ने कहा कि पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन निजीकरण के नाम पर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने पर आमादा है।संविदा कर्मियों की लगातार हो रही छटनी के आंकड़े देते हुए संघर्ष समिति ने बताया की वाराणसी में 417, कुशीनगर में 450, बस्ती में 453, गोरखपुर में 326, भदोही में 429, सोनभद्र में 535, प्रयागराज में 526 और कौशांबी में 569 अत्यंत अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मियों को नया टेंडर कर नौकरी से हटाया जा चुका है। इस प्रकार पिछले कुछ दिनों में लगभग 3705 संविदा कर्मियों की पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में छटनी की जा चुकी है। इससे बिजली कर्मी आंदोलित हैं। संघर्ष समिति के आह्वान पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज लगातार 380 वें दिन बिजली कर्मियों ने समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
ज्यादा दिन नही चलेगा अन्याय, प्रबंधन नए कनेक्शन पर अधिक वसूली रोके
-अवैध वसूली के खिलाफ उपभोक्ता परिषद की अबमानना याचिका
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने पावर कॉरपोरेशन द्वारा बिना विद्युत नियामक आयोग की अनुमति के स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की मनमानी लागत की वसूली पर गंभीर आपत्ति दर्ज की है। परिषद के अध्यक्ष एवं इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कोड रिव्यू पैनल सब-कमेटी के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि आयोग ने स्पष्ट रूप से 15 दिन पहले ही यह कह दिया था कि नए कनेक्शनों पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर को अनिवार्य कर उपभोक्ताओं से वसूली की जा रही राशि अनुमोदित नहीं है। इसके बावजूद बिजली कंपनियों द्वारा वसूली जारी है, जो अत्यंत अनुचित और अवैध है।
उपभोक्ता परिषद में काफी लंबी लड़ाई लड़ी और विद्युत नियामक आयोग के सामने बिजली कंपनियों की पोल खोलते हुए उसे दर का खुलासा किया जो मीटर निर्माता कंपनियों को आरडीएसएस में टेंडर पाने वाले उद्योगपतियों ने दिया था और वह 2630 से 2830 के बीच था। अंततः अब जब आयोग द्वारा प्रस्तावित प्राप्त सामने आ गया है तो निश्चित ही पावर कारपोरेशन को अपनी गलती मान लेना चाहिए।विद्युत नियामक आयोग द्वारा सभी वितरण कंपनियों को प्रस्तावित कॉस्ट डेटा बुक का मसौदा भेज दिया गया है, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि सिंगल फेज स्मार्ट प्रीपेड मीटर 2800,थ्री फेज स्मार्ट प्रीपेड मीटर 4100, इसके विपरीत पावर कॉरपोरेशन उपभोक्ताओं से सिंगल फेज मीटर के लिए 6016, थ्री फेज मीटर के लिए 11,341 की वसूली कर रहा था, जो आयोग की अनुमति के बिना की गई मनमानी और अवैध वसूली है।18 दिसंबर को सप्लाई कोड रिव्यू पैनल सब-कमेटी की बैठक निर्धारित है। परिषद ने कहा है कि पावर कॉरपोरेशन के पास अभी भी समय है कि वह अपनी अवैध वसूली पर तत्काल रोक लगाए और उपभोक्ताओं से अब तक ली गई अतिरिक्त राशि की वापसी सुनिश्चित करे। अनुमान है कि अब तक 100 करोड़ से अधिक की अतिरिक्त वसूली की जा चुकी है।अवधेश कुमार वर्मा ने याद दिलाया कि उपभोक्ता परिषद की ओर से इस अवैध वसूली को लेकर विद्युत नियामक आयोग में अवमानना याचिका लंबित है, जिस पर पावर कॉरपोरेशन पहले ही अपना जवाब दाखिल कर चुका है। आयोग ने अपने निर्देश में साफ कहा था कि मीटर लागत की जो भी वसूली की जा रही है, उसे यूपीईआरसी की स्वीकृति प्राप्त नहीं है।परिषद ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जैसे ही नियामक आयोग नई कॉस्ट डेटा बुक को अंतिम रूप देगा, उपभोक्ताओं से की गई अतिरिक्त वसूली की वापसी के लिए परिषद अपनी लड़ाई और मजबूती से आगे बढ़ाएगी।
केंद्रीय वेतन आयोग द्वारा पेंशन पुनरीक्षण का उल्लेख न होने पर चिंता जताई
उत्तर प्रदेश पेंशनर्स कल्याण संस्था लखनऊ इकाई की मासिक बैठक आज जवाहर भवन इंदिरा भवन कर्मचारी महासंघ कार्यालय में जिला अध्यक्ष रमेश चंद्र श्रीवास्तव की अध्यक्षता एवं जिलामंत्री हरिशंकर श्रीवास्तव के संयोजकत्व में संपन्न हुई। बैठक में प्रांतीय उपाध्यक्ष गोपी कृष्ण श्रीवास्तव व महामंत्री ओंकार नाथ तिवारी तथा जनपद संरक्षक ए के सक्सेना भी उपस्थित रहे।
बैठक में मुख्य रूप से आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के विचारणीय बिंदुओं में पेंशन पुनरीक्षण का उल्लेख न होने पर चिंता जताई गई और आक्रोश व्यक्त किया गया। संस्था की प्रांतीय इकाई तथा संयुक्त पेंशनर्स कल्याण समिति उत्तर प्रदेश द्वारा लिए गए निर्णयानुसार आगामी 17 दिसंबर पेंशनर दिवस को भारी संख्या में पेंशनर्स जिलाधिकारी के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री भारत सरकार तथा मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार को ज्ञापन सौंपेंगे। वक्ताओं ने पेंशन राशिकरण के प्रकरण को आठवें केंद्रीय वेतन आयोग को संदर्भित किये जाने को अनुचित तथा न्यायालय के आदेशों के विपरीत बताया. पेंशनरों के चिकित्सा देयकों के भुगतान में भी विभिन्न कार्यायलयों द्वारा अनावश्यक आपत्ति लगाए जाने पर आक्रोश व्यक्त किया गया। बैठक में मुख्य रूप से राम जी श्रीवास्तव, कल्पना पाठक, प्रकाश चंद शुक्ला, अवधेश त्रिपाठी, रमाशंकर सिंह, अश्वनी कुमार उपाध्याय, सुनीता द्विवेदी, रामशंकर वर्मा आदि ने अपने विचार व्यक्त किये. विनीत कुमार शर्मा व राम कुमार श्रीवास्तव सहित कई पेंशनरों ने संस्था की सदस्यता भी ग्रहण की।
