- REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
नयी दिल्ली :कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और समाजवादी सांसद रामगोपाल यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही को सुनियोजित राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया।समाजवादी सांसद गोपाल यादव ने कहा कि महात्मा गांधी का नाम हटाने और उसे बदलने की क्या जरूरत थी? भाजपा को क्या परेशानी है? सपा सांसद राम गोपाल यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा, सच तो यह है कि जो बिल वे ला रहे हैं, वह पहले से ही मौजूद था, तो महात्मा गांधी का नाम हटाने और उसे बदलने की क्या जरूरत थी ?
राजनीतिक प्रतिशोध के लिए कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को निशाना बना रही केंद्र सरकार-खरगे
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने एक महत्वपूर्ण अदालती फैसले के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि गांधी परिवार के सामने जो कानूनी चुनौतियां पेश की जा रही हैं, उनमें कोई दम नहीं है और वे विशेष रूप से राजनीतिक विरोधियों को
परेशान करने के लिए बनाई गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने मंगलवार को नेशनल हेराल्ड मामले में वरिष्ठ नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी एवं पांच अन्य के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के धन शोधन के आरोपों पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। खरगे ने इस बात पर जोर दिया कि कार्यवाही के शुरुआती चरणों में प्राथमिकी का न होना यह साबित करता है कि आरोप पूरी तरह बेबुनियाद है।
श्री खरगे ने कहा, वे (केन्द्र सरकार) यह सब राजनीतिक प्रतिशोध के लिए कर रही है। यह केस सिर्फ गांधी परिवार को परेशान करने के लिए है। इस मामले में कोई प्राथमिकी नहीं है। हमारा नारा सत्यमेव जयते है और हम इस मामले में आए फैसले का स्वागत करते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष की यह टिप्पणी पार्टी के शीर्ष नेताओं से जुड़े लंबे समय से चल रहे एक कानूनी विवाद के बीच आई है। हालांकि इस विशिष्ट फैसले ने पार्टी को राहत या दी है, लेकिन श्री खरगे ने तुरंत इसे व्यापक संदर्भ से जोड़ते हुए कहा कि सत्ता पक्ष विपक्षी दलों को दबाने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रहा है। यह मामला पिछले कई वर्षों से भारतीय राजनीति में विवाद का केंद्र रहा है। यह कांग्रेस से जुड़ी संस्थाओं में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर आधारित है। जहां सरकार और जांच एजेंसियां यह कहती रही हैं कि वे केवल कानून के शासन का पालन कर रही हैं, वहीं कांग्रेस पार्टी लगातार इस जांच को प्रक्रियात्मक अत्याचार बताती रही है।
कांग्रेस नेताओं ने अक्सर इस बात की ओर इशारा किया है कि ईडी ने औपचारिक प्राथमिकी के बजाय निजी शिकायतों के आधार पर जांच शुरू की थी। पार्टी का आरोप है कि समन और अदालती कार्यवाही का समय अक्सर बड़े चुनावों या संसदीय सत्रों के साथ मेल खाता है। श्री खरगे के कड़े रुख से संकेत मिलता है कि पार्टी इन कानूनी बाधाओं को श्सत्य और न्याय के लिए एक जन-आंदोलन बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। कांग्रेस अध्यक्ष ने सत्यमेव जयतेश् का आह्वान करते हुए इस कानूनी जीत और पार्टी के व्यापक संघर्ष को सरकारी शक्ति के दुरुपयोग के खिलाफ एक नैतिक लड़ाई के रूप में पेश करने की कोशिश की।
एसआईआर व मनरेगा पर सख्त हुए रामगोपाल यादव,कहा कि महात्मा गांधी कई लोगों से ज्यादा थे धार्मिक
मनरेगा पर रामगोपाल यादव ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि जब गांधी जी को गोली मारी गई थी, तब उनके आखिरी शब्द राम थे, वे राम विरोधी नहीं थे। महात्मा गांधी कई लोगों से ज्यादा धार्मिक थे। इस देश में किसी ने भी इस तरह से इतना गहरा योगदान नहीं दिया है और शायद भविष्य में भी कोई नहीं देगा।उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के जैसा न तो देश में कोई पैदा हुआ था और न ही अब होने वाला है। इसके बाद भी भाजपा को इनसे क्या परेशानी है, यह समझ में नहीं आ रहा है। विकसित भारत जी राम जी बिल पर राम गोपाल यादव ने कहा, मनरेगा को प्रभावी ढंग से कम कर दिया गया है। 40 प्रतिशत फंडिंग कौन देगा? राज्यों के पास फंड नहीं है और आप उन पर दबाव डाल रहे हैं। व्यवस्था यह थी कि राज्य केवल 10 प्रतिशत देंगे और केंद्र 90 प्रतिशत देता है। हालांकि, अब उन्होंने अपने ही भाजपा सदस्यों से सलाह लिए बिना इसे लागू कर दिया है।
एसआईआर पर रामगोपाल यादव ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि एसआईआर में चार कैटेगरी हैं। मृत वोटर,
स्थायी रूप से विस्थापित वोटर, जिनका पता नहीं चल रहा है और डबल वोट। डबल वोटों को एक वोट में बदल दिया जाता है। अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि जिनका नाम एक जगह से काटा जा रहा है, वह दूसरे स्थान पर मतदाता सूची में अपना नाम डलवा पाए हैं कि नहीं। इसमें भी गड़बड़ी की जा सकती है, जैसे सरकार के दबाव में अधिकारी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में, अगर मुस्लिम वोटरों के नामों में स्पेलिंग में अंतर है, तो उन्हें कैटेगरी सी में डालने की कोशिश की जा रही है। कैटेगरी सी में रखे जाने का मतलब है कि उन्हें नोटिस मिलेंगे जिसमें उनसे सबूत देने के लिए कहा जाएगा। बंगाल में, जहां वोट हटाए गए थे, यह एक बड़ा मुद्दा बन गया था, लगभग 62 लाख वोट प्रभावित हुए थे। उत्तर प्रदेश में, लगभग 4 करोड़ वोट शामिल हैं। हालांकि प्रक्रिया में अनियमितताएं हैं, अगर ईमानदार अधिकारी इंचार्ज हैं, तो हेरफेर की संभावना कम है, अगर बेईमान अधिकारी कंट्रोल में हैं, तो अनियमितताएं हो सकती हैं।
