LUCKNOW:बिजली रियायत समाप्त करने पर भड़के कार्मिक,क्लिक करें और भी खबरें

-अवकाश के दिन बैठक कर प्रबल विरोध की तैयारी

  • REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS|| EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने ऐलान किया है कि बिजली के निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध के साथ बिजली कर्मियों को एक्ट के तहत मिल रही रियायती बिजली की सुविधा समाप्त करने के आदेश के विरोध में आगामी 01 जनवरी, 2026 को बिजली कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर और अभियंता विरोध दिवस मनाएंगे।
संघर्ष समिति ने बताया कि ष्विरोध दिवसष् के दौरान बिजली कर्मी पूरे दिन दाहिने बाजू पर काली पट्टी बंधेंगे और समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर भोजन अवकाश अथवा कार्यालय समय के उपरांत व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे।
संघर्ष समिति ने बताया कि पॉवर कारपोरेशन द्वारा 22 दिसंबर को जारी एक आदेश में कहा गया है कि समस्त बिजली कर्मियों और पेंशनरों के निवास पर हर हाल में 31 दिसम्बर तक स्मार्ट मीटर लगा दिया जाय अन्यथा की स्थिति में संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों पर प्रतिकूल कार्यवाही की जायेगी। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मियों को रियायती बिजली की सुविधा इलेक्ट्रिसिटी रिफॉर्म एक्ट 1999, यूपी ट्रान्सफर स्कीम 2000 और इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 के प्राविधानों के अनुसार मिल रही है। इसमें कोई भी छेड़छाड़ इन अधिनियमों का उल्लंघन है जिसे कदापि स्वीकार नहीं किया जायेगा। संघर्ष समिति ने बताया कि इलेक्ट्रिसिटी रिफॉर्म एक्ट 1999 के सेक्शन 23(7) में साफ लिखा है कि 14 जनवरी 2000 को बिजली कर्मियों को मिल रही रियायती बिजली की सुविधा किसी भी स्थिति में कमतर नहीं होगी। यू पी ट्रान्सफर स्कीम 2000 के सेक्शन 12(बी) में इसे पुनः लिखा गया है और इस सुविधा को टर्मिनल बेनिफिट्स बताया गया है। इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 के सेक्शन 133(2) में इसी भावना को प्रतिध्वनित किया गया है।
संघर्ष समिति ने पॉवर कारपोरेशन के 22 दिसंबर 2025 के आदेश पर पॉवर कार्पाेरेशन के चेयरमैन को पत्र भेजकर इन सभी अधिनियमों का हवाला देते हुए मांग की है कि यदि किसी भी कर्मचारी या अधिकारी पर जबर्दस्ती मीटर लगाने का दबाव बनाया गया अथवा कोई प्रतिकूल कार्यवाही की गई तो इसकी तीखी प्रतिक्रिया होगी जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी। आज अवकाश के दिन बिजली कर्मियों ने सभी जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक जनसंपर्क कर और बैठक कर बिजली के निजीकरण और जबरदस्ती मीटर लगाने की कार्यवाही के विरोध में अभियान चलाया और निर्णय लिया गया कि रियायती बिजली की सुविधा समाप्त करने का एकजुट होकर सशक्त विरोध किया जायेगा।

वर्टिकल व्यवस्था पूरी तरह चौपट
-गर्मी आते ही क्रिटिकल होगी व्यवस्था, सरकार करे हस्तक्षेप

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के तत्वावधान में आज आयोजित साप्ताहिक वेबिनार में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से जुड़े विद्युत उपभोक्ताओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। वेबिनार में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की विश्वसनीयता तथा पावर कारपोरेशन द्वारा लागू की जा रही वर्टिकल व्यवस्था से उत्पन्न उपभोक्ता समस्याओं पर गंभीर चर्चा की गई।वेबिनार में उपभोक्ताओं ने कहा कि वर्टिकल व्यवस्था लागू किए जाने के बाद उपभोक्ताओं की सेवा संबंधी समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। शिकायतों के समाधान के लिए उपभोक्ताओं को अपने क्षेत्र को छोड़कर 12 से 15 किलोमीटर दूर अन्य क्षेत्रों में भटकना पड़ रहा है। इससे उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश है और कहीं भी प्रभावी सुनवाई नहीं हो पा रही है।उपभोक्ताओं ने चेतावनी दी कि गर्मी का मौसम शुरू होते ही वर्टिकल व्यवस्था प्रदेश सरकार के लिए एक क्रिटिकल व्यवस्था साबित हो सकती है। अभी भी समय है कि उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार करे। उपभोक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि प्रदेश के उपभोक्ता निजी क्षेत्र जैसी व्यवस्था को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं, जहां न्यूनतम कर्मचारियों के सहारे उपभोक्ताओं को परेशान किया जाता है।
स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर उपभोक्ताओं ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि कहीं बिलिंग व्यवस्था गड़बड़ है तो कहीं स्मार्ट मीटर वास्तविक खपत से अधिक बिजली खपत दिखा रहा है। जिन उपभोक्ताओं का बिजली बिल पहले 1000 से 1500 के बीच आता था, वह अब सीधे 2000 तक पहुंच गया है।कही ज्यादा भी उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि चेक मीटर की कोई भी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जा रही है, जिससे यह प्रतीत होता है कि सुनियोजित तरीके से उपभोक्ताओं का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई।उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य श्री अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर की विश्वसनीयता और वर्टिकल व्यवस्था से जुड़ी सभी समस्याओं को विद्युत नियामक आयोग के समक्ष मजबूती से रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि पावर कारपोरेशन चलती हुई विद्युत व्यवस्था को बर्बाद करने के लिए वर्टिकल व्यवस्था लागू कर रहा है तथा स्मार्ट प्रीपेड मीटर की विश्वसनीयता पूरी तरह संदेह के घेरे में है। श्री वर्मा ने मांग की कि विद्युत नियामक आयोग तत्काल इस पूरे मामले में हस्तक्षेप करे और प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को न्याय दिलाए। उत्तर प्रदेश सरकार को भी गंभीर मामले पर अभी से सोचना जरूरी है अन्यथा की स्थिति में गर्मी आते ही व्यवस्था पटरी से उतरेगी

भारतेंदु हरिश्चंद्र वार्ड में पोर्टेबल कॉम्पैक्टर ट्रांसफर स्टेशन का उद्घाटन

नगर निगम लखनऊ द्वारा शहर की स्वच्छता व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई। भारतेंदु हरिश्चंद्र वार्ड, अलीगंज सेक्टर-एल स्थित यादव लोहा भंडार परिसर में पोर्टेबल कॉम्पैक्टर ट्रांसफर स्टेशनका उद्घाटन महापौर श्रीमती सुषमा खर्कवाल द्वारा विधिवत रूप से किया गया। इस अवसर पर क्षेत्रवासियों में विशेष उत्साह देखने को मिला।उद्घाटन समारोह में पार्षद मान सिंह यादव, नगर आयुक्त गौरव कुमार, पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान, प्रोजेक्ट हेड लखनऊ स्वच्छता अभियान (एलएसए) अभय रंजन, पूर्व जीएम जलकल एवं एलएसए कंसल्टेंट एस.के. वर्मा सहित नगर निगम के अधिकारी, कर्मचारीगण एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने इस परियोजना को शहर के समग्र विकास और स्वच्छता सुधार के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।

महापौर सुषमा खर्कवाल ने अपने संबोधन में कहा कि लखनऊ को स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ शहर बनाने के लिए नगर निगम लगातार आधुनिक तकनीकों को अपना रहा है। पोर्टेबल कॉम्पैक्टर ट्रांसफर स्टेशन से कचरा खुले में फेंके जाने की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण होगा, साथ ही कचरा बिखराव और दुर्गंध में भी कमी आएगी। उन्होंने नागरिकों से स्वच्छता नियमों का पालन करने और नगर निगम का सहयोग करने की अपील की। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने जानकारी दी कि यह परियोजना पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (च्च्च्) मॉडल के अंतर्गत संचालित की जा रही है। इसके तहत लखनऊ स्वच्छता अभियान प्रा. लि. को नगर निगम के 5 जोनों में अपशिष्ट प्रबंधन सेवाओं का दायित्व सौंपा गया है। इसमें डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, सेकेंडरी कलेक्शन एवं ट्रांसपोर्टेशन, सड़क व गलियों की सफाई, नालियों की सफाई सहित परिवहन तथा पोर्टेबल एवं फिक्स्ड कॉम्पैक्टर ट्रांसफर स्टेशन का निर्माण एवं संचालन शामिल है। यह कार्य वार्ड संख्या 01, 03, 04, 06 एवं 07 में किया जा रहा है।
परियोजना के अंतर्गत कुल 32 साइटें प्रस्तावित हैं, जिनमें प्रथम चरण की 8 तथा द्वितीय चरण की 24 साइटें शामिल हैं। प्रथम चरण की सभी 8 साइटों को पूर्ण कर ऑपरेशनल किया जा चुका है। द्वितीय चरण की 24 में से 13 साइटों पर निर्माण कार्य पूरा कर संचालन शुरू हो गया है। भारतेंदु हरिश्चंद्र वार्ड की यह साइट 14वीं साइट है, जिसका शनिवार को उद्घाटन किया गया। शेष 10 साइटों पर कार्य तेजी से प्रगति पर है, जिन्हें फरवरी-मार्च 2026 तक पूर्ण कर संचालन में लाने का लक्ष्य रखा गया है। इस पीसीटीएस में 2 पोर्टेबल हाइड्रोलिक कॉम्पैक्टर लगाए गए हैं, जिनकी क्षमता 20 घन मीटर है। हाइवा (भ्लअं) निर्मित वाहनों के माध्यम से 15-16 घन मीटर क्षमता वाले वाहक वाहन तथा भारत बेंज निर्मित 35 जीवीडब्लू क्षमता वाले ट्रक कचरा परिवहन में उपयोग किए जाएंगे।इस ट्रांसफर स्टेशन का मुख्य उद्देश्य ठोस अपशिष्ट को खुले में फेंकने से रोकना, कचरा उछर-बिखराव पर नियंत्रण, संग्रहण बिंदुओं पर स्वच्छता सुनिश्चित करना, कचरा परिवहन व्यवस्था को सुव्यवस्थित करना, निस्तारण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना, कचरा प्रबंधन नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करना तथा नागरिक सुविधाओं में सुधार करना है।

अवमानना के बाद ही दलित अभियंताओं को मिल रहा न्याय
-अकारण दलित व पिछडे वर्ग के अभियंताओं के निलंबन पर फूटा गुस्सा

उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन ने आज एक आपात बैठक कर सभी बिजली कंपनियों मे दलित व पिछला वर्ग के कार्मिकों की समस्याओं पर चर्चा की सर्व समस्या निर्णय लिया गया कि 4 जनवरी को प्रांतीय कार्य समिति का एक प्रादेशिक रिटायरमेंट सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। जिसमें पूरे प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों में जनवरी 25 से जनवरी से दिसंबर तक जो भी अभियंता अधिकारी सेवानिवृत हुए हैं उनका लखनऊ में सम्मान किया जाएगा।आज एक आपात बैठक करके तैयारी का जायजा लिया गया साथ ही इस बात पर घोर चिंता व्यक्त की गई की बिजली कंपनियों में दलित अभियंताओं को माननीय उच्च न्यायालय जाने के बाद ही न्याय क्यों मिल रहा है।
उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आर पी केेंन, कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, उपाध्यक्ष नेकीराम, पीएम प्रभाक,र संगठन सचिव हरिश्चंद्र वर्मा, धीरेंद्र कुमार, ट्रांस को अध्यक्ष सुशील कुमार वर्मा, एक प्रभाकर, पश्मिांचल अध्यक्ष एमके अहिरवार ने कहा आज एक नए मामले पर चर्चा करते हुए आर पार की लड़ाई का ऐलान भी किया गया।

वैसे तो दर्जनों अभियंता जिनकी लंबी लिस्ट है जिन्हें उच्च न्यायालय से न्याय मिला उसी में एक बहुत ही गंभीर मामला है मुख्य अभियंता मुकेश बाबू जो बनारस में पोस्टेड थे उन्हें मात्र 21 दिन में निलंबित कर दिया गया। उनका कोई भी दोष नहीं था उनके द्वारा इस मामले को उच्च न्यायालय इलाहाबाद पीठ में चुनौती दी गई। उच्च न्यायालय इलाहाबाद पीठ द्वारा 26 सितंबर को यह स्पष्ट निर्देश जारी किया गया की 8 सप्ताह यानी की 20 नवंबर तक पावर कॉरपोरेशन मुकेश बाबू के मामले में निर्णय ले ले अन्यथा की स्थिति में उनका निलंबन आदेश स्वत निरस्त माना जाएगा। उच्च न्यायालय द्वारा दी गई समय सीमा समाप्त हुए एक माह से ज्यादा हो गया। लेकिन पावर कार्पाेरेशन प्रबंधन ने उनके मामले पर कोई निर्णय नहीं किया। पावर कार्पाेरेशन प्रबंधन दलितों को अवमानना याचिका के बाद ही न्याय क्यों दे रहा है उत्तर प्रदेश सरकार इसकी उच्च स्तरीय जांच कराए इसी प्रकार अनेकों मामले हैं जो उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका के बाद ही उन्हें न्याय दिया जा रहा है।

Aaj National

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