पुलिस मंथन:यूपी सीएम ने किया प्रारम्भ,कहा पुलिस कर्मियों के लिए कराए जाएं रिफ्रेशर कोर्स 

-साइबर मुख्यालय की हो स्थापना, प्रभावी ढंग से रोका जाये अपराध -मुख्यमंत्री 
-बेस्ट प्रैक्टिसेज़ का केन्द्र बने पुलिस लाइन ,बनाया जाए म्युजियम व  पार्क

  • REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK 

लखनऊ :मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि साइबर क्राइम आज सभी के लिए चुनौती बन चुका है।जनपदों मेंबड़ी संख्या में साइबर अपराध दर्ज किए जा रहे हैं।साइबर क्राइम को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए समय पर उचित कार्यवाही की जाए।समन्वय के स्तर को बेहतर बनाया जाए।लोगों को साइबर क्राइम से बचाव के लिए जागरूक किया जाए। बी0सी0 सखी से समन्वय कर गांवों में लोगों को जागरूक किया जाए।

मुख्यमंत्री आज यहां पुलिस मुख्यालय में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सम्मेलन (पुलिस मंथन) का शुभारम्भ करने के उपरान्त, प्रथम दिवस पर आयोजित समस्त सत्रों में अधिकारियों को मार्गदर्शन प्रदान कर रहे थे।मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल ट्रांजेक्शन से एक ओर जहां लोगों को सुविधा प्राप्त हुई है, वहीं दूसरी ओर डिजिटल अरेस्ट की घटनाएं भी बढ़ी हैं। जागरूकता के लिए महिला बीट पुलिसिंग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। कोविड कालखण्ड में बी0सी0 सखी ने बैंकिंग प्रणाली को आमजन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। साइबर फ्रॉड की प्रभावी रोकथाम के लिए बैंकों द्वारा रखे गये बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेन्ट से भी समन्वय स्थापित किया जाए। डीपफेक के मामलों में त्वरित कार्यवाही की जाए। इसके साथ ही साइबर हेल्पडेस्क को अधिक प्रभावी बनाया जाए, ताकि पीड़ितों को जल्द राहत दिलायी जा सके। हेल्पलाइन का विस्तार किया जाए तथा साइबर मुख्यालय की स्थापना की जाए। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में चुनौतियां बढ़ सकती हैं जिसके लिए अभी से तैयारियां पूर्ण कर ली जाएं।मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पूर्व पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण की क्षमता सीमित थी, जो आज कई गुना बढ़ चुकी है। यह निरन्तर प्रयास से ही सम्भव हो पाया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान चुनौतियों से निपटने के लिए पुलिस कर्मियों को अपडेट किया जाए। उनके लिए रिफ्रेशर कोर्स कराए जाएं। पुलिस लाइन व्यवस्था को मजबूत बनाया जाए। यह केवल आमद का केन्द्र न रहे, बल्कि बेस्ट प्रैक्टिसेज़ का केन्द्र बने। यहां एक पुलिस म्युजियम बने। एक टै्रफिक पार्क बनाया जाए, जहां स्कूली बच्चों को टै्रफिक के नियमों से अवगत कराया जाए। कोविड काल में उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में व्यवस्थाओं को लेकर एक चुनौती थी। 36 जनपदों में कोई भी आई0सी0यू0 बेड नहीं था। क्रिटिकल केयर के लिए जिले के अस्पतालों को एस0जी0पी0जी0आई0, के0जी0एम0यू0 तथा डॉ0 राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के साथ जोड़ा गया। वर्चुअल आई0सी0यू0 की व्यवस्था की गयी। इसी प्रकार से पुलिस कर्मियों को भी मानसिक रूप से नई परिस्थितियों के लिए तैयार किया जाना चाहिए। प्रमोशन की प्रक्रिया में सुधार किया जाए। इसमें क्वालिटी का पूरा ध्यान रखा जाए।

पुलिस लाइन की व्यवस्था को सुदृढ़ करने में लिया जाए वामा सारथी का सहयोग-मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने कहा कि वामा सारथी को पुलिस मुख्यालय के साथ-साथ जनपद स्तर पर भी सक्रिय किया जाए। पुलिस लाइन की व्यवस्था को सुदृढ़ करने में इनका सहयोग लिया जाए। कोविड काल में जनपदों में मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के माध्यम से युवाओं के लिए कोचिंग की व्यवस्था की गयी थी। प्रशिक्षु अधिकारी भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी प्रकार की एक अच्छी कोचिंग की व्यवस्था पुलिस लाइन में भी की जा सकती है। ‘मिशन कर्मयोगी’ के साथ उत्तर प्रदेश के कार्मिक सबसे अधिक संख्या में जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि जितना हम अपने मानव संसाधन को अपडेट करेंगे, उतना ही बेहतर परिणाम दे पाएंगे।प्रयागराज महाकुम्भ-2025 में पुलिस की सकारात्मक भूमिका की काफी सराहना हुई। महाकुम्भ के दौरान पुलिस कर्मियों के व्यवहार को लेकर प्रशिक्षण दिया गया, जिसके लिए समाज शास्त्रियों, मनोविज्ञानियों, इतिहासकारों व मानव शास्त्रियों की सहायता ली गयी। परिणामस्वरूप सुरक्षा व सेवाभाव से पूरा महाकुम्भ आयोजन पूरी तरह से सफल रहा। प्रधानमंत्री जी द्वारा भी उत्तर प्रदेश पुलिस की सराहना की गयी है।मुख्यमंत्री ने  कहा कि उत्तर प्रदेश को पूरे देश में सर्वाधिक अपराधियों को सजा दिलाने में सफलता मिली है। यह हमारे विभिन्न नवाचारों को अपनाने व कार्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पुलिस विभाग और अभियोजन विभाग के मध्य समन्वय इसी प्रकार बना रहे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट की सुनवाई को बढ़ावा दिया जाए। हमें ट्रेण्ड मैनपावर को बढ़ाना होगा। जनपदों में हर माह डिस्ट्रिक्ट मॉनीटरिंग कमेटी की बैठक आहूत हो और इसके प्रभावी परिणाम भी निकल कर आएं।मुख्यमंत्री  ने कहा कि कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं विभाग ने डिजिटल कारागार, बंदी कल्याण एवं पुनर्वास सहकारी समिति, सुरक्षित बचपन योजना जैसी पहलों के माध्यम से कारागार व्यवस्था को सुदृढ़ किया है। उत्तर प्रदेश देश का एक मात्र राज्य है, जिसने कारागारों को उत्पादक इकाई के रूप में भी स्थापित किया। प्रदेश सरकार ने मॉडर्न जेल मैनुअल लागू किया है। कैदियों द्वारा जेल में बनाए गए सामानों की बिक्री के लिए विभिन्न ट्रेड प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाए।

उत्तर प्रदेश को सुरक्षित व समृद्ध उत्तर प्रदेश बनाएंगे-मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस रीएक्टिव पुलिसिंग से बढ़कर प्रेडिक्टिव व प्रोएक्टिव पुलिसिंग की ओर बढ़ी है। सी0सी0टी0एन0एस0 के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी राज्यों में से एक है। विवेचनाओं की पेण्डेन्सी को कम करने में फॉरेन्सिक इन्वेस्टीगेशन की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके दृष्टिगत प्रदेश सरकार ने लखनऊ में उत्तर प्रदेश राज्य फॉरेन्सिक विज्ञान संस्थान को स्थापित किया है, जो सक्रियता से कार्य कर रहा है।वर्ष 2017 से पूर्व प्रदेश में मात्र 04 विधि विज्ञान प्रयोगशालाएं (एफ0एस0एल0) थीं। वर्ष 2017 के बाद 08 नई विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं की स्थापना की गयी है तथा 06 नई विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं की स्थापना का कार्य किया जा रहा है। सभी एफ0एस0एल0 बेहतर ढंग से कार्य करें। राज्य सरकार ने सभी जनपदों में 02-02 फॉरेन्सिक लैब भी उपलब्ध करायी हैं। हमें वर्तमान व भविष्य की आवश्यकताओं के दृष्टिगत यू0पी0 स्टै्रटजिक मैनेजमेण्ट एण्ड ए0आई0 ड्रिवेन रिस्पॉन्सिव ट्रांसफॉर्मेशन की दिशा में कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि ‘पुलिस मंथन’ में अच्छे विचार आए हैं। हम मिलकर उत्तर प्रदेश को सुरक्षित व समृद्ध उत्तर प्रदेश बनाएंगे।

जी0आर0पी0 थाने सहित प्रत्येक थाने में साइबर हेल्पडेस्क की स्थापना

अधिकारियों ने अवगत कराया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में अभियोजन के कार्यों में तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। आई0सी0जे0एस0 पोर्टल के माध्यम से ई-प्रॉसीक्यूशन सम्पन्न किया जा रहा है। ई-रिपोर्टिंग, ई-कोर्ट्स, नवीन आपराधिक गतिविधियों का डैशबोर्ड जैसे नवाचार इनमें प्रमुख हैं। वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में 66 हजार से अधिक गवाही करायी गयी हैं। परिणामस्वरूप इस कार्य में व्यय धनराशि में भी कमी आयी है।सम्मेलन में सम्बन्धित अधिकारियों ने  साइबर अपराध की रोकथाम के लिए वर्तमान में किये गये प्रयासों तथा सम्भावित चुनौतियों से निपटने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की। अधिकारियों ने  मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि वर्तमान में प्रदेश के समस्त जनपदों में साइबर क्राइम थाने संचालित हैं। जी0आर0पी0 थाने सहित प्रत्येक थाने में साइबर हेल्पडेस्क की स्थापना की गयी है। साथ ही, साइबर क्राइम थाना लखनऊ में एडवान्स फॉरेंसिंक लैब की स्थापना भी की गयी है। साइबर हेल्पलाइन नम्बर-1930 पर प्राप्त शिकायतों पर कार्यवाही करते हुए 238.26 करोड़ रुपये फ्रीज किये गये। साइबर अपराध में प्रयुक्त 20,094 मोबाइल नम्बर तथा 18,198 आई0एम0ई0आई0 नम्बर ब्लॉक कराये गये। साई-ट्रेन के माध्यम से 84,705 पुलिस कर्मी प्रशिक्षित किये गये। साइबर विशेषज्ञों द्वारा 18,861 पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया।अधिकारियों ने  यह बताया कि  वर्ष 2017 से 30 नवम्बर, 2025 तक दर्ज 87,175 पंजीकृत अभियोगों से से 74,824 का निस्तारण किया जा चुका है। 53,056 अभियुक्तों के विरुद्ध कार्यवाही की गयी है तथा 378 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि बरामद की गयी है। लोगों को ऑनलाइन व ऑफलाइन माध्यमों से जागरूक किया जा रहा है। आमजन एन0सी0आर0पी0 पोर्टल व हेल्पलाइन नम्बर पर साइबर फ्रॉड से सम्बन्धित शिकायत दर्ज कर सकते हैं।अधिकारियों ने अवगत कराया कि सभी जनपदों में ई-ऑफिस व्यवस्था क्रियान्वित की जा चुकी है। ‘मिशन कर्मयोगी’ के माध्यम से केन्द्र, राज्य व स्थानीय लोक सेवा को अधिक प्रभावी बनाने के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पुलिस प्रशिक्षण निदेशालय को इसकी नोडल एजेन्सी बनाया गया है। पुलिस कर्मियों के लिए 04 विशिष्ट कोर्स चलाए गए हैं। आई-गॉट पोर्टल पर प्रशिक्षण को वार्षिक मूल्यांकन से जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है।

मुख्यमंत्री के सम्मुख आए सभी विचारों पर करेंगे हम कार्य ,शीघ्र ही देंगे परिणाम-राजीव कृष्ण 

पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने कहा कि आज का दिवस ऐतिहासिक है। मुख्यमंत्री ने पूरा दिन इस सम्मेलन में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के विचारों को सुना व हम सभी को अपना मार्गदर्शन प्रदान किया। मुख्यमंत्री के सम्मुख आए सभी विचारों पर हम कार्य करेंगे और शीघ्र ही परिणाम भी देंगे। सम्मेलन में प्रस्तुत सभी प्रस्तुतिकरण गुणवत्तापूर्ण व भविष्योन्मुखी थे।इस अवसर पर प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री, गृह एवं सूचना  संजय प्रसाद, अपर पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक रैंक के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। सम्मेलन में विभिन्न जनपदों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।

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