LUCKNOW:छंटनी और निलंबन से बिजली व्यवस्था चरमराने की आशंका,क्लिक करें और भी खबरें

-निजीकरण के लिए माहौल बनाने में जुटा प्रबंधन

  • REPORT BY:K.K.VARMA || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK 

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन सुनियोजित तरीके से बिजली व्यवस्था को कमजोर करने पर आमादा है। गर्मियों से ठीक पहले बड़े पैमाने पर बिजली व्यवस्था संभाल रहे संविदा कर्मियों को हटाया जा रहा है और नियमित कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों एवं अभियंताओं को मनमाने ढंग से निलंबित किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में बिजली आपूर्ति पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ना तय है।

संघर्ष समिति ने कहा कि ध्यान रहे कि खाड़ी में चल रहे युद्ध के चलते इंडक्शन चूल्हों की मांग बढ़ने से आने वाली गर्मियों में बिजली की मांग बहुत अधिक बढ़ने वाली है। ऐसे में अनुभवी संविदा कर्मियों की बड़े पैमाने पर छटनी से बिजली व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है।

केन्द्रीय विद्युत मंत्रालय के अनुसार इस साल गर्मियों में देश में 270 गीगावाट तक बिजली की मांग जा सकती है जो विगत वर्ष 243 गीगावाट थी। इसी अनुपात में उप्र में भी बिजली की मांग लगभग 12 से 15 प्रतिशत तक बढ़ सकती है जो 36000 मेगावाट तक पहुंचने की संभावना है। संघर्ष समिति ने कहा कि ऐसी स्थिति में बहुत ही अनुभवी और कुशल संविदा कर्मियों को हटाना कौन सी रणनीति है ? इन उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में आज प्रदेश के सभी जनपदों
में बिजली कर्मियों ने अपने-अपने कार्यालयों के बाहर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया।

संघर्ष समिति ने कहा कि 11 अप्रैल को लखनऊ में संघर्ष समिति के सभी घटक संगठनों की केंद्रीय कार्यकारिणी की संयुक्त बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में प्रबंधन द्वारा निजीकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों, उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों एवं भय का वातावरण बनाने की साजिश के खिलाफ विस्तृत चर्चा कर प्रदेशव्यापी आंदोलन की आगामी रणनीति तय की जाएगी।

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि प्रबंधन जानबूझकर गर्मियों से पहले बिजली व्यवस्था में लगे संविदा कर्मियों को हटाकर और नियमित कर्मचारियों को निशाना बनाकर भय का वातावरण तैयार कर रहा है, ताकि बिजली व्यवस्था प्रभावित हो और बाद में इसकी आड़ में निजीकरण को उचित ठहराया जा सके।

संघर्ष समिति के अनुसार वर्ष 2017 के आदेश के तहत शहरी क्षेत्रों में एक सबस्टेशन पर 36 कर्मचारियों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 20 कर्मचारियों की व्यवस्था निर्धारित थी। लेकिन प्रबंधन ने इसे घटाकर क्रमश: 18.5 और 12.5 कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप पूरे प्रदेश में लगभग 2500 संविदा कर्मियों को हटाया जा चुका है। इसका सीधा असर आगामी गर्मियों में बिजली व्यवस्था पर पड़ना तय है।संघर्ष समिति ने बताया कि हाल के दिनों में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर कई शहरों में बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों की छंटनी की गई है।

राजधानी लखनऊ (लेसा) में 340, अयोध्या में 52 और मेरठ में 193 संविदा कर्मियों को हटाया गया है। इसके चलते कई स्थानों पर 36 कर्मचारियों के स्थान पर मात्र 9 कर्मचारी ही कार्यरत रह गए हैं, जो बिजली व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए पूरी तरह अपर्याप्त हैं।संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि जिन शहरों में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू की जा रही है, उन्हें भविष्य में अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के तहत निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी है।

पश्चिमांचल, दक्षिणांचल एवं मध्यांचल के कई शहरों में यह प्रक्रिया तेज कर दी गई है, जिससे स्पष्ट है कि प्रबंधन निजीकरण के एजेंडे पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि संविदा कर्मियों की छंटनी और नियमित कर्मचारियों के उत्पीड़न की कार्रवाई तत्काल बंद नहीं की गई, तो प्रदेशभर में व्यापक एवं निर्णायक आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जि मेदारी पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की होगी।

ऊर्जा मंत्री का लिखित जवाब, उपभोक्ताओं की सहमति पर ही प्रीपेड मोड

लोकसभा में आज विद्युत उपभोक्ताओं के अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रश्न के उत्तर में यह स्पष्ट किया गया है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर सरकार की नीति में उपभोक्ता की सहमति एक महत्वपूर्ण तथ्य है। आज लोकसभा में देश के ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा स्पष्ट कर दिया गया उपभोक्ताओं की सहमति के बाद ही प्रीपेड मोड में मीटर लगाया जा सकता है।

लंबे समय से उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के चेयरमैन व सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा यह कहते रहे हैं कि विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ताओं को प्रीपेड और पोस्टपेड मीटर लेने का विकल्प प्राप्त है, जिसका उत्तर प्रदेश में उल्लंघन किया जा रहा है। और आज उत्तर प्रदेश में लगभग 75 लाख से ज्यादा स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए जिसमें बिना उपभोक्ताओं की सहमत के ही 70 लाख से ज्यादा स्मार्ट प्रीपेड मीटर को प्रीपेड मोड में कन्वर्ट कर दिया गया जो देश के राष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है।

उपभोक्ता परिषद सभी प्रदेश के अपने विद्युत उपभोक्ताओं से अपील करता है कि जब उनके घरों में स्मार्ट मीटर लगाने कोई भी आए तो उन्हें वह भारत सरकार द्वारा बनाए गए राष्ट्रीय कानून विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5 )के तहत लिखित में अवगत करा दे कि उन्हें पोस्टपेड मीटर चाहिए या प्रीपेड बोर्ड में मीटर चाहिए जिससे बिजली कंपनियां कोई भी मनमानी व दादागिरी ना कर पाए।

इसी संदर्भ में आज लोकसभा में देश के ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपने लिखित उत्तर में स्पष्ट किया कि उपभोक्ता की सहमति के बाद ही स्मार्ट मीटर को प्रीपेड मोड में लगाया जा सकता है। ऊर्जा मंत्री द्वारा दिए गए उत्तर में यह भी बताया गया कि धारा 47(5) के अनुसार, यदि उपभोक्ता स्वयं प्रीपेड मीटर चाहता है, तो वितरण लाइसेंसी को उसे यह सुविधा प्रदान करनी होती है और इसके लिए किसी प्रकार की सुरक्षा राशि नहीं ली जाती।

विद्युत (उपभोक्ताओं के अधिकार) नियम, 2020 के तहत नए कनेक्शन स्मार्ट प्रीपेड मीटर के साथ दिए जाने का प्रावधान है, हालांकि अपवाद की स्थिति में राज्य विद्युत नियामक आयोग की अनुमति आवश्यक होती है। सरकार की नीति उपभोक्ताओं को प्रीपेड स्मार्ट मीटर अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की है, न कि इसे जबरन लागू करने की। सरकार ने यह भी कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर के कई लाभ है साथ ही उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ाने के लिए
विभिन्न दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिनमें बिल में छूट, आसान किस्तों में बकाया भुगतान, और स्मार्ट मीटर ऐप के माध्यम से खपत की निगरानी जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा लोकसभा में देश के ऊर्जा मंत्री द्वारा विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5 )पर लंबे समय से चल रहे विवाद पर अपना स्पष्ट मत दे दिया है अब जल्द ही उपभोक्ता परिषद इसके क्रम में विद्युत नियामक आयोग में पूरे मामले को रखकर इस अपवाद को समाप्त करेगा कि उपभोक्ताओं के साथ जो बिजली कंपनियां
दादागिरी कर रही है।

सेवानिवृत्त डिप्लोमा इंजीनियर्स की समस्याओं का होगा निराकरण: बृजेश पाठक
-सेवानिवृत्त डिप्लोमा इंजीनियर्स कल्याण संघ-उ.प्र. का षष्टम महाधिवेशन

सेवानिवृत्त डिप्लोमा इंजीनियर्स कल्याण संघ – उ.प्र. का षष्टम महाधिवेशन विश्वेश्वरैया सभागार, लोक निर्माण विभाग
लखनऊ के परिसर में स पन्न हुआ। षष्टम महाधिवेशन की अध्यक्षता संघ के प्रान्तीय अध्यक्ष इं. आर.के. भाटिया एवं संचालन प्रान्तीय कार्यकारी अध्यक्ष इं. दिवाकर राय तथा इं. बलवन्त प्रसाद, प्रान्तीय महासचिव द्वारा
किया गया।

महाधिवेशन के मुख्य अतिथि ब्रजेश पाठक उप मुख्यमंत्री एवं विशिष्ट अतिथि इं. अशोक कुमार द्विवेदी प्रमुख अभियन्ता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष लोनिवि, रविन्द्र कुमार निदेशक पेंशन एवं वीके सिंह निदेशक कोषागार की गरिमामयी उपस्थिति रही। राज्यपाल असम लक्ष्मण प्रसाद आचार्य द्वारा संघ के सदस्यों को स बोधित करते हुए अपना वीडियो
संदेश दिया गया।

महाधिवेशन में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक को, संघ के प्रान्तीय अध्यक्ष इं. आर.के. भाटिया ने माल्यार्पण एवं स्मृति चिन्ह
भेंट कर सम्मानित किया तथा महासचिव द्वारा सेवानिवृत्त संवर्ग के सदस्यों की समस्याओं का ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। समस्याओं में मुख्य रूप से वेलिडेशन एक्ट 2025 जो केन्द्र सरकार द्वारा लोकसभा में पारित किया गया है जिसके कारण आठवें वेतन आयोग में पेंशन एवं पेंशनरी लाभों पर कुठाराघात हो सकता है, राशिकरण कटौती अवधि 11 वर्ष करने,
प्रत्येक पांच वर्ष में पेंशन वृद्धि तथा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा 7600 ग्रेड पे के स्थान पर 8700 ग्रेड पे का आदेश किया जाना है।
उप मुख्यमंत्री द्वारा 75, 80 वर्ष से ऊपर के संघ के वरिष्ठ 72 सदस्यों को स मानित किया गया। साथ ही साथ संघरत्न के रूप में इं. जयकरन सिंह, इं. अमरनाथ, इं. एस.पी. मिश्रा, इं. आर.पी. मिश्रा को स मानित किया गया।उप मु यमंत्री द्वारा पदाधिकारियों इं. नरेश कुमार प्रान्तीय वित्त सचिव लखनऊ एवं इं. नागेन्द्र सिंह सदस्य कार्यकारिणी एवं मण्डलों एवं
जनपदों के श्रेष्ठ पदाधिकारियों को स मानित किया गया।

उप मुख्यमंत्री ने अपने स बोधन में सेवानिवृत्त डिप्लोमा इंजीनियर्स की सराहना करते हुए कहा कि आपने अपने राजकीय सेवाकाल में प्रदेश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है तथा सेवानिवृत्ति के उपरान्त भी सामाजिक सेवा में पूर्ण लगन एवं निष्ठा से लगे हुए हैं। संघ द्वारा आज जो समस्याओं का ज्ञापन मुझे दिया गया है। उसका मैनें अध्ययन किया है। आपकी
समस्याएं उचित हैं, मैं इसका पूर्ण समाधान का प्रयास करूँगा।सभा को इं. अशोक कुमार द्विवेदी प्रमुख अभियन्ता, लोक निर्माण विभाग,रविन्द्र कुमार निदेशक पेंशन एवं वीके सिंह निदेशक कोषागार द्वारा सबोधित किया गया तथा पेंशनर की समस्याओं के समाधान हेतु सदैव तत्पर रहने का आश्वासन दिया गया।

आज के महाधिवेशन में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष इं. हरि किशोर तिवारी, राष्ट्रीय अध्यक्ष इं. शिव शंकर दूबे तथा पी.के. शर्मा, एनपी त्रिपाठी, एनडी द्विवेदी, जीपी जायसवाल, विजय श्रीवास्तव, सुभाष श्रीवास्तव, पीके मिश्रा, जगमोहन लाल जायसवाल, दीनानाथ वर्मा, शिव शंकर सिंह, विजय कुमार सिंह, शिव शंकर वर्मा, अखिलेश्वर श्रीवास्तव, उदेश सिंह एवं दीनबन्धु सिंह, राम रतन, ए.के. गुप्ता, पीके राय, एके राय, ओपी वर्मा आदि उपस्थित रहे।

Aaj National

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