-आरक्षण पर कुठाराघात बर्दाश्त नहीं करेंगे: एसोसिएशन
- REPORT BY:PREM SHARMA || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ।उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन निदेशक मंडल द्वारा सीधी संविदा भर्ती करने के लिए सीए एवं सीएमए के पद पर पहले तीन वर्ष उसके बाद 2 वर्ष का विस्तार जो निदेशक मंडल का निर्णय लिया गया है।इस पर दलित व पिछड़े वर्ग के शीर्ष प्रतिनिधि संगठन पावर ऑफिसर एसोसिएशन ने कड़ा विरोध जताया है। एसोसिएशन की तरफ से कहा गया है कि एक तरफ लैटरल एंट्री में आरक्षण गया। अभी निर्देशकों के 17 पदों पर आरक्षण को लेकर संशय बना हुआ है। अब पावर कॉरपोरेशन संविदा की सीधे भर्ती करके आरक्षण पर बड़ा कुठाराघात करने की तैयारी कर रहा है। इसके विरोध में पावर ऑफिसर एसोसिएशन की प्रांतीय कार्य समिति की बैठक जल्द बुलाई जाएगी। इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।
पावर ऑफिसर एसोसिएशन के अध्यक्ष आर पी केन, कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, महासचिव अनिल कुमार, संगठन सचिव बिंदा प्रसाद ने कहा हर हाल में हर भर्ती में आरक्षण का प्रावधान होना चाहिए। जिस प्रकार से गुपचुप तरीके से चोर दरवाजे संविदा पर सीधे भारती का निदेशक मंडल से आदेश पारित कर दिया गया। उसमें आरक्षण की व्यवस्था कैसे लागू होगी का कोई भी प्रावधान न किया जाना ऐसा दर्शाता है कि पावर कॉरपोरेशन लगातार दलित व पिछड़े वर्गों के आरक्षण पर कुठाराघात कर रहा है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
निजीकरण के विरोध में 9 अप्रैल को लखनऊ रैली की तैयारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट के वाराणसी और आगरा दौरे का प्रबल विरोध करने का निर्णय लिया है। संघर्ष समिति के आह्वान पर आज प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर विरोध सभा का क्रम जारी रहा। निजीकरण के विरोध में 09 अप्रैल को लखनऊ में होने वाली विशाल रैली की तैयारी में आज राजधानी लखनऊ सहित समस्त जनपदों में संघर्ष समिति की टीम ने कार्यालय कार्यालय जाकर बिजली कर्मचारियों से व्यापक संपर्क किया।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु अवैधानिक ढंग से नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट मेसर्स ग्रांट थॉर्टन की टीम कल वाराणसी और आगरा का दौरा करने वाली हैं। संघर्ष समिति ने आज पत्र भेजकर पॉवर कार्पाेरेशन प्रबंधन को स्पष्ट अवगत करा दिया है कि बिजली कर्मचारी निजीकरण का प्रबल विरोध कर रहे हैं। अतः निजीकरण हेतु ट्रांजैक्शन कंसलटेंट की टीम को वाराणसी और आगरा में कोई डाटा उपलब्ध नहीं कराया जाएगा और न ही अवैध ढंग से नियुक्त टीम को कार्यालय में प्रवेश करने दिया जाएगा। इस दृष्टि से वाराणसी और आगरा में बिजली कर्मचारी लगातार घटनाक्रमों पर नजर रखते हुए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि पता चला है कि निजीकरण हेतु अवैध ढंग से नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन के लोग पावर कारपोरेशन के निदेशक वित्त के कमरे में बैठकर काम कर रहे हैं, कोई पारदर्शिता नहीं है, निदेशक वित्त उन्हें सारे गोपनीय आंकड़े उपलब्ध करा रहे हैं। ध्यान रहे ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति कनफ्लिक्ट ऑफ़ इंटरेस्ट के प्राविधान को हटाकर की गई है जो भ्रष्टाचार का ज्वलंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की नीतियों की पॉवर कार्पाेरेशन प्रबंधन इस प्रकार खुली धज्जियां उड़ा रहा है।संघर्ष समिति के आह्वान पर आज प्रदेश भर में बिजली कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन जारी रखा। आगामी 09 अप्रैल को लखनऊ में होने वाली विशाल रैली की तैयारी में संघर्ष समिति की टीम ने राजधानी लखनऊ के विभिन्न दफ्तरों में तथा जनपदों और परियोजनाओं पर कार्यालय कार्यालय में जाकर बिजली कर्मियों से व्यापक जनसंपर्क किया।आज वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर , मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, गाजियाबाद,नोएडा, हरदुआगंज, पारीछा, ओबरा, पिपरी और अनपरा में विरोध सभा हुई।
सतीश पाण्डेय का विद्युत सुरक्षा निदेशाल में सम्मान
विद्युत सुरक्षा निदेशालय मिनिस्ट्रीरियल एसोसिएशन पदाधिकारियों द्वारा इन्दिरा भवन जवाहर भवन कर्मचारी महासंघ के तेरहवी बार अध्यक्ष चुने जाने के बाद सतीष कुमार पाण्डेय का सम्मान किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वर्तमान समय कर्मचारियों के लिए बहुत अहम है। सभी संवर्ग के पदों पर भारी रिक्तियॉ है। पुरानी पेंशन बहाली के लिए संधर्ष जारी है। एसोसिएशन के संरक्षक एवं महासंघ के कार्यवाहक अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार श्रीवास्वत ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। कर्मचारी संवर्ग की कोई अहित नही होगा इसकी मै गारन्टी लेता हूॅ। राज्य कर्मचारी महासंघ के महामंत्री रामराज दुबे ने कहा कि महासंघ आपकी एसोसिएशन के साथ सदैव खड़ा मिलेगा।
विघुत सुरक्षा निदेषालय सभागार में राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष सतीष कुमार पाण्डेय के सम्मान समारोह एवं प्रान्तीय बैठक में सुरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव सलाहकार, संरक्षक और अमित कुमार श्रीवास्तव अध्यक्ष और धनन्जय सिंह महामंत्री, पवन कुमार गौड़, शैलेन्द्र अवस्थी उपाध्यक्ष, समीर त्रिपाठी संयुक्त मंत्री, विवेक गौड़ संगठन मंत्री,, सुशील कुमार श्रीवास्तव कोषाध्यक्ष को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। कार्यकारिणी सदस्य के रूप में राकेश पाण्डेय, श्रीमती जया चौहान, संतोष कुमार, दुष्यंत कुमार, पवन कुमार द्वितीय और सुनील कनौजिया, सत्यम उपस्थित थे। कार्यक्रम में अतिथिगणों में जवाहर भवन इन्दिरा भवन के महामंत्री राम कुमार धानुक, सईद अकील बब्लू, मौजूद रहे।
निगम का सम्पूर्ण समाधान दिवस इस बार नहीं होगा
नगर निगम शहरवासियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए हर महीने के पहले शुक्रवार को सम्पूर्ण समाधान दिवस आयोजित करता है। इस दिन लोग सफाई, सड़कों की मरम्मत, स्ट्रीट लाइट, जल आपूर्ति जैसी नगर निगम से जुड़ी समस्याओं की शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिनका समाधान तय समय में किया जाता है।हालांकि, इस बार 4 अप्रैल 2025 को होने वाला सम्पूर्ण समाधान दिवस रद्द कर दिया गया है। ऐसा वित्तीय वर्ष 2024-25 की वार्षिक लेखाबंदी एवं नये वित्तीय वर्ष के सर्वर प्रारम्भ न होने की वजह से किया गया है। इसका मतलब यह है कि नगर निगम अपने वित्तीय कार्यों में व्यस्त रहेगा, इसलिए इस दिन शिकायतें दर्ज नहीं की जाएंगी।
नगर निगम द्वारा दी गई जानकारी में कहा गया है कि नागरिको की समस्याओं के निस्तारण हेतु इसी महीने के अगले शुक्रवार अर्थात 11 अप्रैल, 2025 को समाधान दिवस आयोजित किया जायेगा। इसके पश्चात पूर्व की तरह आगामी महीने की पहली शुक्रवार, यानी मई के पहले हफ्ते में यह समाधान दिवस फिर से आयोजित किया जाएगा, जिसमें सभी शिकायतों का निपटारा किया जाएगा। अगर किसी को बहुत जरूरी समस्या हो, तो वे नगर निगम के संबंधित विभागों से सीधे संपर्क कर सकते हैं। नगर निगम शहर की बेहतरी के लिए हमेशा तैयार है और सभी नागरिक सुविधाओं को सुचारू रूप से बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
आनलाइन बिजली भुगतान और सरल हुआ
मोबाइल ऐप के माध्यम से विद्युत बिल भुगतान करना अब आसान होगा। इसकी प्रक्रिया को और सरल किया गया है। विभिन्न एप के माध्यम से किए जाने वाले भुगतान में अब संबंधित विद्युत वितरण कंपनी (डिस्कॉम) का चयन नहीं करना होगा। सिर्फ जिले और कनेक्शन नंबर के जरिए ही ऑनलाइन भुगतान हो जाएगा। इससे उपभोक्ता गलती से कहीं और भुगतान के कारण होने वाली असुविधा से बच सकेंगे।
पावर कॉरपोरेशन में बिजली बिल का भुगतान भीम एप, गूगल पे, फोनपे, पेटीएम तथा अमेजॉन पे इत्यादि के माध्यम से ऑनलाइन किया जा सकता है। बिल का भुगतान करने के लिए अब उपभोक्ता को डिस्कॉम के स्थान पर यूपीपीसीएल तथा अपने जिले के नाम का चयन करना होगा। उसके पश्चात उपभोक्ता खाता संख्या (कनेक्शन नंबर) अंकित करना पड़ेगा। अभी तक डिस्कॉम का उल्लेख करना पड़ता था। गलती से गलत डिस्कॉम भर देने पर उपभोक्ताओं को परेशानी होती थी।
उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा देने के लिए यूपीपीसीएल द्वारा यह संशोधन कर दिया गया है। पावर कॉरपोरेशन की वेबसाइट पर पूर्व से ही यह व्यवस्था लागू है। वर्तमान में पुरानी तथा नई व्यवस्था भुगतान वाले सभी मोबाइल एप पर उपलब्ध है ताकि उपभोक्ता नई व्यवस्था को आसानी से अपना सकें। अगले माह से यह नई व्यवस्था ही उपलब्ध रहेगी।
अतिक्रमण हटाने गई टीम को व्यापारियों ने घेरा
नगर निगम के जोन-3 में त्रिवेणी नगर स्थित मूंगफली मंडी से अतिक्रमण हटाने गई नगर निगम की टीम को व्यापारियों ने घेर लिया। लगभग आधे घंटे चले घेराव के बाद जब निगम टीम ने जब्त किए सामानों को लौटाया तब व्यापारियों ने उन्हें जाने दिया। पुलिस टीम के न रहने के कारण नगर निगम के कर्मचारी असहाय दिखे।
कर अधीक्षक सभाजीत सिंह के नेतृत्व में नगर निगम की टीम गुरुवार दोपहर में त्रिवेणी नगर स्थित मूंगफली मंडी पहुंची। यहां सड़क पर अतिक्रमण कर लगाई गई दुकानों को हटाना शुरू कर दिया। दुकानदारों के तख्त, कुर्सी, मेज, दुकान को ढंकने के लिए लगाए गए तिरपाल आदि को जब्त किया ही था कि वहां अन्य व्यापारी भी पहुंच गए। उन्होंने एक जनप्रतिनिधि पर जबरन अतिक्रमण हटवाने का आरोप लगाते हुए नगर निगम टीम को कार्रवाई से रोका। टीम के न मानने पर व्यापारियों ने घेराव कर दिया। जब्त किए गए सामान वापस करने और बिना कार्रवाई के लिए लौटने का दबाव बनाने लगे। लगभग आधा घंटा के घेराव के बाद जब निगम टीम ने व्यापारियों का सामान लौटाया तब उन्हें जाने दिया गया। सभाजीत सिंह का कहना है कि सड़क घेर कर लगाई दुकानों को ही हटाने गए थे। व्यापारियों के विरोध के कारण लौटना पड़ा।
निजीकरण के विरोध में सभी जनपदों और परियोजनाओं पर प्रदर्शन जारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने यह कहा है कि वर्ष 2025 – 26 में ए टी एंड सी हानियां 13.8 2प्रतिशत लाने के पावर कारपोरेशन के दावे के बाद पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किसके हित में किया जा रहा है। संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 126 वें दिन सभी जनपदों और परियोजनाओं पर विरोध प्रदर्शनजारी रहा।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि मल्टी ईयर टैरिफ डिस्ट्रीब्यूशन रेगुलेशन 2005, 01 अप्रैल से लागू होने के बाद पावर कॉरपोरेशन द्वारा यह दावा किया गया है कि वर्ष 2025 – 26 में ए टी एंड सी हानियां घटकर 13.82 प्रतिशत रह जाएंगी। उन्होंने कहा की 2 दिन पूर्व प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने स्वयं ट्वीट कर बताया था कि वर्ष 2017 की 40 प्रतिशत की तुलना में ए टी एंड सी हानियां वर्ष 2024 में घटकर 16.5 प्रतिशत रह गई है। अब जब चालू वित्तीय वर्ष में ए टी एंड सी हानियों को 13.82 प्रतिशत तक आने की बात कही जा रही है जो 15 प्रतिशत के राष्ट्रीय मानक से कम है, तब निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जानी चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि सितंबर 2020 में केंद्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा जारी ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग रेगुलेशन में स्पष्ट कहा गया है कि जहां 15 प्रतिशत से कम ए टी एंड सी हानियां हों , ऐसे विद्युत वितरण निगमों में निजीकरण करने की कोई आवश्यकता नहीं है। इस दृष्टि से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की चल रही प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जानी चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कार्पाेरेशन प्रबंधन ने निजीकरण का राग छेड़ कर विगत चार महीनों से उत्तर प्रदेश के ऊर्जा निगमों में अनावश्यक तौर पर औद्योगिक अशांति का वातावरण बना रखा है। संघर्ष समिति ने पहले ही बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं का आह्वान किया है कि वह चालू वित्तीय वर्ष में ए टी एंड सी हानियां 15 प्रतिशत से कम करके दिखा देंगे। इस दृष्टि से निजीकरण का निर्णय तत्काल निरस्त किया जाए, कार्य का स्वस्थ वातावरण बनाया जाए और बिजली कर्मियों को पूरे मनोयोग के साथ श्रेष्ठतम प्रदर्शन करने के लिए कार्य करने दिया जाय।स बीच निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने प्रांत व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी रखा। बिजली कर्मचारियों ने आगामी 09 अप्रैल को लखनऊ में होने वाली विशाल रैली के लिए प्रत्येक कार्यालय में जाकर कर्मचारियों और अभियंताओं से व्यापक जनसंपर्क किया।
आकड़ो को आधार पर कौन खरीदेगा बिजली कम्पनियॉ ?,उपभोक्ता परिषद का बड़ा सवाल
दक्षिणांचल व पूर्वाचल के 42 जनपदों को निजीकरण करने के लिए रखे गए कंसलटेंट ग्रांड थ्रोनटन जिसको केवल हाईवे में कंसल्टेंसी करने का अनुभव है और उसके आधार पर उसे असंवैधानिक तरीके से अनेकों मानक में शिथिलता देते हुए ऑर्डर दे दिया गया। यह तो वही वाली बात हुई कि रिक्शा चलाने वाला, हवाई जहाज उड़ाएगा। उपभोक्ता परिषद उत्तर प्रदेश सरकार से यह कहना चाहती है और मांग करती है कि ऊर्जा सेक्टर में उपलब्धि के जो आंकड़े सभी प्लेटफार्म पर और खास तौर पर ऊर्जा मंत्री के ट्विटर हैंडल पर लगातार जारी किए जाते हैं। वह बिल्कुल अलग है और बिजली कंपनियों को निजीकरण करने के लिए जो आंकड़े दिखाए जाते हैं वह एकदम अलग है। ऐसे में उपभोक्ता परिषद पावर कारपोरेशन के उच्च अधिकारियों से मांग करता है कि बिजली कंपनियां के जो उपलब्धि के आंकड़े हैं उन्हीं के आधार पर ट्रांजैक्शन एडवाइजर से रिपोर्ट तैयार कराई जाए। लगभग 1 करोड़ 72 लाख वाले 42 जनपदों के सही आंकड़े यदि पेश कर दिए जाएं तो देश का कोई भी निजी घराना उत्तर प्रदेश की बिजली कंपनियों को सही लागत में लेने के लिए आगे नहीं आएगा।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा पिछले 5 वर्षों में बिजली कंपनियों की आर्थिक स्थिति कमजोर क्यों हुई इसके लिए पावर कार्पाेरेशन प्रबंधन से भी जवाब तलब किया जाना चाहिए। यह एक अपमानजनक स्थिति है कि प्रबंधन ने 5 साल तक पूरी तरीके से अपने हिसाब से पावर सेक्टर को चलाया और जब वह फ्लॉप हो गए तो बचने का मसौदा सामने कर दिया। यह सबसे पहले उच्च प्रबंधन के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। जहां तक सवाल है बिजली निगमो में जो कार्मिक है उनकी भी जवाब देही तय होनी चाहिए। लेकिन निजीकरण का फैसला सरकार को तत्काल वापस लेना चाहिए।उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा वर्ष 2023 में अदानी समूह द्वारा गाजियाबाद नगर निगम और गौतम बुद्ध नगर के समानांतर विद्युत वितरण लाइसेंस के लिए विद्युत नियामक आयोग में याचिका दाखिल की गई थी जिसमें उपभोक्ता परिषद आपत्ति करता है और जब उसकी छानबीन शुरू हुई तो आज तक कोई उसकी खोज खबर नहीं लेने आया। उपभोक्ता परिषद की विधिक आपत्ति के सामने सभी चुप हो गए इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश का सबसे बड़ा निजी घराना उत्तर प्रदेश के दो जनपदों को पैरेलल लाइसेंस पारदर्शी तरीके से नहीं प्राप्त कर पाया और आज भी मामला विचाराधीन है। ऐसे में देश के निजी घराने उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों को कैसे संपूर्ण रूप से खरीदने के लिए आगे आएंगे यह अपने आप में जांच का विषय है और सोचनीय भी है।
भर्ती, पुरानी पेंशन मसले पर प्रमुख सचिव से सार्थक वार्ता,अनुदेशकों का प्रारम्भिक ग्रेड-पे 4600 किये पर हुई बात
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आज उत्तर प्रदेश औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान कर्मचारी संघ के अध्यक्ष हरिओम सिंह एवं महामंत्री विवेक कुमार की बैठक डॉ. हरिओम, प्रमुख सचिव, व्यावसायिक शिक्षण कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के साथ बापू भवन स्थित कार्यालय में संपन्न हुई। जिसमे कार्यदेशक, अनुदेशक संवर्ग संबंधित निम्न मसलों पर सार्थक वार्ता हुई।
महामंत्री ने बताया कि प्रमुख सचिव से वर्ष- 2005 से पूर्व विज्ञापित पदों के सापेक्ष भर्ती हुए कार्मिकों को पूरानी पेंशन स्वीकृति, शासन द्वारा दी गई सहमति के आधार पर अनुदेशकों का प्रारम्भिक ग्रेड पे 4600 और अनुदेशकों के रिक्त पदों के सापेक्ष शीघ्र भर्ती कराये जाने पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके अलावा वर्ष-2016 मे नियुक्त अनुदेशकों की ज्येष्ठता सूची मे व्याप्त विसंगतियों का निस्तारण, चिकित्सा प्रतिपूर्ती भुगतान को आयकर गणना मे शामिल न किये जाने, अतिथिवक्ताओं के मानदेय का निर्धारण प्रशिक्षण महानिदेशालय के द्वारा प्रदत्त सिद्धंत के आधार पर, कार्मिकों के सेवानिवृत्त होने पर विदाई सम्मान समारोह आयोजित कर स्मृतचिन्ह एवं अंगवस्त्र से सम्मनित किया जाने, चयन वर्ष 2024-25 तक के समस्त रिक्त पदों को आगणित कर अनुदेशक से कार्यदेशक के पदों पर पदोन्नति वर्ष-2016 मे नियुक्त अनुदेशकों का स्थाईकरण कराये जाने की मांग रखी गई। बैठक में कार्यदेशक , अनुदेशक संबंधित समस्त समस्याओं के निवारण एवं सुझावों प्रमुख सचिव ने सहमति जताई है।
मण्डल रेल प्रबंधक, जिलाधिकारी एवं नगर आयुक्त, ने किया निरीक्षण
उत्तर रेलवे, लखनऊ मण्डल के चारबाग़ रेलवे स्टेशन पर मंडल रेल प्रबंधक,एस. एम. शर्मा एवं जिलाधिकारी, लखनऊ, विशाख जी. एवं नगर आयुक्त, लखनऊ, इंद्रजीत सिंह के मध्य बेहतर परिवहन, यातायात व्यवस्था सहित समुचित विकास पर चर्चा की गई।
तीनों ही अधिकारियों ने राज्य एवं रेलवे प्रशासन के आपसी तालमेल के साथ काम करने तथा लखनऊ में उत्तर रेलवे की विभिन्न परियोजनाओं को मूर्तरूप देने और चारबाग़ रेलवे स्टेशन पर किये जाने वाले संरचनात्मक और विकास कार्यों जैसे अनेक बिंदुओं पर आपसी विचार विमर्श किया। अगले चरण में उपरोक्त विषय को ध्यान में रखते हुए इन तीनों उच्चाधिकारियों ने संयुक्त रूप से अन्य अधिकारियों के साथ स्टेशन परिसर का निरीक्षण किया और इन कार्यों के उचित क्रियान्वयन की रूपरेखा तय की गई। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने स्टेशन के पुनर्विकास,उत्थान कार्यों को उचित रूप से सम्पन्न किये जाने वाले सभी बिंदुओं को चिन्हित करते हुए इस संबंध में प्रभावी कार्यवाही को क्रमवार सुनिश्चित किया। इस अवसर पर मण्डल के अन्य शाखाधिकारियों सहित आरएलडीए के अधिकारी, राज्य प्रशासन के अन्य अधिकारी तथा कर्मचारी उपस्थित रहे।
‘स्कल्पर’ का पुनर्गठन, अखिलेश अध्यक्ष और उमेश चन्द्र महासचिव नामित
सचिवालय प्रदेश में स्कल्पर नाम से चर्चित, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक एवं विशिष्ट क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा से सचिवालय का नाम रोशन करने वाले कार्मिकों को मंच देने वाली एवं उनके सम्मान में समारोह आयोजित करने वाली, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक पत्रिका सचिवालय दर्पण का प्रकाशन करने वाली संस्था सचिवालय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन समिति (स्कल्पर) का पुनर्गठन किया गया है। समिति के संस्थापक अखिलेश कुमार श्रीवास्तव द्वारा यह जानकारी दी गई।
सचिवालय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन समिति (स्कल्पर) के संस्थापक अखिलेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि समिति के कई पदाधिकारी के सेवा निवृत्त होने की वजह से समिति का पुनर्गठन किया गया है। विशेष सचिव नियुक्ति विनीत प्रकाश, विशेष सचिव नगर विकास डॉ. दीपक कोहली, विशेष सचिव प्राविधिक शिक्षा अजीज अहमद एवं सचिवालय संघ के पूर्व सचिव एवं पेन्शनर्स एसोसिएशन के महामंत्री ओंकार नाथ तिवारी को स्कल्पर का संरक्षक मनोनीत किया गया है।
सचिवालय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन समिति (स्कल्पर) की पुनर्गठित कार्यकारिणी में मंत्री पंचायतीराज के समीक्षा अधिकारी अखिलेश कुमार श्रीवास्तव को स्कल्पर के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. अम्बरीष कुमार सिंह को वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया गया है।
स्कल्पर के 03 उपाध्यक्ष सेनिसमीक्षा अधिकारी देवेन्द्र कुमार सक्सेना, बेसिक शिक्षा विभाग के उप सचिव आनन्द कुमार सिंह, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिर्वतन विभाग के अनु सचिव दिनेश कुमार सिंह नामित किए गए हैं।
स्कल्पर के कोषाध्यक्ष के पद पर गृह विभाग के उप सचिव सत्येन्द्र प्रताप सिंह को, महासचिव पद पर सचिवालय प्रशासन विभाग के डॉ. उमेश चन्द्र वर्मा को, सचिव पद पर वरिष्ठ कवि एवं कृषि विभाग में निजी सचिव रतन कुमार श्रीवास्तव को मनोनीत किया गया है।न्याय लेखा अनुभाग के समीक्षा अधिकारी लेखा रणविजय चौधरी को स्कल्पर का संयुक्त सचिव नामित किया गया है। डॉ. चांदनी बाला सांस्कृतिक सचिव, रेनू सिंह संगठन सचिव बनाई गई है। ओज कवि वीरेन्द्र बहादुर सिंह ‘कुसुमाकर’ को साहित्यक सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। विद्यासागर पाल को आडिटर पद का दायित्व दिया गया है। स्कल्पर के सदस्य पदों पर विजय कुमार शुक्ला, अमरनाथ गुप्ता, मानस मुकुल त्रिपाठी एवं अतुल कुमार पुत्र रमेश उर्फ नागेश्वर को नामित किया गया है। इसी के साथ शिवगोपाल सिंह, संयुक्त सचिव, कारागार विभाग, डॉ. धु्रवपाल सिंह, संयुक्त सचिव गृह विभाग, हरीशंकर श्रीवास्तव, सेनि संयुक्त सचिव, अजय कुमार पाण्डेय, सेनि संयुक्त सचिव मानद सदस्य बनाये गये हैं।