LUCKNOW:एबीसीडी पता नही बना दिए गए सलाहकार,क्लिक करें और भी खबरें

-निदेशक के इशारे पर तैयार हो रही खस्ता हालत रिपोर्ट

  • REPORT BY:PREM SHARMA || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK

लखनऊ। पूर्वांचल व दक्षिणांचल के 42 जनपदों वाली बिजली कंपनियों की नेट वर्थ लगभग 80000 करोड़ की है दोनों बिजली कंपनियों मे एक करोड़ 72 लाख विद्युत उपभोक्ता है। उनका आकलन करने के लिए जिस ब्रिटिश ग्रांट थ्रोनटन कंपनी को कंसल्टेंट नियुक्त किया गया है उसे ना तो पावर सेक्टर के वित्तीय मानक का ज्ञान है और ना पावर सेक्टर में कार्य का कोई ज्ञान है। इस कंपनी का इतिहास केवल यह रहा है कि वह नेशनल हाईवे में कार्य की है।

पावर कारपोरेशन के उच्च अधिकारियों के साथ कल एक गोपनीय बैठक में उनके सवालों और जबाबो से खुद व चकित रह गए कि यह ट्रांजैक्शन एडवाइजर क्या रिपोर्ट तैयार करेगा। जिसको पावर का पी भी नहीं मालूम है। इसकी रिपोर्ट तैयार करने के लिए पावर कारपोरेशन का एक निदेशक जिनका दो मांह-बाद कार्यकाल पूरा हो रहा है उनके द्वारा पूरी रिपोर्ट पावर सेक्टर की दी जा रही है। जो अपने आप में उच्च स्तरीय जांच का मामला है। उपभोक्ता परिषद ने इसी आधार पर सरकार से इा प्रक्रिया में ऐसे अधिकारियों को अलग करने की मांग उठाई है जो एक-दो महीने बाद सेवानिवृत या सेवानिवृत होने के बाद कार्य कर रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस विभाग को खून पसीने से चलने वाले अभियंताओं को इस पूरी प्रक्रिया से बाहर रखा गया है। उत्तर प्रदेश सरकार को उपभोक्ता परिषद बताना चाहती है कि राज्य विद्युत परिषद 1959 में जब बना उसके बाद उसका एक मुख्य वित्तीय रूल था यह किसी भी अभियन्ता के तीन मांह जब सेवानिवृत के लिए बचते थे थे, तो उसकी वित्तीय व प्रशासनिक पावर सीज कर दी जाती थी। यहां पर जो निदेशक दो माह-बाद विदाई लेने वाले हैं उन्हीं के द्वारा पूरी कंसलटेंट प्रक्रिया के चयन को फाइनल किया गया। जो अपने आप में गंभीर मामला है।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कितने दुर्भाग्य की बात है जब दक्षिणांचल व पूर्वांचल को बेचने का निर्णय लिया गया तो वह पावर कॉरपोरेशन के बोर्ड आफ डायरेक्टर में लिया गया। पावर कारपोरेशन के पावर परचेज कमेटी में ट्रांजैक्शन एडवाइजर के टेंडर को फाइनल किया गया तब दक्षिणांचल व पूर्वाचल के किसी भी निर्देशक या प्रबंध निदेशक को पूरी प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया। अब केवल औपचारिकता करने के लिए इस प्रकार की कार्रवाई की जा रही है। उपभोक्ता परिषद के संज्ञान में आया है और पूरी गोपनीय सूचना उसके पास है की ट्रांजैक्शन एडवाइजर के लिए जो कंसलटेंट लगाए गए हैं उन्हें अधिक से अधिक एटीडीसी हानियों को बढ़ाकर बताने सहित दोनों बिजली कंपनियों की वित्तीय हालत खस्ता है इस प्रकार रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा गया है। जिससे काम लागत में बिजली कंपनियों को देश के बड़े निजी घरानो को आसानी से बचा जा सके। लेकिन उपभोक्ता परिषद उसे कामयाब नहीं होने देगा।

गुप-चुप तरीके से गोपनीय सरकारी दस्तावेज देेने कीे जाँच कराई जाए
-बिजली कार्मिको की विशाल रैली में होगा बडत्रे आन्दोलन का ऐलान

पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु अवैध ढंग से नियुक्त ट्रांजैक्शन कंसलटेंट की टीम को गुप-चुप तरीके से गोपनीय सरकारी दस्तावेज दिये जाने के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने प्रदेश भर में उग्र प्रदर्शन किया।पदाधिकारियों ने बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु अवैध ढंग से नियुक्त ट्रांजैक्शन कन्सलटेंट मे. ग्रान्ट थॉर्नटन की टीम वाराणसी और आगरा में 04 अप्रैल को निजीकरण हेतु सर्वे करने करने गयी हुई थी जहां पर प्रबन्धन द्वारा गैर कानूनी तरीके से मे. ग्रान्ट थॉर्नटन की टीम को चुपचाप गोपनीय सरकारी दस्तावेज सौप दिये हैं, जो कि एक अत्यन्त गम्भीर प्रकरण है जिसकी उच्च स्तरीय जाँच होनी चाहिये।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति में कोई पारदर्शिता नहीं बरती गई है और कनफ्लिक्ट आफ इंटरेस्ट हितों के टकराव के प्रावधान को हटाकर कंसल्टेंट की नियुक्ति की गई है।अब इस कंसल्टेंट के जरिए पावर कार्पाेरेशन प्रबंधन प्रदेश के 42 जनपदों का निजीकरण करने हेतु इतना उतावला हो गया है कि उसने अवैध ढंग से नियुक्त कंसल्टेंट की टीम को रात के अंधेरे में ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की टीम को अंदर प्रवेश करा दिया गया था और गोपनीय दस्तावेज ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की टीम को उपलब्ध कराए जो अपने आप में दंडनीय अपराध है। आगरा में आज सुबह 10ः00 बजे से सैकड़ो की तादाद में बिजली कर्मचारी, संविदा कर्मी और अभियंता मुख्यालय पर एकत्र हो गए थे और उन्होंने शांतिपूर्वक लोकतांत्रिक ढंग से ट्रांजैक्शन कंसलटेंट को गोपनीय दस्तावेज देने का प्रबल विरोध किया और उग्र प्रदर्शन किया।

संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि वह बिजली के निजीकरण के विरोध में शांतिपूर्वक लोकतांत्रिक ढंग से अपना आंदोलन चल रहा है किंतु पावर कार्पाेरेशन प्रबंधन द्वारा इस प्रकार पुलिस बल लगाकर और उत्पीड़नात्मक कार्यवाही कर औद्योगिक अशान्ति उत्पन्न की जा रही है जिसके होने वाले दुष्परिणाम की सारी जिम्मेदारी पावर कारपोरेशन के प्रबंधन की होगी।संघर्ष समिति ने प्रदेश के बिजली कर्मचारी, संविदा कर्मियों और अभियंताओं का आह्वान किया है कि वह 9 अप्रैल को राजधानी लखनऊ में अधिकतम संख्या में पहुंचे। 9 अप्रैल को लखनऊ में होने वाली रैली में निर्णायक संघर्ष और आंदोलन के कार्यक्रमों का ऐलान किया जाएगा। राजधानी लखनऊ में केन्द्रीय पदाधिकारियों द्वारा व्यापक जन-जागरण कार्यक्रम चलाया गया।

पंचायत सफाई कार्मिकों की समस्याओं पर उच्च स्तरीय बैठक

-संघ के प्रतिनिधि मण्डल को प्रमुख सचिव ने दिया आश्वासन

उत्तर प्रदेश पंचायती राज ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ के अध्यक्ष बसंत लाल और महामंत्री रामेन्द्र कुमार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मण्डल प्रमुख सचिव, सचिव, निदेशक तथा पंचायती राज विभाग अफसरों की लम्बे अरसे बाद एक वार्ता सम्पन्न हुई। इस दौरान संघ की तरफ से 14 सूत्रीय मांगेे रखी गई। इस पर प्रमुख सचिव ने कई मांगों के अतिशीघ्र निस्तारण का आश्वासन दिया। वित्तीय वर्ष 2024-25 समाप्ति से पहले प्रदेश में समस्त प्रकार के सफाई कर्मचारियों के एरियर, रूके हुए वेतन का भुगतान कराया जाय तथा माह मार्च में बजट वापस करने से पूर्व समस्त सफाई कर्मचारियों के देयकों का भुगतान करा दिया जाय।ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ की प्रमुख सचिव के कक्ष में सफाई कर्मचारियों की मांगो पर विस्तृत और सार्थक वार्ता हुई। बैठक में प्रमुख सचिव श्री अनिल कुमार, सचिव बी चंद्रकला, निदेशक राजेश त्यागी, अपर निदेशक प्रशासन श्री राजकुमार, अनुसचिव श्री अशोक राम, प्रदेश अध्यक्ष बसंत लाल, महामंत्री रामेंद्र श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष कृष्ण कुमार, ा संगठन मंत्री डीडी चौहान, सम्प्रेक्षक अयोध्या यादव, जिला अध्यक्ष रामलाल कश्यप, जिला मंत्री राजू धानुक, जिला अध्यक्ष विनोद चावला उपस्थित रहे।

बैठक में रखी गई मांग पंचायतीराज विभाग के अधीन कार्यरत ग्रामीण सफाई कर्मचारियों की ज्येष्ठता सूची बनाये जाने हेतु दिये गये निर्देश 31 सितम्बर 2024 का कड़ाई से पालन कराये जाने के निर्देश प्रमुख सचिव ने दिये। पंचायतीराज विभाग के अधीन कार्यरत ग्रामीण सफाई कर्मचारियों की पदोन्नति की व्यवस्था की जाय।पंचायतीराज विभाग के अधीन कार्यरत ग्रामीण सफाई कर्मचारियों की विभागीय सेवा नियमावली बनाये जाने पर दस दिनों कमेटी से रिपार्ट मांगी गई है।पंचायतीराज विभाग के अधीन कार्यरत ग्रामीण सफाई कर्मचारियों का नाम पंचायत सेवक विभाग के अनुरूप किया जाय।प्रदेश में रिक्त राजस्व ग्रामों सहित जनपद भदोही में ग्रामीण सफाई कर्मचारियों की भर्ती की मांग पर विचार किए पंचायतीराज विभाग के अधीन कार्यरत ग्रामीण सफाई कर्मचारियों से जाब चार्ज के अनुसार सफाई कार्य ही कराये जाने पर सहमति जताई गई है। पंचायतीराज विभाग के अधीन कार्यरत ग्रामीण सफाई कर्मचारियों के परस्पर स्थानान्तरण की कार्यवाही पूर्ण होने पर स्थानान्तरण कर दिया जाय तथा स्थानान्तरण नीति लागू न की जाय।पंचायतीराज विभाग के अधीन कार्यरत ग्रामीण सफाई कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना बहाल करायी जाय।मृतक आश्रित नियमावली के अनुरूप सफाई कर्मचारियों के मृतक आश्रितों को योग्यतानुसार नौकरी दिये जाने के निर्देश दिए गए है। जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में कनिष्ठ सहायक की भर्ती की जाय। 16 वर्ष पूर्ण होने पर द्वितीय ए०सी०पी० का लाभ दिये जाने में आने वाली कठिनाईयों का निराकरण कराया जाए। वेतन निर्धारण जॉब चार्ट के अनुसार ही सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति के अनुसार वेतन आहरित किया जाए। विकलांग तथा महिला सफाई कर्मचारियों से उनकी नियुक्ति ग्राम में ही कार्य लिया जाए तथा उनको रोस्टर कार्य में न लगाने पर शीघ्र निर्णय लिये जाने का आश्वासन दिया गया है।

गृहकर में छूट की कटौती पर कांग्रेस नेता का विरोध

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं इस्माइलगंज प्रथम वार्ड के पार्षद मुकेश सिंह चौहान ने लखनऊ में गृहकर में छूट की कटौती को लेकर भाजपा की स्थानीय सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इस निर्णय को जनविरोधी बताते हुए कहा कि यह जनता की जेब पर सीधा हमला है और इसका सीधा लाभ भाजपा सरकार अपने हित में लेना चाहती है।

मुकेश सिंह चौहान ने कहा कि भाजपा की स्थानीय सरकार द्वारा नगर निगम के माध्यम से गृहकर में दी जा रही छूट में कटौती कर जनता से धन वसूली की जा रही है। उन्होंने इसे भाजपा के इशारे पर लिया गया निर्णय बताया, जिससे लखनऊ के नागरिकों को आर्थिक रूप से नुकसान हो रहा है।पार्षद चौहान ने बताया कि इस वर्ष अप्रैल में डिजिटल भुगतान पर 10ः और नकद भुगतान पर 8ः छूट दी जा रही है, मई में इसे घटाकर क्रमशः 8ः और 6ः तथा जून में 5ः और 4ः कर दिया गया है। जबकि पूर्व वर्षों में अप्रैल से जुलाई तक 10ः और अगस्त से दिसंबर तक 5ः की छूट मिलती थी।उन्होंने कहा कि बजट 2025-26 की कार्यकारिणी बैठक में भाजपा सरकार के दबाव में छूट को घटाया गया, जिससे आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस कटौती की जानकारी नगर निगम द्वारा जारी प्रेस नोट में जानबूझकर छिपाई गई, जो पारदर्शिता की घोर अवहेलना है।चौहान ने स्पष्ट किया कि कार्यकारिणी का निर्णय अंतिम नहीं है। कांग्रेस पार्टी आगामी बजट सदन में इस जनविरोधी निर्णय का जोरदार विरोध करेगी और प्रयास करेगी कि पिछले वर्षों की तरह छूट को बहाल किया जाए।मुकेश सिंह चौहान ने महापौर से मांग की है कि वह कार्यकारिणी के इस निर्णय पर तत्काल रोक लगाने का आदेश जारी करें और जब तक बजट सदन में अंतिम निर्णय न हो, तब तक पूर्ववत छूट को लागू रखा जाए।

नए वित्तीय वर्ष की शुरूआत में नगर निगम की टैक्स वसूली में उछाल

नए वित्तीय वर्ष 2025-26 की शुरुआत में ही नगर निगम लखनऊ को बड़ी कामयाबी मिली है। केवल कुछ घंटों के लिए खोली गई नगर निगम की वेबसाइट पर 8,000 से अधिक नागरिकों ने ऑनलाइन गृह कर जमा किया, जिससे 2 करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स वसूली हो गई। यह आंकड़ा नगर निगम के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है।

निगम द्वारा ऑनलाइन टैक्स भुगतान पर 10 प्रतिशत की छूट की घोषणा की गई थी, जिसे लोगों ने हाथों-हाथ लिया। घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर से टैक्स भरने की सुविधा और साथ में छूट का लाभ मिलने से नागरिकों ने भारी संख्या में टैक्स जमा किया। शनिवार को दोपहर 03 बजे वेबसाइट खुलने पर सभी जोन के गृहकर दाताओं के पास टैक्स जमा करने के लिए व्हाट्सऐप और एसएमएस के माध्यम से मैसेज भेजा गया। जिसके बाद लोगों ने छह हजार से अधिक गृहकरदाताओं ने अपना नए वित्तीय वर्ष 2025-26 का टैक्स जमा कर दिया। शुक्रवार शाम को भी मेंटेनेंस के दौरान खुली नगर निगम की वेबसाइट से जब लोगों के पास गृहकर जमा करने के लिए मैसेज पहुंचा तो लोगों ने अपने टैक्स का भुगतान करना शुरू कर दिया। इस दौरान 09 लाख रुपये का टैक्स शुक्रवार शाम को नगर निगम को प्राप्त हुआ था। नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह ने जानकारी दी कि सोमवार, 7 अप्रैल 2025 से नगर निगम की वेबसाइट आम जनता के लिए पूरी तरह से चालू कर दी जाएगी। टैक्सदाता 31 अप्रैल तक ऑनलाइन भुगतान करके 10 प्रतिशत की छूट का लाभ ले सकते हैं।जो नागरिक ऑनलाइन भुगतान नहीं कर सकते, उनके लिए भी नगर निगम ने व्यवस्था की है। सभी जोनल कार्यालयों में काउंटर पर कैश टैक्स भुगतान करने पर 8 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इससे तकनीक से दूर रहने वाले लोगों को भी राहत मिलेगी।नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह ने कहा कि इस पहल से नगर निगम की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। टैक्स से मिलने वाली राशि का उपयोग शहर की सड़कों, साफ-सफाई, जल आपूर्ति और अन्य बुनियादी सेवाओं को बेहतर बनाने में किया जाएगा। नगर निगम ने सभी नागरिकों से अपील की है कि समय पर टैक्स जमा करें, छूट का लाभ उठाएं और लखनऊ को स्वच्छ, सुंदर व स्मार्ट सिटी बनाने में अपना योगदान दें।

व्हाट्सअप से भुगतान की प्रक्रिया

1. व्हाट्सअप मैसेज में दिए गए ‘अभी भुगतान करें’ लिंक पर क्लिक करें।
2. खुलने वाले पेज पर भवन स्वामी व बिल का विवरण दिखाई देगा।
3. ‘मेक पेमेंट’ विकल्प पर क्लिक करें।
4. भुगतान मोड (नेट बैंकिंग, डेबिट/क्रेडिट कार्ड, यूपीआई) चुनें।
5. भुगतान सफल होने पर रसीद प्राप्त होगी, जिसे मैसेज में दिए लिंक से भी डाउनलोड किया जा सकता है।

गृहकर भुगतान के अन्य विकल्प

1. कैश काउंटररू सभी जोनल कार्यालयों में कैश, चेक, और बीबीपीएस (भारत बिल पेमेंट सिस्टम) से भुगतान।
2. नेट बैंकिंग/यूपीआई/आरटीजीएस/एनईएफटी, लखनऊ नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट से ऑनलाइन भुगतान।
3. बैंकों के माध्यम सेरू एचडीएफसी और एक्सिस बैंक की किसी भी शाखा में भुगतान।
4. एसएमएस लिंक से भुगतान, प्राप्त एसएमएस लिंक पर क्लिक कर ऑनलाइन भुगतान।

लोगों के लिए फायदे

घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर से कुछ ही मिनटों में टैक्स जमा किया जा सकता है। लंबी कतारों से मुक्ति।
ऑनलाइन भुगतान पर नगर निगम द्वारा अतिरिक्त छूट (जैसे 10 प्रतिशत) दी जाती है।
ऑनलाइन भुगतान करते ही रसीद मिल जाती है, जो भविष्य के लिए सुरक्षित रहती है।
किसी भी दिन, किसी भी समय टैक्स भुगतान की सुविधा, छुट्टी के दिन भी।
ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्टर करने पर समय-समय पर रिमाइंडर मिलते हैं।
ऑनलाइन रसीद और दस्तावेज़ डिजिटल होते हैं, जिससे पेपर का उपयोग कम होता है और पेड़ों की कटाई में कमी आती है।
जोनल ऑफिस तक जाने की ज़रूरत नहीं, जिससे वाहनों का उपयोग कम होता है और कार्बन उत्सर्जन घटता है।
कार्यालयों में कागज़ी काम कम होने से बिजली, प्रिंटर जैसी चीजों की खपत भी घटती है।
पेपर, प्लास्टिक फोल्डर आदि का उपयोग न होने से ठोस कचरे में भी कमी आती है।

Aaj National

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