- REPORT BY:PREM SHARMA || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ। जवाहर भवन इन्दिरा भवन कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष सतीश कुमार पाण्डेय के पुत्र अंशुमान पाण्डेय ने 98.2 पर्संटाइल प्राप्त कर परिवार का नाम रोशन किया है। अंग्रेजी विषय में 99.98 पर्सेंटाइल प्राप्त होने वाले अशुमान अपने पिता की उपलब्धियों पर गर्व करते हुए कहते है कि वह अर्थशास्त्र के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल कर पिता के साथ देश का नाम रोशन करना चाहते है।
अंशुमान पाण्डेय ने सी यू ई टी परीक्षा में अंग्रेजी विषय में 99.98 पर्सेंटाइल प्राप्त किया। सी. एम. एस.कानपुर रोड शाखा के छात्र अंशुमान पाण्डेय ने सी यू ई टी 2025 की परीक्षा में 98.2 पर्सेंटाइल हासिल किया,किंतु अंग्रेजी में अंशुमान पाण्डेय को 99.98 पर्सेंटाइल प्राप्त किया है। अंशुमान दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकाम आनर्स करने की इच्छा रखते हैं। अब वह कॉलेज में जाएंगे और कॉलेज लाइफ का भरपूर आनंद उठाएंगे। वह नए दोस्त बनाएंगे, लेकिन सबसे ज्यादा वह अपने करियर पर फोकस करेंगे। वे अर्थशास्त्र के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल करना चाहते है। एक सम्मान जनक पुरस्कार पाने की इच्छा तथा, देश के विकास में महत्वपूर्ण आर्थिक नीतियों की खोज के साथ किसी विशिष्ट आर्थिक समस्या का अभिनव समाधान खोजना उनका लक्ष्य है।
बिजली कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में काली पट्टी बांधी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के आह्वान पर आज बिजली कर्मचारियों ने दिनभर काली पट्टी बांध कर प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर विरोध दिवस मनाया। निजीकरण का टेंडर होने पर जेल भरो आंदोलन की तैयारी में आज समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर स्वेच्छा से जेल जाने वाले बिजली कर्मियों ने सूची में नाम लिखा लिखाया।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण से उपभोक्ताओं को होने वाले विशेष लाभ के विज्ञापन से आक्रोशित बिजली कर्मचारियों ने आज पूरे दिन काली पट्टी बांध कर अपना विरोध दर्ज किया। विरोध दिवस के तहत आज बिजली कर्मचारियों,जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं ने समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन कर निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष और सामूहिक जेल भरो आंदोलन का ऐलान किया। स्वेच्छा से जेल जाने वाले कर्मचारियों ने लाइन लगाकर जेल जाने वाले की सूची में अपना नाम लिखाया।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने एक बार फिर कहा है कि यदि उप्र सरकार की नजर में निजीकरण के बाद पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के 42 जनपदों में बिजली की आपूर्ति हेतु विश्वसनीय प्रबन्धन होगा तो इस विज्ञापन से अपने आप स्पष्ट हो जाता है कि कि ऊर्जा निगमों में विगत 22 वर्षों से चल रहा आई ए एस प्रबंधन अविश्वसनीय है।
संघर्ष समिति ने सवाल किया कि इसी अविश्वसनीय प्रबंधन द्वारा किए जा रहे निजीकरण की विश्वसनीयता क्या है ? संघर्ष समिति ने कहा कि प्रदेश कि ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने कहा है कि बेहतर प्रबन्धन और तकनीक के लिए निजीकरण किया जा रहा है। ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा स्वयं एक आईएएस अधिकारी रह चुके हैं और उनके द्वारा यह कहना कि निजीकरण के बाद बेहतर प्रबन्धन होगा , एक प्रकार से ऊर्जा निगमों में विगत 22 वर्षों से काम कर रहे आई ए एस प्रबंधन की विफलता को बताता है। सवाल यह है कि ऊर्जा निगमों का प्रबंध करने में जो आईएएस अधिकारी विफल हो चुके है उन्हीं आईएएस अधिकारियों से निजीकरण के किस सफल प्रयोग की उम्मीद की जा रही है।संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के दस्तावेज को अभी तक विद्युत नियामक आयोग ने अप्रूव नहीं किया है। आश्चर्य है कि इसके बावजूद पॉवर कारपोरेशन और शासन में बैठे उच्च अधिकारियों ने निजीकरण के विशेष लाभ बताते हुए उत्तर प्रदेश सरकार का विज्ञापन छपवा दिया। इसी का प्रतिकार करने हेतु आज बिजली कर्मचारियों ने पूरे प्रदेश में काली पट्टी बांधकर विरोध दिवस मनाया है।
चट्टानों में इंसान, शेर और बाज की मुख आकृतियों की खोज का दावा
क्षेत्रीय इतिहास संकलन एवं लेखन अभियान के संयोजक और ग्राम फीना जिला बिजनौर निवासी इंजीनियर हेमंत कुमार ने मध्य प्रदेश की
पहाड़ियों में मानव सिंह और बाज की मुख आकृतियों की खोज करने का दावा किया है । इस संबंध में हेमंत कुमार ने बताया कि साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था नवोदय के आमंत्रण पर वे और उनके मित्र पुखरायां से बृजेन्द्र संखवार 14 जून 2025 को भोपाल में आयोजित साहित्यिक समारोह में पहुंचे थे। इस मौके पर इन्होंने कई पर्यटक स्थल भी देखे । इसी क्रम में हेमंत कुमार जिला रायसेन के रातापानी अभ्यारण के पुरा शैल आश्रय स्थल भी देखने गए थे। हेमंत कुमार को यहाँ की कुछ पहाड़ियों को खास कोण तथा खास स्थान से देखने पर इनमें आदिमानव, शेर तथा बाज की मुख आकृतियों का आभास हुआ।हेमंत कुमार ने आगे बताया कि यहां बनी प्राकृतिक शैल गुफाओं में दुनिया के सबसे प्राचीन भित्ति चित्र मिलते हैं। यहाँ घूमने के दौरान मुझे कुछ शैल गुफा और पहाड़ियां बड़ी विचित्र आकृतियों की दिखाई पड़ी। हेमंत कुमार ने मध्य प्रदेश की पहाड़ियों में मानव सिंह और बाज की मुख आकृतियों की खोज करने का दावा किया है। इनका कहना है कि ये आकृतियाँ दुर्लभ हैं।
ऊर्जा क्षेत्र सुधार में कीर्तिमान तो वापस ले निजीकरण का फैसला
-दोहरा मापदण्ड ठीक नही: आम उपभोक्ता
उपभोक्ता परिषद के साप्ताहिक वेबीनार में आज प्रदेश के अनेकों जनपदों से जुड़े विद्युत उपभोक्ताओं ने इस बात पर चर्चा की लगातार उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से ऊर्जा क्षेत्र में कीर्तमान स्थापित हुआ वर्ष 2017 से 2025 के बीच की तुलनात्मक आंकड़े समाचार पत्रों में प्रचारित किया जा रहे हैं। ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर की ओर साहित विकास का संदेश रोशन प्रदेश निश्चित तौर पर पावर सेक्टर में काफी सुधार हुआ और सिस्टम में भी अपग्रेडेशन लगातार होता रहा पिछले 8 वर्षों में कल बिजनेस प्लान सहित अन्य खर्चाे को जोड़ लिया जाए और आरएसएस को भी शामिल कर लिया जाए तो अब तक लगभग 1 लाख करोड़ खर्च हो चुका है। जिसमें 44000 से ज्यादा आरडीएसएस भी शामिल है। ऐसे में एक तरफ सुधार और दूसरी तरफ निजीकरण का दोहरे मापदण्ड पर उपभोक्ताओं ने सवाल उठाए है।
वेबीनार में उपभोक्ताओं ने कहा कि जब सुधार हो रहा तो निजीरकरण के लिए आपाधापी क्यो मची है। प्रदेश के आने को जिलों से जुड़े विद्युत उपभोक्ताओं ने तीखा सवाल किया की ऊर्जा क्षेत्र कीर्तिमान स्थापित कर रहा है तो उसे अडानी टाटा एनपीसीएल और टोरेंट पावर को बेचने की साजिश करने का क्या तात्पर्य है। ऊर्जा मंत्री का ट्विटर हैंडल उपभोक्ता देखता है तो लगता है कि पूरे देश में उत्तर प्रदेश का ऊर्जा क्षेत्र सबसे ऊपर है लगातार जो समाचार पत्रों में प्रचार दिखाई दे रहा है। उससे भी सिद्ध होता है कि ऊर्जा क्षेत्र ऊंचाई की ओर जा रहा है।लेकिन यह बात सभी के समझ से पड़े हैं कि फिर यह बिकवाली की ओर क्यों जा रहा है। निजीकरण की बात क्यों हो रही है। प्रदेश का उपभोक्ता संशय में है। सरकारी उसे बताएं की सही क्या है गलत क्या है ? उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा अब उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी समाचार पत्रों में प्रचार सामग्री के आधार पर खुद तय कर लेना चाहिए कि ऊर्जा क्षेत्र सुधार की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसलिए उसका फैसला गलत था और उसे प्रदेश की जनता से माफी मांग कर निजीकरण का फैसला वापस कर लेना चाहिए।उपभोक्ता परिषद के वेबीनार में प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की अनेकों समस्याएं भी उठी जिसमें फर्रुखाबाद नोएडा गाजियाबाद हिडन क्षेत्र व मल्टी स्टोरी में इंफ्रा की समस्याएं सामने आई जिस पर जल्द ही एक प्रस्ताव आयोग के सामने रखा जाएगा।
भारी खर्च के बाद ऊर्जा क्षेत्र मे सुधार नही तो पद छो़ड़े जिम्मेदार
-आरडीएसएस योजना में 40 से 45 प्रतिशत अधिक दरों के टेंडर के जिम्मेदार कौन ?
प्रदेश के 42 जिलों के निजीकरण के मसौदे के बीच उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष ने समीक्षा बैठक के उपरांत यह बात स्वीकार की की विद्युत व्यवस्था में सुधार के लिए बहुत बड़ी धनराशि खर्च की गई। लेकिन सुधार सामने नहीं आया इसके लिए पूरी तरीके से पावर कारपोरेशन का प्रबंधन जिम्मेदार है उसे तत्काल अपना पद छोड़ देना चाहिए। उपभोक्ता परिषद ने कहा पावर कार्पाेरेशन प्रबंधन कहीं कोई नॉरेटिव तो नहीं सेट कर रहा है कि सुधार नहीं दिखा। इसलिए कम लागत में बिजली कंपनियों का निजीकरण कर दिया जाए। इसकी भी गहन जांच होनी चाहिए।
उपभोक्ता परिषद लगातार आरडीएसएस में 440 94 करोड़ रूपया खर्च, बिजनेस प्लान में लगभग 4000 से 5000 करोड़ का मुद्दा उठाता रहा है। जब टेंडर फाइनल हो रहा था तो उपभोक्ता परिषद ने पावर कार्पाेरेशन प्रबंधन के सामने गलत ठेकेदारों और 40 से 45 प्रतिशत अधिक दरों पर काम देने का मुद्दा उठाया। स्मार्ट प्रीपेड मीटर के टेंडर को लेकर उपभोक्ता परिषद ने सवाल उठाए। लेकिन पावर करपोरेशन प्रबंधन उसे समय देश के बड़े ठेकेदारों के चंगुल में फंसा था। उसी का नतीजा था कि उपभोक्ता परिषद के विरोध के बाद भी भारत सरकार द्वारा जो 18885 करोड़ का स्मार्ट प्रीपेड मीटर का अनुमोदन दिया गया था। उसे पावर कारपोरेशन के दबाव में 27342 करोड़ में पास किया गया। भारत सरकार द्वारा अनुमोदित राशि से 8500 करोड़ ज्यादा थी लेकिन अभी वह दिन दूर नहीं जब यह स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना भी पूरी तरीके से फ्लॉप हो जाएगी। जिस तरीके से घटिया स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं यह उपभोक्ताओं के जी का जंजाल बनेंगे। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा पावर कॉरपोरेशन हमेशा से ठेकेदारों पर मेहरबानी दिखाता रहा। जब उपभोक्ता परिषद ने खुलासा किया कि पूरे प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर के अंदर चीनी कंपोनेंट लगाए जा रहे हैं सब ने चुप्पी साध ली। उपभोक्ता परिषद में कहा कि आरडीएसएस योजना में ऐसे ठेकेदारों को कम दिया जा रहा है जो बिजली क्षेत्र में नए-नए हैं। लेकिन पावर कॉरपोरेशन केवल एग्रीमेंट कराकर जल्द से जल्द प्रगति लेने के जुगाड़ में लगा था। उसका क्या लाभ था वह खुद जाने, करोड़ अरबो खर्च करने के बाद भी यदि सुधार नहीं दिखा तो सबसे पहले पावर कार्पाेरेशन प्रबंधन को अपना पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा पावर कार्पाेरेशन प्रबंधन सबसे ज्यादा समीक्षा बैठक करता है सबसे ज्यादा क्वालिटी पर काम करता है। इसके बावजूद भी सुधार नहीं दिखा तो सबसे पहले उसे अपना पद छोड़ना चाहिए। वर्तमान में प्रदेश के बिजली अभियंता प्रबंधन जो तय कर देता है इस पर काम करते हैं। तो सबसे ज्यादा जिम्मेदारी पावर करपोरेशन प्रबंधन की है।
जारी रहेगा अतिक्रमण विरोधी अभियान
शहर में अतिक्रमण के विरुद्ध सख्त रुख अपनाते हुए नगर निगम लखनऊ ने शनिवार को विभिन्न क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया। महापौर सुषमा खर्कवाल जी के निर्देश एवं नगर आयुक्त गौरव कुमार के आदेशानुसार यह अभियान जोन-1 और जोन-6 में चलाया गया, जिसमें अस्थायी अतिक्रमणों को हटाकर सार्वजनिक मार्गों को मुक्त कराया गया। यह अभियान अतिक्रमण मुक्ति तक जारी रहेगा।
जोन-1 के अंतर्गत विक्रमादित्य मार्ग स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय के समीप से प्रारंभ होकर कालीदास मार्ग, सिविल अस्पताल, हजरतगंज और अटल चौक तक अभियान चलाया गया। इस दौरान फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों पर किए गए अस्थायी अतिक्रमणों को हटाया गया। साथ ही बालाकदर रोड से हरिओम मंदिर होते हुए बाल्मीकि मार्ग, नॉवेल्टी चौराहा, नगर निगम मुख्यालय, लालबाग तक और कालीदास मार्ग से 1090 चौराहे तक फैले क्षेत्रों में भी अतिक्रमण हटाया गया। जोन-6 के अंतर्गत हैदरगंज प्रथम क्षेत्र में भी अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई की गई। चोरघाटी पेट्रोल पंप से पाल तिराहे तक दोनों पटरियों पर अवैध रूप से लगे 20 ठेले, 30 अस्थायी दुकानों को हटवाया गया। अभियान के दौरान 10 कैरेट, 2 प्लास्टिक की कुर्सियाँ, 2 लकड़ी की बेंच आदि सामान जब्त किया गया।अतिक्रमणकारियों को मौखिक चेतावनी दी गई कि भविष्य में दोबारा अतिक्रमण करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
