LUCKNOW:सरकार जनमत संग्रह माने और निजीकरण वापस ले,क्लिक करें और भी खबरें

-निजीकरण और दर बढ़ोत्तरी पर उपभोक्ता परिषद का करारा हमला

  • REPORT BY:PREM SHARMA || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग की तरफ से कल बनारस में प्रधानमंत्री के क्षेत्र में बिजली दर पर आम जनता की खुली सार्वजनिक सुनवाई संपन्न हुई। जिसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र और ऊर्जा मंत्री के गृह जनपद के विद्युत उपभोक्ताओं ने भी भाग लिया। सैकड़ो की संख्या में सुनवाई में शामिल विद्युत उपभोक्ताओं ने एकस्वर में बिजली दर बढ़ोतरी व निजीकरण का खुला विरोध किया किया। उपभोक्ता परिषद अनुसार इस सुनवाई में जो बात निकाल कर सामने आई उसको आम जनता का जन्म संग्रह मानकर रकार को हाथ जोड़कर निजीकरण के फैसले से पीछे हट जाना चाहिए। सुनवाई समाप्त होने के बाद बनारस के विद्युत उपभोक्ताओं उद्यमियों बुनकरों व संघर्ष समिति के बिजली कार्मिकों ने उपभोक्ता परिषद का आभार व्यक्त करते हुए स्वागत किया। उनके द्वारा स्पष्ट कहा गया कि कि उपभोक्ता परिषद की निजीकरण व बिजली दर बढ़ोतरी के खिलाफ सभी लोग एकजुट होकर उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार है।

सुनवाई के दौरान सबसे खास यह कि एक भी विद्युत उपभोक्ता निजीकरण के पक्ष में नहीं खड़ा दिखा। इसका मतलब यह कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री के क्षेत्र के विद्युत उपभोक्ता भी निजीकरण के पूर्णतया खिलाफ है। ऐसे में अब जन भावना का आदर करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को निजीकरण का फैसला तत्काल निरस्त कर देना चाहिए। ऊर्जा मंत्री जो निजीकरण जनता के हित में है बार-बार कह रहे थे उन्हें अब मान लेना चाहिए कि प्रधानमंत्री के क्षेत्र में ही जनता उनके तर्कों के खिलाफ है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कल पहला ऐसा मौका था जब निजीकरण के ऐलान के बाद प्रधानमंत्री के क्षेत्र में आम जनता की खुली अदालत आयोग के तत्वाधान में लगाई गई। जिसमें बिजली दर बढ़ोतरी और निजीकरण के खिलाफ चरम पर गुस्सा देखने को मिला। बनारस के उपभोक्ता, उद्यमी, किसानष् बुनकर सभी एक और में दिखे और कहा निजीकरण किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आर के चौधरी, बड़े उद्यमी जगदीश झुनझुनवाला, बुनकर प्रतिनिधि, ,किसान प्रतिनिधि ने भी निजीकरण का खुलकर विरोध किया एक तरह से या निजीकरण के खिलाफ आम जनता की आवाज थी। उपभोक्ता परिषद ने एक बार फिर निजीकरण का विरोध करते हुए यह बात दोहराई की प्रदेश के कुछ नौकरशाह निजीकरण को लेकर बहुत दिलचस्पी दिखा रहे हैं।उन्हें यह मालूम होना चाहिए कि देश के आईएएस अफसर का कोई विभाग नहीं होता। वह जिस भी विभाग में जाते हैं वहां तुरंत अपनी मनमानी कर निजीकरण की बात करने लगते ह।ैं क्योंकि उन्हें पता है कि विभाग बंद होते ही वह दूसरे विभाग में चले जाएंगे। उन्होने कहा किवास्तव में आईएएस अपने को बहुत काबिल समझते हैं तो वर्ष 2000 के बाद बिजली विभाग उनके जिम्मे इसके बाद भी विभाग की इतनी खराब कैसे हुई। नैतिक के आधार पर सबसे पहले उन्हें प्रदेश की जनता से माफी मांगते हुए इस विभाग से हट जाना चाहिए।

इमरान अध्यक्ष और धीरज कुमार महामंत्री निर्वाचित

राजकीय वाहन चालक संघ विघुत सुरक्षा निदेशालय उ.प्र. के द्विवार्षिक अधिवेशन में इमरान अहमद अध्यक्ष और धीरज कुमार महामंत्री निर्वाचित हुए। गोमतीनगर विद्युत सुरक्षा निदेशालय के प्रथम तल कमेटी हाल में राजकीय वाहन चालक महासंघ के अध्यक्ष रिजवान अहमद की अध्यक्षता में निर्वाचन अधिकारी महासंघ महामंत्री जय प्रकाश त्रिपाठी ने चुनाव सम्पन्न कराया। इस दौरान सलाहकार शाहिद अली, उपाध्यक्ष सहजराम, वीरेन्द्र पाण्डेय मौजूद थें।
चुनाव अधिकारी ने बताया कि इमरान अहमद अध्यक्ष और धीरज कुमार महामंत्री के अलावा अनुपम कुमार उपाध्यक्ष, दिनेश कुमार संगठन मंत्री, विक्रम कुमार प्रचार मंत्री, गुलशन कुमार कोषाध्यक्ष और धीरज सिंह सम्प्रेक्षक चुने गए। निर्वाचित पदाधिकारियों को सुरेन्द्र कुमार शास्त्री और नौरिशपॉल ने माला पहनाकर स्वागत किया। निर्वाचित पदाधिकारियों को जयप्रकाश त्रिपाठी ने शपथ दिलाई।

श्वान लाइसेंस चेकिंग अभियान में वसूला 20 हजार जुर्माना

नगर निगम लखनऊ द्वारा पालतू श्वान के लिए लाइसेंस चेकिंग अभियान चलाया गया। यह अभियान नगर आयुक्त  गौरव कुमार के निर्देश पर पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अभिनव वर्मा के नेतृत्व में प्रातः 6.30 बजे जोन-3 के सेक्टर एल, एम, एन, ओ समेत अन्य इलाकों में चलाया गया। अभियान में प्रवर्तन दल व डॉग कैचिंग स्क्वाड के साथ राजेश उपाध्याय, श्री शिवेक, मनोज सिंह, श्री रामकुमार,अभिनव भारती आदि अधिकारी सम्मिलित रहे।

अभियान में चार श्वान बिना लाइसेंस के पाए गए 4 व्यक्तियों से कुल 20,000 का जुर्माना वसूला गया। मौके पर 2 नए लाइसेंस भी बनाए गए।कुल 22,000 की राशि नगर निगम कोष में जमा की गई। 2 पोमेरियन व 1 पुग श्वान को बिना लाइसेंस पकड़ा गया, जिन्हें जुर्माना अदा करने के बाद छोड़ा गया। कई लोग अपने श्वान को लेकर भागते नजर आए और नगर निगम टीम को प्रभावित करने की कोशिश भी की। ऐसे सभी व्यक्तियों की जानकारी नोट की गई है। उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा जिसकी प्रति सम्बंधित थाना अध्यक्ष को आवश्यक कार्यवाही हेतु भेजी जाएगी। कुछ लोग लाइसेंस व वैक्सीनेशन कार्ड के साथ नियमों का पालन करते पाए गए। बारिश व डर की वजह से अपेक्षाकृत कम लोग अपने श्वान को टहलाते दिखे। लखनऊ नगर निगम क्षेत्र में पालतू श्वान की संख्या लगभग 10,000 है।

दमन के विरोध में कर्मियों के परिजन करेंगे सत्याग्रह

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण में आ रही वैधानिक अड़चनों से बौखलाया पवार कार्पाेरेशन प्रबंधन दमन और भय का वातावरण बनाकर निजीकरण थोपने की कोशिश कर रहा है जिसे कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। संघर्ष समिति ने कहा कि दमन और उत्पीड़न के विरोध में बिजली कर्मियों के परिवार भी शीघ्र ही सत्याग्रह में सम्मिलित होंगे।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि नवंबर 2024 में पावर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का एकतरफा ऐलान किया था। संघर्ष समिति ने निजीकरण के विरोध में लोकतांत्रिक ढंग से उसी समय आंदोलन प्रारंभ कर दिया जिसका परिणाम यह है कि सात महीनों से अधिक समय गुजरने के बावजूद पावर कार्पाेरेशन प्रबंधन निजीकरण करने में कामयाब नहीं हो पाया। संघर्ष समिति ने निजीकरण के विरोध में कई बिजली पंचायत और बिजली महापंचायत आयोजित कर उपभोक्ताओं और किसानों को भी संघर्ष में जोड़ दिया है। 09 जुलाई की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बाद उत्तर प्रदेश में दो विद्युत वितरण कंपनियों के निजीकरण का मामला अब बिजली कर्मियों , किसानों और उपभोक्ताओं के लिए राष्ट्रीय स्तर का मामला बन चुका है। उत्तर प्रदेश में निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन में उपभोक्ताओं और किसानों का समर्थन विद्युत नियामक आयोग की टैरिफ पर चल रही सुनवाई में भी दिखने लगा है। कानपुर और वाराणसी में हुई सुनवाई में उपभोक्ता परिषद सहित किसानों और सभी श्रेणी के उपभोक्ता संगठनों ने निजीकरण का निर्णय वापस लेने की मांग की। संघर्ष समिति ने कहा कि इन घटनाओं और निजीकरण में आ रही वैधानिक अड़चनों से परेशान और बौखलाए पावर कार्पाेरेशन प्रबंधन ने निजीकरण करने हेतु भय और दमन का रास्ता अख्तियार कर लिया है। प्रबंधन ने हजारों बिजली कर्मचारियों का उत्पीड़न की दृष्टि से दूरस्थ स्थानों पर ट्रांसफर किया, कई हजार बिजली कर्मचारियों का फेशियल अटेंडेंस के नाम पर वेतन रोक लिया गया, संघर्ष समिति के प्रमुख पदाधिकारियों पर अनानुपातिक आय के मामले में एफ आई आर दर्ज कराई गई। दमन पर उतरे प्रबंधन ने अब बिजली कर्मियों के घरों पर यू पी इलेक्ट्रिसिटी रिफॉर्म एक्ट 1999 और यू पी रिफॉर्म ट्रांसफर स्कीम 2000 का खुला उल्लंघन कर स्मार्ट मीटर लगाने की कार्यवाही प्रारंभ कर दी है। संघर्ष समिति ने कहा कि पुलिस बल लगाकर भय का वातावरण पैदा कर बिजली कर्मियों के घरों पर स्मार्ट मीटर लगाने की कोशिश की जा रही है जो रिफॉर्म एट 1999, ट्रांसफर स्कीम 2000 और इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 का खुला उल्लंघन है।संघर्ष समिति ने कहा कि डर और उत्पीड़न के जरिए उत्तर प्रदेश में बिजली वितरण निगमों का निजीकरण करना संभव नहीं है। बिजली कर्मी स्मार्ट मीटर लगाए जाने का हर स्तर पर पुरजोर विरोध करेंगे। आवश्यक हुआ तो स्मार्ट मीटर लगाए जाने के विरोध में बिजली कर्मियों के परिवार भी सत्याग्रह में सम्मिलित होंगे।

Aaj National

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