-उपभोक्ता परिषद ने जारी किया आम जनता का मत
- REPORT BY:PREM SHARMA || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सभी बिजली कंपनियां पूर्वांचल दक्षिणांचल पक्षमांचल मध्यांचल केस्को द्वारा विद्युत नियामक आयोग में कुल लगभग 113060 करोड़ का वार्षिक राजस्व आवश्यकता दाखिल किया गया। इस वर्ष लगभग 86952 करोड़ की बिजली खरीदी जानी है। उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से राजकीय सब्सिडी 17511 करोड़ मिलनी है। कॉरपोरेशन की तरफ से वर्ष 2025 -26 में कुल लगभग 19644 करोड़ का गैप दिखाया गया है। ट्रू ऑफ वर्ष 2023 -24 के लिए 4378 करोड़ का गैप दिखाया गया है। सब मिलाकर कुल लगभग 24022 करोड़ का घाट प्रस्तावित है। उसको पूरा करने के लिए बिजली घरों में औसत 28 प्रतिशत और घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में लगभग 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी प्रस्तावित की गई है। इसके संबंध में केस्को पूर्वांचल दक्षिणांचल पश्चिमांचल और निजी क्षेत्र की कंपनी नोएडा पावर कंपनी में भी सुनवाई संपन्न हो चुकी है। सभी सुनवाई में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने स्वयं भाग लिया। सुनवाई पूरा करने के बाद लखनऊ पहुंचने पर आम जनता उपभोक्ता किसान उद्योग बुनकर कार्मिक सभी द्वारा जो प्रमुख रूप से मुद्दे उठाए गए उस पर खुलासा करते हुए कहा पूरे प्रदेश में बिजली दर बढ़ोतरी व निजीकरण के खिलाफ सभी का गुस्सा देखने को मिला। 21 जुलाई को मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की सुनवाई लखनऊ नियामक आयोग सभागार में होनी है।
सुनवाई में अन्य जो मुद्दे छाए रहे उसमें स्मार्ट मीटर लगाने का विरोध है। पूरे प्रदेश में आम उपभोक्ताओं ने कहा स्मार्ट मीटर जंप और तेज चल रहा है। मल्टी स्टोरी परिसर के विद्युत उपभोक्ताओं का गुस्सा इस बात पर देखने को मिला कि बिल्डर उनका उत्पीड़न कर रहे हैं। विद्युत नियामक आयोग का आदेश नहीं मान रहे। कहीं भी बिजली बिलों में पारदर्शिता नहीं है। घरों में जो छोटे दुकान चला रहे हैं उन्हें घरेलू की विधुत में छूट की मांग उठती रही। अनेकों निगमो में किसानों को फ्री बिजली योजना में काफी शिकायतें रही फ्री बिजली योजना के बाद भी बिजली बिल भेजे जाने पर भी गुस्सा दिखा। किसी भी बिजली कंपनी में मुआवजा कानून के तहत किसी भी उपभोक्ता को मुआवजा न दिए जाने पर भी रोष देखने को मिला। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा प्रदेश में सबसे ज्यादा गुस्सा उपभोक्ताओं का इस बात पर सामने आया कि जब प्रदेश की बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 33122 करोड़ सर प्लस निकल रहा है। ऐसे में बिजली दारो में कमी करने के बजाय उसमें बढ़ोतरी की बात की जा रही है जो सरासर गलत है। किसानों ने बुनकरों ने उद्यमियों ने एकस्वरं निजीकरण स्वीकार नहीं है। सरकारी क्षेत्र में ही सरकार को आगे काम करना चाहिए और निजीकरण के फैसले को निरस्त कर देना चाहिए निजीकरण के दोनों प्रयोग टोरेंट पावर व नोएडा पावर कंपनी के खिलाफ आम जनता व किसानों का गुस्सा देखने को मिला।
खुले नालों और मैनहोल्स को किया जा रहा कवर
नगर आयुक्त गौरव कुमार के निर्देशन में लखनऊ नगर निगम द्वारा खुले नालों, ड्रेनों और मैनहोल्स को कवर करने हेतु एक विशेष जनहित
अभियान तेजी से चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य शहरवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और जनजीवन को दुर्घटनाओं से बचाना है।नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के अंतर्गत गत् कुछ दिनों में कुल 185 स्थानों पर नाले की कवरिंग, ड्रेन मैनहोल्स की मरम्मत और अन्य सुरक्षा से संबंधित कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। नगर आयुक्त के स्पष्ट निर्देश हैं कि जहां-जहां इस प्रकार की समस्याएं चिन्हित की जा रही हैं, वहां त्वरित रूप से कार्यवाही करते हुए कार्य को शीर्ष प्राथमिकता पर पूर्ण किया जाए।
नगर निगम के अधिकारियों और अभियंताओं की निगरानी में यह कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले और स्कूल-कॉलेज, अस्पताल के आसपास के क्षेत्रों में खुले नालों को ढकने के कार्य को तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है।इसी क्रम में जलकल विभाग द्वारा भी नागरिक सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए पिछले दो दिनों में 73 स्थानों पर सीवर के टूटे हुए ढक्कनों की मरम्मत की गई है। विभाग की टीमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित रूप से फील्ड का निरीक्षण करें और किसी भी प्रकार की क्षतिग्रस्त या खुली संरचनाओं को तुरंत दुरुस्त करें।नगर आयुक्त श्री गौरव कुमार ने बताया कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक सभी चिन्हित और संभावित रूप से खतरनाक स्थानों को सुरक्षित नहीं बना दिया जाता। उन्होंने आमजन से अपील की है कि यदि किसी स्थान पर इस तरह की समस्या दिखे तो तत्काल नगर निगम या जलकल विभाग को सूचना दें, ताकि समय रहते सुधार किया जा सके।
चिल्ड्रन्स पैलेस स्कूल में ‘ग्रीन डे’ का आयोजन
लखनऊ नगर निगम के चिल्ड्रन्स पैलेस स्कूल में शुक्रवार को ‘ग्रीन डे’ का आयोजन बड़े उत्साह और संकल्प के साथ किया गया। इस कार्यक्रम
का मुख्य उद्देश्य बच्चों और समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। कार्यक्रम में अनेक सांस्कृतिक और शैक्षिक गतिविधियों के माध्यम से पर्यावरण के महत्व को उजागर किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रमुख सचिव, पर्यटन एवं संस्कृति, उत्तर प्रदेश शासन, मुकेश कुमार मेश्राम (आईएएस) और हेल्प यू एजुकेशन एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी हर्षवर्धन अग्रवाल उपस्थित रहे। दोनों ही विशिष्ट अतिथियों ने विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाया।कार्यक्रम की मुख्य आकर्षण विद्यालय के बच्चों द्वारा प्रस्तुत नाटक रहा, जिसमें उन्होंने पर्यावरण के संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के महत्व को रेखांकित किया। इस प्रस्तुति ने उपस्थित अतिथियों, शिक्षकों और अभिभावकों को गहराई से प्रभावित किया और बच्चों की जागरूकता की प्रशंसा की गई। इस अवसर पर एल्डिको हाउसिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के वित्तीय सहयोग से हेल्प यू एजुकेशन एंड चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा विद्यालय में निर्मित नए शौचालय भवन का भी अनावरण किया गया। यह पहल बच्चों को स्वच्छ, सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सुविधा विशेष रूप से बालिकाओं के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की मुख्य अध्यापिका श्रीमती सविता सिंह ने सभी सम्मानित अतिथियों, सहयोगी संस्थाओं, शिक्षकों, अभिभावकों और बच्चों को धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों में न केवल पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं, बल्कि उन्हें भविष्य का जागरूक और संवेदनशील नागरिक भी बनाते हैं।यह आयोजन पर्यावरण के प्रति समर्पण, सामुदायिक सहभागिता और बाल शिक्षा के समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। चिल्ड्रन्स पैलेस स्कूल के इस प्रयास को नगर निगम और सामाजिक संगठनों द्वारा सराहना प्राप्त हुई है।
स्वच्छता में पुरस्कार महापौर ने जताया आभार, नई प्राथमिकता बताई
स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में लखनऊ को देश में तीसरा स्थान प्राप्त होने की ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद शुक्रवार को नगर निगम मुख्यालय में
प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महापौर सुषमा खर्कवाल ने मीडिया को संबोधित करते हुए इस सफलता के पीछे मौजूद नेतृत्व, मार्गदर्शन और सामूहिक प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त किया।
महापौर ने देश के यशस्वी रक्षा मंत्री एवं लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह का विशेष रूप से धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके निरंतर सहयोग, मार्गदर्शन और केंद्र से मिलने वाले समर्थन की वजह से लखनऊ लगातार प्रगति के पथ पर अग्रसर है। साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का भी आभार प्रकट किया, जिनके सशक्त नेतृत्व में स्वच्छता को जनआंदोलन बनाया गया और उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। उन्होंने कहा कि नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा तथा लखनऊ जनपद के प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना जी का योगदान भी इस उपलब्धि में अहम रहा है। महापौर ने कहा, मैं सभी माननीय मंत्रियों का दिल से आभार व्यक्त करती हूं, जिनकी नीति, नीयत और निरंतर संवाद के कारण लखनऊ देश के टॉप-3 स्वच्छ शहरों में शामिल हुआ है। इस दौरान महापौर ने आगे की प्राथमिकताओं पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि अब नगर निगम की सबसे प्रमुख प्राथमिकता लखनऊ में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट की स्थापना करना है, जिससे शहर के ठोस कचरे का वैज्ञानिक व स्थायी समाधान हो सके। इसके अलावा उन्होंने सीवर व्यवस्था में सुधार को लेकर जलकल विभाग और नगर निगम के बीच समन्वय को और मजबूत करने की बात कही।महापौर ने नगर निगम के सभी माननीय पार्षदगणों का भी विशेष धन्यवाद किया और कहा कि “पार्षदगणों की सक्रियता, जागरूकता और अपने-अपने वार्डों में सतत कार्यों की वजह से ही आज लखनऊ यह सम्मान प्राप्त कर सका है।”उन्होंने आगे कहा, “हमारा लक्ष्य अब सिर्फ तीसरे स्थान को बरकरार रखना नहीं, बल्कि देश में प्रथम स्थान प्राप्त करना है। इसके लिए प्रशासन, जनता, जनप्रतिनिधियों और संस्थाओं का सामूहिक प्रयास आवश्यक होगा।”
निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में होगा व्यापक विरोध प्रदर्शन
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा निजीकरण का मार्ग प्रशस्त करने हेतु बिजली कर्मियों पर
मनमाने ढंग से की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों का कड़ा विरोध करते हुए चेतावनी दी है कि यदि उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां बंद न की गई तो बिजली कर्मी आगामी 22 जुलाई को प्रांतव्यापी विरोध प्रदर्शन करेंगे। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि बिजली कर्मचारी, संविदा कर्मी, जूनियर इंजीनियर और अभियंता विगत आठ माह से शान्ति पूर्वक लोकतांत्रिक ढंग से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। इस दौरान बिजली कर्मचारियों ने प्रदेश के कई प्रमुख जनपदों में बिजली पंचायत और बिजली महापंचायत आयोजित की जिसमें बिजली कर्मियों के साथ किसानों और उपभोक्ताओं ने भी बड़ी संख्या में प्रतिभाग किया। निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन को व्यापक जन आंदोलन बनते देखकर पावर कार्पोरेशन प्रबंधन बौखला गया है।
बौखलाए पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने बिजली कर्मियों का मनोबल तोड़ने के लिए मनमाने ढंग से उत्पीड़न की कार्यवाहियां प्रारंभ कर दी। सबसे ताजा उत्पीड़न की कार्यवाही बिजली कर्मियों के घरों पर रियायती बिजली की सुविधा समाप्त करने हेतु स्मार्ट मीटर लगाने की कार्यवाही है। उल्लेखनीय है कि बिजली कर्मियों को रिफॉर्म एक्ट 1999 और ट्रांसफर स्कीम 2000 के अंतर्गत रियायती बिजली की सुविधा गजट नोटिफिकेशन के जरिए मिली है। इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 में भी साफ लिखा है कम कि विद्युत परिषद के समय मिल रही सुविधा किसी भी स्तर पर कमतर नहीं होगी। स्मार्ट मीटर लगाकर रियायती बिजली की सुविधा समाप्त करने की कोशिश इन सभी अधिनियमों का खुला उल्लंघन है। इससे बिजली कर्मचारी और पेंशनर तथा उनके परिवार प्रभावित हो रहे है। प्रबंधन स्मार्ट मीटर लगाने के लिए परिवारों का उत्पीड़न करने पर उतर आया है। फेशियल अटेंडेंस के नाम पर कई हजार बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं का जून माह का वेतन रोक दिया गया है। यह सभी कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर आ रहे हैं, अपना कार्य कर रहे हैं। किंतु जुलाई माह की 18 तारीख हो जाने तक इन कर्मचारियों को जून माह का भी वेतन नहीं दिया गया है। इसके पूर्व निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन में अपना कार्य करने के बाद कार्यालय समय के उपरांत सभाओं में आने वाले कर्मचारियों को और महिला कर्मचारियों को चिन्हित कर हजारों की तादाद में दूरस्थ स्थानों पर ट्रांसफर किया गया और उन्हें बिना प्रतीक्षा किए तत्काल कार्य मुक्त कर दिया गया। अत्यंत अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मचारियों को मनमाने ढंग से छटनी करके निकाल दिया गया। लगभग 45 प्रतिशत संविदा कर्मचारी सेवाओं से बर्खास्त कर दिए गए। संघर्ष समिति ने कहा कि यह सब दमनात्मक कार्यवाहियां केवल निजीकरण का मार्ग प्रशस्त करने के लिए की जा रही है। बिजली कर्मियों के मन में खौफ पैदा किया जा रहा है। पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष की इन कार्यवाहियों से ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति का वातावरण बन गया है। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि उत्पीड़न की कार्यवाहियां तत्काल बंद न की गई और बिजली कर्मियों का वेतन जारी न किया गया, स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया बंद न की गई, पदाधिकारियों और सक्रिय कर्मचारियों का स्थानांतरण रद्द न किया गया, संविदा कर्मी बहाल न किए गए तो आगामी 22 जुलाई को सभी बिजली कर्मचारी, संविदा कर्मी, जूनियर इंजीनियर और अभियंता प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद भी उत्पीड़न की कार्यवाहियां निरस्त न हुई तो संघर्ष समिति और कड़ा कदम उठाने के लिए बाध्य होगी जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
सिंचाई विभाग में निर्धारित समय डी.पी.सी. न करने पर नाराजगी
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उ प्र के महासचिव अतुल मिश्रा ने मुख्य सचिव को पत्र देकर बताया कि सिंचाई विभाग में कार्यरत जिलेदार की
पदोन्नति उप राजस्व अधिकारी के पद पर होनी है। सिचाई विभाग द्वारा शासन से मांगी गई समस्त सूचनाओं को सामेकित कर फरवरी 2024 में प्रस्ताव शासन को भेज दिया है।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की तरफ से कहा गया कि अत्यन्त खेद का विषय है कि मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव द्वारा समस्त विभागों को कई बार शासनादेश के माध्यम से निर्देशित किया गया है कि अधिकारियों, कर्मचारियों की पदोन्नति समय पर की जाये। परन्तु सिंचाई विभाग उ.प्र. शासन आदेशों को अनदेखी कर पदोन्नति की प्रक्रिया को विगत 01 वर्ष 05 माह से लम्बित रखे हुये है। जिससे कर्मचारियों को आर्थिक हानि उठानी पड़ा रही है और काफी कर्मी लाभ से वांछित हो कर सेवानिवृत्त हो रहे है। जिसका प्रभाव उनके पेंशन पर भी पड़ रहा है, जो कदापि उचित नहीं हैं। परिषद द्वारा कई बार पत्र देकर अनुरोध किया गया है कि एक बैठक आहूत कर समस्याओं का समाधान किया जाए पर सिचाई विभाग द्वारा विगत कई माह से एक भी बैठक नही की गई । जबकि मुख्य सचिव द्वारा कई निर्देश सभी अधिकारियों को दिये गए हैं। परिषद के महासचिव अतुल मिश्रा ने मुख्य सचिव जी से अनुरोध किया है कि प्रकरण पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुये पदोन्नति की प्रक्रिया को समयबद्धता के साथ पूर्ण करने हेतु प्रमुख सचिव, सिंचाई एवं जल संसाधन को निर्देशित करे जिससे कोई टकराव की स्थिति न बने।
महासंघ लम्बित मांगों के लिए 20 अगस्त के बाद आन्दोलन करेगा
उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ आज प्रमुख सचिव नगर विकास को आन्दोलन की नोटिस प्रेषित कर वर्षों से लम्बित मांगों के समयबद्ध समाधान कराये जाने हेतु गत दिनों 9 जुलाई 2025 को साकेंतिक कार्यबन्दी के माध्यम से प्रेषित ज्ञापन के साथ सलंग्न मांग पत्र पर 20 अगस्त 2025 तक कार्यवाही न किये जाने पर पुनः प्रदेश व्यापी आन्दोलनकरेगा ।
स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ अध्यक्ष शशि कुमार मिश्र ने बताया कि लम्बित मांगों पर प्रमुख सचिव नगर विकास उवप्रव शासन को आज पत्र प्रेषित कर जिसकी प्रति मंत्री नगर विकास एवं निदेशक स्थानिय निकाय आदि को देते हुए गत दिनो किये गये आन्दोलन एवं प्रदेश की निकायों से भेजे गये ज्ञापन के क्रम में समयबद्ध कार्यवाही किये जाने का अनुरोध किया गया है। महासंघ का एक प्रतिनिधि मंडल नागर निकाय निदेशालय जाकर अपर निदेशक स्थानीय निकाय रितु सुहास से मुलाकात कर मांग पत्र के विभिन्न बिन्दुओं की समस्याओं से अवगत कराते हुए निदेशालय स्तर पर लम्बित सूचनाए जिन्हे शासन को सन्र्दभित किया जाना है, पर समयबद्ध भेजने हेतु अनुरोध किया गया। महासंघ द्वारा लम्बित मागों का समाधान समयबद्ध न होने पर 20 अगस्त 2025 के बाद किसी भी कार्य दिवस से प्रदेश व्यापी आन्दोलन करने हेतु बाध्य होगा जिसमे अनिश्चत कालीन कार्यबन्दी भी सम्भावित है।
