-नगर आयुक्त को लिखा कड़ा पत्र, माँगा स्पष्ठीकरण
- REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ।महापौर सुषमा खर्कवाल का एक गोपनीय पत्र पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिससे यह पता चलता है कि वह नगर निगम अफसरों की कार्यप्रणाली से नाराज है।महापौर नें बाकायदा पत्र भेजकर स्पष्ठी करण माँगा है। उनके इस पत्र के बाद नगर निगम में हड़कंप मच गया है।
यह मामला नगर निगम के मृतक आश्रितों को नियुक्ति-पत्र प्रदान करने एवं 31 जुलाई को सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के विदाई एवं सम्मान समारोह से जुडा हुआ है।वायरल पत्र में महापौर नें बाकायदा अपने हस्ताक्षर भी किये है। जिसमें नगर आयुक्त
गौरव कुमार को सम्बोधित कर कहा गया है कि नगर निगम के मृतक आश्रितों को नियुक्ति-पत्र प्रदान करने एवं 31 जुलाई, 2025 को सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के विदाई एवं सम्मान समारोह 01 अगस्त, 2025 को सायंकाल 04:00 बजे से 05:00 बजे के मध्य नगर निगम मुख्यालय में कार्यक्रम प्रस्तावित था, परन्तु खेद का विषय है कि उपरोक्त महत्वपूर्ण कार्यक्रम में उन्हें बुलाया जाना उचित नहीं समझा गया, फिर भी कतिपय कनिष्ठ अधिकारियों के मौखिक अनुरोध पर उन्हें सायंकाल 05:15 बजे सम्मान समारोह में प्रतिभाग किये जाने पर पाया गया कि अधिष्ठान विभाग नें महत्वपूर्ण समारोह में न तो आप उपस्थित थे और न ही सम्बन्धित अपर नगर आयुक्त उपस्थित थी। पत्र में यह भी कहा गया है कि मौके पर उपस्थित नगर स्वास्थ्य अधिकारी पी०के० श्रीवास्तव को निर्देशित किया गया कि वह अपर नगर आयुक्त (अधिष्ठान) को कार्यक्रम में तत्काल उपस्थित होने हेतु दूरभाष पर वार्ता करें, तत्पश्चात् अपर नगर आयुक्त (अधिष्ठान) द्वारा दूरभाष पर अवगत कराया गया कि वह प्रमुख सचिव, उ०प्र० शासन, नगर विकास अमृत अभिजात की अध्यक्षता में वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से हो रही बैठक में हैं, जबकि मात्र आधे घंटे में ही वह उपस्थित हो गयीं।
महापौर नें पत्र में यह भी लिखा कि इस प्रकार ऐसे महत्वपूर्ण विभाग का दायित्व उस अपर नगर आयुक्त को सौंपना जो अपने विभागीय महत्वपूर्ण दायित्वों का सुचारू रूप निर्वहन न कर उनके आदेशों/प्रोटोकाल की अवहेलना करें, नगर निगम/कर्मचारी हित में उचित नहीं है। जबकि आप स्वयं विभागीय मुखिया हैं और मुखिया होने के नाते आपका भी दायित्व था कि नगर निगम की कई वर्षों तक सेवा कर सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के सम्मान में आप स्वयं और सम्बन्धित अपर नगर आयुक्त उपस्थित होते तथा प्रोटोकाल के तहत मुझे भी अवगत कराते।
महापौर नें पत्र में यह भी लिखा है कि यदि बैठक में उपस्थित होना आवश्यक ही था तो सम्मान कार्यक्रम की तिथि में परिवर्तन भी किया जा सकता था, परन्तु ऐसा न किया जाना कर्मचारियों के प्रति आपकी संवेदनहीनता को दर्शाता है। उचित होगा कि आप तथा आपके अधीनस्थ अधिकारी महापौर के प्रोटोकाल हेतु शासन से प्रशिक्षण प्राप्त करें। साथ ही 05 अगस्त, 2025 के अपरान्ह तक यह स्पष्ट करें कि क्या मृतक आश्रितों को नियुक्ति-पत्र प्रदान करने एवं सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के विदाई एवं सम्मान समारोह जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में प्रोटोकाल के तहत बुलाये जाने की आवश्यकता नहीं थी ? यह भी स्पष्ट करें कि क्या विभागीय मुखिया होने के नाते आपका यह दायित्व नहीं था कि नगर निगम में कई वर्षों तक अपनी सेवा देकर सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के सम्मान में आपका स्वयं अथवा अधिष्ठान विभाग के दायित्वों के निर्वहन करने वाले अपर नगर आयुक्त को विभाग के ऐसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में उपस्थित होना आवश्यक नहीं था ?
