-निजीकरण मसौदे को सार्वजनिक और बैठको की कार्यवृत्ति जारी करने की मांग
- REPORT BY:PREM SHARMA || EDITED BY-आज नेशनल न्यूज डेस्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों के निजीकरण का मामला जहां उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में सलाह हेतु विचाराधीन है। उत्तर
प्रदेश सरकार ने निजीकरण के मसौदे पर विद्युत नियामक आयोग से सलाह मांगी जिस पर बड़े पैमाने पर संवैधानिक व वित्तीय कमियां सामने आई। जिस पर विद्युत नियामक आयोग ने पुनः सरकार को वापस करते हुए उसे सही करने की सलाह दी थी। उसके बाद से असंवैधानिक रूप से नियुक्त कंसलटेंट ग्रांट थ्रोनटन व उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्य सचिव व पावर कारपोरेशन के उच्च अधिकारी दर्जनों बार अनौपचारिक मीटिंग आयोग से कर चुके। एक बार फिर आज भी ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव ऊर्जा सहित पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष व अन्य उच्च अधिकारी पूरी टीम के साथ विद्युत नियामक आयोग के बैठक की गई। यह लगातार अनौपचारिक रूप से हो रही मीटिंग उक्त मसौदा निकाली गई कैसे सही किया जाए इसलिए की जा रही है। उपभोक्ता परिषद के अनुसार एक संवैधानिक संस्था यानी कोर्ट के लिए इस तरह की अनौचारिक बैठके उचित नहीं है। पहले आयोगकमियां निकले और फिर उसका जवाब सही कराए।
उपभोक्ता परिषद ने इसे जनहित का गंभीर मामला मानते हुए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आज विद्युत नियामक आयोग में एक लोक महत्व प्रस्ताव दाखिल करते हुए कहा जनहित में पारदर्शिता के लिए विद्युत नियामक आयोग निजीकरण के सभी मसौदे को सार्वजनिक करें और साथ ही अनौपचारिक रूप से जो दर्जनों मीटिंग लगातार हुई है उनकी मिनट आप मीटिंग भी जारी की जाए क्योंकि विगत दिनों तत्कालीन मुख्य सचिव की अध्यक्षता में विद्युत नियामक आयोग में सरकार के अनेकों वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लंबी बैठक हुई। वर्तमान में मुख्य सचिव सेवानिवृत्त हो चुके हैं। ऐसे में किसी भी न्यायिक प्रक्रिया में जब पूरा मामला आने वाले समय में आगे बढ़ेगा या किसी जांच का विषय बनेगा उसे समय किसका क्या मत था इसका खुलासा कैसे होगा। जिस प्रकार से निजीकरण के मसौदे में बड़े पैमाने पर निजी घरानों को लाभ देने की बातें सामने निकलकर आ रही है किसी जांच में भी कब किसने क्या कहा इसके लिए मिनट आप मीटिंग का बनाया जाना बहुत जरूरी है। इसलिए आयोग संवैधानिक परिपाटी के तहत मिनट आप मीटिंग जारी करें या उसे पत्रावली के रिकॉर्ड में सुव्यवस्थित करें। अवधेश कुमार वर्मा ने कहा विद्युत नियामक आयोग एक अर्धनायक संवैधानिक संस्था है। उसके द्वारा किसी मसौदे में बड़े पैमाने पर कमियां उजागर की गई है। उसे लिखित तौर पर उत्तर प्रदेश सरकार को विद्युत नियामक आयोग के सामने रखना चाहिए। बार-बार मीटिंग करके विद्युत नियामक आयोग से सलाह लेकर उसमें सुधार कर तैयारी करना कि मसौदा इस बार जब विद्युत नियामक आयोग के सामने प्रस्तुत हो तो आप पूरी तरह पास हो जाए। यह एक सेमी ज्यूडिशल बॉडी के लिए उचित नहीं है। कोर्ट कोई भी निर्णय देती है उसे पर कोई भी जवाब शपथ पत्र के माध्यम से दाखिल होता है। कोई भी कोर्ट किसी भी व्यक्ति या संस्था को आए दिन जवाब सही करने के लिए उसके साथ मीटिंग नहीं करती।
जल जीवन मिशन उत्तराखंड के एमडी ने किया भरवारा प्लांट का निरीक्षण
जल जीवन मिशन (उत्तराखंड) के प्रबंध निदेशक विशाल मिश्रा ने सोमवार को लखनऊ के भरवारा स्थित 345 एमएलडी एसटीपी (सीवेज
ट्रीटमेंट प्लांट) का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने प्लांट में संचालित हो रहे रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम और जलशोधन की प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। निरीक्षण का उद्देश्य उत्तर प्रदेश में अपनाई गई डिजिटल तकनीकों, प्रदर्शन मूल्यांकन और जल शोधन प्रणालियों की समझ बनाना था, ताकि इसे उत्तराखंड में भी प्रभावी रूप से लागू किया जा सके।
निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त गौरव कुमार स्वयं मौजूद रहे और उन्होंने लखनऊ में नगर निगम द्वारा ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के तहत अपनाई गई आधुनिक तकनीकों, डिजिटलीकरण, एवं सतत निगरानी तंत्र के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भरवारा एसटीपी में जलशोधन प्रक्रिया को पूरी तरह स्वचालित किया गया है और इसकी निगरानी े रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से 24 घन्टे 7 दिन की जाती है।इस अवसर पर स्वेज इंडिया के निदेशक राजेश मटपाल, जलकल के अधिशासी अभियंता सचिन कुमार यादव, जल निगम उत्तराखंड के अधिशासी अभियंता आनंद सैनी, जलकल के अवर अभियंता गया प्रसाद सिंह एवं जलकल विभाग के कई अन्य तकनीकी अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे। विशाल मिश्रा ने भरवारा प्लांट की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि लखनऊ में जल प्रबंधन को लेकर की जा रही तकनीकी पहलें प्रेरणादायक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड में भी इसी तरह के डेटा-ड्रिवन और रियल-टाइम मॉनिटरिंग मॉडल को लागू करने की दिशा में यह दौरा अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जल जीवन मिशन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “हमारा लक्ष्य न केवल प्रत्येक घर तक शुद्ध पेयजल पहुँचाना है, बल्कि जलशोधन, अपशिष्ट प्रबंधन और सिस्टम इंटीग्रेशन के उच्चतम मानकों को भी अपनाना है।” उन्होंने लखनऊ नगर निगम की टीम को धन्यवाद देते हुए भविष्य में तकनीकी सहयोग की संभावनाएं भी व्यक्त कीं। अंत में नगर आयुक्त गौरव कुमार ने कहा कि यह लखनऊ के लिए गर्व की बात है कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के उच्चाधिकारी यहाँ की प्रणालियों से सीख लेने आए हैं। उन्होंने कहा कि नगर निगम लखनऊ पूरी प्रतिबद्धता के साथ शहर की जल एवं स्वच्छता व्यवस्था को लगातार बेहतर बनाने के लिए कार्य कर रहा है।
महापौर ने किया बारिश प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण
शहर में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच लखनऊ नगर निगम द्वारा जनसुविधाओं को बनाए रखने के लिए फील्ड पर सक्रियता बढ़ा
दी गई है। इसी क्रम में सोमवार को माननीय महापौर सुषमा खर्कवाल जी ने नगर आयुक्त गौरव कुमार एवं नगर निगम के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ शहर के विभिन्न वर्षा प्रभावित क्षेत्रों का औचक निरीक्षण किया और जलभराव की स्थिति का जायजा लिया।
निरीक्षण की शुरुआत जोन-3 के अंतर्गत आने वाले पुरनिया चौराहे से की गई, जहाँ सड़क की एक लेन पर जलभराव की समस्या सामने आई। इस पर महापौर महोदया ने तत्काल नगर आयुक्त को निर्देशित किया कि जलनिकासी की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे यातायात सुगम बना रहे और आमजन को कोई असुविधा न हो। इस दौरान जोन-3 के जोनल अधिकारी श्री अमरजीत यादव समेत अभियंत्रण विभाग के अन्य अधिकारी एवं नगर निगम के कर्मचारी भी मौके पर उपस्थित रहे।
इसके पश्चात महापौर ने जोन-4 स्थित विक्रांत खंड का निरीक्षण किया। उन्होंने पिछले वर्ष की तुलना में इस बार जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बताते हुए संतोष व्यक्त किया, क्योंकि यहां बड़े पंप की व्यवस्था के कारण बारिश का पानी समय रहते निकाला जा रहा था। निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त गौरव कुमार के साथ जोनल अधिकारी संजय यादव, जोनल सेनेटरी ऑफिसर श्री पंकज शुक्ला एवं अधिशासी अभियंता श्री अतुल भी उपस्थित थे।
इसके बाद महापौर ने कठौता झील के पास सपना स्वीट्स चौराहे पर नाले की स्थिति का निरीक्षण किया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि इस स्थान पर जलभराव की स्थिति उत्पन्न न हो। नगर आयुक्त एवं अधिशासी अभियंता को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए कि नाले की सफाई और फ्लो पर नियमित निगरानी रखी जाए।राम भवन चौराहे पर स्थित नाले का भी महापौर महोदया ने निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि नाले की सफाई, जल प्रवाह और अवरोधों की मॉनिटरिंग नियमित रूप से की जाए ताकि क्षेत्र में जलभराव न हो और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न न हों। महापौर ने कहा कि नगर निगम लखनऊ जनता की सुविधा और सुरक्षा के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वर्षा के इस मौसम में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और हर शिकायत का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए।
निजीकरण विरोध आन्दोलन के 250 दिन पूरे
निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 250 दिन पूरे होने पर आज बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों , जूनियर इंजीनियरों और
अभियंताओं ने प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर जोरदार विरोध प्रदर्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया। बिजली कर्मियों ने संकल्प लिया कि जब तक निजीकरण का निर्णय निरस्त नहीं किया जाता और समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस नहीं ली जाती संघर्ष जारी रहेगा।राजधानी लखनऊ में मध्यांचल मुख्यालय पर भारी बारिश के बीच बिजली कर्मियों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि शीर्ष प्रबन्धन की निजी घरानों के साथ मिलीभगत है और आठ माह से निजीकरण न कर पाने के कारण हताश प्रबंधन बिजली कर्मियों का लगातार उत्पीड़न कर रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि उत्पीड़न का उद्देश्य बिजली कर्मियों का मनोबल तोड़ना है किंतु बिजली कर्मी किसी कीमत पर निजीकरण स्वीकार नहीं करेंगे। उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त कराने हेतु संघर्ष समिति की मांग है कि मार्च 2023 की हड़ताल के बाद ऊर्जा मंत्री द्वारा समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के वापस लिये जाने के निर्देश के अनुपालन में समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस ली जाय। निजीकरण के नाम पर 55 साल की उम्र और डाउन साइजिंग के नाम पर हटाये गये सभी संविदा कर्मी बहाल किये जाय।उत्पीड़न की दृष्टि से बिजली कर्मियों के किये गये सभी ट्रांसफर निरस्त किये जाय।फेसियल अटेंडेंस के नाम पर जून और जुलाई माह का रोका गया वेतन तत्काल बिजली कर्मियों को दिया जाय। उत्पीड़न के नाम पर स्टेट विजिलेंस की जांच कराकर शीर्ष पदाधिकारियों के विरुद्ध की गई फर्जी एफ आई आर वापस ली जाए। रियायती बिजली की सुविधा समाप्त करने की दृष्टि से धमकी देकर जोर जबरदस्ती से स्मार्ट मीटर लगाने की कार्यवाही तत्काल बन्द की जाय। आज वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, हरदुआगंज, जवाहरपुर, परीक्षा, पनकी, ओबरा, पिपरी और अनपरा में मुख्यतया बड़ी विरोध सभा और प्रदर्शन किया गया।
लगातार बारिश के बीच नगर आयुक्त की बेतहर अपील
लगातार बारिश के बीच सोशल मीडिया में नगर आयुक्त की एक बेहतर अपील लोगों में चर्चा का विषय रही। इस अपील को लोगों ने जमकर
शेयर भी किया। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने लखनऊ शहर के नागरिकों से अपील की है कि वे भीषण वर्षा के कारण घर से बाहर निकलने से बचें और अपरिहार्य स्थितियों में ही घर से बाहर निकलें। उन्होंने विशेष रूप से बिजली के खंभों, प्रकाश वाले पोलों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी है।
उन्होंने आम आदमी को सावधानी बरतने के साथ कहा कि बिजली के खंभों और पोलों से दूर रहेंरू बिजली के खंभों और पोलों के पास खड़े होने से बिजली के झटके लगने का खतरा हो सकता है। पेड़ों के नीचे न खड़े होंरू पेड़ों के नीचे खड़े होने से गिरने वाली शाखाओं या पेड़ के गिरने से चोट लगने का खतरा हो सकता है। अपरिहार्य स्थितियों में ही घर से बाहर निकलेंरू यदि संभव हो तो घर से बाहर न निकलें और अपरिहार्य स्थितियों में ही घर से बाहर निकलें। स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी किए गए निर्देशों का पालन करें और स्कूलों के बंद होने की सूचना का ध्यान रखें। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने नागरिकों की सुरक्षा के लिए ये अपील की है और उनका उद्देश्य शहर को सुरक्षित और स्वस्थ रखना है।
नगर निगम टीम ने चौथी मंजिल से रेस्क्यू की गाय
चौक क्षेत्र में एक गाय चौथी मंजिल पर चढ़ जाने के बाद उक्त क्षेत्र में अफरातफरी मच गई। चौक क्षेत्र में अली कॉलोनी स्थित मंजू टंडन ढाल के पास एक बहुमंजिला इमारत की चौथी मंजिल पर गाय चढ़ जाने से हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों ने गाय को उतारन की कोशिश की, लेकिन जब कामयाबी नहीं मिली तो क्षेत्रीय पार्षद गुलशन अब्बास रिजवी को सूचना दी। पार्षद की सूचना पर नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अभिनव वर्मा कैटल कैचिंग दस्त के साथ मौके पर पहुंचे और गाय का सुरक्षित रेस्क्यू कराया।
चौथी मंजिल पर एक भारी-भरकम गाय को देखकर लोग इस बात से भयभीत थे कि गाय कहीं फिसलकर गिर न जाए, जिससे उसके साथ ही नीचे मौजूद लोगों की जान को भी खतरा हो सकता था। नगर निगम की विशेष कैटल कैचिंग टीम सावधानीपूर्वक ऑपरेशन चलाकर गाय को सुरक्षित नीचे उतारा। टीम ने यह तय किया कि गाय को न चोट पहुंचे और न ही क्षेत्र में अफरा-तफरी फेले। बचाव के ष्बाद गाय को नगर निगम की गौशाला भेजा गया, जहां उसका उपचार और देखभाल की जा रही है।
