-नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों से मांगी रिपोर्ट
- REPORT BY:PREM SHARMA || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ। प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों में प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं का 33122 करोड़ सर प्लस निकल रहा है। उपभोक्ता परिषद उसके एवज में बिजली दरों में एक मुफ्त 45 प्रतिशत कमी अथवा अगले 5 वर्षों तक 9 प्रतिशत कमी और 42 जनपदों के निजीकरण मैं बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और निजीकरण प्रस्ताव को खारिज करने की मांग बिजली दर की सुनवाई में जोर-शोर से उठाया गया था।
बिजली कंपनियों में इन सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर लिखित आपत्तियां दाखिल की गई थी। जिस पर विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 64 3(3) के अनुसार उसका जवाब बिजली कंपनियों से बिना लिए बिजली दर के निर्धारण को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। उपभोक्ता परिषद द्वारा दक्षिणांचल व पूर्वाचल में निजीकरण के मुद्दे पर अनेकों कमियां उजागर की गई थी और विद्युत अधिनियम 2003 का गलत प्रयोग करने का मुद्दा भी उठाया गया था। बिजली दरों में व्यापक बढ़ोतरी को असंवैधानिक करार दिया गया था। उपभोक्ता परिषद की पेशबंदी काम आई अंततः उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के निर्देश पर सचिव विद्युत नियामक आयोग द्वारा सभी बिजली कंपनियों से उपभोक्ता परिषद की सभी दाखिल लिखित आपत्तियों पर तत्काल रिपोर्ट तलब की गई है। सभी आपत्तियों को सभी बिजली कंपनियों के प्रबंध निदेशक को भेजने के साथ ही पावर कारपोरेशन के रेगुलेटरी अफेयर यूनिट को भी सभी लिखित आपत्तियां भेजते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश जारी किया गया है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा क्योंकि अब पूरा मामला बिजली दरो में कमी, निजीकरण के प्रस्ताव में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, हनयमों के उल्लंघन के आधार पर उसे खारिज करने का हो। सभी बिजली कंपनियों को अब खास तौर पर पूर्वांचल व दक्षिणांचल को लिखित जवाब विद्युत नियामक आयोग को दाखिल करना पड़ेगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि दक्षिणांचल व पूर्वांचल जो लगातार निजीकरण पर कुछ बोलने से पीछे हट रहा था।उसके तरफ से पावर कॉरपोरेशन बैटिंग कर रहा था अब लिखित जवाब दाखिल करना पड़ेगा। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा अब पूरा मामला रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत टैरिफ का अंग बन चुका है। ऐसे में निजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना पूरी तरह आसंवैधानिक होगा अब सबसे बड़ा सवाल लिया है कि बिजली कंपनियों के जवाब के बाद रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत विद्युत नियामक आयोग को भी उसे पर अपना मत देना पड़ेगा। विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 64(3) के तहत सभी आपत्तियों पर बिना विचार किये विद्युत नियामक आयोग आगे नहीं बढ़ सकता। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा निजीकरण के मामले पर विद्युत नियामक आयोग को बिजली कंपनियों से सही जवाब लेना पड़ेगा और उसे रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत आम जनता के बीच लाना पड़ेगा। बिजली कंपनियों को किसी कंपनी को भी कम दामों पर बेचने का अधिकार नहीं है पूरा निजीकरण का मसौदा ही भ्रष्टाचार का पुलिंदा है। इसकी उच्च स्तरीय जांच होना बहुत जरूरी ह।ै जिसमें विद्युत नियामक आयोग की भूमिका संवैधानिक रूप से सबसे ज्यादा अहम है कहीं भी कोई चूक हुई तो विद्युत नियामक आयोग को भी सक्षम न्यायालय में इसका जवाब देना पड़ेगा ।
अभियान में 50 से अधिक अतिक्रमण हटाए गए
शहर में बढ़ते अवैध अतिक्रमण और यातायात में आ रही बाधाओं को देखते हुए नगर निगम लखनऊ ने आज एक सघन और बहुस्तरीय अभियान चलाया। यह कार्रवाई महापौर सुषमा खर्कवाल के स्पष्ट निर्देशों और नगर आयुक्त गौरव कुमार के आदेश पर की गई। अभियान का उद्देश्य प्रमुख मार्गों, सार्वजनिक स्थलों और फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त कर नागरिकों को सुगम एवं सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराना रहा।
अभियान के अंतर्गत जोन-6 के वार्ड मल्लाही टोला द्वितीय एवं बालागंज क्षेत्र में कार्रवाई की गई। जोनल अधिकारी मनोज यादव के नेतृत्व में नगर निगम की टीम ने प्ळत्ै पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के आधार पर पहले मौके का निरीक्षण किया। बरफखाना क्षेत्र में हुई शिकायत का निस्तारण किया गया, जहां सार्वजनिक मार्ग पर अस्थाई दुकानों और ठेलों द्वारा अतिक्रमण किया गया था। इसी क्रम में दुबग्गा सब्जी मंडी गेट नंबर 2 के पास भी नागरिकों द्वारा की गई शिकायत पर कार्रवाई की गई। यहां सार्वजनिक मार्गों और फुटपाथों पर अनधिकृत रूप से लगाए गए 20 ठेले, 30 अस्थाई दुकानें, 1 लोहे का जिना, 1 लोहे का तराजू, 6 टायर, 2 लोहे के स्टूल, 3 प्लास्टिक स्टूल, 6 प्लास्टिक कुर्सियां तथा 10 कैरेट सहित अन्य अवैध सामग्री हटाई गई और जब्त कर ली गई।नगर निगम टीम द्वारा अतिक्रमणकर्ताओं को सख्त चेतावनी दी गई कि यदि भविष्य में पुनः इस स्थल पर अतिक्रमण किया गया, तो और अधिक कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, क्षेत्रीय थानाध्यक्ष को पत्र प्रेषित कर अवैध अतिक्रमण की रोकथाम हेतु सहयोग मांगा गया, ताकि अतिक्रमण दोबारा न हो।
शिकायतों के आधार पर हटाईं अवैध डेरियां, 17 पशु जब्त
नगर निगम लखनऊ द्वारा शहरी स्वच्छता और जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए मंगलवार जोन-7 के गुडम्बा थाना क्षेत्र में अवैध
डेरियाँ के खिलाफ सख्त अभियान चलाया गया। नगर आयुक्त गौरव कुमार के निर्देश एवं अपर नगर आयुक्त डॉ. अरविंद कुमार राव के आदेशानुसार पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अभिनव वर्मा के नेतृत्व में यह अभियान संचालित किया गया।
विशेष अभियान के अंतर्गत मिश्रपुर एवं शंकरपुरवा द्वितीय (रेनबो पब्लिक स्कूल के पास, कल्याणपुर-कंचना बिहारी मार्ग) स्थित अवैध डेरियों पर कार्यवाही की गई। मिश्रपुर क्षेत्र में सड़क पर अतिक्रमण कर बांधे गए पशुओं को हटाया गया, जबकि शंकरपुरवा में संचालित अवैध डेरी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की गई।अभियान के दौरान कुल 17 पशु (06 भैंस, 10 गायें एवं 01 पड़िया) जब्त किए गए, जिन्हें आलमबाग स्थित कांजी हाउस में निरुद्ध किया गया है। इन पशुओं को केवल निर्धारित जुर्माना जमा करने के पश्चात ही छोड़ा जाएगा।यह कार्यवाही पोर्टल व स्थानीय नागरिकों की शिकायतों के आधार पर की गई थी, जिनमें डेरी संचालकों द्वारा गोबर को खुले प्लॉटों में फेंकने एवं नालियों में बहाने से गंदगी, जलभराव और मच्छरजनित रोगों की आशंका व्यक्त की गई थी।
प्रबन्धन पर गलत आंकड़ों के आधार पर पैरवी का आरोप
-निजीकरण के विरोध में प्रान्त व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आरोप लगाया है कि निजीकरण हेतु तैयार किए गए आरएफपी डॉक्यूमेंट
को अनुमोदित कराने हेतु पावर कार्पोरेशन प्रबंधन गलत आंकड़ों के आधार पर पैरवी कर रहा है और दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 251 वें दिन आज बिजली कर्मियों ने सभी जनपदों को परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष से समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल और निदेशक वित्त निधि नारंग पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट द्वारा तैयार किए गए आरएफपी डॉक्यूमेंट को अनुमोदित कराने के लिए नियामक आयोग से लेकर शासन के उच्च स्तर तक दौड़ लगा रहे हैं। पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष और निदेशक वित्त पूरी टीम के साथ कल विद्युत नियामक आयोग के कार्यालय गए थे और आज इन लोगों ने मुख्य सचिव के पास जाकर गलत आंकड़ों के आधार पर घाटा दिखाकर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की पैरवी की। संघर्ष समिति ने मुख्य सचिव से अपील की है कि वह निधि नारंग और ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की मिली भगत में बनाए गए निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट को किसी भी प्रकार मंजूरी न दें। संघर्ष समिति ने विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष को पत्र भेजकर मांग की है कि निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट को कोई भी मंजूरी देने के पहले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति का पक्ष विद्युत नियामक आयोग को सुनना चाहिए क्योंकि निजीकरण से बिजली उपभोक्ताओं के साथ सबसे अधिक प्रभाव बिजली कर्मचारियों के भविष्य पर पड़ने वाला है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन की निजी घरानों के साथ मिली भगत है और उन्होंने सरकारी विभागों के बकाया और सब्सिडी की धनराशि को घाटे में जोड़कर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के घाटे को बढ़ा चढ़ा कर दिखाया है। संघर्ष समिति ने कहा कि इसके अतिरिक्त दोनों विद्युत वितरण निगमों की एक ए टी एंड सी हानियां बढ़ा चढ़ा कर दिखाइ गई हैं। यह पता चला है कि ए टी एंड सी हानियों को बढ़ाकर दिखाने के लिये ग्रामीण क्षेत्रों में निजी नलकूपों की बिजली खपत कम करके आंकी जा रही है। उल्लेखनीय है कि निजी नलकूपों को उत्तर प्रदेश सरकार की नीति के अनुसार मुफ्त बिजली मिलती है। ए टी एंड सी हानियों को बढ़ा कर दिखाने से गत वर्ष की तुलना में विद्युत वितरण निगमों की अधिक हानि दिखाई गई है।
