-कोई निर्णय लेने के पहले संघर्ष समिति से बात की जाए
- REPORT BY:PREM SHARMA || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उ.प्र. ने विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन को पत्र भेजकर मांग की है कि पॉवर कार्पाेरेशन प्रबंधन द्वारा तैयार किये गए निजीकरण के आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट को विद्युत नियामक आयोग कोई मंजूरी न दे और इस मामले में संघर्ष समिति को अपना पक्ष रखने हेतु विद्युत नियामक आयोग वार्ता हेतु समय दें। संघर्ष समिति ने निजीकरण की गतिविधियां तेज होते देख बिजली कर्मचारियों को सचेत करते हुए एलर्ट जारी किया है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का टेण्डर होने के बाद अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और सामूहिक जेल भरो आंदोलन की तैयारी रखी जाय।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उ.प्र. के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि निजीकरण होने के बाद बिजली कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा अतः निजीकरण के आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट पर कोई भी अभिमत देने के पहले विद्युत नियामक आयोग को संघर्ष समिति से वार्ता करनी चाहिए। संघर्ष समिति ने इस बावत नियामक आयोग के चेयरमैन को पत्र भेजकर वार्ता का समय मांगा है। संघर्ष समिति का कहना है कि निजीकरण के बाद लगभग 50 हजार संविदा कर्मियों की छटनी हो जायेगी और लगभग 16 हजार 500 नियमित कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ जायेगी। कॉमन केडर के अभियंताओं और जूनियर इंजीनियरों पर नौकरी जाने और पदावनति का खतरा उत्पन्न होगा। ऐसी स्थिति में निजीकरण से सबसे अधिक दुष्प्रभाव बिजली कर्मियों पर पड़ने जा रहा है अतः बिना बिजली कर्मियों का पक्ष सुने नियामक आयोग को कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए अपितु सीधे सीघे पॉवर कार्पाेरेशन द्वारा भेजे गये आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट को निरस्त कर देना चाहिए।संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों की आज लखनऊ में हुई बैठक में पॉवर कार्पाेरेशन प्रबंधन द्वारा जोर जबरदस्ती से निजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाये जाने के घटनाक्रमों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गयी। संघर्ष समिति ने प्रदेश के सभी बिजली कर्मियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं को एलर्ट जारी करते हुए आह्वान किया है कि यदि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का टेण्डर किया जाता है तो बिजली कर्मी अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और सामूहिक जेल भरो आंदोलन के लिये तैयार रहें। संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्व निदेशक वित्त निधि नारंग द्वारा अवैध ढंग से नियुक्त किये गए ट्रांजैक्शन कंसल्टेन्ट ग्रांट थार्टन के साथ मिलीभगत कर आ.एफ.पी. डाक्यूमेंट कुछ निजी घरानों की मदद करने के लिए बनाया गया था। उ.प्र. शासन ने संभवतः इन्ही बातों को देखते हुए श्री निधि नारंग को सेवा विस्तार देने से मना कर दिया और अब नए निदेशक वित्त संजय मेहरोत्रा बन गये हैं। अतः श्री निधि नारंग द्वारा तैयार किये गए निजीकरण के दस्तावेज को वैसे ही निरस्त कर देना चाहिए। संघर्ष समिति के आह्वान पर आज भी बिजली कर्मियों ने सभी जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट पढ़ ले, रिफॉर्म फेल रहा
उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों में सुधार कार्यक्रम रिफॉर्म के नाम पर उनका निजीकरण किए जाने के फैसले पर उपभोक्ता परिषद ने उत्तर प्रदेश सरकार व पावर कॉरपोरेशन पर करारा हमला बोला है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहां उत्तर प्रदेश सरकार को वर्ष 2000 में जब उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद( यूपीएसईबी )को तोड़कर उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन में विभाजित किया गया। तत्पश्चात विद्युत क्षेत्र सुधारो के तहत उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन को चार वितरण कंपनियों मे विभाजित किया गया। उसके बाद 31 मार्च 2004 को भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) द्वारा उत्तर प्रदेश में विद्युत क्षेत्र सुधारो की समीक्षा की गई। उसकी रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सीएजी द्वारा भेजी गई जिसमें नियंत्रक महालेखा परीक्षक ने कहा राज्य विद्युत परिषद का विघटन निगमीकरण और पुनर्गठन थर्मल और जल विद्युत उत्पादन कंपनियों को अलग-अलग करने से परिचालन प्रदर्शन में कोई बदलाव नहीं हुआ। बल्कि बड़े पैमाने पर घाटा बढ़ा ट्रांसमिशन व वितरण हानियां बढ़ी, उपभोक्ता सेवा में सुधार नहीं हुआ । बड़े पैमाने पर प्रबंधन में कुप्रबंधन सामने आया। ऐसे में बिजली कंपनियों को पुनः निजीकरण के माध्यम से देश के बड़े निजी घरानों को बेचने की बात करना पूरी तरह प्रदेश की जनता के साथ बड़ा धोखा है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने आज 31 मार्च 2004 को नियंत्रक महालेखा परीक्षक द्वारा जारी रिपोर्ट को सार्वजनिक करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से यह मांग उठाई। प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों को एक करते हुए पुनः राज्य विद्युत परिषद को बहाल करना चाहिए निश्चित तौर पर ऊर्जा क्षेत्र में स्वता सुधार हो जाएगा और प्रदेश की बिजली कंपनियां आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगी।श्री वर्मा ने कहा वर्तमान में प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों व पावर कारपोरेशन के अधीन जो भी लगभग 1 लाख 80000 करोड़ की पर संपत्तियां है। वह सभी उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद की पैतृक संपत्ति ज्यादा है। ऐसे में राज्य विद्युत परिषद की पैतृक संपत्ति को राज्य सरकार द्वारा अपने अधीन 51 प्रतिशत शेयर मानकर उसे सरकारी कंपनी स्वीकार करते हुए उसकी निजी घरानों को बेचना न्याय संगत नहीं है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद 1959 में गठित हुआ था उसको बहाल करने से पूरे देश के ऊर्जा क्षेत्र में एक नई ऊर्जा क्रांति जागेगी। उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बनेगा जो अपनी गलती को सुधारते हुए पुनः राज्य विद्युत परिषद को बहाल करने वाला पहला राज्य होगा।
अभियान में 24 से अधिक भवनों पर सील, लाखों की वसूली
नगर निगम लखनऊ ने सोमवार को कर चोरी करने वाले बड़े बकायेदारों पर शिकंजा कसते हुए शहर के कई हिस्सों में एक साथ कड़ी
कार्रवाई की। ज़ोन-01, 03, 04 और 05 में चलाए गए इस विशेष अभियान के दौरान 24 से अधिक भवनों पर सीलिंग, कुर्की और लाखों रुपये की वसूली की गई। नगर आयुक्त ने साफ कहा है कि कर न चुकाने वालों को अब किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
नगर निगम की टीम ने ज़ोन-01 में कुल 06 भवनों पर कार्रवाई की। इसमें भवन संख्या 162/006, 162/059 और 162/193 (अरसतल चौराहा) से बकाया राशि की वसूली की गई। वहीं, भवन संख्या 162/055 अस्तबल चारबाग भवन स्वामी का नाम रईस जहों बकाया 66906.66 रुपये और 191/069 बाग शेरगंज भवन स्वामी का नाम मोहम्मद हमीद बकाया 190011.01 पर सीलिंग की कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई से इलाके के अन्य बकायेदारों में भी सजक होते नजर आए।ज़ोन-03 में निगम प्रशासन ने सबसे अधिक 10 भवनों पर कार्रवाई की। दिलकुशा प्लाज़ा स्थित भवन संख्या एसएसएलजी/बी-001 भवन स्वामी का नाम सुहैल अहमद बकाया 1,73,212.92व बी-12 भवन स्वामी का नाम नेर सिंह त्रिपाठी बकाया 1,73,212.92 की बकाया राशि होने पर सीलिंग की गई। इसके अलावा, फैजुल्लागंज के भवन संख्या 537/025/139 एवं 537/005/001 पर कार्रवाई की गई।भवन संख्या 537/163 एवं 537/38-सीसी से क्रमशः 1,05,965.76 और 1,34,674.77 की वसूली हुई। वहीं, भवन संख्या 537/23-सीसी पर 1,57,859.65 बकाया होने पर सीलिंग कर दी गई। इसी ज़ोन के गौरीगंज स्थित भवन संख्या 613 से कुर्की के दौरान 40,000.00 की वसूली की गई। पेपरमिल वॉर्ड स्थित ज़ोन-04 में निगम की टीम ने कुल 02 भवनों पर कुर्की की, जिसमें 78,000 की वसूली की गई। इसके अलावा 04 भवनों को सील किया गया। ज़ोन-05 में कुल 06 भवनों को निगम ने निशाने पर लिया। अशरफाबाद नगर स्थित भवन संख्या 272 आशुतोष नगर भवन स्वामी का नाम शंकुन्तला दीक्षित बकाया 87116 रुपये, भवन संख्या 325/5 इंद्रलोक भवन स्वामी का नाम राजेश प्रसाद बकाया 68918 रुपये एवं 155/ जाफ़र खेड़ा भवन स्वामी का नाम जगत प्रकाश बकाया 50085 रुपये से बकाया वसूली की गई। वहीं, इन्द्रलोक स्थित भवन संख्या जी/233भवन स्वामी का नाम अरुण शुक्ल बकाया 137799 रुपये एवं एम-040,041 भवन स्वामी का नाम अवतार सिंह बकाया 76180 रुपये पर सीलिंग/मार्किंग की गई। इन्द्रलोक के ही भवन संख्या 32,033 भवन स्वामी का नाम कल्पना तिवारी बकाया 53103 रुपये से कुर्की के दौरान 25,000 की वसूली हुई। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने साफ शब्दों में कहा है कि बड़े बकायेदारों को अब किसी भी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अधिकारी बकायेदारों पर कार्रवाई में ढिलाई बरतेंगे, तो उन्हें भी कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा। नगर आयुक्त ने विशेष रूप से जोनल अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे लगातार ऐसे बकायेदारों के विरुद्ध अभियान चलाएं और समयबद्ध तरीके से राजस्व वसूली सुनिश्चित करें।
प्रमुख सड़कों से हटाए गए अस्थाई ढांचे
शहर में लगातार बढ़ते अवैध अतिक्रमण और यातायात बाधाओं को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम लखनऊ ने मंगलवार को व्यापक और बहुस्तरीय अभियान चलाया। यह कार्रवाई महापौर सुषमा खर्कवाल के निर्देश और नगर आयुक्त गौरव कुमार के आदेश पर की गई। अभियान का उद्देश्य नागरिकों को सुगम और सुरक्षित यातायात उपलब्ध कराना तथा प्रमुख सड़कों, सार्वजनिक स्थलों और फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त कराना है।
नगर आयुक्त के आदेशों के अनुपालन में पुलिस प्रशासन की उपस्थिति में जोन-2 क्षेत्र के अन्तर्गत कार्रवाई की गई। इस अभियान का नेतृत्व जोनल अधिकारी शिल्पा कुमारी ने किया। उनके साथ अभियंत्रण विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा 296 की संयुक्त टीम मौजूद रही।अभियान के तहत वार्ड मोतीलाल नेहरू चंद्रभानु गुप्त नगर क्षेत्र में बांस मंडी चौराहे से नाका चौराहे होते हुए हैदर कैनाल तक अस्थाई अतिक्रमण हटाए गए। इस कार्रवाई में 1 काउंटर, 2 मेज़, 4 बोर्ड और फ्लेक्स को जब्त किया गया। वहीं, अतिक्रमण व गंदगी फैलाने वालों के विरुद्ध चालान काटकर 3000 का जुर्माना भी वसूला गया।नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान का मकसद केवल अतिक्रमण हटाना ही नहीं, बल्कि लोगों में यह संदेश देना भी है कि सार्वजनिक स्थलों पर अवैध कब्जा किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निगम का कहना है कि यदि लोग खुद पहल करके अतिक्रमण हटाते हैं, तो भविष्य में कार्रवाई और जुर्माने से बच सकते हैं।महापौर सुषमा खर्कवाल ने कहा कि शहर की सुंदरता और यातायात व्यवस्था को बनाए रखने के लिए नगर निगम लगातार सक्रिय है। नागरिकों से अपील है कि वे नियमों का पालन करें और शहर को स्वच्छ, सुंदर तथा यातायात अवरोध मुक्त बनाने में सहयोग दें। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने स्पष्ट किया कि अभियान निरंतर जारी रहेगा और किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अतिक्रमण करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
विश्वविद्यालय महासंघ ने केन्द्रीय शिक्षा मंत्री के समक्ष रखी कई मांगें
उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष डॉ. संजय शुक्ला ने मंगलवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से उनके संसद
भवन स्थित कार्यालय में मुलाकात कर राज्य विश्वविद्यालयों के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की समस्याएं बताई। उन्होंने केन्द्रीय शिक्षा मंत्री से लखनऊ विश्वविद्यालय आने का अनुरोध किया। अध्यक्ष डॉ. संजय ने बताया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा है कि विश्वविद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता बनाने में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। कर्मचारी समस्याओं के समाधान के लिए निर्णायक कदम उठाएगी। इस दौरान संजय शुक्ला ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का ध्यान आकृष्ट करते हुए अवगत कराया कि देश भर के विश्वविद्यालय में शिक्षकों को एक समान वेतन, भत्ते व प्रोन्नति आदि का लाभ मिल रहा है, जबकि कर्मचारियों के संबंध में यह व्यवस्था लागू नहीं है।
उन्होंने इस दौरान केन्द्रीय शिक्षा मंत्री के समक्ष रखी मांगों में कहा कि केंद्र सरकार ने पुस्तकालय संवर्ग से कुछ पदों को भी यूजीसी वेतनमान प्रदान किया है लेकिन लिपिकीय संवर्ग सहित अन्य शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। परिणाम स्वरूप एक ही विश्वविद्यालय में दोहरी व्यवस्था लागू है जिसको लेकर कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त हो रहा है। महासंघ अध्यक्ष ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से एक राष्ट्र एक चुनाव, एक देश एक विधान एक प्रधान की तर्ज पर देश भर के विश्वविद्यालयों में एक व्यवस्था लागू करने के साथ ही केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों की तरह राज्य विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को वेतन, भत्ते, चिकित्सा सुविधा व पेंशन आदि प्रदान करने की मांग की भी मांग रखी।
