LUCKNOW:नए कनेक्शन में प्रीपेड मीटर के आदेश पर भड़के उपभोक्ता,क्लिक करें और भी खबरें

-सरकार की छवि धूमिल करने वाला फैसला ऊर्जा मंत्री चुप क्यों

  • REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर के आधार पर ही बिजली कनेक्शन देने के आदेश पर आज प्रदेश के अनेकों जनपदों से जुड़े विद्युत उपभोक्ताओं ने उपभोक्ता परिषद के साप्ताहिक वेबीनार पावर कॉरपोरेशन व बिजली कंपनी पर करारा हमला बोलां। उपभोक्ताओ ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन प्रदेश की जनता को लालटेन युग में ले जाने की साजिश में लगी है।ं इसके पीछे पूरी तरह यह सिद्ध हो गया है कि निजीकरण का प्लान ही काम कर रहा है। उपभोक्ताओं ने कहा आज उड़ीसा व मुंबई जिस मॉडल पर उत्तर प्रदेश में निजीकरण के लिए 42 जनपदों की प्रक्रिया विचाराधीन है। बिजली कनेक्शन, बिजली दर, के मामले में ऐतिहासिक वृद्धि हुई। घरेलू उपभोक्ताओं की अधिकतम बिजली दर मुंबई में 16 प्रति यूनिट, उड़ीसा में 1 किलोवाट गरीब विद्युत उपभोक्ता का बिजली कनेक्शन 4500 रुपए में है। जबकि उत्तर प्रदेश में सरकार की नाक के नीचे पावर कारपोरेशन अब 1 किलो वाट का बिजली कनेक्शन 6000 के ऊपर होगा। बिजली दर में 45 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है। यदि वह पास हुआ तो अधिकतम 12 प्रति यूनिट तक बिजली दर हो जाएगी। जो या सिद्ध करता है कि पूरा पावर कॉरपोरेशन निजी घराने को खुश करने के लिए उसके लिए लाल कारपेट बिछा रहा है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने वेबीनार में अनेकों जनपदों से जुड़े विद्युत उपभोक्ताओं को अवगत कराया कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत विद्युत उपभोक्ता को प्रीपेड व पोस्टपेड में बिजली कनेक्शन लेने का अधिकार है और वह कोई भी विकल्प ले सकता है। ऐसे में मनमानी तरीके से जिस दर पर पावर कारपोरेशन ने प्रीपेड मीटर लगाने का आदेश पारित किया है। वह असंवैधानिक है और विद्युत नियामक आयोग ने उसे पास नहीं किया है। ऐसे में इस नियम विरुद्ध आदेश को किसी भी सूरत में मानने के लिए हम सभी तैयार नहीं है। विद्युत नियामक आयोग बिजली कनेक्शन के सभी मानक को तय करता है। ऐसे में विद्युत नियामक आयोग द्वारा जब तक कानूनंन कोई आदेश जारी नहीं किया जाता प्रदेश का विद्युत उपभोक्ता पावर कारपोरेशन के नियम विरुद्ध आदेश को मानने के लिए बाध्य नहीं है। पावर कारपोरेशन को अपने नियम विरुद्ध आदेश को वापस लेना चाहिए यह उत्तर प्रदेश की गरीब जनता को लालटेन युग में ले जाने वाला फैसला है। प्रदेश के अनेकों जनपदों से जुड़े विद्युत उपभोक्ता हरेंद्र कुमार, योगेंद्र दुबे, संदीप कुमार, सानू कुमार, सुरुचि, तमन्ना सिंह, अंशु दीप, जावेद हुसैन, जिया पाल सभी ने एक और में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार पावर कारपोरेशन के नियम विरुद्ध फैसले को वापस कारण अन्यथा की स्थिति में पूरे प्रदेश के विद्युत उपभोक्ता बड़े आंदोलन के लिए बढ़ा देंगे जिसकी समस्त जिम्मेदारी पावर कार्पाेरेशन प्रबंधन की होगी।

निजीकरण और उत्पीड़नात्मक विरूद्ध आंदोलन के 290 दिन

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा कि निजीकरण किये जाने हेतु बिजली कर्मचारियों पर बड़े पैमाने पर की गई उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के वापस न लिये जाने से बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त है। निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 290 दिन पूरे होने पर आज बिजली कर्मियों ने समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शनकिया। संघर्ष समिति ने कहा कि कई हजार बिजली कर्मियों को साढ़े तीन माह से वेतन नहीं दिया गया है जो पूरी तरह अमानवीय है। यह बिजली कर्मी तीन माह से वेतन न मिलने पर भी अपनी ड्यूटी कर रहे हैं फिर भी उन्हें वेतन न देना उत्पीड़न की पराकाष्ठा है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि फेसियल अटेंडेंस के नाम पर कई हजार बिजली कर्मचारियों को जून, जुलाई और अगस्त माह का वेतन अभी तक नहीं दिया गया है। काम करने के बावजूद बिजली कर्मचारियों को लगातार तीन माह तक वेतन नहीं दिया जाना यह बहुत ही गंभीर उत्पीड़नात्मक कार्यवाही है और पूरी तरह अमानवीय है। संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के नाम पर मई के महीने में अत्यंत अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मचारियों की बड़े पैमाने पर छटनी की गई थी। कई हजार संविदा कर्मी 55 वर्ष की आयु के नाम पर निकाले गए और कई हजार संविदा कर्मियों को डाउन साइजिंग करके हटा दिया गया। ध्यान रहे की संविदा कर्मियों को बड़े पैमाने पर हटाए जाने से विभिन्न जनपदों में प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के बाद निजी घरानों की सहूलियत के लिए बिजली कर्मचारियों को मिल रही रियायती बिजली सुविधा समाप्त करने हेतु बिजली कर्मियों के और पेंशनरों के निवास पर जबरदस्ती स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं।संघर्ष समिति ने कहा कि विगत 9 माह से निजीकरण के विरोध में चल रहे बिजली कर्मियों के आंदोलन से खीझा हुआ प्रबंधन बड़े पैमाने पर उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां कर दमन पर उतर आया है। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मियों का आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय निरस्त नहीं किया जाता और समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस नहीं होती।

शिवरी प्लांट व कान्हा गौशाला का एडीएम ट्रेनीज ने किया निरीक्षण

शिवरी स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोसेसिंग प्लांट एवं कान्हा गौशाला का प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ट्रेनीज ने संयुक्त रूप से निरीक्षण किया। यह भ्रमण कैपेसिटी बिल्डिंग ट्रेनिंग प्रोग्राम के अंतर्गत आयोजित किया गया था। इस निरीक्षण का नेतृत्व अर्बन ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, लखनऊ के एडिशनल डायरेक्टर सौरभ की अगुवाई में किया गया।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने सबसे पहले सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का दौरा किया। यहाँ नगर निगम लखनऊ द्वारा कचरे के वैज्ञानिक प्रसंस्करण और प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी गई। प्लांट में लिगेसी और फ्रेश वेस्ट के पृथक्करण, कम्पोस्ट तैयार करने की प्रक्रिया और अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादन की प्रणाली का प्रदर्शन किया गया। अधिकारियों ने इस मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि यह स्वच्छता मिशन और सतत विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस तकनीक को प्रदेश के अन्य नगर निगमों और निकायों में भी अपनाया जाना चाहिए ताकि शहरी क्षेत्रों में बढ़ती कचरा समस्या का स्थायी समाधान किया जा सके।

एडीएम ट्रेनीज ने कान्हा गौशाला का भी भ्रमण किया। यहाँ उन्होंने देखा कि किस प्रकार से गायों की देखभाल के लिए व्यवस्थित प्रबंधन किया गया है। गौशाला में स्वच्छता, पोषण और चिकित्सा सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने की जानकारी अधिकारियों को दी गई। एडीएमगण ने व्यवस्था की सराहना करते हुए इसे अनुकरणीय बताया और कहा कि इस प्रकार की गौशालाएँ न केवल बेसहारा पशुओं के संरक्षण का माध्यम बनती हैं, बल्कि स्वच्छ और सुरक्षित शहरी वातावरण के निर्माण में भी सहयोगी सिद्ध होती हैं। अधिकारियों ने संयुक्त रूप से कहा कि लखनऊ नगर निगम द्वारा किया जा रहा यह प्रयास शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों ही दृष्टिकोणों से अत्यंत सराहनीय है। इस मॉडल को यदि प्रदेश के अन्य शहरों में भी लागू किया जाए तो कचरा प्रबंधन और पशु संरक्षण के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव संभव है। इस अवसर पर नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी एडीएम ट्रेनीज को विभिन्न परियोजनाओं की तकनीकी और प्रायोगिक जानकारी दी तथा भविष्य की योजनाओं से भी अवगत कराया। शिवरी प्लांट और कान्हा गौशाला का यह संयुक्त निरीक्षण एडीएम ट्रेनीज के लिए एक महत्वपूर्ण सीख का अवसर बना और उन्होंने आश्वस्त किया कि वे अपने-अपने जिलों में भी इन सफल मॉडलों को लागू करने की दिशा में ठोस पहल करेंगे।
जनता के करीबी लखनऊ मध्य विधायक रविदास मेहरोत्रा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का नाम हमेशा से अपनी सांस्कृतिक धरोहर, गंगा-जमुनी तहज़ीब और सामाजिक सौहार्द के लिए जाना जाता है। इसी शहर के मध्य क्षेत्र से विधायक रविदास मेहरोत्रा का व्यक्तित्व और उनकी जनसेवा की शैली लोगों के दिलों में एक अलग पहचान रखती है।
यह सच है कि रविदास मेहरोत्रा उन गिने-चुने जनप्रतिनिधियों में से हैं, जिनके दरवाज़े जनता के लिए हर वक्त खुले रहते हैं। सुबह हो या शाम, किसी भी परेशानी को लेकर लोग सीधे उनसे मिल सकते हैं। वे जनता की समस्याओं को न केवल ध्यान से सुनते हैं बल्कि तत्काल समाधान कराने का भी प्रयास करते हैं। यही कारण है कि लखनऊ मध्य विधानसभा क्षेत्र के लोग उन्हें अपना सच्चा हितैषी और संरक्षक मानते हैं।उनकी खासियत यह है कि वे केवल चुनाव के समय जनता के बीच नहीं दिखाई देते, बल्कि साल के 365 दिन जनता के सुख-दुख में बराबर खड़े रहते हैं। चाहे गली-मोहल्लों की समस्याएँ हों, गरीब और जरूरतमंदों की मदद का प्रश्न हो या फिर प्रशासनिक स्तर पर जटिल मुद्दों का समाधानकृरविदास मेहरोत्रा हमेशा सक्रिय भूमिका निभाते हैं। सामाजिक सरोकार और मानवीय मूल्यों के प्रति उनकी गहरी निष्ठा उन्हें आम नेताओं से अलग बनाती है। यही कारण है कि उन्हें न केवल अपने क्षेत्र में, बल्कि पूरे लखनऊ में एक जनप्रिय नेता के रूप में जाना जाता है। जनप्रतिनिधि का असली दायित्व यही होता है कि वह जनता के बीच रहे, उनकी समस्याओं को अपनी समस्या समझे और समाधान के लिए हर संभव कदम उठाए। विधायक रविदास मेहरोत्रा ने इसे अपने व्यवहार और कार्यशैली से सिद्ध कर दिखाया है।

Aaj National

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *