LUCKNOW:महालेखा परीक्षक कर देगा वित्तीय अनियमिता और भ्रष्टाचार का खुलासा,क्लिक करें और भी खबरें

-बिजली निजीकरण मामले में वित्तीीय अनियमिताएं एवं मनमानी

  • REPORT BY:PREM SHARMA || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 42 जनपदों के निजीकरण वाली पूर्वांचल व दक्षिणांचल कंपनी की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के द्वारा पूरी पत्रावली व मसौदा तलब किए जाने के बाद पावर कारपोरेशन का यह कहना कि वर्ष 2024 -25 की ऑडिट हो रही है। उसमें कोई वित्तीय प्रक्रिया निजीकरण के संबंध में हुई ही नहीं है वह पूरी तरह सही नहीं है। वर्तमान में जहां यह सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला तो है। वही वर्ष 2024 -25 में ही बिजली के निजीकरण का फैसला लिया गया और 25 मार्च को निजीकरण के लिए ट्रांजैक्शन एडवाइजर को गलत तरीके से नियुक्त किया गया। सबसे चौंकाने वाला मामला या है कि वर्ष 2023 -24 के ऑडिटेड आंकड़ों के आधार पर बैलेंस शीट बनाई गई। इस आधार पर आगे वर्ष 2023 ,-24 के ही ऑडिटेड आंकड़ों के आधार पर बनने वाली पांच बिजली कंपनियों की भी बैलेंस शीट बनाई गई। जिसमें रिजर्व विड प्राइस जो आकलित की गई उससे कहीं ना कहीं देश के निजी घरानो का बड़ा फायदा होना तय है। क्योंकि जिस प्रकार से पांच नई बिजली कंपनियों की कुल रिजर्व विड प्राइस लगभग 6500 करोड़ के आसपास निकल गई है। उसे आने वाले समय में कम लागत में बिजली कंपनियां बिक जाएगी जिससे लाभ देश के बड़े निजी घरानो को होगा। जो एक बहुत बड़ा षड्यंत्र और भ्रष्टाचार का फैसला है।
उत्तर प्रदेश राज विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा पावर कारपोरेशन को सबसे पहले नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक का अधिकार पढ़ना चाहिए। उन्हें शायद यह नहीं मालूम है कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक सीएजी सीएजी (डीपीसी )अधिनियम 1971 की प्रासंगिक धाराओं के साथ जिसके तहत वास्तविक वित्तीय लेनदेन के बिना भी स्थितियां की जांच करने की अनुमति देता है। यदि उनमें संभावित वित्तीय हानियां गलत कार्य शामिल है। इसमें खड्यंत्र या ,कुप्रबंधन जैसी स्थितियां शामिल है। जिससे वित्तीय हानि हो सकती है। भले ही अभी तक कोई धनराशि वितरित न की गई हो उस दशा में भी सीएजी जांच कर सकता है। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा पावर कॉरपोरेशन वास्तव में सही तरीके से कार्य कर रहा है और कहीं भी कोई वित्तीय घोटाला करने की साजिश नहीं की गई है तो उसे तुरंत सभी मसौदे और दस्तावेज पत्रावली सीएजी को उपलब्ध करा देना चाहिए। अगर वह सही है तो उन्हें किस बात का डर है ? पावर कारपोरेशन को अभी भी समय है यह मान लेना चाहिए कि निजीकरण का उसका पूरा मसौदा गलत है। वह निजीकरण के इस फैसले को वापस लेते हैं। अन्यथा की स्थिति में आने वाले समय में जो लोग भी इस भ्रष्टाचार के खड्यंत्र में शामिल हैं।उन्हें जेल जाने से कोई नहीं रोक पाएगा और उपभोक्ता परिषद आखिरी अंजाम तक लड़ाई को ले जाएगा।

उत्पीड़नात्मक एवं निजीकरण के विरोध में ऊर्जा मंत्री आवास पर प्रदर्शन

ऊर्जा निगमों में बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियन्ताओं पर निजीकरण हेतु की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में बिजली कर्मियों ने आज प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। राजधानी लखनऊ में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र एवं राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीयिनर्स संगठन, उप्र के केन्द्रीय पदाधिकारियों के नेतृत्व में विद्युत कर्मियों ने पूर्व नोटिस के अनुसार ऊर्जा मंत्री श्री अरविन्द कुमार शर्मा के निवास पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र एवं राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनिसर्य संगठन, उप्र के शीर्ष पदाधिकारियों ने बताया कि पूर्व नोटिस के अनुसार उत्पीड़न और निजीकरण के विरोध में राजधानी लखनऊ के बिजली कर्मचारी, संविदा कर्मी, जूनियर इंजीनियर और अभियन्ता मध्याह्न 12 बजे ऊर्जा मंत्री श्री अरविन्द कुमार शर्मा के कालिदास मार्ग स्थित आवास पर पहुंच गये। ऊर्जा मंत्री ने बिजली कर्मियों के शीर्ष पदाधिकारियों से मिलने से मना कर दिया। इसके बाद बिजली कर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा और बिजली कर्मियों ने उत्पीड़न वासप लेने तथा निजीकरण निरस्त करने के नारे लगाने शुरू कर दिये। थोड़ी देर में काफी पुलिस बल ऊर्जा मंत्री के आवास पर आ गया किन्तु बिजली कर्मी बिना उत्तेजित हुए शान्तिपूर्ण ढंग से अपना विरोध दर्ज करते रहे। बिजली कर्मियों की मुख्य मांग यह थी कि ऊर्जा मंत्री ने 03 दिसम्बर 2022 और 19 मार्च 2023 को संघर्ष समिति के संयोजक सहित सभी शीर्ष पदाधिकारियों के साथ लिखित समझौता किया था। ऊर्जा मंत्री इस समझौते से मुकर गये हैं। समझौते के अनुसार मार्च 2023 की हड़ताल के दौरान की गयी उत्पीड़न की कार्यवाही आज तक वापस नहीं ली गयी है। इसके विपरीत निजीकरण हेतु लगातार उत्पीड़न की कार्यवाहियां की जा रही हैं जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त है। बिजली कर्मियों का कहना था कि ऊर्जा मंत्री ने 03 दिसम्बर 2022 और 19 मार्च 2023 को संघर्ष समिति और जूनियर इंजीनियर्स संगठन के जिन पदाधिकारियों के साथ लिखित समझौता किया है, ऊर्जा मंत्री से वही पदाधिकारी मिलकर यह समझने आये हैं कि समझौते के अनुपालन में उत्पीड़न की कार्यवाहियां वापस लेने के बजाय लगातार उत्पीड़न की और कार्यवाहियां क्यों की जा रही हैं? ऊर्जा मंत्री संघर्ष समिति के पदाधिकारियों से इस सम्बन्ध में वार्ता के लिए तैयार नहीं थे। इसके विरोध में बिजली कर्मियों ने मध्याह्न 12 बजे से सायं 4 बजे तक ऊर्जा मंत्री के निवास पर शान्तिपूर्वक विरोध प्रदर्शन किया।संघर्ष समिति की मांग है कि दिसम्बर 2022 में किये गये समझौते का पालन किया जाये, मार्च 2023 के समझौते के अनुपालन में उत्पीड़न की की गयी समस्त कार्यवाहियां वापस ली जायें, अत्यन्त अल्प वेतन भोगी निकाले गये संविदा कर्मचारियों को बहाल किया जाये, उत्पीड़न की दृष्टि से बड़े पैमाने पर किये गये बिजली कर्मियों के स्थानान्तरण निरस्त किये जायें, बिजली कर्मियों के शीर्ष पदाधिकारियों पर दमन की दृष्टि से बैठाई गयी स्टेट विजिलेंस की जांच और की गयी एफआईआर वापस ली जाये, फेसियल अटेंडेंस के नाम पर बिजली कर्मियों का रोका गया वेतन जारी किया जाये, बिजली कर्मियों की रियायती बिजली की सुविधा समाप्त करने हेतु स्मार्ट मीटर लगाने की कार्यवाही तत्काल बन्द की जाये और प्रदेश के व्यापक हित में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त किया जाये।आज ऊर्जा मंत्री के निवास पर प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे, वरिष्ठ पदाधिकारी जितेन्द्र सिंह गुर्जर, जूनियर इंजीनियर्स संगठन के अध्यक्ष अजय कुमार, संघर्ष समिति के वरिष्ठ पदाधिकारी महेन्द्र राय, पी के दीक्षित, सुहेल आबिद ने मुख्यतया किया। चार घण्टे चले विरोध प्रदर्शन में सैकड़ों कर्मचारी मौजूद रहे।

कारगिल विजय दिवस की तैयारियों का किया गया जायजा

नगर निगम लखनऊ द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी कारगिल विजय दिवस के अवसर पर कारगिल शहीद स्मारक पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम उन वीर सपूतों की स्मृति में आयोजित किया जाता है, जिन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध में देश की रक्षा हेतु अपने प्राणों की आहुति दी थी। इस बार यह आयोजन और भी विशेष होगा, क्योंकि उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इस कार्यक्रम में सम्मिलित होकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर नगर निगम पूरी तरह से सक्रिय है। इसी कड़ी में नगर आयुक्त  गौरव कुमार ने शुक्रवार को कारगिल शहीद स्मारक का दौरा कर स्थल पर चल रही तैयारियों का निरिक्षण एवं जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कार्यक्रम के दौरान समस्त व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित हों और श्रद्धांजलि समारोह गरिमापूर्ण एवं अनुकरणीय हो। निरीक्षण के दौरान अपर नगर आयुक्त  ललित कुमार, अधिशासी अभियंता किशोरी लाल समेत नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारीगण मौजूद रहे। सभी को साफ-सफाई, सजावट, विद्युत व्यवस्था, मंच व्यवस्था, यातायात संचालन, पानी की उपलब्धता एवं बैठने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। नगर आयुक्त ने विशेष रूप से कहा कि यह अवसर हम सभी के लिए राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है। कारगिल शहीदों के बलिदान की गाथा को नई पीढ़ी तक पहुँचाना हम सबका उत्तरदायित्व है। उन्होंने यह भी बताया कि कार्यक्रम स्थल पर स्वच्छता एवं सौंदर्यीकरण को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि वहां आने वाले आगंतुकों को सकारात्मक और प्रेरणादायक वातावरण मिल सके। कारगिल विजय दिवस के इस अवसर पर नगर निगम लखनऊ की ओर से यह प्रयास किया जा रहा है कि वीर शहीदों की स्मृति में आयोजित यह आयोजन पूर्ण श्रद्धा, सम्मान और गरिमा के साथ सम्पन्न हो।

संगठन पदाधिकारियों से महापौर ने की वार्ता

महापौर  द्वारा नगर निगम लखनऊ के सभी कर्मचारी संगठनों के अध्यक्ष व महामंत्री को अपने कैंप कार्यालय में बुलाकर बैठक कर सभी को संबोधन किया। महापौर द्वारा अपने संबोधन में कहा के देश में स्वच्छता के मामले में अपना लखनऊ शहर तृतीय स्थान पर आया है लखनऊ को राष्ट्रपति द्वारा सम्मान भी दिया गया है। जिस हेतु हम सभी की बराबरी की भागीदारी रही आप सभी के सहयोग से ऐसा सम्भव हुआ जिस लिये आप सब धन्यवाद् के पात्र हैं। इसी तरह हम सब मिल कर ऐसे ही काम करेंगे और प्रयास करेंगे की अपना शहर अगली बार नंबर एक पर आ जाये जिस हेतु हम सब मिल कर एक वृहद स्तर पर बड़ी जागरूकता रैली भी निकाल कर सभी को स्वच्छ्ता के प्रति और जागरूप करेंगे। नगर निगम कर्मचारी संघ,लखनऊ के अध्यक्ष आनन्द वर्मा और महामंत्री शमील एखलाक द्वारा महापौर को आश्वासन दिया गया कि नगर निगम लखनऊ का प्रत्येक कर्मचारी लखनऊ को देश में नंबर एक लाने के लिये अपना पूर्ण सहयोग और योगदान देगा और नागरिको को स्वच्छता हेतु प्रेरित करेगा। इसके अलावा निकाय महासंघ के शशिकुमार मिश्रा, उत्तर प्रदेश नगर निगम कर्मचारी संघ लखनऊ के अध्यक्ष राजेश सिंह ने संघ की तरफ से महापौर को आश्वासन दिया।

इस दौरान नगर निगम कर्मचारी संघ,लखनऊ के अध्यक्ष आनन्द वर्मा एवम् महामंत्री शमील एखलाक द्वारा महापौर को सफाई,आरआर विभाग,उद्यान विभाग,मार्ग प्रकाश,अभियंत्रण,कैटिल कैचिंग,लिपिक संवर्ग,राजस्व संवर्ग के कर्मचारियों की लम्बित 30 सूत्रीय मांगों पर ध्यानाकर्षण कराते ज्ञापन इस आशय और विश्वास के साथ दिया गया कि लम्बित मांगों का निराकरण यदि समयबद्ध कर दिया जाता है तो कर्मचारी और अधिक उत्साह और परिश्रम के साथ उत्तर प्रदेश सरकार की नागरिक हित में योजनाओं को सफल बनाने में और अधिक लगन व परिश्रम के साथ पूरा करेंगे और कर्मचारी संगठनो को विवश होकर आंदोलन का रास्ता नहीं अपनाना पड़ेगा जिसपर माननीय महापौर द्वारा आश्वस्त किया गया की नगर निगम स्तर पर लम्बित मांगों पर प्रशासन से वार्ता कर शीघ्र समस्याओँ को निस्तारित कराया जायेगा।उपरोक्त बैठक बुलाए जाने हेतु प्रदेश अध्यक्ष शशिकुमारमिश्र सहित अध्यक्ष आनन्द मिश्र और महामंत्री सै.कैसर रजा,हरिशंकर पाण्डेय, संजय चन्द्रा,रामकुमार रावत, विजय यादव,शैलेन्द्र तिवारी,राकेश तिवारी,अनिल दुबे,आदि कर्मचारी संगठन के साथियो द्वारा माननीय महापौर महोदया का धन्यवाद् ज्ञापित किया गया। इस अवसर पर महापौर को संगठन द्वारा पुष्प गुछ एवं भगवान श्रीराम जी का स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनन्दन किया गया।उत्तर प्रदेश नगर निगम कर्मचारी संघ लखनऊ के उपाध्यक्ष, दीपक शर्मा, ने बताया कि महापौर के कैंप कार्यालय में, स्वच्छता रैंकिंग में भारत में तीसरा स्थान तथा प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर तमाम संगठनों को अपने कैंप कार्यालय में आमंत्रित किया और उनसे सुझाव तथा भविष्य में प्रथम स्थान के लिए कैसे हम प्रयास करें इस पर चर्चा की गई। जिस पर उत्तर प्रदेश नगर निगम कर्मचारी संघ लखनऊ के अध्यक्ष राजेश सिंह तथा महामंत्री रमेश चौरसिया द्वारा महापौर को सफाई कर्मचारी एवं कंप्यूटर ऑपरेटर को वेतन पारिश्रमिक 18000 किए जाने क्या शासनादेश का उल्लेख किया गया।

जिलाधिकारी ने हेमन्त कुमार को दिया प्रशस्ति पत्र

ग्राम फीना जिला बिजनौर निवासी इंजीनियर हेमन्त कुमार को इतिहाससेवा खोज और लेखन के लिए जिलाधिकारी बिजनौर जसजीत कोर ने अपने कार्यालय में प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। यह सम्मान मुरादाबाद मण्डलीय हिंदी गजेटियर-2 के लेखन से जुड़ा था। जिसमें बिजनौर जनपद के प्रमुख संकलनकर्ताओं और लेखकों को उनके योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र दिये गए। यह देश का पहला मंडल स्तरीय हिंदी गजेटियर है। इसे मण्डलायुक्त आंजनेय कुमार की पहल पर लिखा और प्रकाशित किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका विमोचन किया। इस महत्वपूर्ण कार्य को पूरा करने के लिए स्थानीय इतिहास पर पकड़ रखने वाले विद्वानों का चयन किया गया था। इन विद्वानों में ग्राम फीना जनपद बिजनौर निवासी इंजीनियर हेमन्त कुमार को मंडलायुक्त मुरादाबाद ने मंडल स्तर के संकलनकर्ता के रूप में शामिल किया था। मण्डलीय गजेटियर में इंजीनियर हेमन्त कुमार का नाम भी छापा गया है।

कार्यक्रम संयोजक तथा हिन्दू इंटर कॉलेज में व्याख्याता और गजेटियर में सहयोगी महेंद्र सिंह त्यागी ने बताया कि हेमन्त कुमार जी ने स्थानीय इतिहास पर बहुत बड़ा खोज कार्य किया है और रिकार्ड छह पुस्तक लिखी हैं। जब उच्चाधिकारीयों ने स्थानीय इतिहास पर प्रामाणिक और संदर्भ सहित तथ्यों को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया तो इंजीनियर हेमंत कुमार की पुस्तकों के प्रमाण सबसे अधिक काम आए। इसके लिए इनका नाम मण्डल इस मुरादाबाद मण्डल गजेटियर में प्रकाशित किया गया। इस इतिहास सेवा के लिए जिलाधिकारी जसजीत कौर आई ए एस ने बिजनौर के जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में हेमन्त कुमार को अंग वस्त्र तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर गजेटियर संकलन में शामिल महेंद्र सिंह त्यागी डॉक्टर रिचा शर्मा स्वाती मिश्रा वंदना कनौजिया आत्माराम यादव चंद्रहास सिंह वीरेंद्र कुमार मनोज यादव अमन यादव को भी सम्मानित किया गया। हेमन्त कुमार सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग लखनऊ में सहायक अभियंता हैं और इतिहास के अलावा वैज्ञानिक शोध नवाचार और आविष्कार के लिए भी पहचाने जाते हैं। हेमन्त के क्षेत्रीय इतिहास सम्बन्धी खोज संकलन और लेखन हेतु पर जमीनी स्तर पर काम करने के लिए क्षेत्रीय इतिहास संकलन एवं लेखन अभियान की स्थापना की और इसके अंतर्गत बहुत बड़ा काम किया। हेमन्त ने जिला बिजनौर के इतिहास पर पहली सुलभ पुस्तक जनपद बिजनौर का परिचय लिखी। इन्होंने पैंतालीस गुमनाम सेनानीयों की खोज की और राष्ट्रीय रिकार्ड बनाया। हेमन्त ने अपने अभियान में जिले का गौरव बढ़ाने वाली सैकड़ों खोज की हैं जो बड़े समाचार पत्रों में छपी और लाखों लोगों ने पढ़ी हैं।

Aaj National

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