LUCKNOW:साइबर जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यशाला का डीजीपी ने किया शुभारम्भ

  • REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK 

लखनऊ:पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा ने शुक्रवार को यूपी के सहारनपुर जिले में आयोजित परिक्षेत्र स्तरीय साइबर जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यशाला का वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से शुभारम्भ किया।इस मौके पर अपर पुलिस महानिदेशक मेरठ जोन भानु भास्कर, डीआईजी सहारनपुर परिक्षेत्र अभिषेक सिंह,एसएसपी सहारनपुर आशीष तिवारी, एसएसपी मुजफ्फरनगर संजय वर्मा, एसपी शामली नरेन्द्र प्रताप सिंह, साइबर एक्सपर्ट रक्षित टण्डन, सहारनपुर परिक्षेत्र के सभी अधिकारी व थाना प्रभारी सहित विभिन्न स्कूल व कालेजों के लगभग एक हजार छात्र व छात्राओं ने भाग लिया।

सोशल मीडिया, इंटरनेट व तकनीक जितनी उपयोगी है, उतनी ही विनाशकारी 

कार्यशाला को संबोधित करते हुये पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा ने कहा कि आज सहारनपुर रेंज द्वारा आयोजित साइबर जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यशाला में प्रतिभाग करके मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है क्योंकि डीजीपी के रूप में कार्यभार ग्रहण करने के पश्चात मेरे द्वारा 10 प्राथमिकताएँ निर्धारित की गई थीं जिसमे साइबर क्राइम एक प्रमुख वर्टिकल था।पुलिस महानिदेशक ने लखनऊ में घटित दो साइबर-संबंधित घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि, सोशल मीडिया, इंटरनेट व तकनीक जितनी उपयोगी है, उतनी ही असावधानी से यह विनाशकारी भी सिद्ध हो सकती है। बच्चों व युवाओं में ऑनलाइन गेमिंग एडिक्शन जैसे उदाहरण यह दर्शाते हैं कि डिजिटल सतर्कता आज समाज की आवश्यकता बन चुकी है।

अत्यंत महत्वपूर्ण प्राथमिकता बन चुका है साइबर क्राइम

पुलिस महानिदेशक ने कहा कि पारंपरिक अपराधों की तुलना में साइबर अपराधों के माध्यम से होने वाली आर्थिक हानि लगभग 40 गुना अधिक है। उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए साइबर क्राइम अब अत्यंत महत्वपूर्ण प्राथमिकता बन चुका है।उन्होंने कहा कि पिछले चार महीनों में सभी अपर पुलिस महानिदेशकों (जोन) के नेतृत्व में प्रत्येक थाने पर स्थापित साइबर हेल्प डेस्क पर कार्यरत कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि यदि कोई साइबर अपराध से पीड़ित व्यक्ति थाने पर आता है तो उसे यह उत्तर न दिया जाए कि “साइबर थाने पर जाइए”, बल्कि 1930 हेल्पलाइन पर उसकी शिकायत तुरंत दर्ज कराई जाए। यदि अपराध धन से संबंधित है तो तत्काल उसकी धनराशि को फ्रीज कराया जाए, और निर्धारित गाइडलाइन्स के अनुसार आगे की कार्यवाही की जाए।डीजीपी ने कहा कि यदि मामला थाने स्तर पर समाधान योग्य है तो तत्काल विवेचना की जाए,यदि धनराशि अधिक है या मामला अंतर्राज्यीय प्रकृति का है तो उसे साइबर थाने को अग्रसारित किया जाए।

साइबर अपराध के प्रति हिचक , अब समाप्त 

पुलिस महानिदेशक ने कहा कि यह नहीं कहा जा सकता कि सभी थाना प्रभारियों को साइबर अपराध की विवेचना में अपेक्षित स्तर की विशेषज्ञता प्राप्त हो चुकी है, परंतु यह अवश्य कहा जा सकता है कि पिछले चार महीनों में साइबर अपराध के प्रति जो हिचक थी, वह अब समाप्त हो गई है। उन्होंने बताया कि साइबर अपराध की जांच पूर्णतः एसओपी आधारित एवं व्यवस्थित है। यदि कोई अधिकारी इसे खुले मन से सीखना चाहे तो इसके छह–सात चरणों को समझकर यह पाया जा सकता है कि यह जांच सामान्य आपराधिक विवेचना से भी अधिक सरल और त्वरित है।

दिन-प्रतिदिन बाढा साइबर अपराध का दायरा और महत्ता

पुलिस महानिदेशक ने थाना प्रभारियों के लिए कहा कि यह अवधारणा त्यागनी होगी कि “साइबर अपराध की जांच हम नहीं कर सकते। इसके लिए जोन स्तर पर प्रशिक्षित साइबर वारियर्स कार्यरत हैं, जिन्हें छह माह का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। साथ ही अन्य साइबर विशेषज्ञ समय-समय पर प्रशिक्षण, अभिमुखीकरण एवं जागरूकता सत्र आयोजित करते रहेंगे। यह भी कहा कि साइबर अपराध का दायरा और महत्ता दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है, इसलिए पुलिस कर्मियों का आत्मविश्वास और कौशल जितना बढ़ेगा, उतना ही नागरिकों में भी पुलिस के प्रति विश्वास एवं भरोसा सुदृढ़ होगा।

डिजिटल साक्षरता और जागरूकता ही साइबर अपराध की रोकथाम का सर्वोत्तम उपाय

पुलिस महानिदेशक ने कहा कि जागरूकता, साइबर अपराध नियंत्रण का अभिन्न एवं अनिवार्य अंग है। कोई भी साइबर अपराध ऐसा नहीं होता जिसमें कोई व्यक्ति पीड़ित को डराकर या धमकाकर अपराध करे,यह प्रायः लोभ, लापरवाही या जानकारी के अभाव के कारण होता है।उन्होंने कहा कि समाज में डिजिटल साक्षरता और जागरूकता ही साइबर अपराध की रोकथाम का सर्वोत्तम उपाय है।उत्तर प्रदेश पुलिस ने साइबर क्राइम की रोकथाम के लिए लोगों को जागरूक किये जाने के लिए लगातार जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है, जिसके सार्थक परिणाम प्राप्त हुए हैं।

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