- REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने ऊर्जा विभाग की वर्तमान वर्टिकल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में लागू की गई इस व्यवस्था से आम जनता, जनप्रतिनिधि तथा स्वयं विधायक तक असंतुष्ट हैं, बावजूद इसके बिना उचित समीक्षा के इस व्यवस्था को आगे बढ़ाया जा रहा है। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि वर्टिकल व्यवस्था लागू करने वाले ऊर्जा प्रबंधन को अगले 5 वर्षों तक इसी विभाग में रखा जाए और उनके जवाब दे ही तय की जाए व्यवस्था फेल होने पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी रखा जाए ऊर्जा विभाग कोई प्रैक्टिकल करने का विभाग नहीं है जनता की सेवा करने वाला विभाग है।
उपभोक्ता परिषद ने कहा वर्टिकल व्यवस्था लागू होने के बाद उपभोक्ताओं के पास शिकायत दर्ज कराने के लिए केवल 1912 हेल्पलाइन का ही विकल्प रहेगा। इस पर अब बिजली कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर हेल्प डेस्क स्थापित करने की बात कही जा रही है, जो स्वागत योग्य कदम है कृ बशर्ते ये हेल्प डेस्क उपभोक्ताओं की समस्याओं का वास्तविक समाधान करें, न कि केवल औपचारिकता निभाएँ।
श्री वर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश का ऊर्जा विभाग, जिसकी कमान ऊर्जा मंत्री के हाथों में है, उनके पास प्रदेशभर से लगातार शिकायतें आती रहती हैं, जिनमें सांसद, विधायक, और आम उपभोक्ता सभी शामिल हैं। इन शिकायतों को मंत्री द्वारा संबंधित बिजली कंपनियों कृ वितरण, ट्रांसमिशन, उत्पादन और जल विद्युत निगम कृ को शीघ्र निस्तारण हेतु भेजा जाता है।
परंतु, चौंकाने वाला तथ्य यह है कि 30 सितंबर 2025 तक ऊर्जा मंत्री द्वारा कुल 7585 शिकायतें बिजली कंपनियों को प्रेषित की गई थीं, जिनमें से 4 अक्टूबर 2025 तक केवल 34,06 शिकायतों का ही निस्तारण हुआ, जबकि 41,79 शिकायतें अब भी लंबित हैं।
इसका अर्थ है कि ऊर्जा मंत्री जी से प्राप्त लगभग 55ः शिकायतें अब तक निस्तारित नहीं हुई हैं, जो घोर चिंता का विषय है।
श्री वर्मा ने कहा कि जब ऊर्जा मंत्री के स्तर से भेजी गई शिकायतों का यह हाल है, तो आम उपभोक्ताओं की समस्याओं के समाधान की स्थिति का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा “चाहे जितने हेल्प डेस्क बना लो, लेकिन जब तक आपकी नियत सही नहीं होगी, तब तक धरातल पर कोई सुधार संभव नहीं है। केवल कागजी घोड़े दौड़ाने से उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिलेगी।अंत में परिषद ने ऊर्जा विभाग से मांग की है कि वर्टिकल व्यवस्था की पुनः समीक्षा की जाए, सभी बिजली कंपनियों की शिकायत निस्तारण प्रणाली का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए तथा उपभोक्ताओं के हित में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
इलेक्ट्रिसिटी संशोधन बिल 2025 वापस लेने की मांग
-मुंबई में 3 नवंबर की बैठक में राष्ट्रव्यापी आंदोलन का फैसला
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने केंद्रीय विद्युत मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर से मांग की है कि किसान, उपभोक्ता और कर्मचारी विरोधी इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) 2025 तत्काल वापस लिया जाए। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय ने 09 अक्टूबर को इस बिल का प्रारूप जारी किया है और स्टेक होल्डर्स से एक महीने के अंदर-अंदर टिप्पणी मांगी गई है।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि मुंबई में 03 नवंबर को बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की राष्ट्रीय समन्वय समिति नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी का इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की बैठक हो रही है। इस बैठक में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के विरोध में राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी और बिजली कर्मचारी, किसानों और आम उपभोक्ताओं के साथ संयुक्त मोर्चा बनाकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाएंगे। उन्होंने बताया कि मुम्बई की बैठक में उप्र में चल रही निजीकरण की प्रक्रिया के विरोध में भी राष्ट्रव्यापी आन्दोलन चलाने का निर्णय लिया जाएगा। संघर्ष समिति ने आज जारी बयान में कहा कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार देश के संपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र का निजीकरण करना चाहती है। निजीकरण के बाद बिजली की दरें इतनी ज्यादा हो जाएगी जो किसानों और आम उपभोक्ताओं की पहुंच से बाहर हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि अमेंडमेंट बिल के सेक्शन 14,42 और 43 के माध्यम से निजी कंपनियों को यह अधिकार दिया जा रहा है कि वह सरकारी विद्युत वितरण कंपनियों का नेटवर्क इस्तेमाल कर बिजली की आपूर्ति कर सकेंगे और इसके एवज में वे सरकारी बिजली कंपनियों को व्हीलिंग चार्जेज देंगी जो नाम मात्र का होगा। उन्होंने कहा कि यह सरकारी क्षेत्र में विद्युत वितरण के अंत की शुरुआत होगी।संघर्ष समिति ने बताया कि नेटवर्क के मेंटेनेंस और उसके सुदृढ़ीकरण की सारी जिम्मेदारी सरकारी वितरण कंपनियों की होगी। इसका वित्तीय भार सरकारी विद्युत वितरण निगमों पर आयेगा। निजी कंपनियों को इस नेटवर्क के जरिए पैसा कमाने की छूट दी जा रही है।उन्होंने कहा कि इस अमेंडमेंट बिल में निजी कंपनियों को यूनिवर्सल पावर सप्लाई का दायित्व नहीं होगा जिसका दुष्परिणाम यह होगा की निजी कंपनियां सरकारी कंपनी का नेटवर्क प्रयोग करके मुनाफे वाले औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बिजली देंगी और घाटे वाले किसान और गरीब घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली देने का दायित्व सरकारी विद्युत वितरण निगम का होगा। परिणाम स्वरूप सरकारी विद्युत वितरण कंपनियां कंगाल हो जाएगी और उनके पास बिजली खरीदने और अपने कर्मचारियों को वेतन देने का भी पैसा नहीं बचेगा। उन्होंने बताया कि अमेंडमेंट बिल में सेक्शन 61 (जी) में संशोधन कर अगले 05 वर्ष में क्रॉस सब्सिडी समाप्त करने की बात लिखी है। इसके साथ ही बिल में यह प्रावधान किया गया है कि बिजली का टैरिफ कॉस्ट रिफ्लेक्टिव होना चाहिए जिसका तात्पर्य है कि लागत से कम मूल्य पर किसी उपभोक्ता को बिजली न दी जाए। इसका मतलब यह हुआ कि किसानो को 05 हॉर्स पावर के पंप के लिए कम से कम 12000 रु प्रति माह बिजली बिल का भुगतान करना पड़ेगा। इसी प्रकार गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दरें कम से कम 08 रु से 10 रु प्रति यूनिट हो जाएगी।
स्थानीय निकाय कर्मचारी आन्दोलन मामले में सीएम को पत्र
स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ द्वारा अपनी मांगों को लेकर चलाए जा रहे आंदोलनात्मक कार्यक्रम को प्रदेश के अन्य कर्मचारी संगठनों का भी समर्थन मिलना शुरू हो गया है। इस क्रम में आज जवाहर भवन इंदिरा भवन कर्मचारी महासंघ तथा उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारियों की एक बैठक आज सतीश कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में संपन्न हुई,जिसमें स्थानीय निकाय कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने के लिए मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करके समस्याओं का निराकरण समय सीमा में कराने का अनुरोध करते हुए पत्र प्रेषित किया गया।
जवाहर भवन इंदिरा भवन कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष सतीश कुमार पाण्डेय ने बताया कि कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर प्रशासन द्वारा दिखाई जा रही उदासीनता से यह आंदोलन धीरे धीरे बड़ा स्वरूप ले रहा है,जिससे आने वाले समय में पूरे प्रदेश के कर्मचारियों का आंदोलन बन जाएगा। श्री पाण्डेय ने यह भी कहा कि निकाय कर्मचारियों की समस्याओं के निराकरण हेतु उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ द्वारा जो भी आंदोलनात्मक कार्यक्रम किया जाएगा उसमें जवाहर भवन इंदिरा भवन कर्मचारी महासंघ एवं उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ का शत प्रतिशत समर्थन रहेगा।
