-युवती ने दिखाया फर्जी पेमेंट,पुलिस ने दिलवाया पैसा वापस, अब भेज रही धमकियां
- REPORT BY:A.S.CHAUHAN || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS
लखनऊ। सरोजनीनगर थाना क्षेत्र के गौरी बाजार स्थित गणपति ज्वेलर्स के संचालक अश्वनी कुमार ने 24 अक्टूबर को एक युवती द्वारा ठगी का प्रयास करने की शिकायत दर्ज कराई है। युवती ने जन्मदिन उपहार के बहाने दो अंगूठियां खरीदीं, लेकिन फर्जी ऑनलाइन पेमेंट दिखाकर सामान लेकर चली गई। पुलिस की कार्रवाई से पैसा तो वापस मिल गया, लेकिन अब युवती लगातार व्हाट्सएप पर धमकियां भेज रही है।
अश्वनी कुमार ने बताया कि शाम के समय दुकान पर एक युवती आई और अपने पिता के जन्मदिन पर अंगूठी गिफ्ट करने के लिए कुछ अंगूठियां देखने को कहा। उन्होंने पुरुषों और महिलाओं की अंगूठियां दिखाईं, जिनमें से युवती ने दो पसंद कीं। मूल कीमत 52,000 रुपये बताई गई, लेकिन 51,000 रुपये पर डील तय हो गई।विक्रय के बाद युवती ने ऑनलाइन पेमेंट का हवाला दिया। अश्वनी ने अपने लखनऊ स्थित होलसेलर को पैसे ट्रांसफर करने के लिए क्यूआर कोड दिया। युवती ने मोबाइल पर ट्रांजेक्शन सफल होने का स्क्रीनशॉट दिखाया और अंगूठियां लेकर चली गई। कुछ देर बाद होलसेलर से बात करने पर पता चला कि ट्रांजेक्शन फेल हो गया और कोई पैसा नहीं आया।
युवती से संपर्क करने पर उसने अभद्रता की। अश्वनी ने सरोजनीनगर थाने में लिखित शिकायत की, लेकिन युवती ने तरह-तरह के बहाने बनाए और खुद को एचडीएफसी बैंक का कर्मचारी बताकर धमकियां दीं। थाना प्रभारी राजदेव राम प्रजापति और गौरी बाजार स्थित एचडीएफसी बैंक शाखा के अधिकारियों की मदद से कई दिनों की मशक्कत के बाद पैसा वापस दिलवाया गया।हालांकि, मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। अश्वनी के अनुसार, युवती अब कई दिनों से उनके फोन पर व्हाट्सएप मैसेज भेजकर धमकियां दे रही है। उन्होंने इन मैसेजों की कॉपी थाने में जमा कराई है।
बनी में धूमधाम से मनाया गया खाटूश्यामजी का जन्मोत्सव
ग्राम सभा बनी में शनिवार की रात खाटूश्यामजी के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में अजय लखनवी कीर्तन पार्टी के कलाकारों ने भक्ति गीतों की मनमोहक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में गांव के सैकड़ों पुरुष और महिला श्रोता उपस्थित रहे और भक्तों ने अपनी क्षमता अनुसार प्रसाद चढ़ाकर तथा कलाकारों को इनाम देकर उनका उत्साहवर्धन किया। यह पहली बार था जब खाटूश्यामजी का जन्मोत्सव बनी में अजय सिंह के दरवाजे पर बने नंदेश्वर मंदिर पर आयोजित किया गया।आशा बहू कल्याण समिति ने शुरू की कलमबंद हड़ताल
-बकाया भुगतान न मिलने से नाराज आशा व संगिनी बहनों ने की मांग
उत्तर प्रदेश की आशा बहू कल्याण समिति ने 1 नवंबर से कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी है। यह हड़ताल आशा एवं आशा संगिनी बहनों के
लंबित पूर्ण भुगतान न होने के विरोध में की गई है। समिति की प्रदेश अध्यक्ष नीमा सिंह और राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्र यादव द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रदेश की सभी आशा एवं आशा संगिनी बहनों को अब तक उनके कार्यों का पूरा भुगतान नहीं मिला है।समिति की लखनऊ इकाई की जिला अध्यक्ष इंदुबाला ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरोजनीनगर के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चंदन कुमार यादव को ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि बार-बार की गई मांगों और ज्ञापनों के बावजूद शासन स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे आशा बहनों को मजबूर होकर हड़ताल पर जाना पड़ा है। विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि यह हड़ताल तब तक जारी रहेगी, जब तक सभी आशा और आशा संगिनी कार्यकर्ताओं का पूर्ण भुगतान नहीं कर दिया जाता।समिति ने चेतावनी दी है कि हड़ताल के दौरान यदि किसी प्रकार की असुविधा या बाधा उत्पन्न होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित जिला अधिकारी और राज्य सरकार की होगी। आशा बहू कल्याण समिति ने मुख्यमंत्री से तत्काल संज्ञान लेने और आशा कार्यकर्ताओं के बकाया मानदेय का भुगतान कराने की मांग की है।बताते चलें कि आशा बहनें प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी कड़ी मानी जाती हैं। गर्भवती महिलाओं की देखभाल, बच्चों के टीकाकरण और ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यक्रमों में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस हड़ताल से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है। समिति ने सरकार से शीघ्र कार्रवाई की अपील की है।
लंबित पूर्ण भुगतान न होने के विरोध में की गई है। समिति की प्रदेश अध्यक्ष नीमा सिंह और राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्र यादव द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रदेश की सभी आशा एवं आशा संगिनी बहनों को अब तक उनके कार्यों का पूरा भुगतान नहीं मिला है।समिति की लखनऊ इकाई की जिला अध्यक्ष इंदुबाला ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरोजनीनगर के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चंदन कुमार यादव को ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि बार-बार की गई मांगों और ज्ञापनों के बावजूद शासन स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे आशा बहनों को मजबूर होकर हड़ताल पर जाना पड़ा है। विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि यह हड़ताल तब तक जारी रहेगी, जब तक सभी आशा और आशा संगिनी कार्यकर्ताओं का पूर्ण भुगतान नहीं कर दिया जाता।समिति ने चेतावनी दी है कि हड़ताल के दौरान यदि किसी प्रकार की असुविधा या बाधा उत्पन्न होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित जिला अधिकारी और राज्य सरकार की होगी। आशा बहू कल्याण समिति ने मुख्यमंत्री से तत्काल संज्ञान लेने और आशा कार्यकर्ताओं के बकाया मानदेय का भुगतान कराने की मांग की है।बताते चलें कि आशा बहनें प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी कड़ी मानी जाती हैं। गर्भवती महिलाओं की देखभाल, बच्चों के टीकाकरण और ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यक्रमों में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस हड़ताल से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है। समिति ने सरकार से शीघ्र कार्रवाई की अपील की है।डीएपी खाद का संकट गहराया,सरसों-चना की बुवाई ठप
-सरोजनीनगर तहसील क्षेत्र के किसान बारिश के पानी पर निर्भर, खाद की आस टूटी, गेहूं की तैयारी पर भी ग्रहण
सरोजनीनगर तहसील में डीएपी खाद की किल्लत ने किसानों की कमर तोड़ दी है। एक महीने से अधिक समय से सहकारी समितियों और निजी दुकानों के चक्कर काट रहे किसान अब हताश हो चुके हैं। सरसों और चने की बुवाई जोरों पर है, जबकि 15 नवंबर से गेहूं सहित अन्य रबी फसलों की बुवाई शुरू होने वाली है। हालिया बारिश ने मिट्टी में नमी पैदा कर दी है, जिससे किसान बिना सिंचाई के सीधे बुवाई करने की योजना बना रहे थे, लेकिन डीएपी की अनुपलब्धता ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। नाम न छापने की शर्त पर दुकानदारों ने खुलासा किया कि ऊपरी स्तर पर आपूर्ति रुकी हुई है, और आने वाले दिनों में भी राहत की कोई गुंजाइश नहीं दिख रही।बुवाई का मौसम, खाद की त्रासदी तहसील के गांवों काकोरी, बीजना, अमौसी, और बंथरा समेत दर्जनों इलाकों में किसान सरसों और चने की बुवाई में जुटे हैं। बारिश का पानी खेतों में जमा हो गया है, जो बुवाई के लिए आदर्श स्थिति पैदा करता है। एक किसान ने बताया, “हम सोच रहे थे कि बारिश के पानी से ही बुवाई कर लेंगे, रोपाई का खर्च बचेगा। लेकिन डीएपी न मिलने से सब व्यर्थ। सरसों को तो अभी चाहिए, गेहूं की तैयारी भी रुकी पड़ी है। 15 नवंबर तक अगर खाद न आई तो पूरी फसल लेट हो जाएगी।एक अन्य किसान, जो गेहूं की बुवाई की तैयारी में जुटे हैं, ने व्यथा सुनाई: “मेरे पास 5 एकड़ जमीन है। चने की बुवाई आधी हो गई, लेकिन डीएपी के बिना पौधे कमजोर रहेंगे। सहकारी समिति में नाम लिखवाया, लेकिन बोरी का पता नहीं। ब्लैक में 1500 रुपये तक मांग रहे हैं, वह भी मिले तो। हम जैसे छोटे किसान कहां से लाएं।किसान संगठनों के अनुसार, तहसील में करीब 8,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में रबी फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है। सरसों और चने की बुवाई 40 प्रतिशत तक पिछड़ चुकी है, जबकि गेहूं की समयसीमा बस 15 दिन दूर है।दुकानदारों का खुलासा: ‘संपर्क कर-करके थक गए’
नाम नक्शा पर जाने वाली मुख्य सड़क और आसपास की कृषि दुकानों पर दुकानदारों ने गोपनीयता की शर्त पर सच्चाई उजागर की। एक दुकानदार ने कहा, “हम रोज जिला उर्वरक डिपो, आईएफसी गोदाम और सहकारी संघ से फोन कर रहे हैं। कोटा तो आवंटित है, लेकिन ट्रकों की आवक बंद है। पिछले 45 दिनों में मात्र 15-20 बोरी ही मिलीं, जबकि मांग सैकड़ों में है। ऊपर से कहते हैं—इंतजार करो, लेकिन किसानों का गुस्सा हम पर उतरता है।एक अन्य दुकानदार ने बताया, “बारिश के बाद मांग दोगुनी हो गई। किसान बार-बार आते हैं, पूछते हैं। हम हाथ खड़े कर देते हैं। अगर अगले हफ्ते तक सप्लाई न आई तो दुकानें बंद करने की नौबत आ जाएगी। सरकार कहती है ब्लैक मार्केटिंग न हो, लेकिन व्यवस्था ही नहीं तो हम क्या करें।
बारिश की मेहरबानी, खाद की कमी की मार
हालिया बारिश ने किसानों को राहत दी थी—खेतों में प्राकृतिक नमी से सिंचाई का बोझ कम हो जाता, और बुवाई जल्दी पूरी हो सकती थी। लेकिन डीएपी की कमी ने इस अवसर को चुनौती में बदल दिया। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि डीएपी फॉस्फोरस का प्रमुख स्रोत है, जो जड़ विकास और फसल की मजबूती के लिए जरूरी है। बिना इसके सरसों में फली कम बनेगी, चने में दाने छोटे रहेंगे, और गेहूं की बालियां खाली निकलेंगी। अनुमान है कि उत्पादन में 25-35 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।
प्रशासन की खामोशी, किसानों की बेचैनी
जिला कृषि विभाग अधिकारी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हैं। एक सूत्र ने बताया, “केंद्र से आयातित कच्चे माल में देरी और परिवहन समस्या मुख्य कारण हैं। अतिरिक्त कोटा मांगा गया है, लेकिन 15 नवंबर तक पहुंचना मुश्किल।किसान अब वैकल्पिक रास्ते तलाश रहे हैं—कुछ जैविक खाद की ओर मुड़ रहे हैं, तो कुछ यूरिया से काम चला रहे हैं। लेकिन विशेषज्ञ चेताते हैं कि यह अस्थायी समाधान है। सरोजनीनगर का यह संकट पूरे जिले की उर्वरक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। क्या बारिश का पानी फसल बचा पाएगा, या डीएपी की कमी सब कुछ बहा ले जाएगी? जवाब समय के पास है, लेकिन किसानों का धैर्य जवाब दे चुका है।समितियां और दुकानों पर डीएपी खाद की जगह पर टीएसपी खाद मौजूद हैं, एक बोरी में 15 किलो यूरिया खाद गबड़कर फसलों की बुवाई की जा सकती है।एडीओ एग्रीकल्चर रामगोपाल द्विवेदी कहते है कि डीएपी खाद का रैंक लग गया है और इसी सप्ताह समितियां औऱ दुकानदारों के पास पहुंच जाएगी।
