-उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर एसोसिएशन ने जारी की सूची
- REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर एसोसिएशन की आज एक आपात बैठक फील्ड हॉस्टल कार्यालय में हुई। जिसमें सर्वसम्मत से यह
प्रस्ताव पास किया गया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में वर्तमान सरकार में भी बिजली निगमों में दलित अभियंताओं के साथ भेदभावपूर्ण कार्यवाही की जा रही है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि एक दर्जन से ज्यादा दलित अभियंता अब तक उच्च न्यायालय प्रबंधन के आदेश के खिलाफ जाकर न्याय पाए हैं। जो यह सिद्ध करता है कि बिजली निगमो में उच्च अधिकारी अभियंताओं के साथ विद्धेश पूर्ण भाव से कार्रवाई की जा रही है। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम में कार्य प्रबंध निदेशक द्वारा मुख्य अभियंता हरिश्चंद्र वर्मा को निलंबन के लिए प्रस्ताव पावर कारपोरेशन को भेजा गया। जबकि हरिश्चंद्र वर्मा जब निलंबित किए गए उसे समय वे अपनी पत्नी की डायलिसिस कर रहे थे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक दलित अभियंता अपनी पत्नी की डायलिसिस कराने पर सस्पेंड किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर एसोसिएशन की बैठक में कहा गया कि बिजली निगमों में इस बात की जांच कर लिया है तो ज्यादातर मामलों में यह सामने आएगा कि जब अभियंता को पदोन्नति करने की बात आती है तो उन्हें चार्ज सीट दे दी जाती है। वर्तमान में मध्यांचल विद्युत वितरण निगम में हरिश्चंद्र वर्मा मुख्य अभियंता जो अटैच पद पर थे, जिनकी पत्नी की हफ्ते में तीन दिन डायलिसिस हो रही है। वह सीरियस कंडीशन में है उनके घर में उनके सिवा कोई देखने वाला नहीं है। उन्हें अटैच पद पर निलंबित करके उन्हें मेरठ अटैच किया गया। इससे बड़ी कोई भी अमानवीय घटना नहीं हो सकती है, जबकि प्रबंधन के सज्ञान में यह बात थी।उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर एसोसिएशन के अध्यक्ष आरपी केन, कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, संगठन सचिव बिंदा प्रसाद, एके प्रभाकर, राम शब्द, हरिश्चंद्र वर्मा ,मीडिया प्रभारी रमेश कुमार, पश्चिमांचल अध्यक्ष एमके अहिरवार, भूपेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले 1 वर्ष के दौरान एक दर्जन से ज्यादा अभियंताओं को उच्च न्यायालय की शरण में जाना पड़ा है। उदाहरण के लिए महेंद्र सिंह अधीक्षण अभियंता, मुकेश बाबू, महेश चंद्र, वेद प्रकाश, लोकेश कुमार, अनुभव कुमार जेपी वर्मा, जेपी गौतम, भूपेंद्र सिंह, डीबी पाल, आर आर सुमन, राजेश कुमार, अरब सिंह इसमें ज्यादातर अभियंता अधीक्षण अभियंता के पदों पर है।
विद्युत दरें घोषित करने में देरी,बढ़ात्तरी की साजिश
-विद्युत दरों की देरी पर उपभोक्ता परिषद में जताई चिंता
उ.प्र. राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद प्रदेश के सभी विद्युत उपभोक्ताओं के हितों का प्रतिनिधित्व करते हुए यह गंभीर चिंता व्यक्त करती है
कि उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए विद्युत दरों की अधिसूचना अब तक जारी नहीं की गई है।उन्होंने कहा कि नियम समय से काफी देर तक विघुत दरें घोषित ना करना दरों में बढ़ोत्तरी की साजिश का संकेत है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा आयोग द्वारा 9 सितम्बर 2025 को वार्षिक राजस्व आवश्यकता को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। राज्य सलाहकार समिति की बैठक सहित सभी आवश्यक प्रक्रियाएँ पूर्ण हो चुकी हैं, इसके बावजूद उपभोक्ताओं के लिए नई दरों की अधिसूचना जारी नहीं की गई है। विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 64(3) के अनुसार आयोग को 120 दिनों के भीतर दरों की अधिसूचना जारी करना अनिवार्य है। इस समय सीमा का पालन न होना न केवल विधिक उल्लंघन है, बल्कि संवैधानिक व्यवस्था के प्रति गंभीर प्रश्न भी खड़ा करता है। विद्युत निगम द्वारा लगभग घ्33,122 करोड़ के सरप्लस की वसूली हेतु राज्य सरकार से गारंटी मांगी जा रही है, जो आगे चलकर दर वृद्धि का आधार बन सकती है। यह भी संकेत मिले हैं कि बिहार विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र दर वृद्धि को टालने का दबाव डाला जा रहा है।यह स्थिति आयोग की स्वतंत्रता तथा उपभोक्ता हितों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न उठाती है।दर निर्धारण में देरी और राजनीतिक प्रभाव से उपभोक्ताओं का विश्वास कमजोर होता है। आयोग का यह दायित्व है कि वह किसी भी बाहरी दबाव से मुक्त होकर पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध निर्णय ले।उ.प्र. राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद की मांग की है कि आयोग तत्काल वित्तीय वर्ष 2025-26 की विद्युत दरों की अधिसूचना जारी करे।दर निर्धारण की प्रक्रिया को किसी भी राजनीतिक अथवा बाहरी दबाव से मुक्त रखे। चुनावी कारणों या अन्य राजनीतिक विचारों के चलते उपभोक्ताओं को आर्थिक हानि से बचाया जाए। आयोग उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा कर अपनी संवैधानिक स्वतंत्रता और साख को बनाए रखे।
सिंगल यूज़ प्लास्टिक के खिलाफ नगर निगम का अभियान
लखनऊ स्वच्छता अभियान द्वारा महापौर सुषमा खर्कवाल के कुशल मार्गदर्शन एवं वार्ड 66 चिनहट द्वितीय के पार्षद शैलेंद्र कुमार वर्मा के
नेतृत्व में सिंगल यूज़ प्लास्टिक प्रतिबंध के प्रति नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने हेतु एक विशेष जन जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान पार्षद श्री वर्मा द्वारा क्षेत्रवासियों एवं दुकानदारों को कपड़े से बने पर्यावरण,अनुकूल थैले वितरित किए गए तथा नागरिकों से प्लास्टिक थैलों के उपयोग को समाप्त करने की अपील की गई। स्वच्छता के प्रति जिम्मेदार नागरिकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उन परिवारों को, जो लखनऊ स्वच्छता अभियान की गाड़ियों को कचरा पृथक (गीला एवं सूखा अलग-अलग) करके प्रदान करते हैं, “इकोदृफ्रेंडली ग्रीन गणेश” की मूर्तियाँ सम्मानस्वरूप प्रदान की गईं।
इस अवसर पर आयोजित नुक्कड़ सभा में पार्षद श्री वर्मा ने उपस्थित नागरिकों को सिंगल यूज़ प्लास्टिक के पर्यावरणीय दुष्प्रभावों कचरा पृथक्करण के लाभों एवं स्वच्छता तथा सतत विकास के महत्व के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने सभी नागरिकों से स्वच्छ एवं हरित लखनऊ के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।यह जन-जागरूकता अभियान लखनऊ नगर निगम द्वारा संचालित स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे सतत प्रयासों की दिशा में एक सार्थक पहल है, जिसका उद्देश्य नागरिकों में पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और सहभागिता को सुदृढ़ करना है।
विद्युत अभियंता संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी
उ.प्र. राज्य विद्युत अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी ने पॉवर कार्पाेरेशन प्रबंधन को चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण और
उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस न ली गयी और अभियंताओं की ज्वलंत समस्याओं का समय रहते समाधान न किया गया तो प्रदेश के तमाम विद्युत अभियंता 20 नवंबर के बाद आंदोलन प्रारंभ करने हेतु बाध्य होंगे।
अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी द्वारा पारित प्रस्ताव में यह संकल्प दोहराया गया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण का टेंडर होते ही तमाम अभियंता सामूहिक जेल भरो आंदोलन प्रारंभ करने के लिए बाध्य
अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी द्वारा पारित प्रस्ताव में मुख्यतः संयुक्त उपक्रम में बनाई जा रही ओबरा डी और अनपरा ई परियोजना को उत्पादन निगम को दिया जाए, उत्पादन निगम में सैकड़ों की संख्या में अधिशासी अभियंताओं के पद रिक्त होने के बावजूद विगत 04 वर्षों से सहायक अभियंता से अधिशासी अभियंता के पद पर रुकी हुई पदोन्नति तत्काल की जाए, वर्टिकल रीस्ट्रचरिंग के नाम पर निजीकरण करने हेतु अभियंताओं के पदों को समाप्त करने की साजिश तत्काल बंद की जाए, मार्च 2023 की हड़ताल के दौरान की गयी समस्त उत्पीड़नात्म कार्यवाहियां ऊर्जा मंत्री के 19 मार्च 2023 के निर्देश के अनुसार वापस ली जाए, वर्तमान आंदोलन के फलस्वरुप परामर्श व चार्जशीट के नाम पर अन्य कारणों से की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के तहत अभियंताओं की रोकी गयी प्रोन्नति, स्थायीकरण आदेश तत्काल जारी किये जाएं और आंदोलन के फलस्वरुप उत्पीड़न की दृष्टि से अभियंताओं के ट्रांसफर निरस्त किये जाएं, आईटी के नाम पर अभियंताओं के साथ लगातार किया जा रहा भेदभाव व उत्पीड़न बंद किया जाए।
उ.प्र. राज्य अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी की आज लखनऊ में हुई बैठक में उक्त निर्णय लिया गया। बैठक के बाद अभियंता संघ के अध्यक्ष संजय सिंह चौहान और महासचिव जितेंद्र सिंह गुर्जर ने बताया कि विद्युत अभियंताओं ने निजीकरण के विरोध में आंदोलन के साथ-साथ प्रदेश को बेहतर बिजली आपूर्ति देने का सतत् प्रयास किया है और अभी भी विद्युत अभियंता इस कार्य में लगें हैं किंतु पॉवर कार्पाेरेशन प्रबंधन इसके बदले में अभियंताओं का तरह-तरह से उत्पीड़न करने पर आमदा है। जिसके विरोध में केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में जबरदस्त आक्रोश व्यक्त किया गया।अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी की आज लखनऊ में हुई बैठक में मुख्यतः अध्यक्ष संजय सिंह चौहान, महासचिव जितेंद्र सिंह गुर्जर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रभात सिंह, उपाध्यक्ष राहुल बाबू कटियार, संयुक्त सचिव आलोक श्रीवास्त, संगठन सचिव जगदीश पटेल, सहायक सचिव निखिल कुमार सहित तमाम क्षेत्रीय सचिव व शाखा सचिव उपस्थित रहे।
