LUCKNOW: निजीकरण का निर्णय वापस लेने की मांग तेज,क्लिक करें और भी खबरें

-पुडुचेरी में टेंडर निरस्त, आंध्र सरकार की घोषणा से आन्दोलित कर्मी उत्साहित

  • -REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS
  • -EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK 

लखनऊ। पुडुचेरी में बिजली निजीकरण टेण्डर निरस्त किए जाने तथा आन्ध्र प्रदेश सरकार द्वारा बिजली निजीकरण का निर्णय वापस लिये जाने से प्रदेश के बिजली अभियंता और कार्मिक उत्साहित है। लम्बे अरसे से निजीकरण का विरोध कर रहे अभियंताओं और कर्मचारियों ने निजीकरण का निर्णय वापस लिये जाने की मांग को तेज कर दिया है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा है कि पुडुचेरी में केंद्र सरकार द्वारा निजीकरण का टेंडर रद्द कर देने और आंध्र प्रदेश की सरकार द्वारा बिजली का निजीकरण न करने की घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश सरकार को भी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त कर देनी चाहिए।
संघर्ष समिति ने बताया कि केंद्र शासित प्रदेशों के बिजली विभाग के निजीकरण की केंद्र सरकार की घोषणा के बाद पुडुचेरी के बिजली विभाग के निजीकरण हेतु साढे तीन साल पहले टेंडर नोटिस प्रकाशित की गई थी। निजीकरण की घोषणा होते ही पुडुचेरी के बिजली कर्मियों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया था। इस बीच हुए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में अदानी पावर कंपनी ने अगस्त, 2025 में पुडुचेरी अदानी पावर कंपनी लिमिटेड का रजिस्ट्रेशन कर दिया था। इसके बाद एक बार फिर निजीकरण की प्रक्रिया तेज हुई। 05 जनवरी, 2026 को नए सिरे से निजीकरण की बिडिंग डालने की अंतिम तारीख थी और 06 जनवरी, 2026 को टेंडर खोले जाने थे। 05 जनवरी की शाम को प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए पुडुचेरी बिजली विभाग के निजीकरण का टेंडर निरस्त कर दिया गया है।
संघर्ष समिति के संयोजक और आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि 05 जनवरी 2026 को विजयवाड़ा में हुई आंध्र प्रदेश के बिजली इंजीनियरों की महासभा में आंध्र प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री रवि कुमार ने स्पष्ट शब्दों में घोषणा कर दी कि आंध्र प्रदेश सरकार बिजली के निजीकरण के विरोध में है और आंध्र प्रदेश में बिजली का कोई निजीकरण नहीं किया जाएगा। संघर्ष समिति ने कहा की पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश है और पुडुचेरी के निजीकरण का टेंडर रद्द करने का फैसला केंद्र सरकार की अनुमति से लिया गया है। आंध्र प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू है, जिनकी पार्टी केंद्र सरकार में एक प्रमुख घटक है। संघर्ष समिति ने कहा कि जब केंद्र सरकार ने पुडुचेरी के निजीकरण का टेंडर रद्द कर दिया है और केंद्र सरकार के सहयोगी दल ने आंध्र प्रदेश में बिजली का निजीकरण न करने का ऐलान कर दिया है तब यह जरूरी हो गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार भी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की पहल करे। संघर्ष समिति के आह्वान पर आज बिजली के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज 405 दिन पूरा होने पर बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।

संविदा कर्मचारियों का एकदिवसीय सत्याग्रह, सौंपा ज्ञापन

विद्युत संविदा कर्मचारियों के वेतन बढ़ोतरी, श्रम कानूनों के उल्लंघन एवं लगातार की जा रही छंटनी के विरोध में विद्युत संविदा मजदूर संगठन, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर आज मंगलवार, 6 जनवरी 2025 को प्रदेश के सभी जनपदों में एकदिवसीय सत्याग्रह किया गया। मीडिया प्रभारी विमल चंद्र पांडे ने बताया कि लखनऊ के लेसा क्षेत्र में भी संविदा कर्मचारियों द्वारा शांतिपूर्ण सत्याग्रह आयोजित किया गया, जहां लेसा प्रभारी माता प्रसाद पांडे द्वारा अधीक्षण अभियंता के माध्यम से उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपा गया।
सत्याग्रह के दौरान सौंपे गए ज्ञापन में संविदा कर्मचारियों की 11 सूत्री प्रमुख मांगों को प्रमुखता से उठाया गया जिसमें संविदा श्रमिकों का न्यूनतम वेतन 22,000 तथा लाइनमैन, एसएसओ व कंप्यूटर ऑपरेटर का वेतन 25,000 दिये जाने, पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया को रोकने,संविदा कर्मचारियों की छंटनी तत्काल बंद कर निकाले गए कर्मचारियों को पुनः कार्य पर लिया जाए। वर्ष 2023 की हड़ताल में कार्य करने के बावजूद हटाए गए संविदा कर्मियों को वापस रखा जाए।संविदा कर्मचारियों के लिए सेवा नियमावली बनाई जाए एवं विभाग द्वारा सीधा भुगतान सुनिश्चित किया जाए। संविदा कर्मियों की सेवानिवृत्ति आयु 55 से बढ़…

संघर्ष समिति का प्रदर्शन जारी, निजीकरण स्वीकार्य नही
-विद्युत मंत्रालय की राज्य सरकारों के साथ 22-23 जनवरी को बैठक

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आज खुलासा किया कि भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय ने बिजली वितरण निगमों के निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 पर आम सहमति बनाने के लिए आगामी 22-23 जनवरी को सभी राज्यों के विद्युत मंत्रियों और अधिकारियों की मीटिंग बुलाई है। संघर्ष समिति ने बताया कि दो दिवसीय बैठक में मुख्य रूप से डिस्कॉम निजीकरण के लिए वित्तीय पैकेज, फ्रेंचाइजी मॉडल और डिस्कॉम की समयबद्ध लिस्टिंग से संबंधित मुद्दों पर चर्चा होगी और निर्णय लिया जायेगा। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि उपभोक्ताओं और किसानों के हितों को दरकिनार कर बिजली वितरण निगमों का निजीकरण करने का कोई एकतरफा निर्णय लिया गया तो इसकी तीखी प्रतिक्रिया होगी और उप्र सहित देश के तमाम 27 लाख बिजली कर्मचारी राष्ट्रव्यापी आन्दोलन प्रारम्भ करने हेतु बाध्य होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों की होगी।

संघर्ष समिति ने कहा कि एक ओर राज्य सरकार निजीकरण का निर्णय लेकर पॉवर सेक्टर में निजी क्षेत्र की मनॉपली स्थापित करने में लगी है जो किसी भी तरह उचित नहीं है। अब केन्द्र सरकार वित्तीय पैकेज के नाम पर बिजली वितरण निगमों के निजीकरण, फ्रेंचाइजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के जरिए सरकारी विद्युत वितरण निगमों का नेटवर्क निजी घरानों को इस्तेमाल करने की अनुमति देने की तैयारी कर रही है। इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल के जरिए सब्सिडी और क्रॉस सब्सिडी समाप्त करने की कोशिश और कॉस्ट रिफ्लेक्टिव टैरिफ किसी भी प्रकार किसानों और गरीब उपभोक्ताओं के हित में नहीं है।संघर्ष समिति ने बताया कि इस मीटिंग में बिजली मंत्रालय राज्यों के बीच बिजली (संशोधन) विधेयक के मसौदे पर भी सहमति बनाने की कोशिश करेगा जिससे बिजली (संशोधन) विधेयक संसद के आगामी बजट सत्र में पेश किया जा सके। संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के निर्णय के विरोध में उप्र के बिजली कर्मी तमाम उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के बावजूद विगत 406 दिनों से लगातार संघर्षरत हैं और संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता और समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त नहीं होतीं।आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।

पश्चिमांचल के एक लाख मीटरों की गणना प्रणाली विफल,उच्च स्तरीय जॉच की मांग

स्मार्ट प्रीपेड मीटर सिस्टम में गंभीर गड़बड़ी का खुलासा पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में एक लाख से अधिक उपभोक्ताओं के मीटर में शुल्क गणना प्रणाली बिफल हो गई। जो अब तक का सबसे गंभीर मामला है। उपभोक्ता परिषद ने तत्काल पावर कॉरपोरेशन पूरे सिस्टम की उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मॉग की है। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में समीक्षा बैठक में यह भी गंभीर मामला सामने आया है कि बड़ी संख्या में खातों में बैलेंस शून्य हो गया है। जो यह दर्शाता है कि कहीं-कहीं सिस्टम में बहुत बड़ी कमियां है। उपभोक्ता जो लगातार इन खामियों की शिकायत कर रहा था। उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर लंबे समय से उपभोक्ताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं कि नियमित रिचार्ज के बावजूद उनका बैलेंस कभी शून्य हो जाता है तो कभी माइनस में चला जाता है। इसी कड़ी में अब एक अत्यंत गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है।

ज्ञात हो कि 2 जनवरी को पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि 11 दिसंबर को साइट एक्सेप्टेंस टेस्ट कई बार बाधित हुआ। इस दौरान बड़े पैमाने पर मास बैलेंस जीरो हो गया, जिससे 1 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के मीटरों में शुल्क गणना प्रणाली विफल हो गई। समीक्षा में डीसीसी होल्ड फेल जैसी घटनाएं भी दर्ज की गईं, जो यह दर्शाती हैं कि स्मार्ट मीटर का सिस्टम पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गया था।उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने जब पश्चिमांचल के निदेशक वाणिज्य व अन्य अधिकारियों से इस मुद्दे पर बात कर तकनीकी कर्मियों के बारे में जानना चाहा तो वह हकलाने लगे इधर-उधर की बात करने लगे। इससे आप समझ सकते हैं कि मामला कितना गंभीर है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पूरे पावर कारपोरेशन के स्मार्ट प्रीपेड मीटर के एमडीएम सिस्टम की तत्काल गहन जांच होनी चाहिए। बड़े पैमाने पर तकनीकी खामियां सामने आ रही हैं, लेकिन उन्हें छुपाया जा रहा है। पहली बार पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में सामने आई इन कमियों का ठोस सबूत उपभोक्ता परिषद के हाथ लगा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर की पूरी व्यवस्था में गंभीर दोष हैं, लेकिन बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए इन खामियों को दबाया जा रहा है। पक्षमांचल विद्युत वितरण निगम में इन टैली स्मार्ट द्वारा स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाया जा रहा है इसकी पैतृक कंपनी एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड पहले ही 12 लाख स्मार्ट मीटर लगाकर विवादों में रही अब जिसे बदला जा रहा है।उन्होंने बताया कि पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में 10,82,666 स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। वहीं पूरे उत्तर प्रदेश में 56 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए हैं, जिनमें से 37 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के मीटर प्रीपेड मोड में कन्वर्ट किए जा चुके हैं। 22 दिसंबर तक पूरे प्रदेश में केवल 34 लाख मीटरों का ही साइट एक्सेप्टेंस टेस्ट हुआ है, जबकि अभी बड़े पैमाने पर एसएटी किया जाना बाकी है। उपभोक्ता परिषद ने मांग की है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर सिस्टम की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, प्रभावित उपभोक्ताओं को तत्काल राहत दी जाए और दोषी एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

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