-कासगंज जिले में साइबर जागरूकता कार्यशाला का पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा ने किया शुभारम्भ
- REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ:पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा ने कासगंज जिले में परिक्षेत्र स्तरीय साइबर जागरूकता कार्यशाला का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शुभारम्भ किया।
इस मौके पर अपर पुलिस महानिदेशक आगरा जोन, पुलिस उपमहानिरीक्षक अलीगंढ़ परिक्षेत्र, जिलाधिकारी कासगंज एवं पुलिस अधीक्षक कासगंज, अलीगढ़, हाथरस, एवं एटा, एसपीआरए अलीगढ़, सहायक अभियोजन अधिकारी कासगंज, विभिन्न स्कूलों के शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राओं, विभिन्न व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधि, बैंक कर्मी, सर्राफा एसोसिएशन के पदाधिकारी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े जनपदों के साइबर सेल तथा थानों के पुलिस अधिकारियों व कर्मचारी जुड़े। इस मौके पर पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा ने कार्यशाला को ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी बनाने हेतु अपना अमूल्य समय प्रदान करने वाले साइबर विशेषज्ञ अमित दूबे का आभार व्यक्त किया तथा इस कार्यशाला के माध्यम से साइबर सुरक्षा जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर जन-जागरूकता फैलाने के लिए आयोजकों तथा विशेषज्ञगण का धन्यवाद दिया ।
पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में हमारी जीवनशैली में मूलभूत परिवर्तन आया है। डिजिटल भुगतान, सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म अब प्रत्येक घर की आवश्यकता बन चुके हैं। भारत आज प्रति व्यक्ति डिजिटल वित्तीय लेन-देन में दुनिया में प्रथम स्थान पर है। कोविड काल के पश्चात ई-कॉमर्स के क्षेत्र में लगभग 60 से 70 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसका मुख्य कारण है कि भारत में डेटा दुनिया में सबसे सस्ता है। साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं की सक्रियता में भी उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी हुई है।वर्तमान समय में अधिकांश लोग प्रत्यक्ष रूप से इंटरनेट से जुड़े हुए हैं। यह हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है परन्तु इंटरनेट के बढ़ते उपयोग के साथ-साथ इसके दुरुपयोग की घटनाएँ भी अत्यधिक चिंताजनक रूप में सामने आ रही हैं, इसीलिए आवश्यकता है कि हम इंटरनेट को केवल सुविधा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करें। आज यदि हम सजग एवं सतर्क रहें और मर्यादा तथा नैतिकता को ध्यान में रखते हुए इंटरनेट का उपयोग करें, तो यह दुनिया को बेहतर बनाने का एक सशक्त माध्यम बन सकता है।
पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा समाज पर साइबर अपराध के प्रभाव को लेकर कहा कि वर्तमान परिदृश्य में समाज का शायद ही कोई वर्ग साइबर क्राइम से अप्रभावित रहा हो।हमारे स्कूली बच्चे साइबर बुलिंग का शिकार होते हैं।महिलाएं एवं बालिकाएं साइबर स्टॉकिंग तथा अन्य महिला-केंद्रित साइबर अपराधों की शिकार होती हैं।डिजिटल अरेस्ट- एक उभरता खतरा है ,डिजिटल अरेस्ट एक उभरता हुआ साइबर अपराध है, जिससे सभ्रांत वर्ग के नागरिक एवं पेंशनर्स शिकार हुए हैं और जीवन भर की कमाई गंवा चुके हैं।उन्होंने कहा कि आर्थिक अपराध के तीन प्रमुख कारण है ,इसमें अधिकांश लोग तीन कारणों से साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं।डीजीपी ने पहले कारण का जिक्र करते हुए कहा कि लालच में लगभग 70% साइबर वित्तीय अपराध लालच की वजह से होते हैं। अक्सर लोग पैसा जल्दी कमाने या दोगुना करने जैसी लालचपूर्ण योजनाओं में फँस जाते हैं।इसमें भय सबसे खतरनाक साइकोलॉजिकल अपराध है। साइबर अपराधी स्वयं को CBI, पुलिस, कस्टम अधिकारी या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को मानसिक रूप से भयभीत करते हैं। वे पार्सल में ड्रग्स मिलने, गंभीर शिकायत दर्ज होने, या कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर नागरिकों को भ्रमित करते हैं और इसी डर का फायदा उठाकर उनसे ठगी करते हैं। जबकि भारत में कोई भी एजेंसी वीडियो कॉल पर पैसे जमा करने को नहीं कहती है।
डीजीपी ने कहा कि इसमें लापरवाही में ओटीपी साझा करना, पर्सनल जानकारी देना, फर्जी लिंक पर क्लिक करना— ये पुरानी समस्याएँ हैं। लेकिन अभी का सबसे नया और खतरनाक तरीका .APK फाइल का है । अपराधी किसी शादी का निमंत्रण, विशेष सूचना या बैंक अलर्ट का मैसेज भेजकर .APK लिंक क्लिक करवाते हैं। जैसे ही आप क्लिक करते हैं— आपका फोन हैक हो जाता है। पासवर्ड, बैंक डिटेल, UPI डेटा— सब चोरी हो जाता है। किसी भी अनजान .APK फाइल को कभी मत खोलें।उन्होंने कहा कि साइबर अपराध से बचाव के लिए के लिए तीन उपाय जरूरी है नागरिकों को इन तीन उपायों पर ध्यान देना चाहिए।तत्काल 1930 डायल करें व गोल्डन टाइम-फ्रेम के भीतर रिपोर्ट करें और सही तथ्यों को दर्ज करना आवश्यक है। डीजीपी ने कहा कि बच्चों को ऑनलाइन गेमिंग के दुष्प्रभाव के बारे में सतर्क करना आवश्यक है। बच्चो एवं युवाओं को यह समझना होगा कि साइबर गेमिंग में हमेशा गेम बनाने वाला जीतता है न कि खेलने वाला ।आज के युग में सोशल मीडिया नशे की तरह युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहा है। इसके लिए हमें और अधिक सतर्क एवं जागरूक रहने की आवश्यकता है।
साइबर अपराध को लेकर थाना प्रभारियों को डीजीपी ने दी नसीहत
पुलिस अधिकारियों को लेकर डीजीपी ने कहा कि थाना प्रभारियों को यह अवधारणा त्यागनी होगी कि ’’साइबर अपराध की जांच हम नहीं कर सकते।’’ साइबर अपराध की जांच पूर्णतः SOP आधारित एवं व्यवस्थित है। यदि कोई अधिकारी इसे खुले मन से सीखना चाहे तो इसके छह-सात चरणों को समझकर पाएगा कि यह सामान्य आपराधिक जांच से भी अधिक सरल और त्वरित है। साइबर अपराध का दायरा और दुष्प्रभाव प्रतिदिन बढ़ रहा है, इसलिए पुलिस कर्मियों का आत्मविश्वास और कौशल जितना बढ़ेगा, उतना ही नागरिको का पुलिस पर विश्वास और भरोसा भी सुदृढ़ होगा।साइबर क्राइम से बचाव हेतु मजबूत पासवर्ड एवं अपडेटेड सॉफ्टवेयर का प्रयोग करें और सदैव सतर्क रहें।उत्तर प्रदेश पुलिस नागरिक-केंद्रित, त्वरित एवं पारदर्शी साइबर कानून प्रवर्तन के साथ-साथ राज्य को साइबर अपराध-मुक्त तथा देश को साइबर नियंत्रण के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। यह लक्ष्य तभी संभव है जब प्रत्येक नागरिक सतर्क, सजग और सहयोगी बनकर इस मिशन में सहभागी बने।सुरक्षित डिजिटल उत्तर प्रदेश तभी बनेगा जब जनता और पुलिस साथ हों। साइबर क्राइम जितनी तेजी से बढ़ सकता है, उतनी ही तेजी से नियंत्रण में भी आ सकता है—शर्त है कि हम सब जागरूक हों।
