- REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK
लखनऊ।नगर आयुक्त गौरव कुमार के निर्देशन में नगर निगम के त्रिलोक नाथ हॉल में शनिवार को स्वच्छता कर्मियों के लिए व्यावसायिक
सुरक्षा पर एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम जलकल विभाग और लखनऊ नगर निगम के तत्वावधान में पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया तथा एचसीएल फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में कुल 50 सफाई कर्मचारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य स्वच्छता कर्मियों को सुरक्षित कार्य पद्धतियों, आधुनिक मशीनों के उपयोग, सुरक्षा उपकरणों (सेफ्टी इक्विपमेंट) के महत्व और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में बचाव के वैज्ञानिक तरीकों के बारे में जागरूक करना था। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने स्पष्ट संदेश दिया कि किसी भी परिस्थिति में मैन्युअल सीवर एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित है। सभी कार्य केवल प्रोटेक्टिव गियर, गैस मॉनिटरिंग उपकरण और मशीन आधारित वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से ही किए जाने चाहिए।सेशन के दौरान स्वच्छता कर्मियों को आकस्मिक परिस्थितियों में जीवन रक्षक तकनीक सीपीआर के बारे में भी विस्तार से प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षकों ने उन्हें हेलमेट, मास्क, ग्लव्स और गमबूट जैसे आवश्यक सुरक्षा उपकरणों के सही उपयोग के लिए प्रेरित किया। साथ ही, यह सुनिश्चित किया गया कि भविष्य में सीवर या नाली से जुड़े सभी कार्य सुरक्षित, व्यवस्थित और मशीनरी आधारित तरीके से ही किए जाएँ, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना या स्वास्थ्य जोखिम से बचा जा सके।प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि आधुनिक सीवर और नाली सफाई तकनीकों के उपयोग से कार्य न केवल तेज और सुरक्षित होता है, बल्कि यह स्वच्छता मित्रों के स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी है।कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने कहा कि स्वच्छता कर्मियों को सुरक्षित बनाना और उन्हें आधुनिक तकनीकें उपलब्ध कराना, स्वच्छ शहर के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य में भी जारी रहेंगे, ताकि स्वच्छता कर्मियों का स्वास्थ्य सुरक्षित रहे और शहर को स्वच्छ बनाए रखने के प्रयास और अधिक प्रभावी हो सकें।
अभियान में कई अवैध ढाँचे हटाए, जुर्माना वसूला
शहर में बढ़ते अवैध अतिक्रमण और यातायात अवरोधों को गंभीरता से लेते हुए लखनऊ नगर निगम ने शनिवार को एक व्यापक और
बहुस्तरीय अभियान चलाया। यह कार्रवाई महापौर सुषमा खर्कवाल के निर्देश पर तथा नगर आयुक्त गौरव कुमार के आदेशानुसार विभिन्न जोनों में एक साथ संचालित की गई। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रमुख सड़कों, सार्वजनिक स्थलों, नालों और फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त कर नागरिकों को सुगम, सुरक्षित और निर्बाध यातायात उपलब्ध कराना था।
नगर आयुक्त के निर्देशों का अनुपालन करते हुए जोन-7 के अंतर्गत जोनल अधिकारी रामेश्वर प्रसाद के नेतृत्व में देवा रोड, मटियारी और चिनहट क्षेत्र में विशेष अभियान चलाया गया। इस कार्यवाही के दौरान नाली, नाले तथा सड़क किनारे किए गए अवैध निर्माण और कब्जों को हटाया गया। अभियान में दो लोहे की गुमटी, एक ठेला, एक गैस सिलेंडर, दो गैस चूल्हे और एक पानी की पेटी जब्त की गई। इसके अतिरिक्त चार काउंटर, तीन ठेले और दो गुमटियाँ हटवायी गईं। जोन 6 के जोनल अधिकारी के नेतृत्व में वार्ड दौलतगंज में चलाया गया। यह कार्रवाई मुसाहबगंज पंपिंग स्टेशन रोड पर नटवीर बाबा पुलिया से पंपिंग स्टेशन गेट तक फैले अस्थाई अतिक्रमण को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान 22 ठेले, 4 काउंटर और 20 अस्थाई दुकानें हटवाई गईं। वहीं 1 ठेला, 1 लोहे की जाली, 6 तराजू और 6 फ्लेक्स बोर्ड जब्त किए गए। अतिक्रमणकारियों को चेतावनी दी गई कि दोबारा अतिक्रमण करते पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। मौके पर 6000 का जुर्माना भी वसूला गया।अतिक्रमण विरोधी अभियान के साथ-साथ स्वच्छता ही सेवा अभियान के अंतर्गत प्रतिबंधित पॉलीथिन के विरुद्ध भी सघन कार्रवाई की गई। जोन-7 के मैथिली शरण गुप्त वार्ड में अयोध्या मार्ग स्थित आज़ाद मार्केट में नगर निगम ने विशेष जांच अभियान चलाया। इस दौरान कर अधीक्षक विनय मौर्य और सफाई एवं खाद्य निरीक्षक संचिता मिश्रा के नेतृत्व में पॉलीथिन का अवैध उपयोग, विक्रय एवं भंडारण करने वालों पर कार्रवाई करते हुए 16,700 का शमन शुल्क वसूला गया। नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि प्लास्टिक के विरुद्ध यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
केन्द्रीय विद्युत नियामक आयोग के सदस्य नामित हुए अवधेश वर्मा
भारत सरकार की अधिसूचना जारी प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर है कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के
अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा को केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग द्वारा देश में ऊर्जा की सबसे बड़ी संवैधानिक कमेटी सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी में सदस्य नामित किया गया है। उपभोक्ता परिषद ने केंद्रीय विद्युत नियामक कार्य का आभार व्यक्त करते हुए कहा भारत सरकार की अधिसूचना की कॉपी उपभोक्ता परिषद को मिल गई है। अवधेश वर्मा ने इस नियुक्ति पर कहा कि देश के उपभोक्ताओं के हित में वे अपना पूरा योगदान देंगे।
उत्तर प्रदेश विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 80 के तहत गठित होने वाली सेंट्रल एडवाइजरी कमिटी जो ऊर्जा क्षेत्र में देश की सबसे बड़ी संवैधानिक संस्था है। जिसमें केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग द्वारा उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा को केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग द्वारा सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी का सदस्य नामित किया गया है। इस कमेटी में पूरे भारतवर्ष से कमर्स इंडस्ट्री ट्रांसपोर्ट एग्रीकल्चर लेबर व उपभोक्ताओं के प्रतिनिधि शामिल किए जाते हैं। केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग द्वारा भारत सरकार की तरफ से जारी अधिसूचना की प्रति उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष को केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग सचिव हरप्रीत सिंह पृथि की तरफ से भेजी गई है। इस समिति में भारतवर्ष के कुल 28 सदस्य नामित किए गए हैं। जिसमें सीएमडी पीटीसी इंडिया, सीएमडी सोलर एनर्जी, सीएमडी एनटीपीसी, सीएमडी एनएचसी, सीएमडी पावर ग्रिड, सीएमडी तमिलनाडु, हरियाणा पावर, एमडी गुजरात ऊर्जा प्रवीर सिन्हा, एमडी टाटा पावर अनिल सरदाना, एमडी अदानी ट्रांसमिशन, फिक्की निदेशक, आईआईटी दिल्ली, आईआईएम अहमदाबाद, मेम्बर रेलवे सीएमडी एनएचपीसी प्रमुख रूप से नामित किए गए हैं। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा जो भी सेंट्रल लेवल पर विद्युत उपभोक्ताओं के हितों में संवैधानिक मामले आएंगे उसे पर उपभोक्ता परिषद पूरी मजबूती के साथ पूरे देश के विद्युत उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने की पूरी कोशिश करेगा।
उपभोक्ता बकाए की लड़ाई का परिणाम बिजली दरों की स्थिरता
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद द्वारा प्रदेश की बिजली दरों में अनावश्यक वृद्धि और मनगढ़ंत घाटे का मुद्दा उठाए जाने के बाद
विद्युत नियामक आयोग ने उपभोक्ता परिषद के सभी तथ्यों को स्वीकार करते हुए पावर कॉरपोरेशन के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। यह सब इस लिए हुआ कि विद्युत उपभोक्ता परिषद ने उपभोक्ता के बकाए को जोरदार तरीके से ही नही उठाया बताया कानूनी तरीके से बिजली दर बढ़ोत्तरी को गैर कानूनी घोषित कराने में कोई कसर नही छोड़ी। इसी का परिणाम रहा कि प्रदेश में लगातार छठे साल बिजली दरें स्थिर रही।
पावर कॉरपोरेशन द्वारा लगभग 24,022 करोड़ रुपये के घाटे का हवाला देते हुए औसत 28ः तथा घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 45ः तक बिजली दर बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया था। उपभोक्ता परिषद की कड़ी आपत्तियों, तथ्यों और साक्ष्यों के आगे पावर कॉरपोरेशन का पूरा तर्क तंत्र धराशायी हो गया।सुनवाई के बाद आयोग ने स्वीकार किया कि पावर कॉरपोरेशन के प्रस्तुत आंकड़े गलत थे और वास्तविक स्थिति में 18,592 करोड़ रुपये का अतिरिक्त सरप्लस पाया गया। इसके साथ ही पहले से उपलब्ध 33,122 करोड़ रुपये के सरप्लस को जोड़कर कुल सरप्लस लगभग 51,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।उपभोक्ता परिषद अब इसी सरप्लस के आधार पर बिजली दरों में कमी हेतु आयोग के सामने लोक-हित याचिका/प्रस्ताव दाखिल करेगी। परिषद की टीम बिजली दरों और सरप्लस का विस्तृत अध्ययन कर रही है और जल्द ही आयोग के समक्ष विधिक प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जब नोएडा पावर कंपनी जैसी निजी कंपनी में लगभग 1,242 करोड़ रुपये का सरप्लस होते हुए भी लगातार चौथे वर्ष 10ः रिबेट उपभोक्ताओं को दिया जा रहा है, तो प्रदेश की सरकारी बिजली कंपनियों में भी सरप्लस के आधार पर दरों में कमी होना स्वाभाविक और आवश्यक है। आयोग ने निजी कंपनियों के मामले में यह सिद्धांत स्वीकार किया है, इसलिए अब प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों पर भी यही मानक लागू होना चाहिए।श्री वर्मा ने यह भी कहा कि पावर कॉरपोरेशन ने मनगढ़ंत और मनमाने आंकड़ों के आधार पर न केवल भारी बिजली दर वृद्धि का वातावरण बनाया बल्कि प्रदेश के 42 जनपदोंकृदक्षिणांचल एवं पूर्वांचलकृको बड़े निजी घरानों को बेचने का प्रयास भी किया जा रहा था। ऐसे में यह आवश्यक है कि सरकार पावर कॉरपोरेशन के सभी आंकड़ों की उच्चस्तरीय जांच कराए और यह स्पष्ट किया जाए कि किन आधारों पर ऐसा भ्रामक नैरेटिव तैयार किया गया जिसने सरकार की छवि को भी धूमिल किया है।उपभोक्ता परिषद उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा हेतु अपनी लड़ाई आगे भी जारी रखेगी और सरप्लस के आधार पर बिजली दरों में कमी सुनिश्चित कराएगी।
जब घाटे के आकड़े अस्वीकृत तो फिर निजीकरण क्यो
-निजीकरण विरोध में 27 नवम्बर को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा है कि अब जब विद्युत नियामक ने पॉवर कारपोरेशन
द्वारा दिए गए ए आर आर में दर्शाए गए घाटे के आंकड़ों को अस्वीकृत कर दिया है तब घाटे के इन्हीं आंकड़ों के आधार पर पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का लिया गया फैसला भी निरस्त किया जाय। संघर्ष समिति ने बताया कि पॉवर कारपोरेशन द्वारा नियामक आयोग को प्रेषित ए आर आर में 25 हजार करोड़ रुपए का घाटा बताया गया था । विद्युत नियामक आयोग ने गहन परीक्षण के बाद कहा है कि वर्ष 2025 – 26 में राजस्व वसूली और खर्चों में लगभग मात्र 7710 करोड़ रुपए का अन्तर रहेगा किन्तु 01 अप्रैल, 2025 को पॉवर कारपोरेशन के खाते में 18592 करोड़ रुपए अतिरिक्त जमा होने के कारण यह घाटा भी नहीं होगा। इसी आधार पर नियामक आयोग ने बिजली टैरिफ में कोई वृद्धि नहीं की है।
संघर्ष समिति ने कहा कि कथित घाटे के नाम पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय एक वर्ष पूर्व लिया गया था। इसके अतिरिक्त दागी ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन द्वारा तैयार किए गए आर एफ पी डॉक्यूमेंट को भी इसी घाटे के आधार पर ही बनाया गया है। संघर्ष समिति ने कहा कि अब जब घाटे के आंकड़े ही गलत साबित हो गए हैं तब निजीकरण के लिए तैयार किया गया आर एफ पी डॉक्यूमेंट भी पूरी तरह गलत हो जाता है। ऐसी स्थिति में आर एफ पी डॉक्यूमेंट भी निरस्त किया जाय और निजीकरण का निर्णय भी वापस लिया जाना चाहिए। संघर्ष समिति ने यह भी मांग की है की ए आर आर तैयार करने वाले और निजीकरण हेतु आर एफ पी डॉक्यूमेंट तैयार करने वाले तत्कालीन निदेशक वित्त पर एफ आई आर दर्ज कर इस फर्जीवाड़ा के लिए उन पर कठोर कार्यवाही की जाए। संघर्ष समिति प्रारंभ से ही कहती रही है कि पावर कार्पाेरेशन प्रबंधन घाटे के फर्जी आंकड़े देकर और उत्पीड़न कर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण करना चाहता है। विद्युत नियामक आयोग ने संघर्ष समिति के आरोपों की पुष्टि कर दी है। निजीकरण के विरोध में चल रहे हैं संघर्ष का एक वर्ष पूरा होने पर आगामी 27 नवंबर को देशभर के बिजली कर्मचारी और इंजीनियर उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों के समर्थन में सभी राज्यों की राजधानियों में और बड़े बिजली उत्पादन घरों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे। उत्तर प्रदेश में भी सभी जनपदों में जोरदार विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। विशेष तौर पर डिस्कॉम मुख्यालयों और परियोजनाओं पर बड़े विरोध प्रदर्शन करने की योजना है।
पार्षद आशा रावत ने शुरू कराया सड़क -नाली निर्माण
हजारों की आबादी वाले सदरौना क्षेत्र में सड़क और नाली के आभाव के कारण बारिश के मौसम में जनता को भारी परेशानी का सामना करना
पड़ता था। क्षेत्रीय जनता की शिकायतों को देखते हुए क्षेत्रीय पार्षद लम्बे अरसे से उक्त क्षेत्र में नाली और सड़क निर्माण के लिए प्रयासरत थी।
अततःकल्याण सिंह वार्ड के अंतर्गत पार्षद आशा रावत के अथक प्रयासों से क्षेत्र के विकास कार्य के लिए सदरौना उत्तम मैरिज लॉन के पीछे कल्याणपुरम लेन- 1 में सडक एवं नाली का निर्माण कार्य शुरू करवाया गया। जिसका शुभारम्म क्षेत्रीय पार्षद आशा रावत की उपस्थित में सम्पन्न हुआ। क्षेत्र में लगभग 100 से अधिक घरो को सडक एवं नाली निर्माण कार्य से जलभराव की समस्या से निजात दिलाने का कार्य किया गया। क्षेत्र की जनता ने पार्षद आशा रावत को धन्यवाद देते हुए अन्य कार्यों के लिए अवगत कराया। उक्त सडक नाली निर्माण उद्घाटन के दौरान पार्षद पति सनी रावत, क्षेत्र के सम्मानित जनता कल्पनाथ सिंह, आर सी पांडेय, अखिलेश पाण्डेय, दायशंकर यादव, अभिषेक यादव, गौरव पाण्डेय, अवनेंद्र शर्मा एवं अन्य लोग मौजूद रहे।
