उन्नाव: पुरवा के तत्कालीन सीओ दीपक सिंह के विरुद्ध मुक़दमा दर्ज करने का आदेश 

-23 महीने पुराने दलित उत्पीड़न और आत्मदाह के मामले में  न्यायालय एससी/एसटी एक्ट नें सख्त रुख अपनाया 

  • REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK 
लखनऊ। यूपी के उन्नाव जिले के पुरवा क्षेत्र में बीते 23 महीने पुराने दलित उत्पीड़न और आत्मदाह के मामले को लेकर न्यायालय एससी/एसटी एक्ट नें सख्त रुख अपनाते हुए पुरवा में तैनात रहे तत्कालीन क्षेत्राधिकारी (सीओ) दीपक सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश जारी किया।बतादे कि यह वह मामला है, जिसमें दलित युवक श्रीचंद रावत ने आरोपितों को बचाने और जातिगत उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए एसपी कार्यालय के सामने खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली थी, जिसके दो दिन बाद उसकी मौत हो गई थी।इस घटना से हड़कंप मच गया था। इसको लेकर तरह तरह की चर्चायें होनें लगी थी। उन्नाव के पुरवा कोतवाली क्षेत्र के भुलेमऊ गांव निवासी श्रीचंद रावत पर 18 अक्टूबर 2023 को भूमि विवाद के चलते एक विशेष समुदाय के करीब आधा दर्जन लोगों ने लाठी और कुल्हाड़ी से हमला कर श्रीचंद औऱ उसके भाई और भतीजा को गंभीर रूप से घायल कर दिया था।इसको लेकर पुरवा थाने में दलित उत्पीड़न, मारपीट और जान से मारने की धमकी समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था,इसकी जांच तत्कालीन सीओ दीपक सिंह को सौंपी गई। श्रीचंद का आरोप था कि सीओ दीपक सिंह आरोपितों के नाम हटाने, धाराएं कम करने के नाम पर तीन लाख रुपये की मांग कर रहे थे।जिसकी शिकायत उसने कई बार उच्चाधिकारियों को की थी। यही नहीं पीड़ित नें इस मामले की जांच किसी अन्य अधिकारी से कराने की भी मांग की थी, लेकिन अफसरों नें इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।पीड़ित इस मामले में न्याय न मिलने से निराश औऱ हताश होकर 27 दिसंबर 2023 को वह खुद एसपी कार्यालय पहुंचा गया। वहां उसने खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली।वह गंभीर रूप से झुलस गया। इस दौरान उसने सीओ पर जातिगत उत्पीड़न और रिश्वत लेने के गंभीर आरोप लगाए।इसके बाद 29 दिसंबर को पीड़ित की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।पीड़ित युवक की मौत के बाद पुरवा क्षेत्र में इस घटना से भारी तनाव फैल गया।

हर जगह लगाई गुहार लेकिन नहीं मिला न्याय 

पीड़ित के परिजनों ने अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया,इस घटना को लेकर सरकार की किरकिरी हुईं तो प्रशासन ने सीओ दीपक सिंह और थाना प्रभारी सुरेश सिंह को हटाया और परिवार को न्याय दिलाने का वादा किया।लेकिन सीओ पर केस दर्ज नहीं किया गया। न्याय के लिए भटकते हुए मृतक के भाई मूलचंद ने कई बार इस मामले की मुख्यमंत्री तक से गुहार लगाई। यही नही इस को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से भी मुलाकात की,लेकिन उन्हें हर जगह से निराशा ही मिली।

श्रीचंद्र निराश नही हुए निराश,ली  न्यायालय की शरण 

इस मामले को लेकर  श्रीचंद्र निराश नही हुए उन्होंने न्यायालय की शरण ली।इस लड़ाई में उन्हें 23 माह बाद सफलता मिली।इस मामले को लेकर विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट व अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कविता मिश्रा की कोर्ट ने सीओ के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए हैं। इस फैसले ने पीड़ित परिवार को ढाई साल बाद न केवल न्याय की उम्मीद दी है, बल्कि पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बतादे कि इस मामले में जब पीड़ित नें समझौता नहीं किया तो उसके खिलाफ भी क्रॉस रिपोर्ट पुलिस नें दर्ज कर दी थी।

श्रीचंद्र की तहरीर पर दर्ज हुआ था धारा 147, 148, 323, 504, 506, 308 एससीएसटी एक्ट का  मुकदमा 

श्रीचंद्र पासी ने 18 अक्तूबर को पुरवा थाना में तहरीर देकर बताया था कि पिता राम स्वरुप का दीवानी मुकदमा पुरवा कोर्ट में विचाराधीन है। पड़ोसी अनीश, सरीफ, साबिरा, मुनीर और मुमताज व उसकी पत्नी गिलनिशा के खिलाफ लाठी और धारदार हथियार से मारने व जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करने का केस दर्ज कराया था। श्रीचंद्र की तहरीर पर पुरवा थाना में धारा 147, 148, 323, 504, 506, 308 एससीएसटी एक्ट में केस दर्ज किया गया था।

साबिरा की तहरीर पर श्रीचंद व पिता राम स्वरूप, भाई मूलचंद व भतीजे महेंद्र के खिलाफ दर्ज की गई थी मारपीट की क्रॉस रिपोर्ट

भूलेमऊ गांव निवासी विपक्षी सरीफ की पत्नी साबिरा की तहरीर पर थाना में श्रीचंद, उसके पिता राम स्वरूप, भाई मूलचंद व भतीजे महेंद्र के खिलाफ 24 अक्तूबर मारपीट की क्रॉस रिपोर्ट दर्ज की गई थी। श्रीचंद्र पासी का आरोप था कि समझौत न करने पर सीओ ने विपक्षी की तहरीर पर क्रॉस रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामले को लेकर श्रीचंद्र एसपी कार्यालय व थाना पहुंच शिकायत कर चुका था।

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