LUCKNOW:लचर कार्य प्रणाली एवं भ्रष्टाचार की मुख्यमंत्री शिकायत,क्लिक करें और भी खबरें

-डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के लगातार 33 पत्र निस्तारण शून्य

  • REPORT BY:AAJ NATIONAL NEWS || EDITED BY:AAJ NATIONAL NEWS DESK 

लखनऊ। डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ, लोक निर्माण विभाग के अध्यक्ष इं. एन. डी. द्विवेदी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखते हुए लोक निर्माण विभाग की लचर प्रशासनिक कार्य प्रणाली एवं कतिपय व्याप्त भ्रष्टाचार के सम्बन्ध में अवगत कराया है। इं.एन.डी. द्विवेदी ने पत्र में विस्तार से विभाग की स्थिति के बारे में क्रमबद्ध तरीके से संज्ञानित कराया है। अवगत कराया गया है कि लोक निर्माण विभाग में किस प्रकार से प्रमुख अभियन्ता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष तथा प्रमुख अभियन्ता परिकल्प,नियोजन के सरकुलर की धज्जियां उड़ाई जा रही है। कतिपय स्तर पर जूनियर इंजीनियर्स से बिना सुविधा शुल्क लिए कोई सेवा लाभ नही दिया जाता है।

लोक निर्माण विभाग को लिपिक संवर्ग अपने हिसाब से संचालित कर रहा है। उच्चाधिकारी का कोई नियंत्रण इस पर नही है। उच्चाधिकारी अपने ही सरकुलर का पालन नही करा पा रहे हैं। उल्लिखित किया गया है कि विभाग में लगभग 900 जूनियर इंजीनियर्स के द्वितीय वित्तीय स्तरोन्नयन का लाभ माह जुलाई में दिया जाना चाहिये था। विभागाध्यक्ष के सरकुलर के हिसाब से यह लाभ अधिकतम एक माह में स्वीकृत कर दिया जाना चाहिये। परन्तु चार माह व्यतीत हो जाने के बावजूद भी यह आदेश प्रमुख अभियन्ता परिकल्प,नियोजन द्वारा निर्गत नही किया जा सका है। संघ द्वारा अवगत कराया गया है कि इस परिप्रेक्ष्य में विभाग को 33 पत्र लिखे गये तथा अनेकों बार प्रमुख अभियन्ता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष तथा प्रमुख अभियन्ता परिकल्प,नियोजन से व्यक्तिगत मुलाकात कर अवगत कराया गया। परन्तु फिर भी इन उच्चाधिकारियों के निर्देश का कोई भी असर विभाग के लिपिक वर्ग पर नही पड़ा। यह स्थिति तब है, जब प्रमुख अभियन्ता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष तथा प्रमुख अभियन्ता परिकल्प,नियोजन द्वारा लिखित निर्देश भी निर्गत किये गये तथा विभागाध्यक्ष द्वारा स्वयं प्रतिदिन मानीटरिंग करते हुए प्रतिदिन आख्या ली जा रही है। बहुत प्रयास के बाद स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक 19 नवम्बर 2025 को सम्पन्न हुई। परन्तु बैठक के उपरान्त 21 दिन व्यतीत होने के बाद भी दिनंाक 09 दिसम्बर 2025 तक प्रमुख अभियन्ता परिकल्प,नियोजन द्वारा आदेश निर्गत नही किया जा सका है। इससे प्रदेश के जूनियर इंजीनियर्स में व्यापक आक्रोश व्याप्त है। इसीलिए क्षुब्ध होकर डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ ने पत्र के माध्यम से विस्तार से क्रमबद्ध तरीके से विवरण प्रस्तुत करते हुए मा0 मुख्यमंत्री जी से इस प्रकरण में आवश्यक कार्यवाही करने का अनुरोध किया है। जिससे विभाग की छवि धूमिल न हो तथा विभाग की लचर प्रशासकीय कार्य प्रणाली में सुधार हो सके तथा कतिपय व्याप्त भ्रष्टाचार से निजात मिल सके।

पदों की समाप्ति,संविदा कर्मियों की छटनी से बिजली कर्मियों का गुस्सा बढ़ा

-नजीकरण के विरोध में प्रांतव्यापी विरोध प्रदर्शन जारी

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि राजधानी लखनऊ के बाद अब पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के अंतर्गत आने वाले शहरों और कस्बों में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर सैकड़ों की संख्या में बिजली कर्मियों के पदों को समाप्त करने का प्लान है। इसके साथ ही मनमाने ढंग से सभी मापदंडों को ताक पर रखकर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में हजारों की संख्या में संविदा कर्मचारियों की छटनी की जा रही है जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त हो गया है। बड़े पैमाने पर पदों को समाप्त करने और संविदा कर्मियों की छटनी के विरोध में आज वाराणसी और प्रयागराज में बिजली कर्मियों ने जोरदार प्रदर्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
संघर्ष समिति ने बताया कि यह सब निजीकरण की तैयारी है जिससे निजीकरण के बाद निजी कंपनियों को तत्काल छटनी न करनी पड़े। इसीलिये बड़े पैमाने पर पदों को समाप्त किया जा रहा है और अत्यन्त अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मियों को बिना किसी मापदंड के हटाया जा रहा है।संघर्ष समिति ने बताया कि पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल ने कल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पूर्वांचल में भदोही, मिर्जापुर,फतेहपुर, आजमगढ़ और मऊ में रिस्ट्रक्चरिंग करने तथा दक्षिणांचल में मथुरा और वृन्दावन में रिस्ट्रक्चरिंग करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों को हटाया जा रहा है।संघर्ष समिति ने कहा कि पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन निजीकरण हेतु इतना उतावला हो गया है कि बिना सोचे समझे विफल हो चुकी वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग की व्यवस्था को एक एक कर पूरे प्रदेश में थोप रहा है जिसके दुष्परिणाम राजधानी लखनऊ में साफ दिख रहे हैं।संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर नियमित पदों को समाप्त करने और बिना किसी मापदंड के 48ः तक संविदा कर्मियों की छटनी करने की प्रक्रिया वापस न ली गई तो ऊर्जा निगमों में औद्योगिक शांति बिगाड़ने की सारी जिम्मेदारी पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन की होगी।निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज लगातार 379 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में समस्त जनपदों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।

सेवानिवृत्त डिप्लोमा इंजीनियर्स ने दिया धरना और ज्ञापन

सेवानिवृत्त डिप्लोमा इंजीनियर्स कल्याण संघ उत्तर प्रदेश द्वारा आज पूरे प्रदेश में मण्डल मुख्यालयों पर मण्डलायुक्त तथा जिला मुख्यालयों पर जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री जी को 15 सूत्रीय समस्याओं का ज्ञापन प्रेषित किया गया है।लखनऊ में आज का कार्यक्रम स्व.बी.एन. सिंह की प्रतिमा स्थल पर सम्पन्न हुआ तथा उसके उपरान्त लखनऊ मण्डल तथा लखनऊ जनपद स्तर से ज्ञापन प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री को मण्डलायुक्त तथा जिलाधिकारी के माध्यम से प्रेषित किया गया।
संघ के प्रान्तीय अध्यक्ष इं. आर.के. भाटिया ने आज सम्पन्न कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा आठवें वेतन आयोग के विचारार्थ विषयों से पेंशनरों को अलग रखा जा रहा है, राज्य सभा में सरकार के जबाव में पेंशनरों के सम्बन्ध में स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। इं. भाटिया ने कहा कि पेंशनर जिन्होंने अपने जीवन के अमूल्य समय में से सरकार को समय दिया है, इस प्रकार उनके हितों को अनदेखा किया जाना सरकार का उचित कदम नहीं है, जिसका विरोध निश्चित रूप से होगा। पेंशनर राशिकरण की कटौती 15 वर्ष के स्थान पर 10 वर्ष 11 माह करने के लिए मांग कर रहे हैं ।माननीय उच्च न्यायालय भी इसके पक्ष में कटौती पर स्टे दे चुकी है। परन्तु सरकार कटौती अवधि कम नहीं कर रही है, इसी प्रकार 65, 70 एवं 75 वर्ष पर पेंशन वृद्धि, मेडिकल बीजकों पर आयकर कटौती समाप्त करने आदि मुख्य मांगे हैं।

संघ के प्रान्तीय कार्यकारी अध्यक्ष इं. दिवाकर राय ने कहा कि पेंशन कोई भीख नहीं है यह सरकारी कर्मचारी के वेतन से रोका गया पैसा(क्पििमतमक च्ंल) है, जिसका उल्लेख तीसरे- चौथे वेतन आयोगों की रिपोर्ट में,स्पष्ट रूप से अंकित रहता था।आज का कार्यक्रम संघर्ष का प्रथम चरण है। प्रदेश के सभी अंग्रज संगठनों द्वारा भी विरोध का कार्यक्रम प्रस्तावित है।प्रान्तीय महासचिव इं. बलवन्त प्रसाद ने कहा कि संघर्ष के अगले चरण की शीघ्र घोषणा की जायेगी।

आज सैकड़ों सदस्यों के साथ-साथ इं. शिव शंकर दुबे, इं. एस.पी. मिश्रा, इं. अमरनाथ, संयुक्त पेंशनर्स कल्याण समिति के संयोजक एन पी त्रिपाठी ,इं. क्षमानाथ दुबे, इं. वी.के. बाजपेई, श्री एस के मल्होत्रा, इं. देवेन्द्र कुमार, इं. दीनबन्धु सिंह, इं. उदेश सिंह, इं सुनील श्रीवास्तव, सेवानिवृत कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन के महासचिव इं ओ पी त्रिपाठी,इं.एस.पी. वर्मा, इं. हरिओम आजाद, इं. अखिलेश कुमार श्रीवास्तव उपस्थित रहे।मण्डल स्तर से ज्ञापन इं. वी.के. सिंह मण्डल अध्यक्ष तथा इं. एस.एस. वर्मा मण्डल सचिव द्वारा तथा जनपद स्तर से इं. राम रतन जनपद अध्यक्ष तथा इं. ए.के. गुप्ता जनपद सचिव द्वारा दिया गया।

ब्लोवर चलाये जाने की मांग

जवाहर भवन-इन्दिरा भवन कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष सतीश कुमार पाण्डेय ने बताया कि ठण्ड का प्रकोप दिनों-दिन बढ़ रहा है जिससे दोनो भवनों में नौकरी कर रहे हजारों अधिकारियों एवं कर्मचारियों को ठण्ड का सामना करना पड़ रहा है।इसलिए दोनों भवनों में संचालित सेन्ट्रलाइज्ड एसी चलाये जाने की मांग राज्य सम्पत्ति अधिकारी से की गयी है, और इस आशय का पत्र भी लिखा गया कि बढ़ती ठण्ड को देखते हुए दोनों भवनों का सेन्ट्रलाईज्ड ए.सी. तत्काल चलाया जाये, जिससे शासकीय कार्यों में रूकावट न आने पाये।

एक बार फिर स्थानीय महासंघ ने दी आन्दोलन की धमकी
-स्थानीय निकाय महासंघ ने एक बार फिर मंत्री और प्रमुख सचिव को भेजा पत्र

उ.प्र.स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ ने पूर्व से लम्बित समस्याओ,मांग पत्र जिन पर गत दिनो एक लम्बा ध्यानाकर्षक आन्दोलन के बाद नगर विकास स्तर पर बनी सहमत के क्रम में अगले घोषित आन्दोलन को स्थगित कर समयबद्ध निस्तारण,आदेश जारी न किए जाने पर पुनः मंत्री नगर विकास व प्रमुख सचिव से बैठक कर समाधान कराए जाने का पत्र प्रेषित किया गया। यह जानकारी महासंघ के अध्यक्ष शशि कुमार मिश्रा ने दी। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियो में महासंघ ने पुनः एक बार मंत्री नगर विकास व प्रमुख सचिव नगर विकास जी को समय रहते बैठक के माध्यम से लम्बित सभी मांगो का निस्तारण कराने हेतु पत्र प्रेषित कर समय व तिथि सुनिश्चित करने की मांग की है,अन्यथा कि स्थित में महासंघ अपने स्थगति आन्दोलन 15 जनवरी 26 के बाद किसी भी कार्य दिवस से प्रदेश ब्यापी अनिश्चितकालीन कार्य बन्दी करने हेतु विवश होगा,जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी प्रदेश सरकार व नगर विकास विभाग की होगी।

श्री मिश्रा ने बताया कि महासंघ प्रदेश के निकाय कर्मचारियो की सेवा सम्बन्धी एवं अन्य मांगो का समाधान एक लम्बे समय से नगर विकास व निदेशालय स्तर पर लम्बित होने के कारण कर्मचारियो को समय से उनके लाभ नही प्राप्त हो रहे,जिनके कारण ऐसे कर्मचारियो को जहां आर्थिक क्षति हो रही वहीं उनकी सेवाऔ पर बहुत बुरा असर हो रहा,यह कर्मचारी 15-20 वर्षाे की लम्बी सेवाएं पूर्ण करने के बाद लगातार बिना किसी लाभ के सेवानिवृत हो रहे,जिनकी पीड़ा वर्तमान सरकार में कोई नही देख रहा,महासंघ लगातार लगभग 7-8 वर्षाे से संघर्ष करता आ रहा। प्रदेश सरकार के वह आदेश जिनका लाभ प्रदेश के सभी विभागो में लगभग मिल चुका,परन्तु खेद है कि वर्ष दिसम्बर 2001तक के कार्यरत पूरे प्रदेश में मात्र 315 कर्मचारियो का विनियमतीकरण करने सम्बधी जारी आदेश वर्ष फरवरी 2016 का अनुपालन नगर विकास विभाग द्वारा न किया जा सका,वही वर्ष सितम्बर 2021 में जारी दुसरा आदेश जिनमें कार्यरत तदर्थ,धारा 108 के कर्मचारियो का विनियमितीकरण करने सम्बन्धी आदेश का अभी भी तक अनुपालन न हो सका। महासंघ ने छठवें वेतन आयोग एवं सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियो के क्रम में प्रदेश के निकाय कर्मचारियो का समय से पदोन्नत, कैडर रिव्यू,राज्य सरकार की भांति पद नाम,वेतन,भत्ते एवं ढांचा दिए जाने के साथ साथ जिन पदो पर आज वेतनविसंगतियां व्याप्त है,उनके समाधान हेतु बहुत लम्बे समय से लडाई लड रहा। परन्तु बहुत बार शासन व निदेशालय स्तर पर प्रमुख सचिव आदि के साथ बैठक, सहमत, जारी कार्यवृत्त के बाद भी विभाग द्वारा कोई सकारात्मक निर्णय नही लिया जा रहा।महासंघ लगातार ध्यानाकर्षक आन्दोलन, धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन आदि के माध्यम से प्रमुख रूप से अपनी 10 सूत्रीय मांग पत्र पर मुख्य मंत्री,नगर विकास मंत्री का भी ध्यानाकर्षक, पत्राचार आदि के माध्यम से अनुरोध किया जा चुका,परन्तु अनेको बार आन्दोलन के मध्य समझोता करके कुछ नही किया जा रहा।

पावर सेक्टर को तबाह कर देगा वर्टिकल व्यवस्था
-उपभोक्ता परिषद ने उठाई कड़ी आपत्ति,,मुख्यमंत्री करें हस्तक्षेप

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष तथा केंद्रीय एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि प्रदेश में पावर कॉरपोरेशन द्वारा बिना किसी ठोस तैयारी और उपभोक्ता हितों पर विचार किए बिना लागू की जा रही वर्टिकल व्यवस्था (टमतजपबंस ।ततंदहमउमदज) ने पूरे बिजली तंत्र को अव्यवस्थित कर दिया है।उन्होंने बताया कि आधे से अधिक जिलों में वर्टिकल व्यवस्था लागू की जा चुकी है और अब शेष जनपदों, विशेषकर पूर्वांचल में भी इसे लागू करने की तैयारी की जा रही है। जबकि वे जिले, जहां यह व्यवस्था पहले से लागू है, वहां उपभोक्ता गंभीर रूप से परेशान हैं।श्री वर्मा ने बताया कि पहले जिले के सभी वितरण खंडों में उपभोक्ताओं की शिकायतों का स्थानीय स्तर पर तत्काल समाधान हो जाता था, परंतु वर्टिकल व्यवस्था लागू होने के बाद शिकायत निस्तारण को एकदृदो केंद्रीय बिंदुओं पर केंद्रित कर दिया गया है।
उपभोक्ताओं को 15-20 किलोमीटर दूर जाकर हेल्प डेस्क या 1912 पर निर्भर होना पड़ रहा है।1912 पर सिर्फ शिकायत दर्ज होती है, समाधान की कोई निश्चित व्यवस्था नहीं है।उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं का समय, धन और ऊर्जा बर्बाद हो रही है और पावर कॉरपोरेशन इस व्यवस्था की कमियों से कोई सीख नहीं ले रहा है।उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि जब प्रदेश में 42 जनपदों के निजीकरण की प्रक्रिया उपभोक्ताओं के विरोध और विधिक आपत्तियों के कारण असफल हो चुकी है, तो पावर कॉरपोरेशन अब वर्टिकल व्यवस्था को लागू करने पर क्यों अड़ा हुआ है? कल पूर्वांचल के आधा दर्जन जनपदों में भी वर्टिकल व्यवस्था लागू करने के लिए समीक्षा बैठक में हुआ एलान।
उपभोक्ता परिषद द्वारा प्रस्तुत तथ्यों से पहले ही यह प्रमाणित हो चुका है कि निजीकरण में उद्योगपतियों को लाभ और उपभोक्ताओं को हानि होती। विद्युत नियामक आयोग ने भी निजीकरण पर व्यापक विधिक आपत्तियाँ दर्ज की थीं, जिनका आज तक कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया।

श्री वर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पावर सेक्टर को जिस दिशा में ले जाया जा रहा है, वह आने वाले समय में पावर सेक्टर को गंभीर संकट में डाल देगा। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से आग्रह किया कि वे तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप करें और पावर सेक्टर को प्रयोगशाला बनाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाएँ। ऊर्जा विभाग एक तकनीकी विभाग है और इसकी व्यवस्था में किसी भी बड़े बदलाव से पहले ठोस अध्ययन और उपभोक्ता हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

Aaj National

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